क़ासिद's Image
ब्लॉगवाणी पर यह ब्लॉग
नयी प्रविष्टी लिखी
15 May 2010
कुल प्रविष्टियां
44
पाठक भेजे
2771
पसंद
88
नापसंद
0
पाठक प्रति पोस्ट
62.98
पसंद करें
0
नापसंद करें

महाराष्ट्र की सियाती शतरंज पर अब ‘ख़ाकी’ की बिसात

मुंबई। आईपीएल मैचों में मनोरंजन कर के मुद्दे पर महाराष्ट्र की सियासी शतरंज में अपनी गोटी पिटवा चुकी एनसीपी अब नई बिसात बिछा रही है। ये बिसात है अपने चहेते अफसर को मुंबई पुलिस कमिश्नर बनाने की और इस बिसात पर एनसीपी का खेल बिगाड़ने के लिए कांग्रेस खुलकर
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
2
नापसंद करें

शाहरुख खान का नया प्यार ‘किंडल’

मुंबई। अगर 70 के दशक में हिंदी सिनेमा के सबसे बहुचर्चित डॉयलॉग “मेरे पास मां है” की तर्ज पर कहें तो इन दिनों हिंदी सिनेमा के सितारे एक नई चीज़ पर इतरा रहे हैं। वो शान से कहते हैं – मेरे पास किंडल है। बॉक्स ऑफिस के बादशाह शाहरुख खान इसके बिना घर से बाहर
 
पंकज शुक्ल
टैग: किंडल
पसंद करें
4
नापसंद करें

पटकथा लेखन में मुंबई की दीप मंजुरी विजेता

पत्रकार-फिल्म मेकर पंकज शुक्ल ने अपनी अगली शॉर्ट फिल्म के लिए पटकथा का चयन कर लिया है। इस प्रतियोगिता की विजेता रहीं- मुंबई की दीप मंजुरी दास। इन्हें पुरस्कार स्वरूप 11 हज़ार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी।दीप मंजुरी ने बैंगलोर विश्वविद्यालय से पत्रकारिता
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
1
नापसंद करें

निकम की बहस से 30 से ज़्यादा बार टूटी जजों की कलम

 फांसी जल्द से जल्द दिए जाने के हिमायती हैं उज्जवल निकम संवेदनशील मामलों में शामिल होने के चलते ज़ेड श्रेणी की सुरक्षामुंबई। पाकिस्तानी आतंकवादी अजलम कसाब को फांसी की सज़ा सुनाए जाने के साथ ही विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम की बहस के चलते फांसी के फंदे
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
7
नापसंद करें

‘नदिया के पार’ के निर्देशक गोविंद मूनिस नहीं रहे

मुंबई। फिल्म फेयर पुरस्कार विजेता और सुपर डुपर हिट फिल्म नदिया के पार के निर्देशक गोविंद मूनिस का कल शाम निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और कुछ समय से गले के कैंसर से पीड़ित थे।दो जनवरी 1929 को उत्तर प्रदेश के ज़िले उन्नाव के गांव पासाखेड़ा में पंडित
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

गुलज़ार ने गढ़ा नक्सलियों का नया नारा?

 ‘ठोंक दे किल्ली- चलेगा दिल्ली?’ बना माओवादियों का मार्चिंग सॉन्ग दण्डकारण्य के ट्रेनिंग कैंपों में खूब बज रहा है ‘रावण’ का ये गानामुंबई। चेन्नई के स्टूडियों में तैयार हुई और केरल के जंगलों में जीवंत हुई एक धुन छत्तीसगढ़ के निर्जन इलाकों में चल रहे
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
6
नापसंद करें

लिखिए पटकथा, जीतिए नक़द इनाम

अगर आपको लगता है कि फिल्म मेकिंग में प्रवेश पाना आसान नहीं है और वहां सिर्फ सिफारिशी लोगों की ही पहुंच होती है, तो आप गलत है। पत्रकार से फिल्म मेकर बने पंकज शुक्ल ने नई प्रतिभाओं को आगे लाने के अपने अभियान के तहत इस बार नए लेखकों को तलाशने का बीड़ा उठाया
 
पंकज शुक्ल
टैग: पटकथा
पसंद करें
2
नापसंद करें
पसंद करें
4
नापसंद करें

किसने लिखा - "सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है.." ?

