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06 Jun 2010
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क्रिश्चन हो तो क्या हुआ?

छम्मकछल्लो मुदित है, 'घर-घर देखा, एक ही लेखा' की परिपाटी से. धर्म के ठेकेदारों ने धर्म की बहुत बढिया हालत बना दी है अपने समाज मे, इस सभ्यता से भरे विश्व में. कमलेश्वर ने लिखा 'कितने पाकिस्तान'. आज ज़र्रे ज़र्रे में धर्म के ठेकेदार दीमक की तरह धर्म के तखत
 
Vibha Rani
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हिंदुओं, पहले अपना ही हिंदुपन तो तय कर लो!

http://www.janatantra.com/news/2010/05/19/a-comment-on-hinduism-of-hindus/#commentsछम्मकछल्लो की समझ में नहीं आता कि वह अपने ही धर्म के भाई लोगों को क्या कहे? भाई लोग कहते हैं कि वे सच्चे हिंदू हैं, नारे भी देते हैं कि “गर्व से कहो, हम हिंदू हैं” और अपने
 
Vibha Rani
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एयर होस्टेस कितना बतियाती हैं?

छम्मकछल्लो देश की तरक्की से बहुत खुश है. उस दिन उसने अखबार में पढा कि भारत की तरक्की देखकर ओबामा के पसीने छूटे. छम्मकछल्लो के भी पसीने छूट जाते हैं, अपने देश की तरक्की देख कर. अमेरिका कह्ता है कि भारत दूसरी विश्व शक्ति बनने जा रहा है. अमेरिका जो कहता है,
 
Vibha Rani
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मुंबई ब्लॉगर्स मीट- बोलती तस्वीरें!

भई, क्या हुआ, गर छम्मकछल्लो तनिक सुस्त है और झट से पोस्ट नहीं डाली. कहावत है ना कि देर आयद दुरुस्त आयद! शायद दिल बहल्लने को ग़ालिब ये ख़्याल अच्छा है. जब बात अपने से ना बने तो च्चा घालिब पर छोड दो. तो साहबानो, ये कोई पहला मीट नहीं था, गोय छम्मकछल्लो अलबता
 
Vibha Rani
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अब बेटियां बोझ नहीं!

छछम्मक्छल्लो को अभी तक याद है, वह उनकी दूसरी बेटी थी, जिसके जनम के समय वह वहां थी. पहली संतान भी बेटी थी. अभी भी कई घरों में दो बेटियां स्वीकार कर ली जाती थीं. वहां भी स्वीकार ली गईं कि साल भर बाद फिर से उनके मां बनने की खबर आई. समझ में आ गया कि इस तीसरी
 
Vibha Rani
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सरकारी अधिकारी के ताब? बाप रे बाप!

सरकारी नौकरी के बडे नखरे हैं भाई! छम्मक्छल्लो भी कभी सरकारी नौकरी में थी. मगर तब वह छोटी थी, उसे समझ में नही आते थे ये नखरे या उसे करना नहीं आता था. यह अनभिज्ञता अभी तक बरकरार है. ख़ुदा करम करें कि यह बनी रहे.छम्मक्छल्लो अभी भोपाल गई थी. वहां उसकी पहचान
 
Vibha Rani
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सरकारी अफसर हैं तो क्या हुआ?

सरकार भी न! अजीबोगरीब कायदे-कानून बनाती रह्ती है. एक नियम बना कर पाबंदी लगा दी कि सरकारी नौकरियों में अधिकतम दो बच्चों को ही जन्म दिया जा सकता है. पाबंदी इस अर्थ में कि इन नौकरियों को करनेवाले कर्मचारियों को सरकार की ओर से दी जानेवाली सुविधाएं केवल दो
 
Vibha Rani
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मि जिन्‍ना : मंच पर एक राजनीतिक त्रासदी

http://mohallalive.com/2010/04/21/a-criticism-on-mr-zinna/इतिहास से उठाकर जिन्ना को देखिए – एक बाप के रूप में, एक पति के रूप में, एक भाई के रूप में और इन सबसे ऊपर एक व्यक्ति के रूप में। व्यक्ति की अपनी अभिलाषा जब लोकहित को लांघ जती है, तब जिन्ना जैसे
 
