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कछु ह‍मरी सुनि लीजै

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30 Apr 2010
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कुम्‍भ का बादशाही स्‍नान

इस बार महाकुम्‍भ ने सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए। तीन की जगह चार शाही स्‍नान साधु-संन्‍यासियों ने कर लिए और आ‍खरी दिन कविवर निशंक की मंत्रिपरिषद् ने आकर बादशाही स्‍नान कर लिया। जिस दिन से छत्‍तीसगढ़ की सरकार हरिद्वार आकर नहा गई थी उस दिन से उत्‍तराखण्‍ड की
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Apr 30 2010 07:09 PM
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सफल कुम्‍भ के लक्षण

सभी लक्षण बता रहे हैं कि हरिद्वार में 2010 का महाकुम्‍भ एक सफलतम कुम्‍भ रहा है। कुम्‍भ कार्यों की शुरुआत से लेकर कुम्‍भ संपन्‍न हो जाने तक जो कुछ हुआ वह सब नोबल पुरस्‍कार की श्रेणी का हुआ है। यही वजह है कि उत्‍तराखण्‍ड के कविमना मुख्‍यमंत्री इस महामेले
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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निबट गया कुम्‍भ।

और जैसे तैसे निबट गया कुम्‍भ। किसी के लिए कुम्‍भ रत्‍नजटित महंगी धातुओं का था तो किसी के लिए वह सोने का सिद्ध हुआ और किसी के लिए वह चान्‍दी चान्‍दी कर गया। चमचम करता रत्‍नजटित कुम्‍भ था संत महंतों का तो  स्‍वर्ण कुम्‍भ आया शासन-प्रशासन वालों के
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Apr 16 2010 07:24 PM
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गंगा में राजनीतिक डुबकी

डॉक्‍टर साब अपनी पूरी कबिनेट, बल्कि कहें पूरी सरकार ही लेकर अपनेराम के कुम्‍भनगर में आए थे। सारी सरकार बालबच्‍चों समेत हरिद्वार में थी। डॉक्‍टर साब के साथ कई बड़े बड़े मंत्री और विधायक थे। सत्‍ता में रहने के कारण सबके कुर्ते के नीचे वाले 'कुम्‍भ' भरे भरे
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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हर खंभे पर बाबा जी हैं

हरिद्वार में कुम्‍भ चल रहा है। चारों तरफ रौनक ही रौनक है। सारा कुम्‍भनगर रंगबिरंगे पोस्‍टरों, बैनरों, होर्डिंगों और क्‍योस्‍कों से पट गया है। हर खम्‍भे पर बाबा जी है। खम्‍भा चाहे टेलीफोन का हो या बिजली का, ‍ या फिर किसी शामियाने का ही क्‍यों न हो, सब
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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चौथा शाही स्‍नान क्‍यों

हरिद्वार में चल रहे महाकुम्भ को लेकर एक ताज़ा समझौता साधु-संतों के तेरह अखाड़ों की परिषद् तथा कुम्भ प्रशासन के बीच हुआ है। इस समझौते के मुताबिक तेरहों अखाड़े 15 मार्च के सोमवती अमावस्या और 14 अप्रैल के मुख्य कुम्भ स्नान के बीच में 30 मार्च को एक और स्नान
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Mar 05 2010 08:41 AM
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होली 2010

  हरिद्वारी दोहे आसमान के गाल पर मलती धरा गुलाल, धरा गगन दोनों हुए होली खेल निहाल ।। आसमान खूलकर हंसा, धरती हुई निहाल। जब धरती के गाल पर नभ ने मला गुलाल।। सतरंगी चूनर  हुई बहुरंगी  सब अंग, हर मन में बजने लगे ढोलक और म़ृदंग ।। ऐसी भंग छकी
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Mar 01 2010 07:23 PM
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महाकम्‍भ के महाबन्‍द में