जैसा कि अक्सर होता है कि इतिहास के अनछुए और अनदेखे पहलुओं को आज की रौशनी में देखने की कोशिशों पर सवाल उठ ही जाते हैं। आज़ादी के सिपहसालार हसरत मोहानी के बारे में जो दो कड़ियां मैंने पिछले दिनों लिखीं, उनका संपादित स्वरूप अख़बार "नई दुनिया" ने शनिवार के
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

वो वजह पारसा उसकी..

(कौन हसरत मोहानी? - दूसरी कड़ी)गुस्सा इस बात पर नहीं कि हसरत मोहानी जैसे शख्स को देश के इतिहासकारों और नेताओं ने भुला दिया, बल्कि अफसोस इस बात पर ज्यादा होता है कि कम्युनिस्ट पार्टी के देश में हुए पहले अधिवेशन का अध्यक्ष रहे इस शख्स पर पाकिस्तान ने डाक
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

कौन हसरत मोहानी?

कैसा लगेगा आपको अगर आप आज़ादी की लड़ाई में अपना सब कुछ स्वाहा कर देने वाले किसी गुमनाम से स्वतंत्रता सेनानी पर कोई फिल्म बनाने निकलें और उसके गांव पहुंच कर पहला सवाल ही आपका माथा खराब कर दे। जी हां, ये वाकया मेरे साथ अबकी हुआ उत्तर प्रदेश की राजधानी से
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

ताकि सनद रहे...(जल्द आ रहा है, दूरदर्शन नेशनल पर)

संकट में इतिहास ही सच्चा गाइड है... हम जो हैं, हम जिस तरह के हैं और हम क्यों हैं, यही इतिहास है... क्या आप जानते हैं कि संसद भवन में बम फेंकने के बाद भगत सिंह पर चले मुकदमे में उनकी पैरवी करने वाला वकील कौन था? या फिर, क्या ये जानते हैं कि अमेरिका में
 
पंकज शुक्ल
Mar 06 2010 01:29 PM
पसंद करें
2
नापसंद करें

परों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है....

ज़ी न्यूज़ से ग्यारह साल पुराना नाता तोड़कर बतौर मैनेजिंग एडीटर “चैनल वन” की कमान कमान संभालने वाले वरिष्ठ और चर्चित टीवी पत्रकार यूसुफ़ अंसारी ने ऐलान किया है कि “चैनल वन” आगे चल कर देश के दबे कुचले तबके दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की आवाज़ को बुलंद
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
2
नापसंद करें

इस्लाम का प्रोग्रेसिव चेहरा

राजधानी दिल्ली में चल रहे पुस्तक मेले में जाने वालों को इस बार एक खास बात नज़र आई और वो है यहां बंट रहे हरे सफेद पर्चे। आमतौर पर पुस्तक मेले में अलग अलग प्रकाशकों के कारिंदे नुक्कड़ों और प्रवेश द्वारों पर पुस्तक सूचियां या फिर अपने स्टाल का पता बताने
 
पंकज शुक्ल
टैग: Pankaj Shukla
पसंद करें
4
नापसंद करें

कुमार के कौतुक

दिल्ली पुस्तक मेले से लौटते वक्त एकाएक नज़र गेट के करीब लगे एक बैनर पर अटक गई। फोटो तो अपने जाने पहचाने और करीबी डॉ. कुमार विश्वास की ही थी लेकिन किताब की डिज़ाइन पर जो नाम छपा था, वो समझ नहीं आया। काफी देर दिमाग की नसें जब आपस में गुत्थमगुत्था करके हार
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

सफलता के सौ दिन !

