प्यारी दीदी
तेरे धरो का बखान अब मेरी जुबानी तेरी मुराद की कोशिश अब मेरी कलामी गुस्से से हो जाए वो लाल - पीली पीली कहके सतायु है वो एक पगली पठारों के मायने पर हर रिश्तो को संभाली उची है उसकी हर ललकार पर हर जबान खरी तूने ही सीचा मेरे फूल का हर ताना हर बेरहमी दुपहर...
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Dev
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[04 Jan 2009 15:01 PM]



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