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दीपक भारतदीप की अंतर्जाल पत्रिका

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06 Jun 2010
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सत्य और भ्रम-विशेष रविवारीय लेख (satya aur bhram-special hindi features and article)

भारत का अध्यात्मिक ज्ञान सत्य के निकट क्यों है? सीधी सी बात है कि दुनियां के सबसे अधिक भ्रमित लोग यहीं रहते हैं। जिस तरह कमल कीचड़ में खिलता है गुलाब कांटों में सांस लेते हुए जिंदा रहता है उसी तरह सत्य का प्रकाश वहीं सबसे अधिक वहीं दिखता है यहां भ्रम का
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विदुर नीति-दुष्टों को अनदेखा करने से जनता नाराज होती है

साहसे वर्तमानं तु यो मर्षयति पार्थिवः।सः विनाशं व्रजत्याशु विद्वेषं चाधिगच्छति।।हिन्दी में भावार्थ-यदि राज्य प्रमुख  दुस्साहस करने वाले व्यक्ति को क्षमा या उसे अनदेखा करता है तो उसका अतिशीघ्र विनाश हो जाता है क्योंकि तब प्रजा में उसके विद्वेष की
May 30 2010 05:33 AM
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रहीम सन्देश-पानी के बिना मनुष्य, मोती और अनाज का अभ्युदय नहीं हो सकता

कविवर रहीम कहते हैं कि--------------------------------रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सूनपानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून आशय यह है  पानी को बचा कर रखें क्योंकि पानी बिना सब सून। पानी अगर न रहा तो मोती, मनुष्य और अनाज किसी का उद्धार नहीं हो
May 29 2010 11:04 AM
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रहीम दर्शन-छोटा आदमी कम महत्वपूर्ण नहीं होता

कविवर रहीम कहते है कि------------------------------- रीति प्रीति सबसों भली, बैर न हित मित गोतरहिमन याही जनम की, बहुरि न संगति होत इस जीवन में सबसे प्रेम से पेश आओ। न किसी से बैर करो न अपने मित्र और गौत्र से हित की चाह करो। यह मनुष्य जीवन फिर मिलेगा कि
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May 27 2010 11:43 AM
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भर्तृहरि नीति शतर्क-मणि होने के बावजूद विषधर से कोई प्रेम नहीं करता

आरंभगुर्वी क्षयिणी क्रमेण लघ्वी पुरा वृद्धिमति च पश्चात्। दिनस्य पूर्वाद्र्धपराद्र्ध-भिन्ना छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्।।जिस तरह दिन की शुरूआत में छाया बढ़ती हुई जाती है और फिर उत्तरार्द्ध  में धीरे-धीरे कम होती जाती है। ठीक उसी तरह सज्जन और दुष्ट की
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संत कबीर दास के दोहे-प्रेम की फसल किसी खेत में नहीं होती (sant kabir das ke dohe-khet men prem nahin ugta)

यह तो घर है प्रेम का, ऊंचा अधिक इकंतशीश काटि पग तर धरै, तब पैठ कोई संतसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि प्रेम का घर तो ऊंचे स्थान और एकांत में स्थित होता है जब कोई इसमें त्याग की भावना रखता है तभी वहां तक कोई पहुंच सकता है। ऐसा तो कोई संत ही हो सकता
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May 20 2010 09:06 AM
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संत कबीर के दोहे-परिवार पालने का दावा कर खुद को धोखा देते हैं (parivar palna-hindi sandesh)

कुल करनी के कारनै, हंसा गया बिगोयतब कुल काको लाजि, चारि पांव का होयसंता शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि अपने परिवार की मर्यादा के लिये आदमी ने अपने आपको बिगाड़ लिया वरना वह तो हंस था। उस कुल की मर्यादा का तब क्या होगा जब परमार्थ और सत्संग के बिना जब
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संत कबीर के दोहे-शब्द का महत्व चुंबक के समान

सीखै सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देयबिना समझै शब्द गहे, कछु न लोहा लेयसंत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि जो शब्द सुनकर कुछ सीखता और उस पर विचार करता है उसे वह सुख प्रदान करते हैं। बिना सोचे समझे ग्रहण कर बोलने वाला व्यक्ति कोई लाभ नहीं ले पाता। यही
May 18 2010 09:27 AM
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मनु स्मृति-दिल में बैठे देवता की अनदेखी न करें (dil ka devata-hindu dharma sandesh)

