डरी हुई है धूप
कुछ अवसाद सा घुल रहा है मौसम में धूप के साथ-साथ धूप डरी हुई है कुछ दिनों से पहले धूप होती थी खिलंदड़ी चाहे जहां आकर बैठ जाती थी पक्की छत पर छत की मुंडेर पर कच्चे आंगन में, बरामदे में पूरा घर और घर के बाहर अपने आप उग आयी अयाचित घास पर पहले धूप मांगती...
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Pawan Nishant
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[06 Jan 2009 15:16 PM]



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