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11 Mar 2010
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सुनो सजना पपीहे ने कहा सबसे पुकार के....सम्हल जाओ चमन वालो कि आये दिन बहार के

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 370/2010/70 पिछले नौ दिनों से आप 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर आनंद ले रहे हैं इस रंगीन मौसम का, बसंत ऋतु का, फागुन के महीने का, होली के रंगों का, सब के सब गीत संगीत के माध्यम से। आज हम आ पहुँचे हैं इस रंगीन लघु शृंखला की अंतिम कड़ी पर। 'गीत
 
सजीव सारथी
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Mar 11 2010 06:56 PM
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पुरवा सुहानी आई रे...थिरक उठते है बरबस ही कदम इस गीत की थाप सुनकर

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 369/2010/69 'गीत रंगीले' शृंखला की नौवीं कड़ी के लिए आज हमने जिस गीत को चुना है, उसमें त्योहार की धूम भी है, गाँव वालों की मस्ती भी है, लेकिन साथ ही साथ देश भक्ति की भावना भी छुपी हुई है। और क्यों ना हो जब भारत कुमार, यानी कि हमारे
 
सजीव सारथी
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Mar 10 2010 06:35 PM
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ख़ाक हो जायेंगे हम तुम को ख़बर होने तक.. उस्ताद बरकत अली खान की आवाज़ में इश्क की इन्तहा बताई ग़ालिब ने

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७४इक्कीस बरस गुज़रे आज़ादी-ए-कामिल को,तब जाके कहीं हम को ग़ालिब का ख़्याल आया ।तुर्बत है कहाँ उसकी, मसकन था कहाँ उसका,अब अपने सुख़न परवर ज़हनों में सवाल आया ।सौ साल से जो तुर्बत चादर को तरसती थी,अब उस पे अक़ीदत के फूलों की नुमाइश है
 
विश्व दीपक
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आई झूम के बसंत....आज झूमिए बसंत की इन संगीतमयी बयारों में सब गम भूल कर

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 368/2010/68 बसंत ऋतु की धूम जारी है 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर और इन दिनों आप सुन रहे हैं इस स्तंभ के अन्तर्गत लघु शृंखला 'गीत रंगीले'। आज जिस गीत की बारी है वह एक ऐसा गीत है जिसे बजाए बिना अगर हम इस शृंखला को समाप्त कर देंगे तो यह शृंखला
 
सजीव सारथी
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Mar 09 2010 06:51 PM
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गुनगुनाते लम्हे में अमृता-इमरोज़ के प्यार की दास्तां

अभी कुछ दिन पहले आपने मशहूर चित्रकार इमरोज़ का विशेष इंटरव्यू पढ़ा जिसे आप सबके लिए लाया था रश्मि प्रभा ने। इस बार के 'गुनगुनाते लम्हे' में भी रश्मि प्रभा गीतों के माध्यम से अमृता-इमरोज़ की अमर प्रेम-कहानी लेकर आई हैं। बिना किसी विशेष भूमिका के हम आपको
 
नियंत्रक । Admin
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सुनो कहानी: चारा काटने की मशीन - उपेन्द्रनाथ "अश्क"

उपेन्द्रनाथ अश्क की "चारा काटने की मशीन"'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में इब्ने इंशा की कहानी "हमारा मुल्क" का पॉडकास्ट सुना था। आवाज़ की ओर से आज हम लेकर आये हैं उर्दू और
 
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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आज मधुबातास डोले...भरत व्यास रचित इस गीत के क्या कहने

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 367/2010/67 गीत रंगीले' शृंखला की सातवीं कड़ी में आप सभी का स्वागत है। दोस्तों, इन दिनों हर बातें कर रहे हैं बसंत ऋतु की, फागुन के महीने की, रंगों की, फूलों की, महकती हवाओं की, पीले सरसों के खेतों की। इसी मूड को बरक़रार रखते हुए आज
 
