झारखंडी घनश्याम's Image

झारखंडी घनश्याम

http://jharkhandighanshyam.blogspot.com/
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
14 Jun 2010
कुल प्रविष्टियां
32
पाठक भेजे
6996
पसंद
124
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
218.63
पसंद करें
1
नापसंद करें

समुन्नति का सूत्र

चंद शब्दों की समिधाथोड़ा सा कल्पना का अक्षतयादों के दो फूल औरमंत्रवत प्रस्तुत संस्कारआओ शब्दों को साधेंसृजन की धूनी रमाएंअपेक्षाओं की पालथी माररचें एक शब्द विधानप्रस्तुत-अप्रस्तुत की जिच छोड़ले लें एक मौन संकल्पकर्तव्यों का होम होता रहे अनवरतसमिधा की
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
0
नापसंद करें

यात्रा मन की

एक बया सा मनचाहता हे सृष्टि रच देनासूरज को दिखाकर दीयासितारों तक डग भर लेनालम्हे गुजरती देखतीं मेरी आंखेंकरना चाहती हैं वक्त का हिसाबऔर फिर समय के डार्क रूम मेंएक्सपोज कर देना सबकुछपुरवाई की ओट में पीठ डालपछुआ को मात देनाऔर तान देना बरगद परसंभावनाओं का
 
घन्नू झारखंडी
Jun 11 2010 11:39 AM
पसंद करें
2
नापसंद करें

आवारगी की कविताएं

आवारगी सिर्फ मुफलिसी की नहीं होती, विचारों की भी होती है, उतनी ही बेसाख्ता, जितना हर पल किसी झरने से गिरता रहता है पानी। कभी किसी कोने में गांठ बांध बैठा नश्तर चुभने लगता है, तो शब्द बाहर आने की जिद करते हैं और आवारगी मिल जाती है उसी सोते में, जिसका
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
0
नापसंद करें

उत्साह मार दिया बरसात ने

झारखंड में झूम कर बरसात हो रही है। चक्रवात के डीप डिप्रेशन के कारण गली-कूचों में समंदर सा सैलाब उमड़ रहा है। मुख्य सड़क की कई दुकानें बंद हैं। दुकानदार यह सोचकर नहीं आए कि क्या फायदा। जब ग्राहक ही नहीं होंगे, तो तरद्दुद किस बात की। इस बरसात से सबको च
 
घन्नू झारखंडी
Dec 29 2009 11:41 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सन्नाटा तोड़ने की जिद

देखिए ना, यों ही छह महीने बीत गए। करीब डेढ़ साल पहले ब्लागिंग की दुनिया ऐसे खींच ले गई थी कि रात-दिन ब्लाग के बारे में ही ख्यालात आते थे। कितना मजा आता था। ले आउट बनाने से लेकर डैशबोर्ड पर नई डिजाइन बनाना कितना रोमांचित करता था। इस बीच छह महीने में ज
 
घन्नू झारखंडी
Dec 29 2009 11:41 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पूतना और जल्लाद ही क्या तय करेंगे देश का भविष्य

चुनावी जोर आजमाईश में नेताओं की प्रखर बौद्धिकता की एक से एक बानगी देखने को मिल रही है। बात वरुण से शुरू हुई थी। उनके भाषण में पहली बार आया-हिन्दुओं की तरफ जो हाथ उठेगा, काट दिया जायेगा। भाषण में इसी तरह मार-काट के शब्द भरे पड़े थे। बात काफी आगे बढ़ी,
 
घन्नू झारखंडी
Dec 29 2009 11:41 AM
पसंद करें
3
नापसंद करें

वाह जनता जनार्दन

झारखंड चुनाव की तसवीर साफ हो चुकी है। जनता ने किसी के पक्ष में जनादेश नहीं दिया है। नौ सालों तक नियति की मार झेल रहे झारखंड में किसी के भी पक्ष में जनादेश नहीं आना स्पष्ट कर रहा है कि जनता राजनीतिक रूप से अभी परिपक्व नहीं हुई है। जिन घोटालों और भाई-भ
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
4
नापसंद करें

