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दर्पण के टुकड़े

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10 Apr 2010
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परवाना खुद शमा की लौ पे जल मरा कोई क्या करे

क्यों नही समझता तू दर्द को मेरे कभी क्यों समझता है कि मेरे सीने मे कोई दिल नहीं क्यों मरा कैसे मरा चाहे जिस पे इल्जाम दे पर सच बता हमदम मेरे क्या तू मेरा कातिल नहींखुद खुशी पाई ना आंचल तेरे खुशियां भर सकाबेमेल प्यार से किसी को कुछ हुआ हासिल नहींपरवाना
 
Krishan lal "krishan"
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ऐसे भी तड्पाता है कोई यार अपने यार को

या तो वक्त से कहो रोके अपनी रफ्तार कोया मना लाये वो जाके रूठे हुये यार को हर सांस पे लगता है ये अब थमी कि तब थमी ऐसे भी तड्पाता है कोई यार अपने यार को या तो खुद आओ या सांसो से कहो कि आये ना कोई तो राहत मिले तेरे इश्क के नीमार को और दर्द और जख्म हमको वो
 
Krishan lal "krishan"
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यार जब दिल मे कोई बस जाये तो क्या कीजीये

यार जब दिल मे कोई बस जाये तो क्या कीजीये दिन रात वो ही याद जब आये तो क्या कीजीयेलोग माहिर हैं भुला देने मे अपने प्यार को हम से इस तरह ना भूला तो क्या कीजीये दिल दिया है उसको तो हम जान भी देंगे उसेइन्तजार उससे थोडा ना हो पाये तो क्या कीजीयेधीरे धीरे प्यार
 
Krishan lal "krishan"
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यार को हम बीच राह छोड दे मुमकिन नही

या तो वक्त से कहो रोके अपनी रफ्तार कोया कही से द्गून्ढ लाये जाके मेरे यार कोयार को हम बीच राह छोड दे मुमकिन नहीं इससे तो बेहतर है ये हम छोड दे सन्सार को जब दिल मे उसके बीज शक का अकुरित हो ही गयादिन बचे क्या बाकी फिर दम तोडने मे प्यार कोआन्धी ना तूफान फिर
 
Krishan lal "krishan"
Apr 03 2010 07:39 PM
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इसके बाद शायद ना लिखु शायद ना लिख पाऊं

इसके बाद शायद ना लिखु शायद ना लिख पाऊंसोचा चलते चलते आखिरी रचना लिखता जाउंअपने अपने मापदण्ड खुद बना लिये है सबनेऔर उन्ही मापदण्डो पे औरो को लगते कसने अच्छे बुरे की परिभाषा कुछ ऐसी सब ने बनायी जो बात लगी अच्छी खुद को उसमे ही दिखी अच्छाईअपनी गलती नज़र नही
 
Krishan lal "krishan"
Mar 06 2010 04:49 PM
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जो प्यार किताबी रह जाए उस प्यार नहीं मै कह सकता

जो यार के काम ना आये कभी उसे यार नही मै कह सकता जो प्यार किताबी रह जाए उस प्यार नही मै कह सकता सह सकता हूँ दुःख गम या तकलीफ चाहे जितनी भी हो बस खुशी मुझे कोई दे जाए तो थोड़ी भी नही सह सकता जुबां पे कुछ और दिल में कुछ ये रीत है दुनिया वालो की लो तुम ही
 
Krishan lal "krishan"
Mar 06 2010 03:16 PM
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जला है यूं घर का मेरे तिनका तिनका

अंधेरो में रहने की आदत है हम को उजालो में आने से डरते बहुत हैं तेरे आने से घर हो सकता था रौशन पर आँखे चोंधियाने से डरते बहुत हैं जिसे भी दिखाए उसी ने कुरेदे जख्मो की अपनी यही दास्ताँ है बेवजह नही जो किसी मेहरबान को जख्म अब दिखाने से डरते बहुत हैं अभी तक
 
Krishan lal "krishan"
Mar 06 2010 12:08 PM
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जब प्यासा मरना किस्मत है तो नदी किनारे क्या मरना