साक्ष्येऽनृतं वदन्याशैर्बध्यते वारुणैर्भृशम्।विवशः शमाजातीस्तरस्मात्साक्ष्यं वदेदृतम्।।हिन्दी में भावार्थ-झूठी गवाही देने वाले मनुष्य, वरुण देवता के पाशों से बंधकर सैंकड़ों वर्षों तक जलोदर बीमारियों से ग्रसित जीवन गुजारता है। अतः हमेशा किसी के पक्ष में
May 16 2010 11:11 AM
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संत कबीर दर्शन-बाहर का दरवाजा बंद कर, अन्दर का खोलो (andar ka darvaja kholo-kabir darshan)

भारत के महान संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं------------------------------------------------------ सुमिरन सुरति लगाय के, मुख ते कछु न बोल बाहर के पट देय के, अंतर के पट खोल मन का एकाग्र और वाणी पर नियंत्रण करते हुए परमात्मा का स्मरण करो। आपनी बाह्य
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भर्तृहरि नीति शतक-दूसरों का मुंह ताकने से कोई लाभ नहीं

किं कन्दाः कन्दरेभ्यः प्रलयमुपगता निर्झरा वा गिरिभ्यःप्रघ्वस्ता तरुभ्यः सरसफलभृतो वल्कलिन्यश्च शाखाः।वीक्ष्यन्ते यन्मुखानि प्रस्भमपगतप्रश्रयाणां खलानांदुःखाप्तसवल्पवित्तस्मय पवनवशान्नर्तितभ्रुलतानि ।।हिंदी में भावार्थ- वन और पर्वतों पर क्या फल और अन्य
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रहीम संदेश-जहां छल की संभावना हो वहां से दूर रहें

कविवर रहीम कहते हैं किरहिमन वहां न आइए, जहां कपट को हेतहम तन ढारत ढेकुली, सींचत अपनो खेतवहां कतई न जाईये जहां कपट होने की संभावना है। रात भर ढेंकली कोई किसान चलाता रहे पर कोई कपटी उसके खेत का पानी अपनी खेत की तरफ कर ले ऐसा भी होता है।वर्तमान संदर्भ में
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चाणक्य दर्शन-धैये हो तो धनाभाव संकट नहीं बनता (dhiraj hi dhan hai-chankya neeti)

दरिद्रता श्रीरतया विराजते कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते।कदन्नता चोष्णतया विराजते कुरूपता शीतया विराजते।।हिंदी में भावार्थ- अगर मनुष्य में धीरज हो तो गरीबी की पीड़ा नहीं होती। घटिया वस्त्र धोया जाये तो वह भी पहनने योग्य हो जाता है। बुरा अन्न भी गरम होने पर
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भर्तृहरि नीति शतक-राजाओं को कब तक प्रसन्न रखा जा सकता है

दुरारध्याश्चामी तुरचलचित्ताः क्षितिभुजो वयंतु स्थूलेच्छाः सुमहति बद्धमनसः। जरा देहं मृत्युरति दयितं जीवितमिदंसखे नानयच्छ्रेयो जगति विदुषेऽन्यत्र तपसः।।हिंदी में भावार्थ- जिन राजाओं का मन घोड़े की तरह दौड़ता है उनको कोई कब तक प्रसन्न रख सकता है। हमारी
May 11 2010 08:47 AM
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संत कबीर के दोहे-कपटी कभी साधु नहीं बनते (kapti kabhi sadhu nahin hote-kabir ke dohe)

चाल बकुल की चलत हैं, बहुरि कहावैं हंसते मुक्ता कैसे चुंगे, पडे काल के फंस संत शिरोमणि कबीरदास जीं कहते हैं कि जो लोग चाल तो बगुले की चलते हैं और अपने आपको हंस कहलाते हैं, भला ज्ञान के मोती कैसे चुन सकते हैं? वह तो काल के फंदे में ही फंसे रह जायेंगे। जो
May 10 2010 09:14 AM
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रहीम के दोहे-सीधी चाल से ही किसी का दिल जीता जा सकता (sidhi chal se dil jeeten-rahim ke dohe)

प्रेम पंथ ऐसी कठिन, सब कोउ निबहत नाहिंरहिमन मैन-तुरगि बढि, चलियो पावक माहिंकविवर रहीम कहते हैं कि प्रेम का मार्ग ऐसा दुर्गम हे कि सब लोग इस पर नहीं चल सकते। इसमें वासना के घोड़े पर सवाल होकर आग के बीच से गुजरना होता है।फरजी सह न ह्म सकै गति टेढ़ी
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रहीम दर्शन-नदी के तट को पार करने वाला पानी व्यर्थ चला जाता है (rahim ke dohe-nadi aur pani)

