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आज़ाद लब

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21 Jan 2010
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साल २०१०: भविष्य को लेकर साहित्यकारों की राय

साल २०१० और आने वाले समय की पड़ताल को लेकर साहित्यकारों से हुई बातचीत की लम्बी श्रृंखला ब्लॉग 'कबाड़खाना' में चलाई गयी. अब वह पूरी बातचीत पाठक एक ही जगह इस लिंक पर देख सकते हैं. साहित्यकारों का क्रम पहले हुई बातचीत के आधार पर बनता चला गया. हम कई और
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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रोशन-ख़याली की मिसाल थे बहादुरशाह ज़फ़र

१८५७ के प्रथम स्वतंत्रता सेनानी और बहादुरशाह ज़फ़र' पुस्तक का जिक्र मैंने इसी ब्लॉग में पिछले दिनों किया था, उसकी भूमिका है यह. पुस्तक के संकलनकर्ता-संयोजक और लेखक डॉक्टर विद्यासागर आनंद ने इसे लिखा है. इस भूमिका की यह आख़िरी कड़ी है- विजयशंकर चतुर्वेद
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
Dec 29 2009 11:41 AM
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दुनिया-ए-फ़ानी से बेलौस गुज़र गए नीरज कुमार

मैं सैनिकों के रानीखेत क्लब में पर्वतराज हिमालय की ओर मुंह किये नंदा देवी की मनोरम चोटी को अपलक निहार रहा था, जो मुझे मिस्र के किसी बच्चा पिरामिड की तरह लग रही थी. वह इतवार की फुरसतिया सुबह थी. 'कबाड़खाना' वाले अशोक भाई खुद को फुर्ती से भरकर मित्रों
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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एक नदी जो बना दी गयी अछूत

पिछले दिनों मैं हिन्दी समाचार एजेंसियों की एक रपट पढ़ रहा था. उसे पढ़कर झटका लगा. मनुष्यों का मनुष्यों को ही अछूत बना देना तो हम देखते-सुनते-पढ़ते आ रहे हैं लेकिन नदियों को अछूत बना देना! वह भी भारत जैसे देश में जहां पेड़-पौधों, नदी-पहाड़ों यहाँ तक कि
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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रमन सिंह के साथ चित्र ही दिखा दें- कमला प्रसाद

हिन्दी आलोचना के क्षेत्र में प्रोफेसर कमला प्रसाद ने महत्वपूर्ण कार्य किया है. पिछले कई वर्षों से वह प्रगतिशील 'वसुधा' का सम्पादन कर रहे हैं और वर्त्तमान में प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव हैं. उन्होंने जाने कितने ही कवियों-लेखकों को पुष्पित
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
टैग: विवाद
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मैंने म.प्र. प्रलेस इसलिए छोड़ा- ज्ञानरंजन

ज्ञानरंजन का नाम साहित्य जगत में बड़े आदर के साथ लिया जाता है. उनके सम्पादन में हाल-फिलहाल तक निकलनेवाली प्रतिष्ठित लघु-पत्रिका 'पहल' का महत्त्व किसी से छिपा नहीं है. एक कथाकार के रूप में ज्ञान जी ने हिन्दी साहित्य को कई अनमोल कहानियां दी हैं. वह मध्
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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कब समाप्त होगा शोक का यह हिमयुग!

शोक मन का दीमक है. तन को तो यह घुन की तरह खाता रहता है. तिस पर मृत्यु का शोक घातक है. शोकग्रस्त माँ कहीं की नहीं रह जाती. जिसका २० साल का बेटा घर लौटते समय एक दुर्दांत डम्पर की चपेट में कुचलकर पल भर में मारा जाए उस माँ की अवस्था का वर्णन करने के लिए
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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हिन्दुस्तानी कुर'आन शरीफ़ लिखना होगी!

