अनवरत's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
18 Mar 2010
कुल प्रविष्टियां
285
पाठक भेजे
19909
पसंद
1767
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
69.86
पसंद करें
3
नापसंद करें

लोगों के अपकारी काम धर्मों को समेट रहे हैं

कुछ दिनों से ब्लाग जगत में बहस चल रही है कि किस किस धर्म में क्या क्या अच्छाइयाँ हैं और किस किस धर्म में क्या क्या बुराइयाँ हैं। हर कोई अपनी बात पर अड़ा हुआ है। दूसरा कोई जब किसी के धर्म की बुराई का उल्लेख करता है तो बुरा अवश्य लगता है। इस बुरा लगने पर
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

मुबारक हो तुम को नया साल यारो

यहाँ नीचे आप एक बिंदु से एक वृत्त को उत्पन्न होता और विस्तार पाता देख रहे हैं। फिर वही वृत्त सिकुड़ने लगता है और बिंदु में परिवर्तित हो जाता है। फिर बिंदु से पुनः एक वृत्त उत्पन्न होता है और यह प्रक्रिया सतत चलती रहती है। बिंदु या वृत्त? वृत्त या बिंदु?
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
1
नापसंद करें

उपभोक्ताओं को अपने अधिकारों के लिए संगठित हो कर खुद आगे आना होगा

आज अट्ठाइसवाँ विश्व उपभोक्ता दिवस था। 1983 में कंजूमर्स इंटरनेशनल नाम की संस्था ने इसे आरंभ किया था। यह संस्था इसी वर्ष अपने जन्म का पचासवाँ वर्ष भी मना रही है। दुनिया में पैदा हुआ मानव समाज का प्रत्येक सदस्य एक उपभोक्ता है। इस संस्था के गठन का मूल मकसद
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
1
नापसंद करें

किसानों के लिए खुश-खबर : बिना सिंचाई 35-40 क्विंटल गेहूँ उपजाया

राजस्थान के टोंक जिले में पाँच वर्ष पहले जब किसान सिंचाई के लिए पानी की मांग के लिए आंदोलन कर रहे थे, तब राजमार्ग से अवरोध हटाने के लिए सरकार को गोलियाँ चलानी पड़ी थीं।  इस गोलीकांड में एक महिला सहित पाँच व्यक्तियों को अपनी जान देनी पड़ी थी। ये
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

चितकबरी ग़ज़ल 'यक़ीन' की

पुरुषोत्तम 'यक़ीन' की क़लम से यूँ तो हर तरह की ग़ज़लें निकली हैं। पर कुछ का मिजाज़ बिलकुल बाज़ारू है। लेकिन बाजारू होते हुए भी अपने फ़न से उस में वे समाज की हक़ीकत को बहुत खूब तरीके से कह डालते हैं। जरा इस ग़ज़ल के देखिए ...... चितकबरी ग़ज़ल 'यक़ीन'
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
1
नापसंद करें

दिमाग पर स्पेस का संकट

कल अनवरत और आज तीसरा खंबा की पोस्टें नहीं हुई। मैं सोचता रहा कि ऐसा क्यों हुआ? एक तो पिछले सप्ताह बच्चे घर पर थे। सोमवार को वे चले गए। बेटी अपनी नौकरी पर और बेटा नौकरी के शिकार पर। उस का लक्ष्य है कि अच्छा शिकार मिले। पिछले चार माह से जंगल (बंगलूरू) में
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
2
नापसंद करें

यूँ समापन हुआ होली पर्व का

यूँ तो हाड़ौती (राजस्थान का कोटा संभाग) में होली की विदाई न्हाण हो चुकने के उपरांत होती है। न्हाण इस क्षेत्र में होली के बारहवें दिन मनाया जाता है। हमारे बचपन में हम देखते थे कि होली के दिन रंग तो खेला जाता था लेकिन केवल सिर्फ गुलाल से। लेकिन गीले रंग या
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: son
पसंद करें
0
नापसंद करें

और एक हुसैन.........