जो मरजाद चली सदा, सोई तो ठहरायजो जल उमगै पारतें, कहे रहीम बहि जाय कविवर रहीम कहते हैं कि जो सदा से मर्यादा चली आती है, वही स्थिर रहती है। जो पानी नदी के तट को पार करके जाता है वह बेकार हो जाता है। जो बड़ेन को लघु कहें, नहिं रहीम घटि जाहिंगिरधर मुरलीधर
May 08 2010 09:26 AM
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संत कबीर दास के दोहे-गुरु के लिए अधिक संपत्ति जोड़ना खतरनाक (kabir ke dohe-sant aur sanpatti)

माया दासी संत की साकट की शिर ताजसाकुट की सिर मानिनी, संतो सहेली लाज संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि माया तो संतों के लिए दासी की तरह होती है पर अज्ञानियों का ताज बन जाती है। अज्ञानी लोग का माया संचालन करती है जबकि संतों के सामने उसका भाव विनम्र होता
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मनु दर्शन-आत्म नियंत्रित कार्य ही करें (atmanilantri kam karen-manu darshan in hindi)

सर्वे परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।हिन्दी में भावार्थ-जो कार्य दूसरे के अधीन है वह दुःखदायी होता है। जिस काम पर अपना पूरी तरह से नियंत्रण हो उसी से ही सुख मिलता है। यही सुख और दुःख का लक्षण है। यत्कर्मकुर्वतोऽस्य
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May 04 2010 08:47 AM
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रहीम संदेश-मनुष्य नाचता है कठपुतली की तरह (manushya kathputli hai-rahim sandesh)

ज्यों नाचत कठपूतरी, करम नचावत गातअपने हाथ रहीम ज्यों, नहीं आपुने हाथकविवर रहीम कहते हैं कि जैसे नट कठपुतली को नचाता है वैसे ही मनुष्य को उसके कर्म नाच करने के लिऐ बाध्य करते हैं। जिन्हें हम अपने हाथ समझते हैं वह भी अपने नियंत्रण में नही होते हैं।वर्तमान
Apr 30 2010 09:32 AM
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रहीम संदेश-समय कभी एक जैसा नहीं रहता (samay ms saman nahit rahta-rahim ke dohe)

समय पाय फल होत है, समय पाय झरि जायसदा रहे नहिं एक सौ, का रहीम पछितायकविवर रहीम कहते हैं कि समय आने पर अपने अच्छे कर्मों के फल की प्राप्ति अवश्य होती है। वह सदा कभी एक जैसा नहीं रहता इसीलिये कभी बुरा समय आता है तो भयभीत या परेशान होने की आवश्यकता नहीं
Apr 27 2010 09:14 AM
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-भंवरा मरने के लिये ही हाथी के कान में ध्वनि करता है (hathi aur bhavra-kautilya darshan)

स्निग्धदीपशिखालोकविलेभितक्लिोचनः।मृत्युमृच्छत्य सन्देहात् पतंगः सहसा पतन्।।हिन्दी में भावार्थ-दीपक की स्निग्ध शिखा के दर्शन से जिस पतंगे के नेत्र ललचा जाते हैं और वह उसमें जलकर जान देता है। यह रूप का विषय है इसमें संदेह नहीं है। गन्धलुब्धो मधुकरो
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मनुस्मृति-वेद मंत्रों के जाप से इच्छित फल प्राप्त होता है (manu smriti-ved mantra ka jap)

इदं शरणमज्ञानामिदमेव विजानताम्।इदमन्विच्छतां स्वर्गमिदमानन्त्यमिच्छताम्।।हिन्दी में भावार्थ-मनुष्य ज्ञानी हो या अज्ञानी वेद मंत्रों को जपने से उसे इच्छित फल प्राप्त होता है। उसी तरह इनके जाप से स्वर्ग की इच्छा करने वालो को स्वर्ग तथा मोक्ष प्राप्त करने
Apr 22 2010 09:33 AM
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संत कबीर वाणी-खोटी हाट में गांठ का हीरा न खोलें (sant kabir vani-heera aur hat)

हीरा परखै जौहरी, शब्दहि परखै साध।कबीर परखै साधु को, ताका मता अगाध।।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि हीरे की परख जौहरी करता है तो शब्द की परख साधु ही कर सकता है। जो साधु को परख लेता है उसका मत अगाध हो हो जाता है। हीरा तहां न खोलिए, जहं खोटी है हाट।कसि
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मनुस्मृति-तस्करों और करचोरों को कठोर दंड दिया जाये (manusmriti-taskar air