सजीव सारथी
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Mar 08 2010 06:44 PM
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एम एम क्रीम लौटे हैं एक बार फिर अपने अलग अंदाज़ के संगीत के साथ "लाहौर" में

ताज़ा सुर ताल १०/२०१०सजीव - सभी को वेरी गुड मॊरनिंग् और 'ताज़ा सुर ताल' के एक और अंक में हम सभी का स्वागत करते हैं। सुजॊय, पिछले दो हफ़्तों में हमने ग़ैर फ़िल्म संगीत का रुख़ किया था, आज हम वापस आ रहे हैं एक आनेवाली फ़िल्म के गीतों और उनसे जुड़ी कुछ
 
सजीव सारथी
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Mar 08 2010 09:00 AM
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छम छम नाचत आई बहार....एक ऐसा मधुर गीत जिसे सुनकर कोई भी झूम उठे

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 366/2010/66 "एक बार फिर बसंत जवान हो गया,जग सारा वृंदावन धाम हो गया,आम बौराई रहा, सरसों भी फूल रहा,खेत खलिहान शृंगार हो गया,पिया के हाथ दुल्हन शृंगार कर रही,आज धूप धरती से प्यार कर रही,बल, सुंदरता के आगे बेकार हो गया,सृष्टि पे यौवन
 
सजीव सारथी
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ज़िन्दगी सपने जैसा सच भी है, पर तेरे साथ....एक चित्रकार, एक कवि और इन सबसे भी बढ़कर मोहब्बत की जीती जागती मिसाल है इमरोज़ - एक खास मुलाकात

दोस्तों, कभी कभी कुछ विशेष व्यक्तियों से मिलना, बात करना जीवन भर याद रह जाने वाला एक अनुभव बन रह जाता है, अपना एक ऐसा ही अनुभव आज हम सब के साथ बांटने जा रही हैं, रश्मि प्रभा जी, तो बिना कुछ अधिक कहे हम रश्मि जी और उनके खास मेहमान को सौंपते हैं आपकी आँखों
 
सजीव सारथी
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Mar 07 2010 11:22 AM
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केतकी गुलाब जूही चम्पक बन फूले...दो दिग्गजों की अनूठी जुगलबंदी से बना एक अनमोल गीत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 365/2010/65 भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग ना केवल दिन के अलग अलग प्रहरों से जुड़े हुए हैं, बल्कि कुछ रागों का ऋतुओं, मौसमों से भी निकट का वास्ता है। ऐसा ही एक राग है बहार। और फिर राग बहार से बना है राग बसन्त बहार भी। जब बसंत, फागुन
 
सजीव सारथी
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Mar 06 2010 06:30 PM
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रंग बसंती, अंग बसंती, संग बसंती छा गया, मस्ताना मौसम आ गया...और क्या कहें इसके बाद

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 364/2010/64 मानव मन पर नवचेतना और नई ताज़गी का संचार करने हर वर्ष आता है ऋतुराज बसंत। प्रकृति मानो नींद से जाग उठती है और चारों तरफ़ बहार ही बहार छा जाती है। पीले सरसों के लहलहाते खेत अपने पूरे शबाब पर होते हैं जैसे किसी ने पीले
 
सजीव सारथी
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Mar 05 2010 06:30 PM
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मोहे भी रंग देता जा मोरे सजना...संगीत के विविध रंगों से सजा एक रंगीला गीत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 363/2010/63 रंग रंगीले गीतों पर आधारित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की यह लघु शृंखला 'गीत रंगीले' जारी है 'आवाज़' पर। "आजा रंग दूँ तेरी चुनरिया प्यार के रंग में", दोस्तों, अक्सर ये शब्द प्रेमी अपनी प्रेमिका को कहता है। लेकिन कभी कभी हालात ऐसे
 