 और एक हुसैन......... दिनेशराय द्विवेदीएक हुसैन ठेला घसीटता है और पहुँचाता है सामान, जरुरत मंदों तक एक हुसैन सुबह-सुबह म्युनिसिपैलिटी की गाड़ी आने के पहले कचरे में से बीनता है काम की चीजें अपनी रोटी के जुगाड़ने कोएक हुसैन भिश्ती दोपहर
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
पसंद करें
0
नापसंद करें

खुशी, जो मिलती है आभासी के वास्तविक होने पर

कल रात मैं भोजन कर निपटा ही था कि मोबाइल घनघना उठा। जहाँ मैं था वहाँ सिग्नल कमजोर होने से आवाज स्पष्ट नहीं आती। मैं ने मोबाइल उठाया तो नमस्ते के बाद कहा गया कि मैं रतलाम से .......... बोल रहा हूँ। नाम स्पष्ट समझ नहीं आया। बाद में संदेश था कि वे सुबह
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
0
नापसंद करें

दुर्घटना के मुकदमों में दावेदारों की वकालत का विकास

अपनी वकालत का यह बत्तीसवाँ साल चल रहा है। वकालत के पहले दस-बारह वर्षों में यदा-कदा मोटर दुर्घटना में घायल होने या मृत्यु हो जाने के मुकदमे सहज रूप से आया करते थे। इसी तरह कामगार क्षतिपूर्ति के मुकदमे सहज रूप से आते ही थे। हम अपने सेवार्थी से मुकदमे का
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: advocate
Mar 07 2010 06:56 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

खिन्नता यहाँ से उपजती है

दो दिन कुछ काम की अधिकता और कुछ देश की न्याय व्यवस्था से उत्पन्न मन की खिन्नता ने  न केवल अनवरत पर अनुपस्थिति दर्ज कराई, पठन कर्म भी नाम मात्र का हुआ।  मैं भी इस न्याय व्यवस्था का ही एक अंग हूँ। अधिक खिन्नता का कारण भी यही है कि देश की ध्वस्त
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: justice
Mar 05 2010 09:29 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अनुभवी सीख : शिवराम की एक अनोखी कविता

कल के आलेख में मैं ने शिवराम की व्यंग्य कविता का उल्लेख किया था। जो उन्हों ने सूर्य कुमार पांडेय के सानिध्य में होली के दिन हुई काव्य गोष्ठी में सुनाई थी। आज उसे यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ....   अनुभवी सीखशिवरामएक चुप्पी हजार बलाओं को टालती हैचुप
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
Mar 02 2010 07:58 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

भांग की तरंग होली के चित्रों के संग

होली की पूर्व संध्या पर काव्य-मधुबन के कार्यक्रम फुहार2010 में सूर्यकुमार पाण्डेय को ग्यारहवाँ व्यंग्य श्री सम्मान प्रदान किया गया। इस समारोह में जाने के पहले ही बच्चा-लोगों ने हमारे घर विजया की ठंडाई घोंटी थी। उस के चित्र देखिए-- तैयारी जारी है
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
Mar 01 2010 10:54 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

होली के दिन का फिर हमें है इन्तज़ार

हमारे शायर दोस्त पुरुषोत्तम ‘यक़ीन’ हर साल बड़ी हसरत लिए निकलते हैं होली खेलने। उन की हसरत कई साल से पूरी न हो पा रही है। बस एक वादा लिए लौट आते हैं हर बार। पिछले साल लौटे तो एक नज़्म लिखी। आज होली के दिन उन की ये नज़्म उन्हीं को समर्पित है । इस आशा के
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
Mar 01 2010 07:08 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पहेली!

कल मैं ने एक चित्र आप को यहाँ दिखाया था और पूछा था आप बताएंगे यह क्या है?जवाब समीर लाल जी ने देना आरंभ किया बेर है, फिर किसी ने उसे देख सेब की याद आई किसी ने उसे आड़ू और गूलर भी बताया। पर बिलकुल सही उत्तर दिया अभय तिवारी जी ने। वे कहते हैं ....ये बरगद का
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: पहेली
Feb 28 2010 05:39 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

होली के पहले की एक रंगभरी शाम

आज मिलादुन्नबी का त्यौहार था। बहुतों के साथ ही मेरे लिए भी होली के पहले एक दिन और अवकाश का। इस्लाम के अनुयायियों के लिए उतना ही बड़ा दिन जितना शायद कृष्ण जन्माष्टमी या क्रिसमस है। बिटिया दीपावली के बाद अब घर आई है तो घर ही रहा। कुछ साल पहले तक मुहल्ले
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
Feb 27 2010 11:35 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

पहेली!