Vibha Rani
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"लाडली मीडिया अवार्ड "- chhammakchhallokahis.blogspot.comको

आए हाए हाए! बहुत दिन बाद छम्मकछल्लो आपसे मुखातिब है. अरे बस यूं ही, एक जान दिल जहान! सब कुछ कर लेने की ख्वाहिश! पता है ना कि एक ही जनम है, सो उसी में भरपूर जी लेने की चाहत! अभी दो-दो नाटक "बिम्ब-प्रतिबिम्ब" और "मि. जिन्ना" में लगी थी. जेलों में थिएटर
 
Vibha Rani
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गॉड! यू आर ग्रेट!

"हंस" के फरवरी, 2010 के अंक में छम्मकछल्लो की एक कहानी छपी है. पढें और अपनी राय दें.गॉड! यू आर ग्रेट!       वे दोनों इस महान देश की महिलाएं थीं, भावनाओं की चाशनी में पगी, भाषा की उन्नत उठान में ढली, पहनावे की समुद्री लहरों की
 
Vibha Rani
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थिएटर की भूमिका

आज दिनांक 30 जनवरी, 2010 के "हिदुस्तान" पटना में छपा आलेख.
 
Vibha Rani
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'मुश्किल नहीं संभलना"- एक नाटक, जेल बन्दियों का

'अवितोको' ने इस बार थाणे केन्द्रीय काराग्र्ह में 10 दिवसीय थिएटर वर्कशॉप का आयोजन किया. अंतिम दिन 11 बन्दियों ने अपने द्वारा तैयार 35 मिनट का नाटक 'मुश्किल नहीं संभलना' प्रस्तुत किया.'टाइम्स ऑफ इंडिया की यह रिपोर्ट. अंग्रेजी में है, मगर विश्वास है कि आप
 
Vibha Rani
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मुनिवर नारद! नारायण! नारायण!!

हे मुनिवर नारद , आपने नारायण नारायण की रट लगा कर भवसागर पार कर ली। आपने ऐसा संदेश दिया कि जो नारायण नाम उचारेगा, उसे किसी भी तरह की मोह माया नहीं व्यापेगी। परंतु बावजूद इसके, आप नारायण की ही कृपा और उनकी ही महिमा से नारी के मोहपाश में बंध गये। इतने क
 
Vibha Rani
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यह वहशी दुनिया तुम्हारे लायक नहीं थी रुचिका

अरी बिटिया रुचिका, अच्छा हुआ, तुम सिधार गई. 19 साल बाद आज के इस हालात से तो बेहतर है कि तुम पहले ही चली गई. क्यों कहूं मैं कि तुम समाज से लड़ती रहो, कि समाज के सामने सर उठाकर चलो, कि समाज के डर से डरो मत, कि लोग तुम्हारा कुछ बिगाड़ नहीं सकते, कि कानू
 
Vibha Rani
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मारो, मारो, बेटियों को मारो!

यार लोग परेशान हैं कि किसी ने अपनी नवजात बेटी को मार दिया, क्योंकि उसे बेटी नहीं चाहिये थी. कमाल है, अरे नहीं चाहिये थी तो नहीं चाहिये थी. अब इसमें इतना शोर या मातम मचाने की क्या ज़रूरत? उसका बच्चा, उसकी मर्ज़ी! उसने आपसे पूछकर तो बाप बनने की प्रक्रि
 
Vibha Rani
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विभा रानी को प्रथम "राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान"

छम्मकछल्लो का एक प्रयास यह भी. http://mohallalive.com/2009/12/19/vibha-rani-get-first-rajeev-saraswat-memorial-award/ http://hindi-khabar.hindyugm.com/2009/12/vibha-rani-rajiv-saraswat-smriti-samman.html प्रथम "राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान" सुप्रसिद्ध
 
Vibha Rani
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I will try my level best-का मतलब? कभी नहीं जी कभी नहीं!