सजीव सारथी
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Mar 04 2010 06:30 PM
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लाई है हज़ारों रंग होली...और हजारों शुभकामनाएं संगीतकार रवि को जन्मदिन की भी

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 362/2010/62 'गीत रंगीले' शृंखला की दूसरी कड़ी में आप सभी का एक बार फिर स्वागत है। दोस्तों, आप ने बचपन में अपनी दादी नानी को कहते हुए सुना होगा कि "उड़ गया पाला, आया बसंत लाला"। ऋतुराज बसंत के आते ही शीत लहर कम होने लग जाती है, और एक
 
सजीव सारथी
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Mar 03 2010 06:30 PM
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रोएंगे हम हज़ार बार कोई हमें सताये क्यूँ.. नूरजहां की काँपती आवाज़ में मचल पड़ी ग़ालिब की ये गज़ल

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७३लाजिम था कि देखो मेरा रस्ता कोई दिन और, तनहा गये क्यों अब रहो तनहा कोई दिन और। ग़ालिब की ज़िंदगी बड़ी हीं तकलीफ़ में गुजरी और इस तकलीफ़ का कारण महज़ आर्थिक नहीं था। हाँ आर्थिक भी कई कारण थे, जिनका ज़िक्र हम आगे की कड़ियों में करेंगे। आज
 
विश्व दीपक
Mar 03 2010 09:45 AM
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पिया संग खेलूँ होली फागुन आयो रे...मौसम ही ऐसा है क्यों न गूंजें तराने फिर

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 361/2010/61 होली का रंगीन त्योहार आप सभी ने ख़ूब धूम धाम से और आत्मीयता के साथ मनाया होगा, ऐसी हम उम्मीद करते हैं। दोस्तों, भले ही होली गुज़र चुकी है, लेकिन वातावरण में, प्रकृति में जो रंग घुले हुए हैं, वो बरक़रार है। फागुन का
 
सजीव सारथी
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Mar 02 2010 06:22 PM
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कहीं शेर-ओ-नग़मा बन के....तलत साहब की आवाज़ में एक दुर्लभ गैर फ़िल्मी गज़ल

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 360/2010/60 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़', तलत महमूद पर केन्द्रित इस ख़ास पेशकश की अंतिम कड़ी में आपका फिर एक बार हम स्वागत करते हैं। दोस्तों, किसी भी इंसान की जो जड़ें होती हैं, वो इतने मज़बूत होती हैं, कि ज़िंदगी में एक
 
सजीव सारथी
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Mar 01 2010 07:22 PM
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"अमन की आशा" है संगीत का माधुर्य, होली पर झूमिए इन सूफी धुनों पर

ताज़ा सुर ताल ०९/२०१०सुजॊय - सभी पाठकों को होली पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ और सजीव, आप को भी!सजीव - मेरी तरफ़ से भी 'आवाज़' के सभी रसिकों को होली की शुभकामनाएँ और सुजॊय, तुम्हे भी।सुजॊय - होली का त्योहार रंगों का त्योहार है, ख़ुशियों का त्योहार है,
 
सजीव सारथी
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Mar 01 2010 09:03 AM
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यादों का सहारा न होता हम छोड के दुनिया चल देते....और चले ही तो गए तलत साहब

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 359/2010/59 'ओल्ड इज़ गोल्ड' के सभी श्रोताओं व पाठकों को हमारी तरफ़ से होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। इन दिनों 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर जारी है तलत महमूद पर केन्द्रित शृंखला 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़'। जैसा कि हमने आप से पहली ही
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 28 2010 06:30 PM
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फागुनी पॉडकास्ट कवि सम्मेलन और एक सरप्राइज

रश्मि प्रभाखुश्बूदुनिया के लगभग सभी त्योहार बदलाव-सूचक हैं। और ये बदलाव दुखों से लगातार लड़ते मनुष्य के मन में, आगे सुख की रोशनी है- की आशा का संचार करते हैं। होली त्योहार भी वैमनस्यकता, ईर्ष्या, द्वेष के खिलाफ भाईचारे का उद्‍घोष है। इसी तरह की कुछ
 