होली का अवसर है। इन दिनों हरे रंग का पार्श्व हो और सुर्ख लाल रंग ऊपर चमकता हो बहुत सुंदर लगता है। कल ऐसे ही कुछ चित्र लेने का अवसर मिला। उन में से एक चित्र आप के लिए यहाँ रख रहा हूँ। आप बताएँ, यह चित्र किस का है?"Allow Blog Feeds" to "Full"
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: पहेली
Feb 27 2010 07:42 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

आपाधापी-अवरोध और हॉर्न

दो दिनों से कुछ भी लिखने को मन नहीं किया। होली सर पर आ गई और दोनों बच्चे घर में नहीं। मन कुछ तो उदास होना ही था। पूर्वा बिटिया आ रही है यह सोच कर मन उद्विग्न भी था। आज रात वह कोटा पहुँच गई। उस की ट्रेन बीस मिनट लेट थी। हम स्टेशन पहुँच कर उस की प्रतीक्षा
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
Feb 26 2010 11:23 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

न जाने कब हूर मिलेगी?

'कहानी'  न जाने कब हूर मिलेगी?  अदालत के जज साहब पूरे सप्ताह अवकाश पर हैं। रीडर साहब की मेज पर पड़ी आज की दैनिक मुकदमा सूची गवाही दे रही है कि जिन मुकदमों में आज पेशी थी, उन में तारीख बदली जा चुकी है। जो मुवक्किल पेशी पर आए थे वे तारीखें
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: धर्म
Feb 24 2010 09:14 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

जल्दी की तारीख अदालत के स्टॉक में नहीं

मेरे यहाँ कोटा में वकीलों की चार माह तक चली हड़ताल समाप्त हुए डेढ़ माह से ऊपर हो चला है। अदालतें अब पूरी शक्ति से काम करने लगी हैं। अपने निर्धारित कोटे से दुगना और कोई कोई तो उस से भी अधिक काम कर रही हैं। बहुत दिनों के बाद मुझे लग कर काम करना पड़ा है। दो
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: justice
Feb 24 2010 01:04 AM
पसंद करें
0
नापसंद करें

हुकुम! मुझे ईनाम नहीं मिलेगा?

कल जयपुर यात्रा हुई। मुझे और बार कौंसिल सदस्य और पूर्व अध्यक्ष महेश गुप्ता जी दोनों को जाना था। तय हुआ कि जबलपुर जयपुर दयोदय एक्सप्रेस पकड़ेंगे। उस का समय सुबह 8.15 पर कोटा से रवाना होने का है। मैं सात बजे घर से कार लेकर निकला महेश जी के घर उसे पार्क
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: justice
Feb 21 2010 11:10 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

नहीं सुन पाए राकेश मूथा की कविता

उद्यान में मेरे पास ही बैठे संजय व्यास ने मुझे प्रभावित किया। एक दम सौम्य मूर्ति दिखाई पड़ रहे थे वे। वे पूरी बैठक में कम बोले लेकिन जितना बोले बहुत संजीदा। मैं ने उन्हें अब तक बिलकुल नहीं पढ़ा था। इस कारण उन के लिए बहुत असहज भी था। बाद में जब कोटा आ कर
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: meet
Feb 20 2010 11:18 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

ताज़गी और बदलाव के लिए ब्लागीरी

अशोक उद्यान में हरी दूब के मैदान बहुत आकर्षक थे। हमने दूब पर बैठना तय किया। ऐसा स्थान तलाशा गया जहाँ कम से कम एक-दो दिन से पानी न दिया गया हो और दूब के नीचे की मिट्टी सूखी हो। हम बैठे ही थे कि हरि शर्मा जी के मोबाइल की घंटी बज उठी। दूसरी तरफ कुश थे। वे
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: meet
Feb 19 2010 10:15 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

शर्मा जी के घर रुचिकर स्वादिष्ट भोजन

जोधपुर की यह यात्रा पहली नहीं थी। मेरी बुआ यहाँ रहती थी, फूफाजी विश्वविद्यालय में संस्कृत के प्रोफेसर थे। उन की बेटियों के ब्याह में कोई पेंतीस बरस पहले यहाँ आना हुआ था। यहाँ पहुँचने के पहले मार्ग में ही एक दुर्घटना में पिताजी को चोट लगी और उनका तत्काल
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: meet
Feb 18 2010 09:57 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहीं सर्दी कहीं वसंत