ये जो हमारा प्यारा भारतवर्ष है; ख़ास तौर पर उसके बासिन्दे हिन्दू और मुसलमानों के लिए- मुसलमानों को बार-बार देशभक्ति साबित करने के लिए कहा जाता है. जाहिर है ऐसी मांग करने वाले देशद्रोही हैं. इन चंद वहशी हिन्दुओं से अगर एक मुसलमान इसी तरह का कोई सवाल क
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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बाबा की यह कविता आज होने वाले फैसले की जान है

सच कहूं तो मैं इन लोगों के प्रति इतनी बे-नाकामी से घिरा था कि यह अद्भुत कविता याद ही नहीं आयी. कल एक चैनल तो सीधे हमारी ब्लॉग कम्युनिटी से बाबा की कविता के कुछ अच्छे लोगों द्वारा (मैं इरफ़ान के ब्लॉग से वहां गया था) गाए गए अंश सुना रहा था और बेशर्मी स
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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राहुल बाबा की कांफ्रेंस के बाद हंगामा क्यों बरपा है?

कल मैंने जो लिखा था उस पर ड्रामा और हंगामा आज (06/05/2009) देखा? एमजे अकबर जैसा सीनियर जर्नलिस्ट मेरी बात का हेडलाइंस टुडे में समर्थन कर रहा है. सीएनएनआईबीएन में राजदीप सरदेसाई ने यही कहा. प्रभु चावला जी ने यही कहा. सुधीन्द्र कुलकर्णी को तो आलोचना कर
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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राहुल गांधी के साथी लगभग मूर्ख हैं!

राहुल गांधी की इस समय प्रेसकांफ्रेंस सीरीज दरअसल कांग्रेस के चंद मूर्ख नेताओं की सबसे गहरी वेवकूफी है. सरकार के पांच सालों के बीच इस तरह की कान्फ्रेंसें चला करती हैं. यह आगे हो सकती थी. इससे साबित होता है कि अभी का कांग्रेस नेतृत्व समझदार नहीं है. अब
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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अर्थशास्त्री भीमराव अम्बेडकर ने कहा था...

दलितों की अवस्था को सुधारने के लिए प्रयास तो गौतम बुद्ध के समय से ही शुरू हो गए थे. बुद्ध के बाद भारतीय समाज में कई संत और समाज सुधारक हुए हैं जिन्होंने दलितों की दीनदशा के लिए आंसू बहाए हैं लेकिन ज़मीनी कार्य पहली बार बाबासाहेब अम्बेडकर ने ही किया.
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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काला धन कैसे वापस लायेंगे आडवाणी जी?

काला धन छिपाने के धरती पर जो अन्य स्वर्ग हैं- जैसे मलयेशिया, फिलीपीन्स, उरुग्वे, कोस्टारिका, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, बहामा, बरमुडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और केमैन आइलैंड आदि- इनके नाम तो सब बता देंगे, लेकिन यहाँ कितने भारतीयों का कितना काला धन छिपा ह
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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क्यों है ग़ालिब का अंदाज़-ए-बयां और?

किसी ने आपसे ये कहा है क्या कि रोग़न किया कीजिये? ये तो शौक की बात है कि आप रोग़न करेंगे या सिर्फ रंग भरके रह जायेंगे... या रंग-रोग़न कोई रोग है? लोग कहते आये हैं कि ग़ालिब का है अंदाज़-ए-बयाँ और. ये तस्लीम भी किया गया है. आप फ़ाइलून और मफ़ाइलून के चक्कर
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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चुनाव प्रचार में साहित्य की रेड़ लगाई!

संसद में शेर-ओ-शायरी जगह पाती थी तो अख़बार वाले (अब टीवी चैनल वाले भी) उसका बड़ा शोर करते थे कि फलां मंत्री ने अपने भाषण के दौरान यह शेर पढ़ा, ढिकां कविता की लाइनें पढ़ीं वगैरह-वगैरह. लेकिन अब साहित्य चुनाव प्रचार में भी जगह पा रहा है. यह हम जैसे पढ़ने-
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठेंगे दीवाने दो

