मन कोमल सा
एक साधारण की लड़की हर बड़े-छोटे शहर में कहीं हालात से कहीं खुद से उलझी। रंग गेहुआ सा। उम्र वहीं कोई बीस बाइस साल। यौवन पर चढ़ाव, मन कोमल सा। भोली-भाली सी सुरत। आंखें सुख झील सा। दिखे जैसे बसंत में खिले सरसों सा। पर उसके अंदर हुक था, जो जान सका न कोई।...
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monikashekhar
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[03 Jan 2009 06:36 AM]



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