छम्मकछल्लो को अंग्रेजी आती नहीं. मगर अंग्रेजी अच्छी बहुत लगती है. अब अंग्रेजी न आने और पसन्द आने के बीच अप कोई तालमेल ना खोजें. हाथ तो चांद भी नहीं आता और हीरे का हार भी. तो इसका यह मतलब तो नहीं कि आप चांद या हार को पसन्द करना बन्द कर दें? आप यक़ीन क
 
Vibha Rani
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ताज्जुब है!

मैने बाल कटाए और अपने बदले रूप पर मुग्ध हुई. मैने बगैर किसी की सलाह के चश्मा खरीदा मुझे अच्छा लगा, अपने जन्म दिन पर मिठाइयां बांटीं, बधाइयां बटोरीं मैं तनिक इतराई- जन्मदिन पर कल तुमसे लडाई की, बेचैन रही रात भर, सोई नहीं सुबह दस मिनट में पकनेवाली सब्ज
 
Vibha Rani
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यू पी के दो भैये से परेशान-ये पूरा हिन्दुस्तान!

परम आदरणीय महोदय साहेब जी लिब्रहान, क्यों हो रहे हैं आप हलकान? जीवन के सत्रह साल का कर दिया नुकसान. सत्रह साल में तो बच्चा जवान हो जाता है, जवान बूढा हो जाता है बूढा स्वर्ग की सीढियां नाप जाता है. सोचिए साहेब जी कि सत्रह साल और उससे भी अधिक समय से, क
 
Vibha Rani
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नंगा नंगा कहि कै, सब नंगे हुई जात हैं!

पिछले दिनों मोहला लाइव पर एक बहस छिडी. लिंक है- http://mohallalive.com/2009/11/29/milind-soman-madhu-sapre-acquitted/ मोहल्ला लाइव के ऑथर ने अपने साइट से हवाला दिया कि अबतक (उनके लिखने तक) 627 लोग साइट पर जा चुके हैं, इसके लेखक उमेश चतुर्वेदी के ball
 
Vibha Rani
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उफ्फ! बाबा मत कहो ना!

बढ़ती उम्र बढ़ता नासूर है. यह बालपन से बढ़ कर जवानी की ओर जाती उम्र की उछाल नहीं है कि लोग रूमानी होवें, सपने देखें, आहें भरें, गिले शिकवे करें. यह तो जवानी की खेप तय कर चुकने के बाद बुढ़ापे की ओर भागती उम्र का पका घाव है, मवाद भरा हुआ. फोड़ा पका नही
 
Vibha Rani
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गुजरात- यानी जहां गुजरे अच्छे से रात!

छम्मकछल्लो के एक मित्र हैं डॉ. माणिक मृगेश. गुजरात प्रेमी हैं. वे अक्सर कहते हैं, गुजरात- यानी जहां गुजरे अच्छे से रात! और यह जो शख्स है , उसका नाम प्रवीण है। वह प्राइवेट टैक्सी का ड्राइवर है। नरोदा पटिया में रहता है। समय बिताना था। हमारी गाड़ी अपने
 
Vibha Rani
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मन की लटाई पर निन्दा का माझा और वो लेखन का गुड्डी बकाट्टा!

आह! मन बहुत दुखी है. कम्बख्त बार बार सोचता है कि लेखक ही बनना था तो हिन्दी और मैथिली के क्यों बने? अपने जन्म पर भी अफसोस होता है कि जन्म ही लेना था तो एक आम आदमी बनकर क्यों जन्मे? आप चाहें तो कह लें कि आम औरत. मुहावरे में भी थोड़ा बदलाव आ जायेगा और ज
 
Vibha Rani
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रब का बन्दा -एक लघु कथा

पढिये लघुकथा.कॉम पर अपनी एक लघु कथा. लिंक है- http://www.laghukatha.com/304-1.htm वह शहर के सबसे बड़ चौराहे पर था। आने-जाने वालों की संख्या बहुत थी। उसे अच्छे पैसे मिल जाते थे। वह खुश था। आज भी वह अपनी नियत जगह पर था। दफ्तर के बाबुओं का आना-जाना शुरू
 