नियंत्रक । Admin
टैग: gaurav vashishtha
Feb 28 2010 08:10 AM
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सुनो कहानी: हमारा मुल्क - इब्ने इंशा

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में असगर वज़ाहत की एक कहानी "आग" का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहे हैं इब्ने इंशा की लघुकथा "हमारा मुल्क", जिसको
 
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
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Feb 27 2010 07:59 PM
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देख ली तेरी खुदाई...न्याय शर्मा, जयदेव और तलत ने रचा निराशा का एक संसार

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 358/2010/58 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़', इस शृंखला की आज है आठवीं कड़ी, और पिछले सात ग़ज़लों की तरह आज की ग़ज़ल भी ग़मज़दा ही है। १९६३ की फ़िल्म 'किनारे किनारे' तो फ़िल्म की हैसियत से तो नहीं चली थी, लेकिन इस फ़िल्म के
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 27 2010 06:30 PM
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जब छाए कहीं सावन की घटा....याद आते हैं तलत साहब और भी ज्यादा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 357/2010/57 दर्द भरे गीतों के हमदर्द तलत महमूद की मख़मली आवाज़ और कोमल स्वभाव से यही निचोड़ निकलता है कि फूल से भी चोट खाने वाला नाज़ुक दिल था उनका। और वैसी ही उनके गीत जो आज भी हमें सुकून देते हैं, हमारे दर्द के हमदर्द बनते हैं।
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 26 2010 06:30 PM
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हर शाम शाम-ए-ग़म है, हर रात है अँधेरी...शेवन रिज़वी का दर्द और तलत का अंदाज़े बयां

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 356/2010/56 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़' की आज की कड़ी में फिर एक बार शायर शेवन रिज़्वी का क़लाम पेश-ए-ख़िदमत है। दोस्तों, तलत महमूद ने "शाम-ए-ग़म" पर बहुत सारे गीत गाए हैं। दो जो सब से ज़्यादा मशहूर हुए, वो हैं "शाम-ए-ग़म
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 25 2010 06:26 PM
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'काव्यनाद' और 'सुनो कहानी' की बम्पर सफलता

हिन्द-युग्म ने 19वें विश्व पुस्तक मेले (जो 30 जनवरी से 7 फरवरी 2010 के दरम्यान प्रगति मैदान, नई दिल्ली में आयोजित हुआ) में बहुत-सी गतिविधियों के अलावा दो नायाब उत्पादों का भी प्रदर्शन और विक्रय किया। वे थे प्रेमचंद की 15 कहानियों का ऑडियो एल्बम ‘सुनो
 
नियंत्रक । Admin
टैग: hindi kavitayen
Feb 25 2010 03:17 AM
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तेरा ख़याल दिल को सताए तो क्या करें...तलत साहब को उनकी जयंती पर ढेरों सलाम

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 355/2010/55 आज २४ फ़रवरी है, फ़िल्म जगत के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक तलत महमूद साहब का जनमदिवस। उन्ही को समर्पित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की ख़ास पेशकर इन दिनों आप सुन रहे हैं 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़'। दोस्तों, इस शृंखला में
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 24 2010 06:30 PM
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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है.. ग़ालिब के दिल से पूछ रही हैं शाहिदा परवीन

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७२पूछते हैं वो कि "ग़ालिब" कौन है,कोई बतलाओ कि हम बतलायें क्याअब जबकि ग़ालिब खुद हीं इस बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं कि ग़ालिब को जानना और समझना इतना आसान नहीं तभी तो वो कहते हैं कि "हम क्या बताएँ कि ग़ालिब कौन है", तो फिर हमारी इतनी समझ
 
