उसने कभी भी

कुछ ग़ज़ल कुछ गीत ! उसने कभी भी पीर पराई सुनी नहीं . कितना भला किया कि बुराई सुनी नहीं. रोटी के जमा-ख़र्च में ही उम्र कट गई, हमने कभी ग़ज़ल या रुबाई सुनी नहीं . औरों की तरह तुमने भी इलज़ाम ही दिये; तुमने भी मेरी कोई सफाई सुनी नहीं. बच्चों की नर्सरी के खिलौने तो सुन लिए; ढ... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Amar Jyoti
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[03 Jan 2009 06:53 AM]

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