राज्ञः प्रख्यातभाण्डानि प्रतिधिद्धानि यानि च।तानि निर्हरतो लोभार्त्स्वहारं हरेन्नृपः।।हिन्दी में भावार्थ-अगर राज्य का कोई बेईमान व्यावसायी राजा के निजी पात्रों व विक्रय के लिये प्रतिबंधित पात्रों को लोभवश दूसरे स्थान पर जाकर व्यापार करता है तो उसकी सारी
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Apr 17 2010 10:29 AM
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मनुस्मृति-जुआ और सट्टा राष्ट्र में डकैती के समान (juaa aur satta desh ke liye bura-manu smruti)

प्रकाशमेतत्तास्कर्य यद्देवनसुराहृयौ।तयोर्नित्यं प्रतीवाते नृपतिर्यत्नवान्भवेत्।।हिन्दी में भावार्थ-द्युत और समाहृय (जुआ और सट्टा)दिनदहाड़े डकैती के समान माने जाने चाहिए। यह देवता और असुर दोनों का विनाश कर देते हैं। अतः राज्य को इन पर रोक लगाने का प्रयास
Apr 16 2010 09:13 AM
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मनुस्मृति-गायत्री मंत्र का जाप सुबह शाम करना चाहिए (manu smirit-gyatri mantra ka jaap)

पूर्वी संध्या जपंस्तिष्ठनैशमेनो व्यपोहति।पश्चिमां तु समासीनो मलं हन्ति दिवाकृतम्।हिन्दी में भावार्थ-प्रातःबेला में गायत्री मंत्र का जाप करने से रात्रिभर के तथा सायंकाल में जाप करने से दिन भर के पाप नष्ट होते हैं।वर्तमान संदर्भ में संपादकीय
Apr 15 2010 09:11 AM
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मनुस्मृति-धर्म की हत्या करने वाले का नाश होता है

धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नोधर्मोहतोऽवधीत्।।हिन्दी में भावार्थ-जो मनुष्य धर्म की हत्या करता है, धर्म उसका नाश करता है। इसलिये धर्म की रक्षा करना चाहिए ताकि हमारी रक्षा हो सके। यद्राष्टं शूद्रभूयिष्ठं
Apr 14 2010 08:57 AM
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भर्तृहरि शतक-जब तक काम का हमला न हो तभी तक रहती है सज्जनता (sex and religion-hindi sandesh)

संसार! तव पर्यन्तपदवी न दवीयसी।अन्तरा दुस्तराः न स्युर्यदि ते मदिरेक्षणा।।हिन्दी में भावार्थ-यहां भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ‘ओ संसार, तुझे पार पाना कोई कठिन काम नहीं था अगर मदिरा से भरी आखों में न देखा होता। तावन्महत्तवं पाण्डितयं केलीनत्वं
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मनुस्मृति-क्रोध आने पर भी डंडा न उठायें (manu smriti-krodh par kabu rakhen)

परस्यं दण्डं नोद्यच्छेत्क्रुद्धोनैनं।अन्यत्र पुत्राच्छिष्याद्वा शिष्टयर्थ ताडयेत्तु तौ।।हिन्दी में भावार्थ-कभी क्रोध भी आये तब भी किसी अन्य मनुष्य को मारने के लिये डंडा नहीं उठाना चाहिये। मनुष्य केवल अपने पुत्र या शिष्य को ही पीटने का हक रखता है।
Apr 10 2010 09:54 AM
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मनुस्मृति-वेदों की निंदा न करें (ved ninda n karen-manu smruti in hindi)

नास्तिक्यं वेदनिंदा च देवतानां च कुत्सनम्।द्वेषं दम्भं च मानं च क्रोधं तैक्ष्ण्यं च वर्जयेत्।हिन्दी में भावार्थ-भगवान के अस्तित्व पर अविश्वास, वेदों की निंदा, देवताओं का अपमान, अन्य लोगों से शत्रुता तथा विरोध रखना, पाखंड, अहंकार, क्रोध तथा स्वभाव में
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श्रीगुरु ग्रंथ साहिब-दहेज में केवल हरि का नाम दान दें (dahej men hari ka nam-shriguru granth sahib)

‘हरि प्रभ मेरे बाबुला, हरि देवहु दान में दाजो।’हिन्दी में भावार्थ-श्री गुरुग्रंथ साहिब में दहेज प्रथा का आलोचना करते हुए कहा गया है कि वह पुत्रियां प्रशंसनीय हैं जो दहेज में अपने पिता से हरि के नाम का दान मांगती हैं। दहेज प्रथा पर ही प्रहार करते हुए यह
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-शत्रुओं पर दंड का प्रयोग अवश्य करें (kautilya darshan-shatru aur dand)