माफ करना भागीरथी

सगर के साठ हजार पुत्रों को सद्गगति देने जमीन पर उतरीं गंगा का कलियुग में लगातार लहरविहीन होते जाना बहुत पीड़ा देता है। बनारस के घाटों पर गंगा की महाआरती देखते हुए पिछली बार कभी आरती की प्रज्ज्वलित लौ देखता, तो कभी नाव पर निशाकाल में खामोश बहती काली स
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
3
नापसंद करें

सचिन की आवारगी को सलाम

सचिन की नई इबारतें लगातार पढ़ता हूं। सचिन को जानता हूं, उनकी आवारगी बेहद भाती है। एक ऐसा शख्श, जो पैदा ही हुआ, शायद दुनिया की तहजीबों को पलीता लगाने के लिए। उनकी जिस्मानी सीरत चाहे जैसी भी हो, उनके व्यक्तित्व के ढेरों रंग हैं। अमर उजाला में एकबार सचि
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
1
नापसंद करें

छूट रही पढ़ने की आदत

स्वाध्याय स्व उन्नति का आधार है, यह सभी जानते हैं। आत्मदीप प्रज्ज्वलित करने की दिशा में पुस्तकों से अच्छा कोई मित्र शायद ही हो। एक दशक पहले तक अध्ययन के दिनों में पत्र-पत्रिकाएं, जर्नल्स पढ़ने के लिए व्यक्ति समय निकाल ही लेता था। यह आदत में शुमार था।
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
3
नापसंद करें

ये शब्द हैं, इनका असर होता है

तोल-मोल कर बोल। भारतीय मनीषा में कुछ भी बोलने के पहले आत्ममंथन करने की हिदायत दी गयी है। क्या हम ऐसा करते हैं? मालिक नौकर को डांटता है, तो उसका सात जनम तार देता है। कुछ लोग बेवजह दूसरों पर दोषारोपण व छीछालेदर में लिप्त रहते हैं। पीठ पीछे इत्ती भद्दी
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहां गई शहनाज हुसैन?

लगभग तीन-चार साल पहले दुर्गा पूजा के समय पंडाल में घूमते हुए अचानक एक सुरीली आवाज सुनकर कदम ठिठक से गए थे। शेरावाली मां का भजन लाउडस्पीकर से बज रहा था-छुम छुम छननन बाजे, मैया पांव पैंजनिया...। एक हस्की सी वायस थी और यह भजन जहां-जहां गए, सभी पंडालों म
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
4
नापसंद करें

कहां गई शहनाज हुसैन?

लगभग तीन-चार साल पहले दुर्गा पूजा के समय पंडाल में घूमते हुए अचानक एक सुरीली आवाज सुनकर कदम ठिठक से गए थे। शेरावाली मां का भजन लाउडस्पीकर से बज रहा था-छुम छुम छननन बाजे, मैया पांव पैंजनिया...। एक हस्की सी वायस थी और यह भजन जहां-जहां गए, सभी पंडालों म
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
0
नापसंद करें

बदल रहे हैं बच्चे

एक दिन एक परिचित के घर गया था। पांच साल का उनका हाइपर एक्टिव बच्चा एक प्ले स्कूल में पढ़ता है। ये लोग मुजफ्फरपुर के हैं। बच्चा तीन साल मुजफ्फरपुर में रहने के बाद रांची आया था। पूरे तीन घंटे उसे वाच करने पर लगा- वाकई बदल रहे हैं आज के बच्चे। वह शुद्ध
 
घन्नू झारखंडी
Oct 14 2009 07:37 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मान गए राहुल भैया