Vibha Rani
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"निर्मल आनन्द सेतु" अवितोको की कार्यशाला का दूसरा चरण- जेल बन्दियों के लिए

निर्मल आनन्द सेतु" कार्यक्रम के तहत अवितोको की थिएटर कार्यशाला 7 नवम्बर, 2009 को थाणे सेंट्रल जेल के बन्दियों के लिए आयोजित की गई. इस कार्यक्रम का उद्देश्य बन्दियों के साथ लगातार काम करके उनके जीवन में सकारात्मक विचारधारा लाना है. इसमें मुख्य रूप से
 
Vibha Rani
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अंतर्राष्ट्रीय महिला नाट्य लेखक यानी WPI (WOmen Playwright International) कॉंफ्रेंस में नाट्य पाठ

।hindyugm.com/2009/11/vibha-raji-natak-path-wpi.html छम्मकछल्लो के बेहद चर्चित नाटक "दूसरा आदमी दूसरी औरत" का नाट्य पाठ 6 नवम्बर, 2009 को दोपहर 12 बजे मुंबई में स्त्री मुक्ति संघटना एवं एकेडेमी ऑफ थिएटर आर्ट, मुंबई विश्वविद्यालय के सौजन्य से 1-7 नवम्
 
Vibha Rani
Nov 08 2009 02:27 PM
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मुंबई में 8वां महिला नाट्यलेखक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आरम्भ

मुंबई में 8वां महिला नाट्यलेखक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन यानी Women Playwright International (WPI) 1 से 7 नवंबर, 2009 तक मुंबई विश्वविद्यालय के अकेडमी ऑफ थिएटर आर्ट तथा स्त्री मुक्ति संघटना, मुंबई के सौजन्य से आयोजित किया जा रहा है। WPI के गठन का उद्देश
 
Vibha Rani
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सकुबाई से सफाई घर की भी, दिल की भी

नाटक में आप जितने भी प्रयोग कर लें, पीरियड ड्रामा ले आएं, ड्रामे के माध्यम से आप राग रंग, नट भाव, उपमा, उपमान की बातें बताएं, सच तो यह है कि आम आदमी नाटक के उन्हीं हिस्सों से जुड़ पाता है, जिसके साथ वह अपना जीवन देख पाता है। पौराणिक आख्यानों में भी व
 
Vibha Rani
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“दयाशंकर” की डायरी देखी है? नहीं तो अब देखिए

।com/2009/10/25/review-of-dayashankar-ki-diary/ http://www.artnewsweekly.com/substory.aspx?MSectionId=1&left=1&SectionId=31&storyID=102 # जब भी कोई नाटक किया जाता है तो उसे एक टीम के रूप में ही तैयार किया जाता है. मगर कई बार हो यह जाता है
 
Vibha Rani
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देख भाई देख, ताल ठोंक के देख!

पिछले दिनों मोहल्ला लाइव पर रवीश कुमार ने दो तसवीरें भेजी थीं जिनमें माँ बहन की गाली देते हुए लोगों से उस स्थान पर लघुशंका न कराने के लिए कहा गया था। छम्मक्छल्लो के लिए भी यह एक अनोखी बात थी। उस तस्वीर और उस पर आधारित लेख पर यह प्रतिलेख। मोहल्ला लाइव
 
Vibha Rani
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रेप हथियार है! फौज़ तैयार करें!

।com/2009/10/22/vibha-rani-article-on-rape-and-women/ आज आप किसी को भी रेप के नाम पर डरा सकते हैं, धमका सकते हैं. रेप के मामले में कौन सच्चा है, कौन झूठा, यह तय करना मुश्किल है. न्याय, धर्म, प्रेम मानवता आदि की बातें इस संदर्भ में ना करें. घटना सामाज
 
Vibha Rani
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रेप हथियार है! फौज़ तैयार करें!