भोले शंकर (23)। गतांक से आगे... फिल्म भोले शंकर ने बिहार में शानदार सौ दिन पूरे कर लिए हैं। फिल्म की नेट कमाई केवल बिहार से पौन करोड़ के करीब पहुंच चुकी है। फिल्म इस हफ्ते भी कोई पांच सिनेमाघरों में अब भी चल रही है। समझ में ना आने वाली बात ये है कि भ
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

कहानी की कीमत तीन लाख रुपये!

पंकज शुक्ल हिंदुस्तान में किसी फिल्म की कहानी लिखने के लिए लेखक को कितना पैसा मिल सकता है? नामी लेखकों की बात छोड़ दें तो शायद ही कोई लेखक इसके लिए लाखों मिलने की बात सपने में भी सोच सकता होगा। लेकिन फिल्म राइटर्स एसोसिएशन, मुंबई की चली तो आने वाले द
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

दादा की दरियादिली

भोले शंकर (22) । गतांक से आगे... लखनऊ में फिल्म भोले शंकर का पहला शेड्यूल खत्म होने के बाद पूरी यूनिट ने मुंबई लौटने की तैयारी शुरू कर दी। फिल्म उद्योग को सरकारी लापरवाही का शिकार किस तरह होना पड़ता है, इसकी एक मिसाल भी इसी दौरान हमें देखने को मिली।
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

बेरोज़गारी से दो दो हाथ...

भोले शंकर (21)॥गतांक से आगे... फिल्म भोले शंकर की कहानी अब तक आप लोगों को काफी कुछ साफ हो चुकी होगी। ये कहानी एक विधवा मां और उसके दो बेटों की है। ये कहानी बताती है कि कैसे एक बेसहारा मां अपने बच्चों को अपने बल बूते पाल पोस कर बड़ा करती है। ये कहानी
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
2
नापसंद करें

अजीजन मस्तानी और बहुरुपिया का प्रदर्शन एनआरआई फिल्म फेस्टिवल 2010 में...

पत्रकार से फिल्म मेकर बने पंकज शुक्ल की दो शॉर्ट फिल्में अगले साल जनवरी में दिल्ली में होने जा रहे प्रवासी फिल्म समारोह यानी एनआरआई फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शन के लिए चयनित हुई हैं। इन फिल्मों के नाम हैं अज़ीजन मस्तानी और बहुरुपिया। कुशाग्र क्रिएशंस
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

स्माइल पिंकी को अलका सक्सेना का साथ

ऑस्कर विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्म स्माइल पिंकी का भारतीय टेलीविज़न पर कल शनिवार को बाल दिवस के मौके पर प्रीमियर होने जा रहा है। इस फिल्म को सबसे पहले देखने का का मौका पाएंगे बिहार के दर्शक, जहां कटे होंठ और तालू के मामले देश में सबसे ज़्यादा पाए जाते
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

"हम हैं राष्ट्र की ऊर्जा की बुनियाद"

अरसा हुए जब टेलीविजन पर एक विज्ञापन आया करता था, शायद फोर स्क्वायर वालों का विज्ञापन हुआ करता था जिसमें नयन मोंगिया को बॉलिंग करते दिखाया जाता था। और विज्ञापन के आखिर में एक कैचलाइन उभरती थी - YOU NEVER KNOW WHAT YOU CAN BECOME. हम जो देखते हैं, सुनत
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

दंश : The Sting

शॉर्ट फिल्म नंबर 3 टीना को दफ्तर ज्वाइन किए हुए अभी हफ्ता भर भी नहीं हुआ था और उसे लगने लगा था कि कंपनी के सीईओ की उस पर कुछ खास ही नज़रे इनायत होने लगी है। टीना देखने में सुंदर थी। आकर्षक कद काठी। जल्दी से जल्दी सबसे आगे निकल जाने का अरमान। इंटरव्यू
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

