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आशुतॊष मासूम...

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31 Dec 2009
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ऑपरेशन कम्बल परैड

हम झारखंड से २५ लडके कैम्प के लिये आन्ध्राप्रदेश गये हुये थे, और मेरा रैन्क सीनियर अन्डर औफिसर का था. पर उत्तर से दक्षिण जाते ही लगभग सारे लडकों की तबियत खराब हो गई. और जैसा की एन.सी.सी. कैम्प मे होता है, हर दिन किसी की डयुटी लगती है. झारखंड के हम २५
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खुशी की तलाश......

तुमने जो चित्र कभी अपने ख्वाबों मे बनाये थे, आज मैने उस चित्र मै रंग भर दिया है, फिर भी वह चित्र अधुरा दिख रहा है, क्योंकी अब चित्र मे तुम्हारे होने का एह्सास नही है. तुमने जो कभी मंजिल बनाई थी अपने लिये, आज मै उस मंजिल पर खडा हुँ, पर मुझे आज वो मंजि
Dec 29 2009 11:49 AM
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नववर्ष आपके लिये मंगलमय हो...

सजधज के जैसे ही नववर्ष मनाने हम घर से निकले, राह मे अचानक एक बच्चे को देख कदम संभल गये, नहीं नही वो बच्चा मामूली नही था, वह कूडों के ढेर मे, अपना भविष्य खोज रहा था, बचपने मे ही, बडों जैसी सिलवटे उसके माथे पर दिख रहा था. मेरे दिल मे अचानक ख्याल आया, ह
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बेटी

बेटी के जीवन मे वो बेला भी आई थी, मां, बाप, भाई, सबको देनी अब विदाई थी, घर का वो आंगन, जिसको वो अपना बताती थी, आज एक अंजान के खातीर वो सबसे हुई पराई थी, मायके की इज्ज्त आज अपने काधों मे देख, आज बेटी के आखो मे आंसु की धार बह आई, अम्मा, बाउजी ने जो सिख
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भारत का इन्कलाब - चाय और पान के दुकान पर

विद्रोह मे पढिये " भारत का इन्कलाब - चाय और पान के दुकान पर " क्लिक करें... " भारत का इन्कलाब - चाय और पान के दुकान पर "
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नयी जगह, पुराने विचार - विद्रोह

मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था की मैने जिस उद्देश्य से ये ब्लाग शुरु किया था, मै उस उद्देश्य से भटक रहा हुँ. मैने "आशुतोष मासूम" नाम से इस ब्लाग को शुरु किया था अपनी कविताओं और कहानियों के लिये, किन्तु धीरे धीरे मै इस ब्लाग पर कुछ ऐसे मुद्दे उठाने लगा जो
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हिन्दुत्व की जीत, हिन्दुस्तान की हार.

सर्वप्रथम मोदी जी को गुजरात की जीत पर बधाई... एक प्रजातंत्र एवं धर्मनिरपेक्ष राज्य का नागरिक होने के नाते, मुझे भी ये हक है की मै अपनी बात कह पाउँ. मै किसी विशेष पार्टी से सम्बन्ध नही रखता, पर जब जीस को जैसा करते हुये देखता हुँ, अपनी बेबाक राय जरुर ब
Dec 29 2009 11:49 AM
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महाशक्ति समूह बनी संस्‍था

पिछले माह प्रारम्‍भ हुआ महाशक्ति समूह आज नई बुलन्दियों को छू रहा है। महाशक्ति समूह अपने निर्माण के प्रथम माह में ही करीब 1500 हिट्स प्राप्‍त करने में सफल रहा। इसके साथ ही साथ केन्‍द्रीय समिति के जानाकारी के अनुसार समूह अब एक संस्‍था भी बन गई है। भारत
Dec 29 2009 11:49 AM
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एक छोटी से प्रेम कहानी

