जिस रोज़ से पछवा चली...
जिस रोज़ से पछवा चली आँधी खड़ी है गाँव में उखड़े कलश, है कँपकँपी इन मंदिरों के पाँव में। जड़ से हिले बरगद कई पीपल झुके, तुलसी झरी पन्ने उड़े सद्ग्रंथ के दीपक बुझे, बाती गिरी मिट्टी हुआ मीठा कुआँ भटके सभी अँधियाव में उखड़े कलश, है कँपकँपी इन मंदिरों क...
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डॉ० कुअँर बेचैन
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[03 Jan 2009 01:40 AM]



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