अज़ीज़न मस्तानी : Revenge Of A Gorgeous Freedom Fighter

पिछली कहानी बहुरूपिया को मिली प्रशंसा से उत्साहित होकर आज मैं एक और शॉर्ट फिल्म के बारे में लिखने जा रहा हूं। इस कहानी में थोड़ा सच है और थोड़ी कहावतें। 1857 में जब कानपुर में फिरंगियों पर नाना साहब, तात्या टोपे और अज़ीमुल्ला ख़ान ने क़हर बरपाया तो इ
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

बहुरुपिया : The Face Maker

बचपन में तो हमने उसे अक्सर देखा लेकिन अब वो कहीं नज़र नहीं आता। गांवों में भी अब वो कभी कभार ही दिखता है। लोगों ने उसे नाम दिया बहुरुपिया। पुराने मित्र और सहपाठी शरद मिश्र ने एक दिन यूं ही बातों बातों में बहुरुपिया का ज़िक्र छेड़ दिया। बात आगे बढ़ी त
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

माई नेम इज़ खान, तो क्या?

सत्रह साल, पांच दर्जन से ज़्यादा फिल्में, ढेरों पुरस्कार और बहुत सारा प्यार। दिल्ली के एक लड़के का मुंबई जाकर कामबायी की नई इबारत लिखने का ये एक ऐसा सफर है, जिसे किसी फिल्म की कहानी में आसानी से तब्दील किया जा सकता है। एक मुसलमान लड़के की एक हिंदू लड़की
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

शर्म इनको मगर नहीं आती!

हिंदुस्तानी सिनेमा जिसे लोग प्यार से, नफरत से या फिर जैसे भी बॉलीवुड कहते हैं, दरअसल इस देश की विरासत का असली आइना है। ये वो जगह है जहां एक हिंदू डायरेक्टर एक मुस्लिम कैमरामैन पर अपने ज़मीर से ज़्यादा भरोसा करता है। ये वो जगह है जहां एक सिख आर्ट
 
पंकज शुक्ल
Aug 05 2009 12:27 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

सहकारिता को सियासत का श्राप - 2

महाराष्ट्र में गन्ना खेती पूरे सूबे में होती हो, ऐसा भी नहीं है। बामुश्किल पांच फीसदी कृषि योग्य भूमि पर होने वाली गन्ने की खेती पूरे राज्य की खेती के लिए मिलने वाली आपूर्ति का 60 फीसदी अकेले डकार जाती है। ये गन्ने की खेती का ही असर है कि इन इलाकों में
 
पंकज शुक्ल
Aug 03 2009 12:56 PM
पसंद करें
0
नापसंद करें

बाग़ी हो गया छोटा शकील !!!

मुंबई में पिछले साल हुए आतंकी हमले के बाद से भले ही केंद्रीय खुफिया एजेंसियां सतर्क हों और खुद गृह मंत्री पी चिदंबरम ये कह रहे हों कि भारत के पश्चिमी तटों की समुद्रीय सीमाएं सुरक्षित नहीं हैं, जानकार बताते हैं कि अगला हमला पूरब की तरफ हो सकता है। मुंबई
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

सहकारिता को सियासत का श्राप- 1

आधुनिक अर्थशास्त्रियों को तो ख़ैर ये बात बहुत देर में समझ में आई, लेकिन भारतीय वेदों में सह अस्तित्व की बात शुरू से मान्य रही है। ओम् सह नानवतु, सह नौ भुनक्तु, सह वीर्यम करवावहै का ज़िक्र हो या फिर सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामयाः , सर्वे
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
2
नापसंद करें
पसंद करें
4
नापसंद करें

रहिमन निज मन की व्यथा...

कल से आज तक छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र तक से ना जाने कितने फोन आए, सिर्फ इस बात की बधाई देने के लिए कि मैंने अपने ब्लॉग पर अपने मन की बात कही। दरअसल, ब्लॉग की मूल अवधारणा भी यही है कि जो बात इंसान किसी से ना कह पाए, वो अपने
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
0
नापसंद करें

Check out The Great Driving Challenge !!