यूं तो कुम्‍भमेला सबके ही फायदे की चीज है। जब आता है तो सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आता है। पर सबसे ज्‍यादा फायदा होता है छुट्टियां चाहने वालों को। जिन्‍हें कामकाज से छुट्टी चाहिये उनके लिये कुम्‍भ से मुफीद कुछ नहीं। जित देखूं तित अवकाशानन्‍द । बाहर वाले तो
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Feb 19 2010 02:24 PM
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संग संग नहाए जोगी और भोगी

कुम्‍भनगर में साधुसंतों के अखाड़ों का पहला शाही स्‍नान आज सकशल निबट ही गया। सच तो यह है कि प्रशासन महसूस रहा है कि उसकी जान बची और उसने लाखों पाए। संयोग ऐसा कि आज लाखों स्‍नानार्थी भी आए और किस्‍मत से जान बची के भी लाखों पाए प्रशासन ने। आज दोनों हाथों
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Feb 12 2010 06:15 PM
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कुम्‍भ में नयनसुख

हरिद्वार एक स्‍नान-प्रधान या कहिये नहान-प्रधान शहर है। यहां दुनिया भर से आस्तिक लोग नहाने आते हैं। जो आस्तिक नहीं हैं वे नहान देखने आते हैं यानी नहाते हुओं को देखने के लिये आते हैं। वे नहानेवालों को देखते हैं। और नहाते हुओं को देखने वालों को भी देखते
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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विकासशील पेट का कुम्‍भ

विकास के कई आयाम हैं। विकसित होना और अविकसित होना इसके दो ध्रुवान्‍त हैं तो अर्द्धविकसित होना मध्‍यबिन्‍दु है। अर्द्धविकसित होने में एक स्थिरता का भाव है पर इसके अलावा एक भाव है विकासशीलता का। विकासशीलता के इस भाव में गतिशीलता है। बड़ी संभावनाएं छिपी
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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संतों का वसंत

आजकल कुम्‍भनगर हरिद्वार में कुम्‍भ की रौनक है। कुम्‍भ यानी संतों का वसंत। तो हरिद्वार में इन दिनों संतों का वसंत आया हुआ है। न केवल आया हुआ है, बल्कि छाया भी हुआ है- ''जित देखूं तित संतई संता, जित संता उत सदा बसंता''। गली गली, डगर डगर, मौहल्‍ले मौहल्‍ले,
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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ज़मीनों की मारामारी

भक्‍तों, इस घोर कलिकाल में द्वापर घुसने को आतुर है। अपनेराम भय‍भीत हैं कि अब क्‍या होगा। गंगातट पर कुम्‍भ का मेला लगने वाला है। साधुसंतों की रेलमपेल शुरू हो चुकी है। एक तरफ पाण्‍डव साधुवेश में पाण्‍डव हैं और दूसरी ओर अफ़सरों की कौरवी सेना। मामला वही भूमि
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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दौर-ए-मिलावट

मेल-जोल, मेल-मिलाप और मिलावट एक जैसे दीखने वाले शब्‍द हैं। पर मेल-जोल और मेल-मिलाप से लोग खुश होते हैं और मिलावट पर नाक-भौं सिकोड़ते हैं। कहते हैं मिलन अच्‍छा है, मिलावट ग़लत है। मिलन को असली बताते हैं और मिलावट को नकली से जोड़ देते हें।  अब कोई
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Dec 29 2009 11:43 AM
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शूकरताप से ग्रस्‍त भाजपा

सारे देश में शूकरताप क्‍या फैला अपनी भाजपा भी उसके चपेट में आ गई लगती है। पुणे, बैंगलोर के बाद अब शिमला चपेट में है। पर शिमला में खैरियत ये है कि वहां तापित केवल भाजपा है शेष शहर नहीं। लौहपुरुषों की अपनी यह पार्टी शापग्रस्‍त तो पहले ही हो चुकी थी, अब
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Dec 29 2009 11:43 AM
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अखाड़े हैं तो लड़ेंगे ही