विरासत की राजनीति से लैस राहुल गांधी ने अपने व्यक्तित्व में काफी कुछ जोड़ लिया है। वह समझ गए हैं कि बूढ़ों की समझौतावादी कवायदों से जनता का दिल नहीं जीता जा सकता है। इस गोरे-चिट्टे, खानदानी और मासूम से दिखनेवाले शख्स के लिए राजनीति अब परफेक्ट करियर बन गई
 
घन्नू झारखंडी
Sep 11 2009 01:24 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

मौसम से बात करते हैं डा झा

मौसम की भविष्यवाणी के लिए राष्ट्रीय राजधानी और राज्यों में बाकायदा अलग विभाग हैं। आमलोग बहुत हद तक इनकी भविष्यवाणियों पर निर्भर करते हैं। किसानों को रोपनी, बुवाई, कटाई के लिए हिदायत, मार्गदर्शन चाहिए, तो आमलोग अपने सफर के लिहाज से, दैनंदिन कामकाज के
 
घन्नू झारखंडी
Sep 10 2009 04:05 PM
पसंद करें
5
नापसंद करें

वरुण बहक गये, वर्ना हीरो तो हैं ही

भाजपा के पीलीभीत से उम्मीदवार, इमरजेंसी में चर्चित संजय गांधी और प्रख्यात पर्यावरणविद मेनका गांधी के बेटे और देश की लौह महिला पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पोते वरुण गांधी अपने कथित जहरीले भाषण के लिए पूरे देश में आलोचना का पात्र बने हुए हैं। पर
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
1
नापसंद करें

इस लोकतंत्र का क्या मतलब है

देश के अलग-अलग हिस्सों में पहले चरण के चुनाव में व्यापक हिंसा से स्वाभाविक रूप से चिंता उभरती है। झारखंड में तो चुनाव के एक दिन पहले से हमले शुरू हो गये थे। यहां कुल मिलाकर दो दिनों में १५ लोग नक्सली हिंसा में मारे जा चुके हैं। चुनाव के एक दिन पहले म
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

बेटा कसाब और ममता की मारी मां

कसाब आतंकवादी है। पर वह किसी का बेटा है। ममता ने जोर मारा तो उसकी मां पाकिस्तान से भारत आ रही है। सबकुछ ठीक रहा और भारतीय कानून आड़े नहीं आया, तो एक मां का अपने बेटे से पांच महीने बाद मिलन होगा। यह भारत जैसे देश में ही संभव है, जहां की सनातनी संस्कृत
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

राखी का बाजार फंडा

राखी सावंत सुर्खियों में है। एक साधारण नाक-नक्श वाली इस लड़की को अपनी ब्रांड वैल्यू मेनटेन करना आता है। एक बेहद साधारण परिवार से आयी राखी की इमेज मीका के चुंबन प्रकरण के बाद ऐसी बढ़ी कि वह हाट पीस बन गयी। एक चैनल पर प्रसारित होनेवाले रियलिटी शो स्वयं
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
5
नापसंद करें

नुसरत की रेंज को सलाम

सुबह रोज मार्निंक वाक पर जाता हूं। मेरे कानों में आइपाड से लगे इयरफोन होते हैं। उसमें मेरे पसंदीदा संकलन के कुल डेढ़ सौ गाने हैं। मन में इच्छा होती थी कि नुसरत फतेह अली खान का एक अलबम मिले। एक मित्र ने एक सीडी कल थमायी, जिसमें नुसरत के फोक, रीमिक्स औ
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
5
नापसंद करें

मीरा ने सोच-समझकर फैसला लिया होगा

एबीएन एमरो की भारत प्रमुख मीरा सान्याल ने दक्षिण मुंबई सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए पर्चा दाखिल किया है। शुक्रवार को सभी अखबार और गुरुवार को टीवी चैनलों में उनकी खूबसूरत तसवीर चल रही थी। खूबसूरत औरतें कई हैं, पर आज की गलीज राजनीति में इतनी हाइ
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

