वेताल की मेखला (इन्द्रजाल कॉमिक्स अंक - ००१, मार्च १९६४)
बड़े से आंगन के एक कोने में बने हुए छोटे और पुराने दरवाजे से ललित ने तेजी से दौड़ते हुए प्रवेश किया. उसकी सांस फ़ूली हुई थी जिसमें इस तेज दौड़ का कम और उस उत्तेजना का ज्यादा हाथ मालूम होता था जो एक बड़ी ख़बर अपने साथ लाने की वजह से पैदा हुई थी. अखिल! अखिल...
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वेताल शिखर
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[07 Jan 2009 14:34 PM]



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