हाँ, तो पिछली पोस्ट में जो शेर मैंने आपको पढ़वाया था वह शेर कहा था जगतमोहन लाल रवां साहब ने. मैं कह रहा था कि यह शेर दो दिन पहले सैयद रियाज़ रहीम साहब के साथ बातचीत के दौरान मेरे सामने आया. मैंने यह मिसरा तो बहुत सुन रखा है- 'ख़ूब गुज़रेगी जो मिल बैठे
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो

आपको आज एक शेर सुनाता हूँ जिसके बारे में मैं चाहूंगा कि आप लोग कुछ समझें . बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने आपसे बड़े ज्ञानी(?) तनख्वाह पर रख लिए थे. लेकिन ये शेर अब भी पढ़ने-लिखने वालों के बीच (टुच्चे मूर्खों (चंद वर्षों पहले मूर्खता भी एक वैल्यू हुआ करती थ
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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आज़ाद लब

एटीएम ने अप्रैल फूल बना दिया! बड़ा शोर था कि एक अप्रैल २००९ से नकद राशि निकालने के लिए किसी भी बैंक का एटीएम अपना हो जाएगा. कहीं-कहीं शायद हो भी गया हो लेकिन मुझे तो मेरे पड़ोसी एटीएम ने ही अप्रैल फूल बना दिया. दरअसल मेरा बचत खाता एचडीएफसी बैंक में है.
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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माँ के बारे में

बहुत बुरे हैं वे जिन्हें माँ के बारे में सब कुछ पता है अच्छे लगते हैं वे जो माँ के बारे में ज्यादा नहीं जानते बुरों से थोड़ा अच्छे हैं वे जो माँ के बारे में जानना चाहते हैं. उनसे माँ के बारे में कोई बात तो की जा सकती है. -विजयशंकर चतुर्वेदी
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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अबकी होली और समीर लाल की संगत

इस बार जबलपुर जाने का ख़ुमार अलग रहा. अबकी होली के रंगों में कुछ वायवीय, कुछ शरीरी और कुछ अलौकिक अनुभूतियाँ घुली हुई थीं. संकोच के साथ सूचना दिए देता हूँ कि मेरी पत्नी को और मुझे पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई है, वह भी जबलपुर में. संस्कारधानी के मार्बल सि
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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अश्वेत शरीर में श्वेतात्मा है ओबामा!

समारोह के पहले जिस तरह वहाँ के ताकतवर लोगों को प्रस्तुत किया गया वह पूरी दुनिया को धमकाने की अमेरिकी अदा है. जान लेना होगा कि ओबामा के आ जाने से पूंजीवाद और पश्चिमी तथा अमेरिकी साम्राज्यवाद का आधुनिक मुखौटा 'बाज़ारवाद' का चेहरा नहीं बदल जाएगा. ओबामा अ
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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देख तो दिल के जाँ से उठता है- मीर

कई बातें कह दूँगा! अव्वल तो शिरीष जी की अगली-पिछली पोस्ट का ये शेर- कहते हो न देंगे हम दिल अगर पड़ा पाया दिल कहां कि गुम कीजे, हमने मुद्दआ पाया खालिस रोमांटिक शेर है. लेकिन दिक्कत यह है कि गालिब इतना चतुर था कि एक तीर से हज़ार शिकार किया करता था. उसका
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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महिलाओं की सच्ची की जय हो!

यह न समझिए कि महिलाओं की कोई जय-पराजय झूठ-मूठ हो सकती है. इससे ज्यादा अहंवादी पुरुषों के परनाले आज भी खुले हुए हैं. अनेक उदाहरण दिए जा सकते हैं. तथाकथित 'नारी आन्दोलन' एक अलग तरह की व्यवस्था है. लोग इसे माने या न माने लेकिन एक अद्भुत प्यार मोहल्‍ला म
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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हम ने यह माना, कि दिल्ली में रहें खाएंगे क्या

उर्दू में व्यंग्य का उद्गम तलाशने की सलाहियत मुझमें नहीं है. लेकिन शायरी में व्यंग्य की छटा मीर, ज़ौक, ग़ालिब, सौदा, मोमिन जैसे पुरानी पीढ़ी के शायरों ने जगह-जगह बिखेरी है. मुझे ग़ालिब की एक पूरी की पूरी ग़ज़ल ध्यान में आती है जिसका हर शेर करुणा, आत्मदया
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
Jan 09 2009 08:25 PM
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सुनो...सुनो...सुनो... इरफ़ान भाई के चंद गंदे गाने!