विश्व दीपक
टैग: shahida parveen
Feb 24 2010 09:24 AM
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गर तेरी नवाज़िश हो जाए...अंदाज़े मुहब्बत और आवाजे तलत

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 354/2010/54 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़' शृंखला की यह है चौथी कड़ी। १९५४ में तलत महमूद के अभिनय व गायन से सजी दो फ़िल्में आईं थी - 'डाक बाबू' और 'वारिस'। इनके अलावा बहुत सारी फ़िल्मों में इस साल उनकी आवाज़ छाई रही जैसे कि
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 23 2010 06:30 PM
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ज़िंदगी किस मोड़ पर लाई मुझे...पूछते हैं तलत साहब नक्श की इस गज़ल में

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 353/2010/53 यह है 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की महफ़िल और आप इन दिनों इस पर सुन रहे हैं तलत महमूद साहब पर केन्द्रित शृंखला 'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़'। तलत साहब की गाई ग़ज़लों के अलावा इसमें हम आपको उनके जीवन से जुड़ी बातें भी बता
 
सजीव सारथी
टैग: naksh lyalpuri
Feb 22 2010 06:30 PM
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कविता और संगीत का अनूठा मेल है "काव्यनाद"

ताज़ा सुर ताल ०८/२०१०सुजॉय- सजीव आज आपके चेहरे पर एक अजीब सी खुशी है, इसकी वजह...सजीव- हाँ सुजॉय मैं हिंद युग्म के अपने प्रोडक्ट "काव्यनाद" को विश्व पुस्तक मेले में मिली आपार सफलता और वाह वाही से बहुत खुश हूँ.सुजॉय- हाँ सजीव मैंने भी यह अल्बम सुनी, और सच
 
सजीव सारथी
Feb 22 2010 10:38 AM
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आंसू तो नहीं है आँखों में....तलत के स्वरों में एक और ग़मज़दा नगमा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 352/2010/52 आ'दस महकती ग़ज़लें और एक मख़मली आवाज़'। तलत महमूद साहब के गाए १० बेमिसाल ग़ज़लों पर आधारित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की इस ख़ास पेशकश की दूसरी महफ़िल में आप सभी का स्वागत है। इससे पहले कि आज की ग़ज़ल का ज़िक्र करें, आइए आज तलत
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 21 2010 06:30 PM
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भरम तेरी वफाओं का मिटा देते तो क्या होता...तलत की आवाज़ पर साहिर के बोल

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 351/2010/51 आज है २० फ़रवरी। याद है ना आपको पिछले साल आज ही के दिन से शुरु हुई थी 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की यह शृंखला। आज से इस शृंखला का दूसरा साल शुरु हो रहा है। आपको याद है इस शॄंखला की पहली कड़ी में कौन सा गीत बजा था? चलिए हम ही याद
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 20 2010 06:30 PM
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खुशबू उड़ाके लाई है गेशु-ए-यार की.. अपने मियाँ आग़ा कश्मीरी के बोलों में रंग भरा मुख्तार बेग़म ने

महफ़िल-ए-ग़ज़ल #७०हमने अपनी महफ़िल में इस मुद्दे को कई बार उठाया है कि ज्यादातर शायर अपनी काबिलियत के बावजूद पर्दे के पीछे हीं रह जाते हैं। सारी की सारी मक़बूलियत इन नगमानिगारों के शेरों को, उनकी गज़लों को अपनी आवाज़ से मक़बूल करने वाले फ़नकारों के
 
विश्व दीपक
टैग: raani
Feb 10 2010 09:21 AM
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कभी तन्हाईयों में यूं हमारी याद आएगी....मुबारक बेगम की दर्द भरी सदा

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 340/2010/40 फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर की कमचर्चित पार्श्वगायिकाओं को सलाम करते हुए आज हम आ पहुँचे हैं इस ख़ास शृंखला की अंतिम कड़ी पर। अब तक हमने इस शृंखला में क्रम से सुलोचना कदम, उमा देवी, मीना कपूर, सुधा मल्होत्रा, जगजीत कौर,
 
