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12 Mar 2010
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अनाजों की किटी पार्टी से सीधा प्रसारण ( अहा जिंदगी के मार्च अंक में प्रकाशित व्यंग्य )

इस बार की किटी पार्टी मूंग की दाल के घर थी । सुबह से ही वो तैयारियों में लगी हुयी थी । तरह-तरह के पकवान बन रहे थे । मूंग की दाल की पकौड़ी, मूंग की दाल का हलवा ,मूंग की बर्फी आदि । मूंग का मानना था कि ऐसा करके वो अन्य सहेलियों की छाती पर मूंग दल पाएगी ।
 
Atul CHATURVEDI
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चंदाई के चंद नुस्खे ( नई दुनिया सण्डे के होली विशेषांक में प्रकाशित व्यंग्य)

चंदा मांगना हमारी गौरवशाली परंपरा है । कई महापुरुषों ने बहुजन हिताय चंदा मांगा है। ब्राह्मणों का तो इस पर एकाधिकार रहा है । सौभाग्य से मैं भी ब्राह्मण हूं सो अपनी पुष्ट कुल पंरपरा को कैसे त्यागता ? चंदे पर मेरा ऐसे ही विश्वास है जैसे अमेरिका का पाक पर ।
 
Atul CHATURVEDI
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चिट्ठाजगत : धड़ाधड़ छप रहे चिट्ठों में खोजें Hindi Blogs Aggregator and Search Engine

चिट्ठाजगत : धड़ाधड़ छप रहे चिट्ठों में खोजें Hindi Blogs Aggregator and Search Engine
 
Atul CHATURVEDI
Mar 03 2010 04:56 PM
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ग्याहरवां व्यंग्यश्री सम्मान सूर्यकुमार पांडेय को

कोटा ग्याहरवां व्यंग्यश्री मधुबन सम्मान इस वर्ष प्रसिद्ध व्यंग्य कवि तथा स्तंभकार सूर्यकुमार पांडेय को स्थानीय अंबेडकर भवन में संस्था काव्य मधुबन द्वारा प्रदान किया गया । ज्ञातव्य है कि ये सम्मान प्रतिवर्ष व्यंग्य के क्षेत्र में काम करने वाले किसी एक
 
Atul CHATURVEDI
Mar 03 2010 04:52 PM
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घोषणाओं का वसन्त का लोकार्पण संपन्न

साहित्यिक संस्था काव्य-मधुबन के द्वारा अतुल चतुर्वेदी के दूसरे व्यंग्य संग्रह घोषणाओं के वसन्त का लोकार्पण समारोह प्रेस क्लब में संपन्न हुआ । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. नरेन्द्रनाथ चतुर्वेदी ने कहा कि व्यंग्यकार को आत्मश्लाघा से बचना चाहिए । व्यंग्य
 
Atul CHATURVEDI
Feb 13 2010 11:29 PM
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तलाश नए चेहरों की

पुराने चेहरों पर झुर्रियां पड़ चुकी थीं । तरह-तरह की झुर्रियां असफलता की ,बदनामी की,कुंठा की झुर्रियां । कब तक काम चलाएं पुराने चेहरों से भला । जनता भी ऊब चुकी थी उनसे । वही खीसें निपोरने का पुराना ढंग , वही घिसे-पिटे डॉयलाग,वही हाथ जोड़ने की मध्ययुगीन
 
Atul CHATURVEDI
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नए साल में सब कुछ नवा -नवा (व्यंग्य )

आ रहा है नया साल । काहे को हो रहे हैं आप बेहाल ? मत बदलिए अपनी चाल । चलिए वैसे ही बेढंगे ,आड़े-तिरछे ,दूसरों को रौंदते हुए किसी राजकुमार विजित की तरह । भाषावाद को , प्रान्तीयतावाद को लगाइए एक और चिंगारी ताकि जले इसमें अक्खा भारत का नर -नारी । नए साल क
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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व्यंग्य लेखन एक सार्थक विधा

व्यंग्य विधा को लेकर कोटा की साहित्यिक संस्था "काव्य -मधुबन " ने एक गोष्ठी का आयोजन किया । इस व्यंग्य गोष्ठी में डॉ.ओंकारनाथ चतुर्वेदी के दसवें व्यंग्य संग्रह "आभार सहित " का लोकार्पण डॉ उषा झा ने किया । उन्होंने कहा की व्यंग्य की विधा अपनाने वाले ले
 
Atul CHATURVEDI
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अम्बानियों संवदेनशील बनो !