इन दिनों कुम्‍भनगरी हरिद्वार में अखाड़ों के चर्चे आम हैं। अखाड़े यानी साधुसंतों के अखाड़े। अखाड़ा होता वही है जहां मल्‍लयुद्ध सिखाते हैं और करते हैं। दो मल्‍ल आमने सामने खड़े होकर हाथ मिलाते हैं और फिर अपने दांवपेंच आजमाकर दूसरे को पटकनी देने की जुगा
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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राजनीति में पत्‍थर

राजनीति में पत्‍थरों का बड़ा महत्‍व है। बड़े काम की चीज होते हैं ये पत्‍थर। इनके के बगैर राजनीति का काम नहीं चलता। न पक्ष की राजनीति का और ना ही विपक्ष की राजनीति का। फिर राजनीति अगर पहाड़ की हो तो कहना ही क्‍या। सारा उत्‍तराखण्‍ड प्रदेश कंकर से पत्‍
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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भाषात्‍कार का ज़माना

भाषात्‍कार का ज़माना लोग जो बोलते हैं, जो लिखते हैं और फिर जो हमें छपा हुआ दीखता है उसे देखकर लगता हैं कि हम उस युग में आ चुके हैं जिसे 'भाषात्‍कार का युग' मज़े में कहा जा सकता है। दरअसल मनुष्‍य अपने जीवन में जितनी तरह के बलात्‍कार करता है, उनमें से
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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ठाकरे की ठकुराई

एक छोटे ठाकरे ने एक बड़े ठाकरे की ठकुराई पर अपनी जीत का ग्रहण लगा दिया है। बड़े ठाकरे के अपने लोग, जो उनकी ठकुरसुहाती कहते-करते अघाते नहीं थे, अब न केवल हार का ठीकरा उनके सिर पर फोड़ रहे हैं बल्कि उनके नेतृत्‍व को ठोकर मारने पर भी उतारू दीख रहे हैं।
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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बुज़ुर्गों के घर में बचपना

दिल्‍ली में अपनी राजसभा भरेली थी। राजसभा को अंग्रेजी में बोले तो एल्‍डर्स हाउस यानी बुज़ुर्गों का घर। तो बुज़ुर्गों का घर खचाखच भरेला था। सफेद बाल और सफेद दाढ़ी-मूंछ वाला शैतान बच्‍चा लोग भी उधर धमाचौकड़ी मचाने कू जमा था। बड़ा ही सेकुलर किसिम का माहौ
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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पहले राष्ट्रीय फिर महाराष्‍ट्रीय

वाह बेटा सचिन, क्‍या बल्‍ला घुमाया है। ठाकरे की बॉल पर तुमने वो अट्ठा मारा है कि अपनेराम का दिल बल्लियों उछल रहा है। अपने निजी स्‍वार्थ के लिये रोज़ सुबह उठकर हवा में ठा ठा करने वाले इन ठाकरों को अब क्‍या कहें जिन्‍हें सामान्‍य बोलचाल की भाषा के अर्थ
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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दम्‍भ का महाकुम्‍भ

यूं तो बारहों महीने वसंत है संतई में। पर इन दिनों गंगनगरी हरिद्वार में संतो का विराट् वसंतोत्‍सव आने को है। महाकुम्‍भ के रूप में संत बनने-बनाने का द्वादशवर्षीय दुर्लभ अवसर आने को है। रोज़गार के अवसर जुटनेवाले हैं। समाज को ऋणी होना चाहिए कि बेरोज़गारो
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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आज वाणी अवाक् है

कई बरस बीत गए, शायद अस्‍सी के दशक की बात है। हरिद्वार के पत्रकारों की संस्‍था भारतीय संवाद परिषद् ने तब व्‍याकरणाचार्य पं.किशोरीदास वाजपेयी कर स्‍मृति में व्‍याख्‍यानमाला का आयोजन किया था। नवभारत टाइम्‍स के संपादक पत्रकार-प्रवर राजेन्‍द्र माथुर मुख्‍
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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कुम्‍भ के शुम्‍भ-निशुम्‍भ

