कविता को लेकर फिरदौस भूल जाना चाहता है सुधांशु को.......

Hamzabaan हमज़बान कविता का नया प्रेमी : सुधांशु फ़िरदौस ________________________________________________ कभी आपने कैलाश वाजपई की कविताओं को पढ़ा है.रहीम, खुसरो , जायसी और नानक के दोहों के साथ उतरे-डूबे हैं.यदि ऐसी पृष्ठ भूमि में मुक्तिबोध और निराला के दिग्दर्शन हो जाएँ... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[05 Jan 2009 15:21 PM]

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