शनिवार को जोधपुर यात्रा के पहले की व्यस्तता का उल्लेख मैं ने पिछली पोस्ट में किया था। वह पोस्ट लिखने के उपरांत भी व्यस्तता जारी रही। यहाँ तक कि सोमवार को वापस कोटा पहुँचने के बाद भी  व्यस्तता के कारण यहाँ कोई पोस्ट नहीं लिख सका।  शनिवार को
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: cold
Feb 17 2010 10:50 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

यात्रा के पहले काम का एक दिन

सुबह शेव बना कर दफ्तर में आ बैठा था। सुबह से कोहरा और बादल थे तो रोशनी की कमी ने दुपहर चढ़ने का अहसास ही समाप्त कर दिया। काम और आगंतुकों में ऐसा फँसा कि 12 बजे के पहले उठ नहीं सका। आगंतुकों के उठते ही ने उलाहना दिया -आज नहीं नहाना क्या?  मैं तुरंत
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: travel
Feb 13 2010 06:16 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

लो, मेरा रूमाल ले लो

शिवरात्रि के अवकाश का दिन बिना कोई उल्लेखनीय काम और उपलब्धि के रीत गया। कुछ ऐसे ही एक मौका देखने जाना पड़ा। वापसी में जोधपुर जाने-आने की यात्रा के टिकट ले कर आया बस में लोअर स्लीपर मिल गया इतना पर्याप्त था इस जाती हुई और जाते जाते अपने तमाम रूप और नखरे
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
Feb 12 2010 10:10 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

अम्मी मत रो! सब ठीक हो जाएगा।

कोटा शहर की एक बस्ती संजय गांधी नगर में कल शाम पाँच बजे एक हादसा हुआ ...... शहर में छोटी सी जगह। उस पर किसी तरह मकान बनाया। जैसे तैसे गुजारा चल रहा था। सोचा ऊपर भी दो कमरे डाल लिए जाएँ किराया आ जाएगा तो घर खर्च में आसानी हो लेगी। बमुश्किल बचाए हुए रुपए
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: मृतक
Feb 11 2010 10:06 PM
पसंद करें
2
नापसंद करें

बढ़ सकती है उत्सवों की संख्या

आठ फरवरी को रुचिका छेड़छाड़ मामले के अभियुक्त एसपीएस राठौर पर उत्सव नाम के युवक ने चाकू से हमला किया और उसे घायल कर दिया। बताया गया है कि उत्सव दिमागी तौर पर बीमार है और उस की चिकित्सा चल रही है। रुचिका प्रकरण में बहादुरी और संयम के साथ लड़ रही रुचिका की
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: Justice
पसंद करें
1
नापसंद करें

मीडिया उत्तेजना फैलाने में न्यायालय की अवमानना की भी परवाह नहीं करता

मीडिया समाचारों के मंतव्यों को बदलता है, यह बात अब छुपी हुई नहीं रह गई है। वह समाचारों को अपने हिसाब से लिखता है जिस से एक विशेष प्रतिक्रिया हो और उस खबर को खास तौर पर पढ़ा जाए। उसे इस बात का भी ध्यान नहीं रहता कि इस प्रकार वह समाज में क्षोभ भी उत्पन्न
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
3
नापसंद करें

अतीत पर गौरव भी और ....

कई दिनों से आसमान में बादल छाए थे। लेकिन बरसात नहीं हो रही थी। तालाब सूख चुका था। पानी के लिए तालाब के पेंदे में गड्ढे बना कर काम चलाया जा रहा था। ऐसे में शाम के वक्त दो गप्पी तालाब किनारे बैठे गप्प मार रहे थे। पहले ने कहा -मेरे दादा जी के दादा जी
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: indian
पसंद करें
2
नापसंद करें

उन्हें अकेला खाने की आदत नहीं है

पिछले छह दिन यात्रा पर रहा। कोई दिन ऐसा नहीं रहा जिस दिन सफर नहीं किया हो। इस बीच जोधपुर में हरिशर्मा जी से मुलाकात हुई। जिस का उल्लेख पिछली संक्षिप्त पोस्ट में मैं ने किया था। रविवार सुबह कोटा पहुँचा था। दिन भर काम निपटाने में व्यस्त रहा। रात्रि को
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: indian
पसंद करें
2
नापसंद करें

