मेरी बतियाँ

मेरी बतियाँ किसी अच्छी ख़बर की आस बड़ी हो गई है। दिन-रैन इंतज़ार कि कोई ख़बर आने को है। मगर क्या ख़बर? ऐसा क्या होने को है जिसकी उम्मीद है? कुछ भी तो नहीं... फिर? ऐसा भी कोई देखा है जो बेमतलब और अनजान आस के लिए सारे काम छोड़कर बार-बार मैजिक आई से झाँककर कर देखता... [पूरी पोस्ट]
writer महेन
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[04 Jan 2009 22:48 PM]

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