झारखंड में पहला ब्लागर्स मीट

ब्लागर साथियोरांची में २२ फरवरी, दिन रविवार को झारखंड का पहला ब्लागर्स मीट कश्यप मेमोरियल आइ हास्पीटल व झारखंडीघनश्याम.ब्लागस्पाट. काम के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हो रहा है। दरअसल झारखंड में ब्लागिंग अभी शैशवावस्था में है और बाहर के ब्लागरों को आ
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
3
नापसंद करें

मुखर हुआ फिजा में पलाश का गीत

झारखंड के पहाड़ों पर पलाश का खास मौसम होता है। लाल, सुर्ख फूलों के साथ बदलती फिजां की आगवानी होती है। मन मयूर नाच उठता है, झारखंडियों का। सुरमई शाम के साथ ही किसी गांव से आने लगती है नगाड़े की थाप और भावभीने गीत अरमानों को छूते से ऐसे निकलते हैं मानो
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

रूथ जैसे लोग कम होते हैं

दशकों पहले की बात है। तम हम कालेज में पढ़ते थे। रांची का बहु बाजार इलाका मुसलिम और काथलिक लोगों की रिहाईश के लिए जाना जाता है। वहीं है डा दयाल हाउस। यहां काथलिक गतिविधियां होती रहती हैं। एक मित्र के साथ अक्सर वहां जाया करता था, क्योंकि वहां बहुत अ च्
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
1
नापसंद करें

इस बार तरस गये पछुआ हवा को

जाड़ा बीत गया, देखते-देखते। इस बार पहाड़ों की ओर देखा, तो कहीं से हाड़ कंपाने को दौड़ती सनसनाती हवा नहीं आ रही थी। सर्दियां बीत गयीं, दिन की गर्माहट ने जा़ड़े का सारा सार तत्व जाने कब लील लिया, पता ही नहीं चला। आजकल जिस तरह बच्चे एकबारगी जवान से हो ज
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
0
नापसंद करें

जंग लगी जवानी

सोमवार को राष्ट्रीय युवा दिवस है। भारतीय मनीषा के उस तेजोपुरुष स्वामी विवेकानंद की जयंती, जिन्होंने पिछली सदी के अंतिम दशक में पूरी दुनिया को यह बताया कि भारत की ताकत क्या है। स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में हर साल इसलिए मनाय
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

रिजर्व होने की मुश्किलें

मैं शुरू से जरा रिजर्व सा हूं। पढ़ाई के दौरान मेरा रिजर्व होना मेरे माहौल के साथ चल रहे लोगों को अच्छा लगता था। सब कहते थे, लड़का रिजर्व रहता है। किसी से कोई लट-पट नहीं रखता। ये टिप्पणियां मुझे उत्साह से भर देती थीं। मैं अंतरमुखी होता चला गया। यह अलग
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
2
नापसंद करें

जीना सिखाती है यात्रा

घूमना मेरा शगल है। १९८९ तक देश के १६ राज्यों की यात्रा कर चुका था। घूमता हूं, तो अपनी आंखों से देश की माटी के हर रंग निहारता हूं। कहीं की आबोहवा भाती है, कहीं का आतिथ्य। कई बार कोफ्त होती है कि जिन राज्यों ने अतिथि सत्कार से राजस्व अर्जन में महारत हा
 
घन्नू झारखंडी
पसंद करें
6
नापसंद करें

खूब गुल खिला रहा आजमगढ़

मेरे एक करीबी मित्र हैं, आजमगढ़ के। वाम विचारधारा के हैं। जब नोएडा में था, तो हममें खूब बहस होती थी। धर्मनिरपेक्षता, संप्रदायवाद और अन्य विषयों पर। एकबार उन्हें आजमगढ़ वाले अबू सलेम की याद दिलायी, तो उन्होंने झट से लिखा- आजमगढ़ सिर्फ अबू सलेम का नहीं
 
घन्नू झारखंडी