देखी ज़माने की यारी, बिछडे़ सभी बारी बारी...
नये साल की शुरुआत मैं एक ऐसे पोस्ट से करना चाहता था, जिसे सिंहावलोकन या Restrospect कहा जा सकता है. पिछले ६ महिनों से जब से यहां आप से मुखातिब हो रहा हूं , कई उतार चढाव देखे, महसूस किये,अंतरंग के भावनात्मक पहलूओं को स्पर्श किया, कुछ कड़वे अनुभव लिये,...
[पूरी पोस्ट]
दिलीप कवठेकर
38
4
0
4
2
[06 Jan 2009 14:53 PM]



Shuffle








