मन्दिर का धंधा

Sab ka maalik ek hai मैं सुबह जिस पार्क में घूमने जाता हूँ उसके पास एक मन्दिर है. मैं कभी मन्दिर के अन्दर नहीं गया, बाहर से ही भगवान को प्रणाम कर लेता हूँ. पार्क में आए कुछ सज्जन अक्सर मन्दिर के बारे में बात करते हैं. उनकी बातों से लगता है जैसे मन्दिर एक धंधा हो गया है.... [पूरी पोस्ट]
writer Suresh Chandra Gupta
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[04 Jan 2009 04:30 AM]

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