हालांकि इसकी कोई जरूरत नहीं है लेकिन एक गुजारिश करता हूँ. इन दिनों इरफ़ान भाई तथाकथित गंदे गानों की जो श्रृंखला चला रहे हैं, उसे एक बार अपना समय बरबाद (?) कर अवश्य सुनें! जिन लोगों ने नफ़रत फैलाने के नाम पर भारत में पे-रोल के जरिए देश-दुनिया में गोलबंद
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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CYA मतलब 'कवर योर ऐस', RAB का मतलब क्या?

सुभाष घई की फ़िल्म 'सौदागर' का वह गाना तो आपको याद होगा- 'इलू का मतलब आई लव यू." आप सोच रहे होंगे कि यह मैं बेमौसम का राग क्यों अलापने लगा! बात दरअसल ये है कि मेरे एक मित्र ने जब मुझसे ४५९ का मतलब पूछा तो मैं निरुत्तर रहा. फिर दूर की कौड़ी लाकर कहा कि
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें...: ज़फ़र

सन १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में आख़िरी मुग़ल सम्राट बहादुरशाह ज़फ़र ने जननायक की भूमिका निभाई थी. ज़फर एक महान शायर भी थे. इस बुजुर्ग बादशाह ने अपनी पार्थिव देह दिल्ली की गोद में दफ़न कराने की इच्छा जताई थी. लेकिन मौत आई भी तो रंगून की जेल में
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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एक लीटर खून

दोस्तो, देर हुई आने में. करिए क्षमा! जैसे आत्महत्या चुटके (सोसाइड नोट) में दहेज की मारी महिलाएं कोई वजह नहीं दे पातीं (पति के भविष्य या बाल-बच्चों की वजह से. लेकिन हम क्या करें; कवि मिजाज से हैं और रिश्ते दुनियावी पारिवारिक रिश्तों से घट नहीं होते) ;
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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स्मृति शेष: हिन्दी का क्रान्तिधर्मी कवि वेणु गोपाल

कागज़नगर में हम तीनों रोज़ ही शाम को मिलते. लेकिन रविवारों को हम सारा दिन साथ रहते. वेणु और तेज को एक कमरे का छोटा-सा मकान स्कूल की ओर से मिला हुआ था. वेणु मुझे रविवार को ख़ास आमंत्रित करता-- 'सुबह दस-ग्यारह बजे आ जाना'. मैं पहुंचता. मैं और वेणु गप्पो
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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डॉ. भारती के 'अँधा युग' की भूमिका और अपनी बात

पहली वजह तो यही है है कि यह एक सर्वकालिक कंटेंट है. दूसरी बात इसका गीतात्मक होना. सबसे विशेष बात है मौके का चयन. यह युद्ध के १८वें दिन बाद की कथा है. मजे की बात यह है कि दुर्योधन और भीम के बीच जंघाफाड़ युद्ध अभी शेष है. दुर्योधन का मरना अभी नहीं हुआ
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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विश्वास मत: फ़िल्म की कहानी का अंत बता दूँ?

लोकसभा में २२ जुलाई २००८ का ड्रामा देखने का रोमांच ख़त्म हो गया है. दरअसल अगर जासूसी फ़िल्म की कहानी का अंत बता दिया जाए तो फ़िल्म क्या देखनी! लेकिन वह अंत बताने से पहले मैं अपने दिल की बात करना चाहूंगा २० और २१ जुलाई को मैं ठाणे लोकसभा क्षेत्र में
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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ख़बरों का सिलसिला लगातार ज़ारी क्यों है?

