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रू मानी होने की जरूरत नहीं ,इस आशा से मिलकर आपकी आँखें चार नही बल्कि चौकन्नी हो जायेंगीं ! क्या है कि इन दिनों नौकरी के चक्कर में गाँव गाँव की धूल फांकनी पड़ रही है -तो ऐसे ही एक दिन आशा से मुलाकात हो गयी ! यहाँ जो आशा हैं वे भारत वर्ष के हर गाँव में
किसी भी विषय पर अंधाधुंध लिखना शुरू करने से पहले उस विषय पर पढ़ना भी जरुरी होता हैं । कुछ विषय बहुत भ्रांतियां लिये होते हैं और उन पर लिखने से पहले उनको जानना भी जरुरी हैं । हम किसी को कभी भी नकार देने की परम्परा मे जीते हैं और जो सब करते हैं उसे ही
तुम जब मुझसे मिलने आती थी अपना कुछ न कुछ सामान जान बूझ कर छोड़ जाती थी तुम्हारा वो सब सामान अब भी मेरे घर में रखा है कभी आते जाते ले जाना यादों के सहारे तो जिंदगी नहीं काटी जा सकती अपनी वो सब मुलाकातें यादें बन कर मेरे घर के हर कोने में पढ़ी हैं कभी
जिसकी हमें लंबे समय से तलाश थी आखिर वो हमें मिल ही गई जब वो मिल गई तो दिल की कली खिल गई उसके जाने के बाद दिल उदास था उसके खोने का हमको दुखद अहसास था लगता था अब हमें वो कभी न मिल पाएगी जिंदगी भर की गई मेहनत बेकार जाएगी बहुत ज्यादा तड़प थी उसके लिए दिल
राजकुमार ग्वालानी
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सप्रे स्कूल के मैदान को सुरक्षित करने के लिए मैदान के किनारे में टाइल्स लगाने का काम किया जाएगा। मैदान को नापकर बताने का जिम्मा शेरा क्रीड़ा समिति को दिया गया है। जैसे ही मैदान को नापने का काम पूरा होगा टाइल्स लगाने का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा, ऐसा
राजकुमार ग्वालानी
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शैशव
शैशव में सुख सारे थे।सारे जग के प्यारे थे ।।राज़ सभी पर अपना था।चलते हुक्म हमारे थे।।जीवन सुख से चलता था।बिन मांगे सब मिलता था।।दिन वैभव से कटते थे।ऐसे ठाठ हमारे थे।।गुड्डे-गुडिया, गेंदें-गोली।ईद बिहू और पोंगल होली।।सब त्यौहार मनाते थे।हम कितना इतरात
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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नवेला और सांप कुदरती दुश्मन हैं -नेवले और कोबरा की लड़ाई जिसने भी देखी है वह सहज ही इसे स्वीकार कर लेगा ! इस वीडियो को देखिये -यह महाराष्ट्र से कोबरा नवेला की सच्ची लडाई का दृश्य और आंखों देखा हाल है ? http://www.youtube.com/watch?v=4yvdXO9N1D4 कई सवा
विभा..पहले दिन से उसके लटके-झटकों से मुझे नफरत है ...../...और 'साहब'? ...साहब कोई पद नहीं होता सिस्टम में घुसकर कुछ तो आदमी ख़ुद,कुछ लोग उसे 'साहब'बना देते हैं...
उम्मीदों की मचान, मैंने बांध ली है, पर टूटकर कुछ गिरा, उम्मीद का एक टुकड़ा, नेत्र सजल हुए, धारा अविरल बही, जल-कण संचित करुं, उम्मीद ही न रही। -harminder singh posts related to बूढ़ी काकी : * अब यादों का सहारा है * अनुभव अहम होते हैं * बुढ़ापा भी सुन्दर
और जिसकी लाठी उसकी भैंस विद्‌ आर्ट ऑफ़ ब्लफिंग
जाने यह किससे क्‍या लगा बैठा वो चांद से उतरा तो तारों में जा बैठा हमने सोचा था क्‍या के ऐसा होगा जो पास था वो मुफलिस का ख्‍वाब बना बैठा होशो-हवास के मिरे क्‍या कहने सिराने मीर था जो पैताने कबीर जा बैठा समझाएं कैसे किसे क्‍या समझाएं बात आई थी दिल में
कामी तरि, क्रोधी तरै, लोभी तरै अनन्त आन उपासी कृतधनी, तरै न गुरु कहन्त संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि कामी और क्रोधी तर सकते हैं और लोभी भी इस भव सागर से तरकर परमात्मा को पा सकते हैं पर जो अपने इष्ट देव की उपासना त्यागता है और गुरु का संदेश नहीं
देश की सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी भारत संचार निगम लिमिटेड की कार्य प्रणाली उपभोक्ताओं के लिए हमेशा से ही सिर दर्द रही है। फिर भी ये देश के लोगों का सरकारी उपक्रमों के प्रति लगाव ही है जो इन्हें चलाता रहता है। कोई जानता है कि इन नवरत्नों, महा
डा०आशुतोष शुक्ल
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स्वाभिमान