।com/2009/10/22/vibha-rani-article-on-rape-and-women/ आज आप किसी को भी रेप के नाम पर डरा सकते हैं, धमका सकते हैं. रेप के मामले में कौन सच्चा है, कौन झूठा, यह तय करना मुश्किल है. न्याय, धर्म, प्रेम मानवता आदि की बातें इस संदर्भ में ना करें. घटना सामाज
 
Vibha Rani
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टैगोर, नारी मन और असम का संगम- नाटक 'मध्यबर्तिनी' में

रवींद्रनाथ टैगोर की नारी प्रधान कहानी हो तो दिल अपने आप भर आता है। और उस पर जब असम के लोक रंग का बाना हो, तो उसका असर दुगना होते देर नहीं लगती। नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल के आखिरी दिन दोपहर दो बजे मराठी नाटक “टेंग्शेच्या स्व्पनात ट्रेन” था और शाम सात
 
Vibha Rani
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टेंग्चे के सपनों में मुंबई की लोकल की नाट्य त्रासदी

नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल का पांचवां मराठी नाटक था – समन्‍वय, पुणे का “टेंग्शेच्या स्वप्नात ट्रेन” यानी टेंचे के स्वप्‍न में ट्रेन, ट्रेन मुंबईकर के बदन में धड़कन की तरह समायी हुई है। यह ट्रेन जीवन है, धड़कन है, समय है, समय के साथ भागती दौडती ज़‍िंद
 
Vibha Rani
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'आ'एम हैप्पी'

आ'एम हैप्पी' किसी भी भाषण की बड़ी अच्छी शुरूआत है। हर समारोह में अतिथि वक्ता यह जरूर कहते हैं कि 'आ'एम हैप्पी' । आय एम हैप्पी कि मुझे आप लोगों ने यहाँ बुलाया। आए एम हैप्पी कि मुझे आप सबसे मिलने का मौका मिला। आएम हैप्पी कि मुझे आप सबसे बातें करने का, आ
 
Vibha Rani
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दास्‍तानगोई उर्फ हम कहें आप सुनें

नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल में नाटक की अलग अलग प्रस्तुतियों के बाद इस बार दास्‍तानगोई पर एक प्रस्तुति "हम कहें आप सुनें" नादिरा ज़हीर बब्बर ने अपने "एकजुट थिएटर ग्रुप" की तरफ से की. लिलेट दुबे के 'ब्रीफ कैंडल' के बाद यह दूसरा नाटक रहा, जो किसी महिला न
 
Vibha Rani
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“अजिंठा” में कब्र से निकल आई “पारो”

।com/2009/10/16/ajintha-in-nehru-theatre-festival/ http://www.artnewsweekly.com/substory.aspx?MSectionId=1&left=1&SectionId=31&storyID=९६ http://janatantra.com/2009/10/16/ajintha-in-nehru-theatre-festival/ नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल में इ
 
Vibha Rani
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"किरात पर्व"- बांग्ला नाटक की इतनी लचर प्रस्तुति?

।com/2009/10/11/nehru-centre-theatre-festival-7th-day/ http://reporterspage.com/miscellaneous/23-24 नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल में 1970 में उत्पल दत्त द्वारा स्थापित पीपल्स लिटिल थिएटर (पीएलटी) ने उन्हीं का लिखा नाटक "किरात पर्व" प्रस्तुत किया. उत्पल
 
Vibha Rani
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राजा होना सुखी होने का मार्ग नहीं है, कदापि! - चाणक्य

नेहरु सेंटर थिएटर फेस्टिवल की अगली प्रस्तुति थी मनोज जोशी कृत नाटक- चाणक्य. नीति और राजनीति के बात आने पर कौटिल्य चाणक्य का नाम ना आये, यह असम्भव है. राजनीति और छल प्रपंच राजनीत का अभिन्न हिस्सा है. यह राजनीति जब व्यक्ति से उठकर समाज की ओर जाती है तो
 
Vibha Rani
Oct 14 2009 07:37 PM
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पानी में आग!

पढ़ें एक व्यंग्य रचना- पानी में आग! लिंक है- http://rachanakar.blogspot.com/2009/10/blog-post_10.html कहते हैं, मुंबई शहर हादसों का शहर है। इन हादसों में सबसे बड़ा हादसा यह हुआ कि यहाँ पानी में आग लग गई। अब तक तो आग जंगल में लगती थी, पेट में लगती थी।
 
Vibha Rani
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