उत्साहदेशकालेस्तु संयुक्तः सुसहायवान्।युधिष्ठिर इवात्यर्थ दण्डेनास्तन्रयेदरन्।।हिन्दी में भावार्थ-अपने अंदर उत्साह का निर्माण तथा देश काल का ज्ञान प्राप्त करते हुए बलवान युधिष्ठर के समान शत्रु को परास्त करें।आत्मनः शक्तिमुदीक्ष्य दण्दमभ्यधिकं नयेत्।एकाकी
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-उपाय करने से सफलता मिलती है

सहस्त्रात्पृलुत्य दुष्टेभ्यो दुष्करं सम्पदर्ज्जनम्।उपायेन पदं मूघर्िल् न्यस्यते मतहस्तिनाम्।।हिन्दी में भावार्थ-हजार दुष्टों पर आक्रमण कर भी संपत्ति प्राप्त करना कठिन है पर उपाय किया जाये तो मतवाले हाथी पर भी अपना पैर रखा जा सकता है। वाळ्मानमयः खण्डं
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चाणक्य नीति-विद्वान एकाग्रता से अपना काम स्वयं करते हैं (kam aur dhyan-chankya neeti)

इन्द्रियाणि च संयम्य बकवत् पण्डितो नरःदेशकालबलं ज्ञात्वा सर्वकायणि साधयेत्।।हिन्दी में भावार्थ-ज्ञानी मनुष्य को बगुले की तरह एकाग्रता के साथ अपने मन और इंद्रियों पर नियंत्रण करते हुए अपनी शक्ति के अनुसार ही अपना काम करना चाहिये। प्रभूतं कार्यमल्पं वा
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-विष के प्रतिदिन दर्शन से मन कलुषित होता है (hindi adhyamik gyan sandesh-vish darshan)

चकोरस्य विरज्येत नयने विषदर्शनात्।सुव्यक्तं माघति क्रोंचो प्रियते कोकिलः किल।हिन्दी में भावार्थ-विष को देखने मात्र से चकोर पक्षी की आंख लाल हो जाती है और कोकिल तो मृत्यु के गाल में ही समाज जाता है।नित्यं जीवस्य च ग्लानिर्जायते विषदर्शनात्।एषामन्यतमेनापि
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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-काम पर पड़ने पर दुर्जन की भी प्रशंसा करें (kautilya darshan in hindi)

कार्यस्य हि गरीबस्त्वात्रोचानामपि कालचित्।सतोऽपि दोषान् गुणानप्यसतो वदेत्।।हिन्दी में भावार्थ-अपने कार्य के लिये आवश्यकता पड़ने पर समय को जानने वाला मनुष्य निम्न प्रवृत्ति के मनुष्य के अवगुणों को छिपाकर उसके असत् गुणों का वर्णन करे। चाहे भले ही उसमें अनेक
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मनुस्मृति-अधर्म का प्रतिकार न करना भी अनुचित (manu smriti in hindi-Dharam & adharm)

यत्र धर्मेह्यहृधर्मेण सत्यं यत्राऽनृतेन च।हन्यते प्रेक्षमाणानां हतास्तत्र सभासदः।।हिन्दी में भावार्थ-जहां असत्य सत्य को तथा अधर्म धर्म को दबाता है उस सभा में जाने पर सभासद भी नष्ट हो जाता है। धर्मो विद्धस्त्वधर्मेण सभां यत्रोपतिष्ठते।शल्यं चास्य न
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भर्तृहरि नीति शतक-जीवन में आत्मबल को होना आवश्यक (jivan aur atmabal-hindu dharma sandesh)

नाऽस्ति मेघसमं तोयं नाऽस्ति चात्मसमं बलम्।नाऽस्ति चक्षुःसमं तेजो नाऽस्ति धन्यसमं प्रियम।।हिन्दी में भावार्थ-बादलों के जल के अलावा कोई दूसरा जल नहीं है। उसी तरह आत्मबल के अलावा कोई दूसरा बल नहीं है। आंख जैसी कोई अन्य शक्तिशाली इंद्रिय नहीं है और अन्न के
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श्री गुरुग्रंथ साहिब-मांगने वालों के पांव न छूऐं

‘गुरु पीरु सदाए मंगण जाइ।त के मूलि न लगीअै पाई।।’हिन्दी में भावार्थ-श्री गुरुग्रंथ साहिब की वाणी के अनुसार कुछ लोग अपने को गुरु और पीर कहते हुए अपने भक्तों से धन आदि की याचना करते हैं ऐसे लोगों के पांव कभी नहीं छूना चाहिये। ‘पर का बुरा न राखहु चीत।तम कउ
Mar 23 2010 10:08 AM