शहर की भीड़भाड़ से उकताया हुआ कुत्ता जंगल की ओर चल दिया. बस्ती से बाहर आते ही उसकी निगाह एक औरत पर पड़ी, सिर पर लकड़ियों का बड़ा-सा गट्ठर उठाए वह शहर की ओर जा रही थी. गट्ठर भारी होने के कारण उसे चलने में परेशानी हो रही थी. ‘इतना कठिन जीवन जीने वाला मनुष्य
kashyap omprakash
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प्रमाणश्चधिकश्यापि महत्सत्वमधष्ठितः। पदं स दत्ते शिरसि करिणः केसरी यथा।। हिंदी में भावार्थ- प्रमाणित योग्यता से अधिक पद की इच्छा करने वाला व्यक्ति भी उस महापद पर विराजमान हो जाता है उसी प्रकार जैसे सिंह हाथी पर अधिष्ठित हो जाता है। उच्चेरुच्चस्तरामिच
रचनाकार परिचय:-सुभाष नीरव का जन्म 27–12–1953 को मुरादनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। मेरठ विश्वविद्यालय से स्नातक तथा भारत सरकार के पोत परिवहन मंत्रालय में अनुभाग अधिकारी(प्रशासन) के तौर पर कार्यरत सुभाष नीरव की कई कृतियाँ यथा ‘यत्कचित’, ‘रोशनी की लकीर’
साहित्य-शिल्पी
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canada se --
चल दिए-- आसमां से-- बादलों के ऊपर -- ये जमीं है या आसमां-- लो भाई पहुँच गए ---
Dr.T.S. Daral
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उस गुजरे हुए ज़माने की कोई बात सुनाए | .................................दर्द की याद दिलाए | चितौड़ दुर्ग ने शाके देखे , रक्त सिन्धु रण खेत हुए थे | कौन स्मृति चिन्ह को लेकर , मेरे तिलक लगाए | .......................................फूलों के हार चढ़ाए |
क्षत्रिय
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मानसून की आस में प्यासी धरती की तड़प आसानी से समझी जा सकती है। सभ्यता के आदि काल से ही वर्षा पर निर्भरता ने इसे आमंत्रित और नियंत्रित करने हेतु मनुष्यों को प्रेरित किया है। वर्षा के देवता की आराधना तथा यज्ञ के अलावे संगीत को भी वर्षा को आमंत्रित करने
धत तेरे की। ये भी कोई एक्सपेरीमेन्ट हुआ। इंसान ही को इंसान बनाकर दिखा दो तो जानें।’’ रामसिंह ने फिलास्फी झाड़ी। ‘‘पहले मैं जानवरों पर एक्सपेरीमेन्ट कर रहा हूं। फिर इंसानों की बारी आयेगी।’’ प्रोफेसर ने बताया। ‘‘ये इस डोंगे में क्या है?? बड़ी बदबू आ रह
zeashan zaidi
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आजकल के मौसम के हिसाब से एक बेहतरीन पेय बताता हूँ. मजेदार, स्वास्थवर्धक और बहुत कम कैलोरी.स्मूथीसामग्री: (दो गिलास के हिसाब से)१० स्ट्राबेरी१०-१२ काले अंगूर१ गिलास दही६ काजू६ अखरोट के आधे टुकड़े६ बादाम१ चम्मच शक्करस्ट्राबेरी और अंगूर को चॉपर में ग्रेट
जुलाई 2009 को हरिभूमि समाचार पत्र के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग की दुनिया से' में इंडियागेट न्यूज, हिंदी टीवी मीडिया तथा इंडियन सिटिज़न का उल्लेख
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ए/ए1/एच1/ विषाणु के कारण होनेवाले सूअर बुखार (स्वाइन फ्लू) को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए विश्वव्यापी महामारी (पैंडेमिक) के स्तर के जोखिम की संभावना वाली स्थिति माना है (देखिए चित्र)। यह बुखार मेक्सिको में सर्वप्रथम प्रकट हुआ
बालसुब्रमण्यम
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कैसे जानें आपके बच्चे का हुआ है यौन शोषण? यद्यपि सबसे अच्छा तो यही है कि बच्चा इसके बारे में स्वयं ही बताए, मगर बच्चे के लिए अपनी व्यथा व्यक्त करना आसान नहीं होता है। इसलिए कई बार बच्चे के व्यवहार में आए परिवर्तनों को देखकर ही अन्य लोगों को समझ लेना
बालसुब्रमण्यम
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निमन्त्रण
कितना अजीब है ! मिलना निमन्त्रण भूतपूर्व पत्नी की शादी पर !! जैसे कि याद दिला दिया उसने कैसे कैसे स्वप्न थे मेरे ! कि पत्नी भी बन पाये प्रेमिका पर छोड़ो यार ! कहाँ की लजाती मुस्कान और शौख अदाये! नहीं बन पाई थी वह रूक्मणी से राधा ! देना पड़ा था तलाक क्य
मुंह दिखाई के समय दूल्हन का घूंघट हटा कर जैसे ही जलेबी फूवा ने मुंह देखा, चौंक कर पीछे हट गईं - हाय दईय़ा....दुल्हन को तो दाढी-मोंछ है। कौन गांव की ले आया रे........अरे नासपीटे..........तैने ईतना भी पता न चला कि लडके को ही दुल्हन बना कर ले आया। तभी मै