कौन कहता है कि बादशाह शाहजांह चले गए ? जिन्दा हैं वो अभी भी नए -नए रूपों में । ११ वर्षों की मेहनत और करोड़ों रुपए से बढकर खर्च करने वाले अपने अम्बानी बन्धु आज मौजूद हैं । एक ने अपनी पत्नी को गत वर्ष २५० करोड़ का प्लेन गिफ्ट में सालगिरह पर दिया तो दूसर
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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अंतुले पर देश द्रोह का मुकदमा चले

अंतुले का बयान चर्चा में है । अंतुले राजनीति के अनुभवी खिलाडी हैं । कोई नौसिखिया नही । उन्हें अन- तुले नही बहु -तुले कहें । उनका बयान भारतीय राजनीती के तुष्टीकरण का हिस्सा है । अपनी टिप्पणी पर उनका विक्ट्री का निशान दिखाना किस मनोवृति का परिचायक है ?
 
Atul CHATURVEDI
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हूक दा मामला है ! (व्यंग्य )

हूक का मामला बड़ा विचित्र है । जब उठती है तो ससुरी काबू में नही रहती है । बूढे भी ८२ साल की उमरिया में सत्ता की चाशनी में अपनी कामरिया गीली करने को तत्पर हो जातें हैं । शीशराम ओला को देख कर तो ऐसा ही लगा । उधर बिगडे नवाब सी पी जोशी साहेब भी कुर्सी की
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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कुछ लघु पत्रिकाओं के विषय में - दो

पाखी से ही अपनी बात शुरू करूंगा । विश्वनाथ त्रिपाठी जी की आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जीवनी का अंश प्रभावी है । एक लेखक के संघर्ष का ईमानदार चित्रण किया गया है । आचार्य द्विवेदी जी की वक्तृता का उल्लेख ,उनकी कार्य के प्रति लगन अनुकर्णीय है । अशोक
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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कुछ लघु पत्रिकाओं के विषय में (एक )

आजकल में कुछ नयी लघु पत्रिकाओं को पढ़ रहा हूँ । इसमे सबसे पहले "पाखी " का उल्लेख करना चाहूँगा । अपूर्व जी का प्रयास अच्छा है । लेकिन अभी प्रशंसा से बचने की जरूरत है । एक नयी पत्रिका की ध्वनी ऐसी जानी चाहिए कि उस पर किसी वाद का लेबल न लगे । कविताएँ यश
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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कंगारू बददिमाग हैं

ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी मैथ्यू हेडेन की टिप्पणी कि -'भारत तीसरी दुनिया का देश है '। अत्यन्त निंदा जनक है । ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ियों के नस्लवादी सोच का परिचायक है । गिलक्रिस्ट के बाद हेडेन का बयान उनकी खिसियाहट का प्रतीक है । हार को पचाना भी कंगारुओं को सीखन
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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चाँद ,कवि और अभियान (व्यंग्य )

चाँद पर पहुंचना इन्सान की पुरानी ख्वाहिश रही है । चाँद को लेकर कवि गण न जाने क्या -क्या लिखते रहे । किसी ने "चन्द बदन मृग लोचनी बाबा कही कही जाए " लिखा तो किसी ने "चौहदवीं का चाँद हो या आफ़ताब हो "लिख डाला । कोई महानुभाव "चाँद जैसे मुखड़े पर बिंदिया स
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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राज ठाकरे के नाम एक खुला ख़त (कविता)

अबे ओ राज ! मत फैला कोढ़ में खाज क्षेत्रीयतावाद के चूल्हे पे वोटों की रोटियाँ पका रहा है नफरत के जंगल में एक और विषबेल उगा रहा है माना कि व्यवस्था गुंडों की रखैल है शरीफ आदमी के जीवन में विवशताओं की नकेल है किससे भिड़े ,किसको दिखाए हर हथेली में ज़ख्म ह
 