उत्‍तराखंड को लोग उसकी प्राकृतिक सुन्‍दरता के चलते धरती का स्‍वर्ग कहते हैं लेकिन इसी नाते से उत्‍तराखंड के निवासियों को स्‍वर्गवासी कहने का कोई रिवाज़ नहीं है। हां, इस प्रदेश का प्रमुख नगर हरिद्वार अलबत्‍ता कई तरह के ''द्वार'' के रूप में मशहूर है। द
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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बिगबॉस का सीटी संपादन

इन दिनों लोग बीबी के घर में घुसकर वहां के जलवों का आनन्‍द ले रहे हैं। बीबी का घर चर्चा का विषय है। वहां की रंगीनियां रंग पर यानी अपने कलर चैनल पर गिखरी पड़ी हैं। सुबह से देर रात तक तक इस चैनल पर रंग ही रंग हैं। अनदेखा बिहार है, पता नहीं कौनसा राजस्‍थ
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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तोहफा-ए-दीवाली

आज सुबह सुबह अपनेराम के पड़ौसी ठाकुर गुलफामसिंह अचानक दरवाजे पर नमुदार हुए। सोचा दीवाली की रामराम करने आए विहोंगे। पर इतनी सुबह । ठाकुर साहब देर रात तक शीशे के गिलासों से खेलते हैं और सुबह दस साढ़े दस तक बिस्‍तर नहीं छूटता उनसे। आज सुबी सात बजे अपने
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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माया की माया

संत कबीरदास शताब्दियों पहले कह गए थे  कि ''माया महाठगिनि हम जानी''। इस 'हम' में वे खुद  और उनके कुछेक समकालीन संत रहे होंगे जिन्‍होंने माया के असली रूप को समझ लिया। पर हम  दुनियावालों की समझ में यह बात  तब क्‍या, अब तक भी नहीं आई
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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सोने के तारों की खादी

हमारे राष्‍ट्रपिता और राष्‍ट्रपति दोनों ही इन दिनों सुर्खियों में हैं। सारी दुनिया में अपने राष्‍ट्रपिता अतिविशेष हैं। उनका सुर्खियों में रहना तो सामान्‍य बात है। पर अपनी राष्‍ट्रपति का इन दिनों सुर्खियों में रहना विशेष हैं। राष्‍ट्रपिता अगर एक कलम क
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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बीबी चाहिये तो वोट दो

चुनावों में किये जाने वाले वादो से सारा देश परिचित है। तरह तरह के उम्‍मीदवार तरह तरह के वादे करते नज़र आते हैं। कोई मकान का वादा करता है तो कोई बिजली का। कोई सड़कों की बात करता है तो कोई साफ पानी का वादा करता है। वोटर इन वादों पर यकीन करके 
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Sep 25 2009 09:28 AM
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सारा देश मवेशी है

धन्‍यवाद कृष्‍णा जी, शुक्रिया थरूर जी। हम आभारी हैं अपने इन माननीय केन्‍द्रीय मंत्रियों के जिनके कारण इस देश को अचानक सादगी याद आ गई है। न ये माननीय मंत्रिगण पंचतारा होटलों में रहते और ना ही मीडिया में उनके विलास-विश्राम की चर्चाएं होती। न विलास-विश्राम
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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सच का सामना

झूठ का सामना करते करते उकता गया था सत्‍यवादी राजा हरिश्‍चन्‍द्र का यह देश। झूठ, झूठ और सिर्फ झूठ। देश को सिर्फ झूठ ने घेर रखा था। लोग सच बोलने से डरते थे। बोलते भी थे तो मुलम्‍मेदार सच बोलते थे। गोलमेाल भाषा में गोलमोल प्रश्‍न होते थे और उसके गोलमोल ही
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
Jul 29 2009 07:04 PM
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संस्‍कार देती औरतें