सजीव सारथी
टैग: mubarak begum
Feb 09 2010 06:30 PM
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तितली उडी, उड़ जो चली...याद कीजिये कितने संस्करण बनाये थे शारदा के गाये इस गीत के आपने बचपन में

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 339/2010/39 फ़िल्म जगत के श्रेष्ठतम फ़िल्मकारों में से एक थे राज कपूर, जिनकी फ़िल्मों का संगीत फ़िल्म का एक बहुत ही अहम पक्ष हुआ करती थी। क्योंकि राज कपूर को संगीत का अच्छा ज्ञान था, इसलिए वो अपनी फ़िल्म के संगीत में भी अपना मत
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
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"स्ट्राईकर" का संगीत निशाना है एक दम सटीक

ताज़ा सुर ताल 06/ 2010सजीव - सुजॊय, यह बताओ तुम्हे कैरम खेलने का शौक है?सुजॊय - अरे सजीव, यह अचानक 'ताज़ा सुर ताल' के मंच पर कैरम की बात कहाँ से आ गई। वैसे, हाँ, बचपन में काफ़ी खेला करता था गर्मियों की छुट्टियों में, लेकिन अब बिल्कुल ही बंद हो गया
 
सजीव सारथी
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नि मैं यार मानना नि चाहें लोग बोलियां बोले...जब मिलाये मीनू पुरषोत्तम ने लता के साथ ताल से ताल

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 338/2010/38 फ़िल्म संगीत के सुनहरे दौर के कमचर्चित पार्श्वगायिकाओं को समर्पित 'ओल्ड इज़ गोल्ड' की लघु शृंखला 'हमारी याद आएगी' की आठवीं कड़ी में आज एक ऐसी गायिका का ज़िक्र जिन्होने कमल बारोट की तरह दूसरी गायिका के रूप में लता
 
सजीव सारथी
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मैं तेरी हूँ तू मेरा है....मधुबाला जावेरी का नटखट अंदाज़ निखारा हंसराज बहल ने

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 337/2010/37 'हमारी याद आएगी' के आज के अंक में गूंजने वाली है एक और बेहद मधुर गायिका की आवाज़। वक़्त के साथ साथ इस गायिका की यादें ज़रा धुंधली सी हो गई है और आज शायद ही आम ज़िंदगी में हम रोज़ इन्हे याद करते हैं, लेकिन किसी ज़माने
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 06 2010 06:30 PM
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सुनो कहानी: संस्कृति के रखवाले

'सुनो कहानी' इस स्तम्भ के अंतर्गत हम आपको सुनवा रहे हैं प्रसिद्ध कहानियाँ। पिछले सप्ताह आपने अनुराग शर्मा की आवाज़ में इस्मत चुगताई की आत्मकथा ''कागज़ी है पैरहन'' से एक बहुत ही सुन्दर, मार्मिक प्रसंग का पॉडकास्ट सुना था। आज हम आपकी सेवा में प्रस्तुत कर
 
Smart Indian - स्मार्ट इंडियन
टैग: suno kahani
Feb 06 2010 10:19 AM
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हँसता हुआ नूरानी चेहरा ....क्यों न हो ओल्ड इस गोल्ड के सुनहरे गीतों को सुनते हुए

ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 336/2010/36 इन दिनों 'ओल्ड इज़ गोल्ड' पर चल रहा है फ़िल्म संगीत के सुनहरे युग के कुछ कमचर्चित लेकिन बेहद प्रतिभावान पार्श्वगायिकाओं पर समर्पित शृंखला 'हमारी याद आएगी'। आज की कड़ी में ज़िक्र एक अनोखी आवाज़ की। मिट्टी की सौंधी सौंधी
 
सजीव सारथी
टैग: sujooi chatterjee
Feb 05 2010 06:30 PM