हरि शर्मा जी से एक मुलाकात

एक दिन की जोधपुर यात्रा से आज सुबह लौटा हूँ और अब फिर से सामान तैयार हैं शोभा सहित रवाना हो रहा हूँ, फरीदाबाद के लिए। उसे बेटी के पास छोड़ मैं निकल लूंगा दिल्ली। वहाँ राज भाटिया जी से भेंट होना निश्चित है। और किस किस के साथ भेंट हो सकेगी यह तो यह तो वहाँ
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: Travel
पसंद करें
3
नापसंद करें

हिन्दी ब्लागीरी बिना पढ़े और पढ़े हुए पर प्रतिक्रिया किए बिना कुछ नहीं

शनिवार को अविनाश वाचस्पति कह रहे थे कि रविवार को अवकाश मनाया जाए। कंप्यूटर व्रत रखें, उसे न छुएँ। मोबाइल भी बंद रखें। लेकिन रविवार को उन की खुद की पोस्ट पढ़ने को मिल गई। हो सकता है उन्हों ने अवकाश रखा और पोस्ट को शिड्यूल कर दिया हो। लेकिन कभी कभी ऐसा
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: Broadband
पसंद करें
3
नापसंद करें

एक गीत, तीन रंग ....

आम तौर पर संगीत सुनने का कम ही समय मिलता है। आते जाते कार में जब प्लेयर बजता है तो सुनाई देता है, या फिर देर रात को काम करते हुए कंप्यूटर पर। मुझे सभी तरह का संगीत पसंद है। भारतीय शास्त्रीय संगीत से ले कर हिन्दी फिल्मी गानों और दुनिया के किसी भी कोने से
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: freedom
पसंद करें
1
नापसंद करें

वो राहतों के ख़्वाब दोस्तो सलीब हो गये

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या है। हमारे गणतंत्र ने जहाँ से अपना सफर आरंभ किया था वहाँ से अब वह बहुत दूर निकल आया है। क्या थे हालात और क्या हैं हालात। देखिए पुरुषोत्तम ‘यक़ीन’ की इस नज़्म के आईने में ........नज़्म       
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
पसंद करें
3
नापसंद करें

बीज ही वृक्ष है।

मेरे एक मित्र हैं, अरविंद भारद्वाज, आज कल राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बैंच में वकालत करते हैं। वे कोटा से हैं और कोई पन्द्रह वर्ष पहले तक कोटा में ही वकालत करते थे। कुछ वर्ष पूर्व तक वे अपने पिता जी की स्मृति में एक आयोजन प्रतिवर्ष करते थे। एक बार उन्हों
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
पसंद करें
1
नापसंद करें

झाड़ू ऊँचा रहे हमारा

नाटक शिवराम की प्रमुख विधा है। नाटकों की आवश्यकता पर उन्हों ने अनेक गीत रचे हैं। ऐसा ही उन का एक गीत ...... आनंद लीजिए, गुनिए और समझिए....झाड़ू ऊँचा रहे हमाराशिवरामझाड़ू ऊँचा रहे हमारासब से प्यारा सब से न्याराइस झाड़ू को लेकर कर मेंहो स्वतंत्र विचरें घर
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: poetry
पसंद करें
2
नापसंद करें

आज किसी ने बताया नहीं, कि बसंत पंचमी है

मुझे पता था आज बसंत-पंचमी है। पर न जाने क्यों लग रहा था कि आज बसंत पंचमी नहीं है। शायद मैं सोच रहा था कि कोई आए और मुझ से कहे कि आज बसंत पंचमी है। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। अक्सर इन त्योहारों का महिलाओं को खूब ध्यान रहता है। पत्नी शोभा मेरे बिस्तर से उठने
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi
टैग: उत्सव
पसंद करें
2
नापसंद करें

खुद को कभी कम्युनिस्ट नहीं कहूँगा

कल एक गलती हो गई। भुवनेश शर्मा अपने गुरू श्री विद्याराम जी गुप्ता को बाबूजी कहते हैं। मैं समझता रहा कि वे अपने पिता जी के बारे में बात कर रहे हैं।  भुवनेश जी के पिता भी वकील हैं। कल की पोस्ट में मैं ने उन के पिता का उल्लेख कर दिया। आज शाम भुवनेश जी
 
दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi