"सार्थकता"
स्पर्श भर लहर का भिगो दे मन सारा आकाश , तब तो सार्थकता है सागर की ; वरना धूल बन कर आंखों में चुभने की आदत तो हर किसी सूखी आंधी में होती ही है !!...
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विक्षुब्ध सागर
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[04 Jan 2009 16:04 PM]



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