देखी ज़माने की यारी, बिछडे़ सभी बारी बारी...

मानस के अमोघ शब्द नये साल की शुरुआत मैं एक ऐसे पोस्ट से करना चाहता था, जिसे सिंहावलोकन या Restrospect कहा जा सकता है. पिछले ६ महिनों से जब से यहां आप से मुखातिब हो रहा हूं , कई उतार चढाव देखे, महसूस किये,अंतरंग के भावनात्मक पहलूओं को स्पर्श किया, कुछ कड़वे अनुभव लिये,... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर
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[06 Jan 2009 14:53 PM]

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