जीना सिखाती है यात्रा

झारखंडी घनश्याम घूमना मेरा शगल है। १९८९ तक देश के १६ राज्यों की यात्रा कर चुका था। घूमता हूं, तो अपनी आंखों से देश की माटी के हर रंग निहारता हूं। कहीं की आबोहवा भाती है, कहीं का आतिथ्य। कई बार कोफ्त होती है कि जिन राज्यों ने अतिथि सत्कार से राजस्व अर्जन में महारत हा... [पूरी पोस्ट]
writer घन्नू झारखंडी
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[07 Jan 2009 05:12 AM]

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