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विशम्भर नाथ की स्मृति में

पिछले दिनों प्रसिद्ध आलोचक एवं उपन्यासकार डॉ.विशम्भरनाथ उपाध्याय का जयपुर में निधन हो गया । आज से लगभग १२-१५ वर्ष पूर्व वे मेरे मित्र विजय जोशी के प्रथम कहानी संग्रह खामोश गलियारे के विमोचन समारोह में कोटा आए थे । कार्यक्रम समाप्ति के उपरांत जब हम लो
 
Atul CHATURVEDI
Dec 29 2009 11:48 AM
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ऐतिहासिक है कोटा का दशहरा मेला (१०० वर्षों से भी पुराना )

कोटा के दशहरे मेले की गिनती राष्ट्रीय मेले के रूप में की जाती है । इस दशहरे मेले को आकर्षक बनानेका क्रम सन १८९२ से शुरू हुआ । महाराव उम्मेदसिंह द्वितीय के शासन कल में यह मेला अपने पूर्ण यौवन पर आया । तीन दिन चलने वाला मेला एक सप्ताह का हो गया । बाहर
 
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बिग बॉस की फूहड़ता पर रोक लगे !

बिग बॉस नामक अश्लील सीरियल का प्रसारण दिखा कर हम क्या संदेश देना चाहते हैं ?क्या मुनाफे के लिए हमारे चैनल कुछ भी परोसेंगे ?हमारी शिष्टसोच ,संस्कार आदि को क्या लकवा मार गया है ?भारत अमरीका नही है । हमे बक्शें ,हमें उन अंधेरे कुओं में मत धकेलें जिन का
 
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आज हिन्दी दिवस पर कुछ खास !

हिन्दी आज करोड़ों लोगों की भाषा है । लेकिन हिन्दी की दुर्दशा को लेकर वर्ष में एक बार हमारा भाषा प्रेम जागता है । हिन्दी दिवस ,हिन्दी सप्ताहों का सिलसिला शुरू हो जाता है । सही अर्थों में हिन्दी का यह दौर संक्रमण का दौर है । एक तरफ़ बाजारवाद की चुनौंति
 
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क्या कभी कोई ऐसी भाषा

उदयप्रकाश ने लिखा एक भाषा हुआ करती है भारतेंदु ने भाषा को उन्नति का मूल कहा राज ठाकरे नहीं मानता कोई भाषा या वो नही समझता कोई भाषा सभ्य भी हो सकती है भाषा को ले कर कितना सजग है वो जैसे इससे ही बचेगा मराठी मानुस इससे ही रोजगार ,रोटी बचेगी गन्ना ,कपास
 
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प्रभाष जी के बिना हिन्दी पत्रक्रारिता अनाथ हो गयी है

प्रभाष जोशी का निधन हिन्दी पत्रकारिता जगत के लिये एक अपूरणीय क्षति है । वे न केवल एक महान पत्रकार थे बल्कि एक महान विचारक भी थे । हिन्दी पत्रकारिता को उन्होने उच्च मूल्य प्रदान किए तथा पत्रकारिता को एक नया मुहावरा भी दिया । नयी भाषा , नए तेवर लेकर जन
 
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पॉवर युग में आराधन (दैनिक भास्कर में २४ सितम्बर,०९ को प्रकाशित व्यंग्य)

नवरात्र चल रहे हैं । हर कोई शक्ति की आराधना में लगा हुआ है । बस शक्ति प्राप्त करने के सबके तरीके अलग-अलग हैं । कोई बाहुबल में विश्वास रखता है तो कोई पगचंपी में । कोई धरने-प्रदर्शन का रास्ता अपनाता है तो कोई षडयंत्रो की सुरंगों को तय करता है । बस किसी तरह
 
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हम भी हैं विकास की राह में ( नयी दुनिया सण्डे में १३सित०९ को प्रकाशित व्यंग्य)

