''मैंने कभी किसी गरीब को नहीं देखा''
यह कविता मैंने वर्ष 2001 में मध्यप्रदेश सरकार के लिये किये जा रहे ''गरीबी का आकलन'' के दौरान हुये अनुभवों के आधार पर लिखी थी। मैंने कभी किसी गरीब को नहीं देखा मैंने गरीबी को कभी महसूस भी नहीं किया मैं गरीबी की परिभाषा से भी अनजान हूँ पर देखा है कुछ न...
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प्रशांत दुबे
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[02 Jan 2009 23:17 PM]



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