हिन्दी समाचार चैनलों के टीवी एंकरों की भाषा पर काफी बातें कही-सुनी जा चुकी हैं लेकिन वे नहीं सुधरे। गुणीजनों की निगाहें नुक्तों और उच्चारण पर भी गयी हैं, लेकिन एक बात पर इनका भी ध्यान नहीं गया. बात एनडीटीवी, इंडिया टीवी, सहारा, आईबीएन ७ या इसी तरह के
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
Jul 01 2008 10:22 PM
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अगली पोस्ट उर्फ़ 'या रब ज़माना मुझको मिटाता है किसलिए'

मैं चाहता हूँ कि मेरे अहबाब और तलबा सिब्बन बैजी को दो-चार दिन पढ़ते रहें. वह ऐसे सख्स हैं जिनसे मेरा तआल्लुक निजी तो है ही, अदबी भी है. उनसे मैंने बहुत सीखा है. इसके बाद मुझे कभी-कभार पिता जैसी मोहब्बत देने वाले निदा फाज़ली की वे रचनाएँ आप पढ़ेंगे
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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इस बार पढ़िये सिब्बन बैजी की चंद गज़लें

शायर सिब्बन बैजी का मूल नाम सीबी सिंह है, मुझे इसका इल्म बहुत बाद में हुआ. करीब १८ साल पहले जब मैं मुम्बई में उनसे पहली बार मिला था तो उन्हें तमाम दोस्त सिब्बन नाम से पुकारते थे. वह फक्कड़ तबीयत के, छपने-छपाने के मामले में पूरी तरह बेपरवाह शायर रहे ह
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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बाल कविता या प्रौढ़ कविता?

दोस्तों, कुछ दिनों पहले मुझसे एक कविता हो गयी. दोस्तों को पढ़वाई तो कहने लगे कि यह तो बाल कविता है. मैंने कहा कि अच्छा है, आजकल बाल-साहित्य पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है, लेकिन मुझसे बेध्यानी में ही सही; बाल-साहित्य के खाते में कुछ दर्ज़ हो गया
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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कौन ज्यादा कुत्सित- अमेरिकी या भारतीय मीडिया?

'मोहल्ला' में अंशुमाली जी का यह लेख और उससे पहले दिलीप मंडल का. मैंने टिप्पणी के रूप में कुछ बातें की थीं. शायद वे इन दोनों लेखों से जुड़ती हैं. दिलीप भाई के लेख पर कुछ इस तरह की शिकायत भी थी कि बहस को दूसरी दिशा में क्यों मोड़ दिया गया.सरकारी नीतिय
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
Jun 15 2008 11:46 AM
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बारिश जो न करवाए, गीत लिखवा लिया!

बारिश जो न चाहे करवा ले!कल वर्षा में सराबोर होकर जब घर पहुंचे तो हल्का-हल्का सुरूर छा चुका था. गली में बैठने वाले बुजुर्ग घड़ीसाज़ रियाज काका से सुबह ही छतरी सुधरवाई थी. रास्ते में हवा-पानी की मार से वह क्षत-विक्षत हो चुकी थी. पैराहन से पानी टपक रहा थ
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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'बकरी जो मैं-मैं करती है....'

'मौर्यध्वज और ताम्रध्वज' नाटक हमारे यहाँ रामलीला का राज्याभिषेक समाप्त होने के बाद देसी मंडलियाँ खेला करती थीं. अब तो टीवी ने रामलीला मंडलियों को लील लिया है. बचपन में सतना जिले के दुरेहा कस्बे की रामलीला मंडली बड़ी नामाजादिक थी. उसका साजो-सामान और क
 
विजयशंकर चतुर्वेदी
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पढ़िये लीलाधर जगूड़ी की 'पुरुषोत्तम की जनानी'

हमारे समय के बहुत बड़े कवि लीलाधर जगूड़ी की यह कविता मैं चाहता हूँ कि ब्लॉगर साथी पढ़ें. 'पहल' के हालिया अंक में छपी यह कविता आजकल चर्चा में है. जगूड़ी जी से इस कविता को लेकर फोन पर मेरी बात हुई. उन्होंने कहा- "पेड़ तटस्थ समाज का प्रतीक न समझा जाए बल्क
 
विजयशंकर चतुर्वेदी