कहानी पढने के लिये क्लिक करें... " एक छोटी से प्रेम कहानी "
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पिंजर

१९३५ की भुमी पर रची गई कहानी उस पूरो की है, जिसे रशीद अपनी पुरखों की लडाई का बदला लेने के लिये,शादी के ठीक १५ दिन पहले उठा लेता है. अब पूरो उस पिंजर मे बंद होकर रह जाती है, जहॉ से निकलने के बाद उसकी कोई दुनिया ही नही है. उसके मॉ पिताजी अब अपनी उस बेट
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खुद के तलाश-अमृता प्रीतम के साथ

आज दो दिन हो गये रुम से निकले हुये, सिर्फ पेट की भुख मिटाने के लिये रुम से निकलता हुं और वापस फिर से खुद को कमरे मे बन्द कर ले रहा हुं. आखिर क्यों ना रहुं कमरे मे, इतना प्यारा दोस्त जो मिल गया है. पुरे कॉलेज मे शायर के नाम से मशहुर हुं, लोगों को कहते
Dec 29 2009 11:49 AM
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अधुरा ख्वाब - एक अधुरी कहानी

आरामदेह कूर्सी पर बैठा मानव अजीब सी उधेडबुन मे गुम था. सिर्फ २७ साल की उम्र मे ही उसने वो सब पा लिया था, जो लोगों को पाने मे एक उम्र लगानी पडती है। आज उसके पास अपना मकान, अपनी गाडी, बैंक बैलेंस, सब कुछ था, फिर भी उसे कुछ कमी सी लग रह थी। वो अपने उन द
Dec 29 2009 11:49 AM
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तुम मुझे उस दिन प्यार करना

जब तुम्हे मुझ पर यकीन हो जाये, मेरी बातों मे तुमको सच्चाई दिखने लग जाये, मेरी ऑखों के ऑसु पानी है,जब ये भ्रम टुट जाये, जब तुमको लगे की,तुम बिल्कुल अकेली हो, तुम मुझे उस दिन प्यार करना. जब तुम्हारे पास जीने की कोई उम्मीद ना हो, तुम्हारे ऑसु पोछने के ल
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गजल

ना जाने क्यों लोग,जिन्दगी भर साथ निभाने की बात करते हैं, हमने तो तेरे संग चंद लम्हों मे जिन्दगी को जी लिया है. मै तो तेरी यादों को भुला खुद ब खुद संभल ही गया, तुमने नजरें मिलते ही, नजरों को क्यों झुका लिया है. आशियॉ बनाने मे सदियों लगे थे,उजडने मे लम
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जिन्दगी/मौत : एक तलाश???

मेरे जेहन मे अचानक ख्याल आया की, क्यों ना मौत की परिभाषा ढुढीं जाये। क्या सांसो के रुकने को ही मौत का नाम दिया जा सकता है या मौत की कोई और भी परिभाषा हो सकती है । पर सर्वप्रथम ये जानना जरुरी है की जिन्दगी क्या है? क्योकीं जिन्दगी और मौत एक सिक्के के
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श्रदान्जलि

ये कविता सिर्फ एक कविता नही है, ये मेरे उस भाई को श्रंदान्जलि, जो आज सिर्फ २१ साल की उम्र मे ही इस दुनिया को छोड चला गया. वो भाई जिसने अपनी जिन्दगी के १९ साल मेरे संग व्यतित किये थे. अभी जब मै ये कविता लिख रहा हुं, तो २००० किलोमीटर दुर उसके चिता को आ
Dec 29 2009 11:49 AM
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हाँ बाबूजी, मै वेश्‍या हूँ

उस भीड भरी राहों मे भी एक सुनसान सी जगह है, हर रोज देखता हूँ, उन्हे वहां पर, संध्या की बेला के साथ, सजधज वो वहॉं आ जाती है, खडी तो खामोश ही रह्ती है, पर आँखें उन्की ना जाने किसको बुलाती हैं, अगर कोई आ जाये, तो मुस्कुराती है, और फिर चुपचाप उन्के साथ च
Dec 29 2009 11:49 AM
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क्षणिकायें - मयखाना

