फिसले छलनी से

POEM OF SOUL यह एहसास हुआ है यूं ही इन दिनों, अचानक, दुनिया कुछ दिनों में बीसवीं सदी की केंचुली को उतार फेंकने वाली है। हर कोई बीसवीं सदी से छुटकारा पाने को उतारु है, जैसे, कोई, अपने मैले-कुचले कपड़ो से। मैं तो नहीं था तब जब आई थी बीसवीं सदी, कुछ लोग उठा लाए थे,... [पूरी पोस्ट]
writer Nitish Raj

poetry

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[02 Jan 2009 01:49 AM]

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