उसे देखा हैं पहले भी कहीं ..............

आरोही लगता हैं ,जैसे उसे देखा हैं पहले भी कहीं । कहाँ? ये याद नही । शायद मेरे सपनो में , मेरी कल्पनाओ में , मेरी भावनाओ में । शायद...नीले बादलो में, टीमटिमाते तारो में, वासंती बहारो में , शायद... कभी कहीं किसी मोड़ पर , इस या उस जनम के छोर पर, रात को दिन ब... [पूरी पोस्ट]
writer राधिका बुधकर
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[02 Jan 2009 14:13 PM]

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