अभी कल ही अखबार में खबर पढ़ी कि स्वाइन फ्लू का पहला रोगी आखिर हमारे शहर में भी मिल गया । सच मानिए कि दिल को इतनी तसल्ली मिली कि शब्दों में बयान करना संभव नहीं है । चलो , दुनिया को मुँह दिखाने के काबिल तो बचे हम वरना हीनता बोध से मरे जा रहे थे । रोज
 
Atul CHATURVEDI
Sep 19 2009 04:34 PM
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सच का फैसला झूठे लोग न करें

भारतीय समाज एक मर्यादाशील समाज है । विदेशों की नकल पर और बहुराष्ट्रीय कंपनियों के इशारे पर परोसे जाने वाली झूठन को जितनी जल्दी समेट लिया जाए उतना अच्छा है । सच का सामना कार्यक्रम विकृत मानसिकता का परिचायक है । एंकर का बयान खुद बताता है कि उसे सिर्फ
 
Atul CHATURVEDI
Jul 26 2009 12:58 PM
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मायावती का मूर्ती प्रेम बहुजन समाज का मखौल है

मायावती का मूर्ती प्रेम उनके सामंतवादी सोच का परिचायक है । कांशीराम जिंदगीभर जिन मूल्यों का विरोध करते रहे मायावती ने उनको ही प्रश्रय दिया है । यही कारण है की उत्तर पदेश में उनका ग्राफ ते़जी से नीचे जा रहा है । पूरे प्रदेश की जनता जहाँ बिजली की कमी स
 
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माँ के नाम ( मदर्स डे पर )

माफ करे सौ गलतियां ,नखरे सहे हजार । बदले में मांगे नहीं , ऐसा मां का प्यार ।। मां के चरणों में बसे, जग के चारों धाम । ममता की छाया तले, क्या वर्षा ,क्या घाम ।। जब- जब हमने दिया उसे, अपने सुख का भाग । तब-तब मानों जाग उठे, अपने रूठे भाग ।। अपलक पहरों ज
 
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मँहगे चुनाव , सस्ती बयानबाजी

कौन कहता है कि यह आम चुनाव है ? यह चुनाव धन कुबेरों का चुनाव है , बाहुबलियों का चुनाव है और सेलिब्रेटीज का चुनाव है । आम जनता तो मात्र दर्शक है । मुझे इस अवसर पर रघुवीर सहाय की कविता की कुछ पक्तियां याद आ रही हैं , आप भी आनंद उठाएं - निर्धन जनता का श
 
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व्यंग्यकार को संवेदनशील होना होगा -विष्णु नागर(व्यंग्य शिविर का पहला दिन )

व्यंग्य शिविर के पहले दिन प्रख्यात कवि और व्यंग्यकार विष्णु नागर ने कहा कि जिस लेखक में व्यंग्य का पुट नही है वो लेखक ही नही कहा जा सकता है । सफल लेखक वह है जो सर्वाधिक पाठकों तक पहुँचता है । यदि छोटों के प्रति सहानभूति नही है ,दृष्टि व्यापक नही है त
 
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ज्ञान चतुर्वेदी को मधुबन व्यंग्य श्री सम्मान -(अखिल भारतीय व्यंग्य शिविर सम्पन्न )

पिछले दिनों लंबा अन्तराल रहा । आप लोगों से मुखातिब न हो सका ,इसका बड़ा कारण था लगातार तीन महीनों से व्यस्त रहना । यह व्यस्ततता थी एक विशाल आयोज़न की । हमारी संस्था 'काव्य -मधुबन ' प्रति वर्ष एक राष्ट्रीय व्यंग्यकार को सम्मानित करती है । इस कार्यक्रम
 
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ऐसे लिक्खाडों से बचाओ !

क्या साहित्यकारों को एक तराजू में तोला जा सकता है ? क्या वे कभी एक मत हो सकते हैं ? आप कहेंगे कि चेतनाशील और बौद्धिक लोग हैं इसलिए एक राय हो नही सकते हैं । साहित्यकारों का संकट यह कि यदि पत्रिकाएँ पचास हैं तो लेखक भी हज़ार । कभी -न-कभी छपने का अवसर म
 
Atul CHATURVEDI