एक स्त्री के प्रति

नया प्रयत्न स्वीकार कर लिया काँटों के पथ को पहचाना फ़िर भी जकड़ लिया बहुरूपी झूठे सच को कुछ बतलाओ, न रखो अधर में हे स्नेह बिन्दु ! क्यों करते हो समझौता ? जब पूछ रहा होता हूँ, कह देते हो 'जो हुआ सही ही हुआ' और ' जो बीत गयी सो बात गयी' , कहो यह मौन कहाँ से सीखा ? ज... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु
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[01 Jan 2009 18:35 PM]

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