जाओ जाओ सर्दी

बबलू का बचपन जाओ जाओ सर्दी जी गर्मी जी को आने दो स्वेटर और रजाई को बक्से में पहुंचाने दो कोहरे की चादर को ओढे ऊंघते रहते सूरज दादा सर्दी हवा लगती है जैसे टीचर ने मारा हो तमाचा झपकी जैसे छोटे दिन हैं रातें कोई लंबी सडक जान पे मेरी बन आई है पर क्या है तुमहें कोई फर... [पूरी पोस्ट]
writer बबलू
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[06 Jan 2009 08:54 AM]

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