हर शराबी का बस दो ही ठिकाना है, होश मे रहा तो मयखाना, नशे मे रहा तो,वो दीवाना है. 2 पंडित कहे,शराब पाप है, शराबी कहे, हम पापी है, मयकदे मे दोनो संग संग, कौन सचा कौन झूठा??? 3 जब तक तुम थे, मै आशिक, तुम चले गये, मै शराबी, कौन निभा गया मुझसे वफा??? 4 म
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कौन हूँ मै ???

आखि़र कौन हुँ मै ???? इस छल कपट और फरेबी दुनिया मे, जहाँ हर वक्त, बेबसी मौत से हारती है, कौन है अपना कौन पराया? जिन्दगी हर वक्त इस सवाल का हल ढूढ़ती नजर आती है. रिश्ते जो अपनी आखिरी साँसों में कहीं उलझा, कहानियों में अपने होने का एहसास करती है, कौन ह
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दर्द एक अनुभूति

दर्द की एक अनुभूति, मुझसे परेशान है. वह सूनी सी, पथराई सी, आँखो से निकलना चाहे, मै चाँहू मेरे रक्त कणो के संग संग बह्ती जाये.वह चाहे अपनी व्यथा सुनाकर गुजित करना दिवारो को,मै चाँहू पहले तोडे वह मेरे जीवन मन्दिर द्वारो को. दर्द की वह् अनुभूति, जो मुझम
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मेरी यादे

आज मेरा घर मुझको बुलाता है, वो मेरा आग़ॅन मुझको याद आता है। वो गलीयाँ जीस पर मै दौडा कराता था, वो मन्दिर की घॅटी जिसे मै रोज बजाया कराता था, सुबह का निकला शाम को घर आया करता था, घर पर आ हर रोज,एक नई कहानी सुनाया करता था, आज मेरा वो घर मुझको बुलाता है,
Dec 29 2009 11:49 AM
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एहसास

तेरा एक एक एहसास मुझको रुला जाता है, भुलने वाले क्या कभी तुझको मेरा चेहरा याद आता है. तेरी चाहत के एक एक मोती को आज भी कोइ संजोता है, भुलने वाले क्या तु भी कभी उस की याद मै आखे भिगोता है. आज भी तेरी याद मे कोइ शख्स रोने से डर जाता है, उसके हर अक्स मे
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नाकाम कोशीश

तुझे भुलने कि फिर से एक नाकाम कोशीश कि है, जिन्दगी के साथ एक और जंग कि आगाज कि है. तुझे भुलने कि खातीर जब जब जिन्दगी को आवाज दी है, जिन्दगी ने तब तब तुम्हारी और बस तुम्हारी ही बात कि है. तुम्हे और नही याद करना है, जब जब खुद से बात ये कि है, दिल और जु
Dec 29 2009 11:49 AM
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AARJUUUUU.......

Usne jab hamari mohabat ko thukara hi diya haiHamne bhi unki aarju ko phir se samman diya hai.Girne na dunga ek bhi katra apni aankhooo seYahi to najrane hai , jo unki mohabat ne hamko diya hai.Ab to logo se aur bhi salikeee se milte hai hamUnki chahat
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BAS YU HIII

Tanhaai Ki Chadar Odehey Hum Muskaurate HaiTum Aankhoo Mai Base Ho, AurHam Tumhe Bhulne Ke Geet Gate HaiGamoo Ke Dariaa Mai To Ham Har Roj Gota Lagate HaiKah Sakta Hu Tum Mughe Yaad Nahi, ParNa Jane Kayun Har Kavita Mai Tumhara Naam Le Aate Hai.Teri Di
Jul 20 2007 04:03 PM