संस्‍कार देती औरतें औरतें लड़ रही हैं और देश आगे बढ़ र‍हा है। औरतें ज़बान लड़ा रही हैं और देश आगे बढ़ रहा है। किस दिशा में बढ़ रहा है, बस यही मत पूछिये। आज देश में जो हो रहा है वह औरतों की वजह से ही हो रहा है। जो नहीं हो रहा है उसकी वजह भी  औरते
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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इलैक्‍शन जीते बिना सांसदी

वे बेचारी तो शुद्ध भारतीय परम्‍परा का निर्वाह कर रही थीं पर उसी में धरी गईं। अब कोई  अपने शौहर का अनुगमन भी न करे तो क्‍या करे। आगे आगे शौहर गए, पीछे पीछे बेगम चली गईं और जाकर लोकसभा में उन कुर्सियों में से एक पर बिराज गईं जिन पर बैठकर माननीय सद
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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कोर्ट ने दी असली आज़ादी

माननीय न्‍यायमूर्तियों ने ऐसा कुछ कर दिया है कि भाईलोग बड़े खुश हैं। कह रहे हैं कि देश को असली आज़ादी अब जाकर मिली है। 1947 वाली अब तक की आज़ादी तो आदमी को आदमी से और औरत को औरत से दूर कर रही थी। अब 63 वें साल में जो आजादी मिली है वह जाकर कहीं आदमी क
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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मध्‍यावधि मुख्‍यमंत्री

बचपन की बात है। अपनेराम खेलते खेलते दौडकर उस कमरे में जा पहुंचे जहां चटाई पर बैठे पिताश्री चाय पी रहे थे। भरा हुआ चाय का कप जमीन पर रखा था जिस पर ठोकर लगी और सारी चाय बिखर गई। कपप्‍लेट के टुकडे दूर तक फैल गए। यह देखकर पिताश्री चाय से भी ज्‍यादा गरम ह
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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इस्तीफों की बहार !

इस्तीफों की बहार ! अपनी अति अनुशासित और अति राष्ट्रवादी पार्टी में इन दिनों इस्तीफों की बहार है। बड़े बड़े लोग दनादन इस्तीफे देकर बाहर हैं। लालभाई पर लाल-पीले होने वालों की नफरी में लगातार बढ़ोत्री हो रही है। लालभाई जैसे भीष्म तो अब चुप हैं पर उनके न
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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यही मर्दानगी है

कभी लगता है कि औरतें उनके पीछे पड़ गईं हैं। पर अगले ही पल वे औरतों के पीछे पड़ते नजर आने लगते हैं। जब भी औरतों को एक तिहाई तवज्जो देने की बात उठती है तो  वे सेंटी हो जाते हैं। महिला आरक्षण की बात उठते ही पता नहीं क्यों वे खुद उठ खड़े होते हैं। उ
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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जय माता दी !

कोई मानें या न मानें कांग्रेस की अम्मा अब देशभर की अम्‍मा हो चली है। अपनेराम ने इसीलिये उन्‍हें नाम दिया है सर्वाम्मा। सर्वाम्मा का ही कमाल है कि दशकों से चर्चाओं में सिमटा महिला आरक्षण बिल अब आकार लेने को है। पहले महामहिम का सिंहासन, फिर सबसे बड़ी प
 
डॉ. कमलकांत बुधकर
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संसदेव कुटुम्बकम्

अपनेराम के बापश्री अब इस दुनिया में नहीं हैं। 102 के होकर कूच कर चुके हैं। वे बड़े आदमी थे। इतने बड़े कि जिन्दगी भर खुद को छोड़कर बाकी समाज और परिवार के लिये मरते-खपते रहे। वह सब कुछ किया जिससे औरों को लाभ हो। पर, वही नहीं किया जो करना चाहिए था। मसलन
 
डॉ. कमलकांत बुधकर