Hi I am inviting you to become a fan on the application page and cast your vote in support. You can visit my application page by clicking on this link here. Cast your vote and also become a fan.
 
पंकज शुक्ल
Jul 09 2009 05:53 PM
पसंद करें
5
नापसंद करें

माओवादियों का ‘मिशन दिल्ली’ !

छत्तीसगढ़ की राजधानी से कोई तीन- साढ़े तीन सौ किलोमीटर आंध्र प्रदेश की तरफ जाने पर नक्सलवाद की असल कहानी सामने आती है। ये इलाका कहलाता है बस्तर यानी रामायण काल के दण्डकारण्य का हृदय प्रदेश। नक्सली इसे आज भी दण्डकारण्य ही कहते हैं। और कहते हैं कि जैसे
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
3
नापसंद करें

ऐ जाने वफ़ा ये जुल्म न कर...

तो भैया, अब ये भरम भी जाता रहा कि आदमी अपने काम से जाना जाता है। अब मिसल ये दी जाती है कि दुनिया में रहना है तो आराम करो प्यारे, हाथ जोड़ सबको सलाम करो प्यारे। और दिक्कत ये है ससुरी कि हमने अच्छी अच्छी चीज़ें लगता है कुछ ज्यादा ही पढ़ ली हैं। स्कूल म
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
1
नापसंद करें

आदमी हो आदमी की शान रखना तुम

रायपुर से स्नेही स्वजन श्री गिरीश पंकज जी ने आज एक कविता मेल की, दिल के करीब लगी, इसलिए यहां आपके सबके लिए रख रहा हूं - हो मुसीबत लाख पर ये ध्यान रखना तुम, मन को भीतर से बहुत बलवान रखना तुम। बहुत संभव है बना दे भीड़ तुमको देवता, किंतु मन में एक अदद इ
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
1
नापसंद करें

मिठलबरा: पार्ट टू

मिठलबरा - अब भी ज़िंदा है! हिंदी फिल्मों में सीक्वेल की परंपरा पुरानी है। लेकिन, किसी कालजयी उपन्यास का सीक्वेल भी लिखा गया हो, ऐसा सुनने में नहीं आता। लेकिन, प्रिंट पत्रकारिता के चंद मठाधीशों के चेहरों से नक़ाब उतारने में सफल मशहूर व्यंग्य उपन्यास म
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
4
नापसंद करें

बॉलीवुड का मर्सिया ?

साउथ अफ्रीका में चल रहे आईपीएल के जश्न के बीच देसी मनोरंजन उद्योग का मर्सिया भी पढ़ा जा रहा है। जी हां, भले क्रिकेट मैच के शोर में हिंदी सिनेमा का ये शोक गीत किसी को सुनाई ना दे रहा हो, लेकिन जिन्हें इस उद्योग की चिंता है, वो नब्ज़ पर लगातार हाथ रखे
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
6
नापसंद करें

छत्तीसगढ़

खुदा की कसम ये कश्मीर तो नहीं लेकिन कश्मीर से कम भी नहीं... रायपुर, १६ अप्रैल। सुबह दफ्तर पहुंचने के बाद लोक सभा चुनाव के पहले चरण के मतदान के दौरान आ रही ख़बरों के बीच भागदौड़ चल ही रही थी कि मुंबई से पुराने मित्र श्रीनिवासन रामचंद्रन, जिन्हें सब रा
 
पंकज शुक्ल
पसंद करें
4
नापसंद करें

मेरी पहली बड़ी स्टोरी और राजेंद्र वढेरा...

रायपुर, 3 अप्रैल, 2009। मुरादाबाद जैसे छोटे शहरों में क्राइम रिपोर्टिंग करते हुए कोई संवाददाता किसी भी तरह की कैसी बड़ी से बड़ी स्टोरी कर सकता है? यही कि कभी कोई आईएसआई के एजेंट की गिरफ़्तारी पर ख़बर मिल जाए या किसी नए प्रशिक्षु आईपीएस के चाल-चलन पर
 
पंकज शुक्ल