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मेरी परिक्रमा...

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31 Dec 2009
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तेरी दीवानी हुई

कभी दुआ बन कर पलको पे छाये कभी प्यास बन कर लबों पे आये कभी दिल की राह से गुजर गये देखा तुझे तो खुद को भूल गई कतरा-कतरा तेरी हुई मैं दीवानी हुई तेरी दीवानी हुई तेरी आँखों की दुनिया में देखा एक सपना मेरा भी मुझसे तेरा फ़र्क मिटा जब से तुझ सी हुई कतरा-क
Dec 29 2009 11:48 AM
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शायरी

छू कर आई हूँ रूह-ए-यार को तू मेरे बदलते अन्दाज़ तो देख शोखियों में डूबी हैं तार तार इन झुकी पल्कों के राज़ तो देख ...
Dec 29 2009 11:48 AM
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शब्द

क़्या तुम्हारे आँगन में अपना पहला कदम रख सकता हूँ शब्द हूँ मैं तुम्हारे लबों का क्या तुमसे व्यक्त हो सकता हूँ... अपनी मर्यादा में कसकर बंधा हुआ हूँ ऊँच नीच जाति भेद में तुला हुआ हूँ क्या मैं तुम्हारे पंखों का आत्मसात कर खुले गगन में उङने का आभास कर सक
Dec 29 2009 11:48 AM
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गज़ल

सफर कटता रहा नजारे गुजरते रहे निगाहें बोझिल हुईं हम सोचते रहे इश्क़ और फर्ज़ की कशमकश में दामन को अश्कों से निचोडते रहे आहटें कुछ सुनी झोके वो धूल के बाबस्ता दरीचे दिल के खोलते रहे गुबार सन्नाटों में कहाँ निकालते बेखुदी में एक आस खरोचते रहे वफा ही वफा
Dec 29 2009 11:48 AM
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काश मेरे नसीब में

काश मेरे नसीब में ,रब बख्शी सौगात हो दिल डूबा हो तुझ में,चाँद तारों से बात हो नज़रे ज़ीक़ झुकी रहे,मगर तुझे देखती रहूँ इब्तदा इश्क की सहर, तन्हा मुलाकात हो मुद्दतें बीतीं दीदार को, जलवे देखे जो यार के सीने पर लब निसार, आँसुऑ की बरसात हो जख्म लगे पैरों म
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खार

ज़रूर उसमें कोई तो बात होगी जो वो मुझसे मोहब्बत करता है वरना जहान में, कहाँ अब तलक कोई खार को सीने से लगाकर रखता है...
Dec 29 2009 11:48 AM
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गीत

देखूँ जब पर्वतों को रंग उड कर बादल बन जाता है छू कर गुजरा कोई अभी-अभी मेरा रुआँ झूम जाता है उन चरागों की शमा बुझती नहीं जिनके तले घना अँधेरा होता है तुम्हें अक्सर महसूस करती रूह बहती इन साँसों से नाता है तेरे लिये जग छोड भी दूँ मगर गैरों पर यकीन नहीं
Dec 29 2009 11:48 AM
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तुम्हारा प्यार...

कभी शबनम तो कभी शोला कभी बरसात, कभी तृष्णा कभी बन्धन तो कभी मुक्ति कभी आँसू कभी अंगार तुम्हारा प्यार... फलक पर टिमटिमाते तारे सा प्यार रोम-रोम में घुलता मोम सा प्यार तुम्हारा प्यार... पुरातन में प्यार, मेरे वर्तमान में प्यार सृष्टि में प्यार, सागर मे
Dec 29 2009 11:48 AM
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नज़्म

झुकी पलकें झपक कर वो सोचते हैं आँखें बरसात सोख गई उन्हें इल्म नहीं पलकों पर चमकते हैं अश्क़, जैसे मेहराब पर ठहरी बून्दें.... मेहराब= छप्पर, छज्जा
Dec 29 2009 11:48 AM
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जीवन के दोराहे

जीवन के दोराहे पर खड़ा है मेरा मन एक तरफ मदमस्त जवानी एक तरफ मासूम बचपन नानी की कहानियाँ थीं मौजों की रवानियाँ थीं छत पर पड़ी चारपाई पर अपना डेरा था मुंडेर पर गिरी बेरी पर जुगनुओं का बसेरा था घर से दोपहर में चोरी से भागना बहुत याद आता है, बरगद की जटा
Dec 29 2009 11:48 AM
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ख्वाबों के ज़ज़ीरे

देखे हैं डूबे हुये ख्वाबों के ज़ज़ीरे यहाँ देखे हैं भटकते चाहतों के काफिले यहाँ... हकीकत से हारी है दिल वालों की दुनियाँ गम-ए-दिल की है ये हम पर मेहरबानियाँ नहीं बस सका मेरे प्यार का आशियाँ सुनने को तरसे हम खुशियों की शहनाइयाँ देखे हैं डूबे हुये ख्वाबो
Dec 29 2009 11:48 AM
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"तुम्हारी उपमा"

क्यों निहारते हो सुबह से मुझे दिन सारा फिर कहते हो शाम हो गयी मगर दिल नहीं भरा गम की शब में याद आता है वो सिरफिरा जिसकी ज़िन्दगी थी एक सुरंग मैं ही उसका ये सिरा मैं ही उसका वो सिरा तुम कहते हो चुप रहती हूँ मैं अकसर बटोरती रहती हूँ तुम्हारी उपमा के टुक
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महक उठी जैसे कस्तूरी

