जरा उन 53000 लोगों के बारे में भी सोचिएगा!!!
जो कल तक अभेद्य किले दिखते थे वो सेकेंडों में रेत के महल की तरह भरभरा कर गिर पड़े...जिनकी नींव सबसे ठोस मानी जाती थी...वहां एक ऐसी अंधी सुरंग निकली जिसमें लाखों निवेशकों का भरोसा दफन हो गया....लेकिन फिक्र यहां नहीं है---बाज़ार है तो घाटा भी होगा...मं...
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मिहिर
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[07 Jan 2009 15:30 PM]



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