महक उठी जैसे कस्तूरी रोशन हुई मंज़िलें अंधेरी गिरती बहकती आसमान पर चली नाता नहीं किसी रहगुज़र से कोई बैठी जब दर पर फुरसत से कभी तपती जमीन ने दी शबनम की नमी बनकर एक गुमनाम कहानी छोड आयी थी यार की गली झूमती रही फकीरन बनी जब भी तेरी सदा सुनी भटकी जैसे रात
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चौथ की रात

चौथ की रात का अंधेला उससे लिपटा चाँद सुनहला जीवन की अविरल छाया सा प्रेम सराबोर स्वच्छ रूप तुम्हारा मेरी विपसना, मेरी तपस्या और सारी नेकियों का सिला चौथ की रात का अंधेला.. विंध्याचल सी अड़िग विभोर निर्मल सुशोभित तेरी काया शशि का तेज़ नेत्रों में हिमकण
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तस्वीर और क्षणिकायें

एक एक फर्क है इस तस्वीर में और तुममें इसमें तुम मुस्कुराते हो... दो लम्हों को सजाने के लिये ली थीं तुम्हारी तस्वीरें तस्वीरें यहीं हैं लम्हें कहीं नहीं यादें तो बहुत थीं तुम्हारी, पास मेरे मगर क्या करुँ ख्वाबों मे सारे धंधला गये चेहरे तुम्हारे ... ती
Dec 29 2009 11:48 AM
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इक शाम

बिखरे हुये लम्हों की लडी बना ली है जब चाहे गले मे डाल लीजब चाहे उतार दी झील का सारा पानी उतर आया आँखों में न जाने कितनी गागर खाली हैं तैरता था उसमें तिनका कोई जो यूँ ही आँखों छलक गया कभी हौले से उतरूँ सैलाब की रवानियों में कि मेरी गागर अभी खाली है इन
Dec 29 2009 11:48 AM
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सपन

चपल-चपल होये अंतर मन मे उमड़-घुमड़ घटा देखो छाई भीगी-भीगी ऋतु में सुधि पिया की फिर आयी थिरक-थिरक अँगिया में छनन-छनन पायलिया बाजी घनघोर हुयी बदरिया कि कारी घटा देखो फिर छाई सरर-सरर बल खा भागी झरर-झरर मारी प्रेम पिचकारी हाथन मा लागी मेंहदी दर पर मोरी ब
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शायरी

ये हाल हमारा है या तुम्हारे हाल का हम इज़हार करते हैं नज़रों से नज़रें मिलती हैं फिर लबों पर कुछ सवाल बार बार उठते हैं बेहाल से हम तुम्हारा इन्तेज़ार करते हैं ये खयाल तुम्हारा है या हम खयालों से प्यार करते हैं...
Dec 29 2009 11:48 AM
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दिल के दर्पण

जब दिल होता है बहुत उदास कर न पाते हैं कुछ हदें बरदाश्त दिल के दर्पण में झलकता दिखता है तुम्हरा चेहरा फलकता है पानी इन नैनों से ढलती जाति है सांझ बढता जाता है दर्द कहीं खो जाते हैं हम तुम्हारी आखों के समंदर में जैसे सूरज ङूब जाता है वादों में हम तो ड
Dec 29 2009 11:48 AM
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झूठा सच

मैंने एक दिन उनसे कहा.. बहुत खुश हूँ मैं कहने लगे झूठी हो तुम वाकई खुश होती तो कहना भूल जाती कि बहुत खुश हूँ मैं...
Dec 29 2009 11:48 AM
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रंग

एक अन्धे बच्चे से पूछा मैंने क्या तुम्हें पता है रंग कैसा होता है? बच्चा मुस्कुरा कर बोला... दीदी! मालूम है मुझे, अंधा हूँ तो क्या हुआ? मेरे चेहरे पर खिलती आपकी मुहब्बत जैसा होता है...
Dec 29 2009 11:48 AM
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मैं कुछ दिनों तनहाई चाहती हूँ

मैं कुछ दिनों तनहाई चाहती हूँ हर बन्धन से बिदाई चाहती हूँ... कई ख़्वाब खेले पलकों पर फिसले और खाक़ हो गये बीते थे तेरे आगोश में वो लम्हें राख हो गये एक रात गुजरे दर्द के आलम में क़ुछ ऐसी रहनुमाई चाहती हूँ मैं कुछ दिनों तनहाई चाहती हूँ... रफ़्ता-रफ़्ता
Dec 29 2009 11:48 AM
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स्त्री

तुम्हारी सादगी, स्नेह, समर्पण अपनी प्रेरणा बनकर रमते देखा है परिवार रिश्तों को सहेजते तुम्हें मुझसे उपर उठते देखा है असम्भव से सम्भव का प्रयास सपनों को धरातल पर बुनते देखा है जब जब हारा और मैं पस्त हुआ तुम्हें दिशा बनकर बिछते देखा है किसनें कहा फरिश्
Dec 29 2009 11:48 AM
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कब तुम आते हो

कब तुम आते हो कब तुम जाते हो वायुमंडल के मध्यांतर में सुगन्ध बिखरी सी है धुंध आप ही छँट जाता है अन्धकार सब हट जाता है मेरी बेकरारी को कितना तरसते हो कब तुम .... हर मोड़ से कई रास्ते निकलते हैं हर रास्ते पर कई मोड़ मिलते हैं फासलों को छुओ तो कुछ दूर औ
Dec 29 2009 11:48 AM
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Dreams!!!

When all your Dreamsare crushed and crumbledlying on the doorway of your Heart you will hear a slightsquashed Lubdub soundstill something Lingers in youstill something is Living inside youand that something is HopeHope that creeps uplike a little sweet
Dec 11 2008 07:11 AM