हसरत मार के जीना है तो तेरा साथ भी क्या करना खुद भी परेशां क्या होना,तुझ को भी परेशां क्या करना दामन फटा ही रहना है तो रफुगर कोई मिला ना मिलाजब चाक गरेबां सीना नहीं तो सुई या धागा क्या करना बून्द बून्द को तरसा दे उस जल के स्त्रोत से क्या हासिलवो नदिया हो
 
Krishan lal "krishan"
Mar 06 2010 11:52 AM
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दर्पण के टुकड़े

कौन वो मेरा क्या है तुम ही कुछ मुझ को बतलाओमेरा होकर भी मेरा नहीं क्या लगता है कुछ समझाओहम दूर दूर रहते हैं लेकिन पास पास भी रहते हैंदिल की सारी बाते अक्सर हम इक दूजे से कहते हैंइक दूजे के काँधे पे सर रख साथ साथ हम रोये हैंइक दूजे का हाथ पकड़ अक्सर
 
Krishan lal "krishan"
Mar 04 2010 01:25 PM
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या तो अब तुझ संग जीना है या फिर तुझ संग ही है मरना

प्यार तेरा नफरत में बदल जाए वो काम नही करना अपनी खुशी के लिए यासा किसीका दामन गम से क्या भरना हमको तो आदत है यूं भी प्यासा जीते जाने की दो घूँट पानी के लिए किसी कूए को जूठा क्या करना ये होठो तक की प्यास नहीं दिल भी प्यासा मन भी प्यासा ये प्यास किसी से
 
Krishan lal "krishan"
Mar 02 2010 11:09 AM
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दर्पण के टुकड़े

संभल संभल के अनजानी राहों में चलना होता हैलौट के वापिस आ पाना वरना मुश्किल होता है पूरा कर सकते ही नहीं वो ख़्वाब किसीको मत दिखलाख़्वाब टूट जाने का गम यारा बहुत बुरा होता हैजब साथ निभाने की दिल में ना चाहत है ही हिम्मततो बात बात में हाथ पकड़ने से फिर यारा
 
Krishan lal "krishan"
Mar 01 2010 11:59 AM
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अंग अंग जब तक ना भीगे तब तक होगी होल़ी

कभी खेला करते थे होली जिद्द कर के हम सबसे पर जब से हुआ बदरंग ये जीवन छुए नही रंग तबसे यूं तो होली खेलने अब भी साथी घर आते हैं पर जीवन हो बदरंग तो फिर रंग कहाँ कोई भाते हैं तुमने जानू कह कर मेरी जान ये क्या कर डालारंगहीन जीवन में मेरे फिर से रंग भर डाला
 
Krishan lal "krishan"
Feb 28 2010 09:30 AM
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गंगा खुद नाले में गिर जाए तो नाला क्या करे

मंजिले सब से जुदा हैं रास्ते भी हैं जुदाहमसफर कोई ना बने तो फिर मुसाफिर क्या करेनाले का गंगा में मिलने का तो कोई हक़ नहीपर गंगा खुद नाले में मिल जाए तो नाला क्या करेआग लगने से बचा रखा था सूखी घास कोचिंगारी कोई डाले तो घास ना जले तो क्या करेसाजे दिल के
 
Krishan lal "krishan"
Feb 27 2010 02:57 PM
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तुम पहले दोस्त बनी होती तो बात ही कुछ और होती

तुम पहले दोस्त बनी होती तो बात ही कुछ और होती कुछ पहले और मिली होती तो बात ही कुछ और होती ये सूरज पहले निकल आता मेरे दिन कुछ और हुए होते ये चांदनी पहले खिली होती तो रात ही कुछ और होती ता उम्र अकेले तन्हा ही मै यहाँ वहां भटका ही किया तेरा साथ मिला होता
 
Krishan lal "krishan"
Feb 22 2010 06:15 PM
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अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया

अब तक तो दर्पण टूटा था कोई अक्स भी आज तो तोड़ गया पहले छूटे रिश्ते नाते लेकिन इक साया साथ में था जाने कहाँ हम से चूक हुई साया भी साथ को छोड़ गया पहले भी जख्म मिले हैं बहुत पर वक्त ने उनको भर डाला नासूर से भी ज्यादा गहरा कोई जख्म वो दिल पे छोड़ गया वो पल पल
 
Krishan lal "krishan"
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वो मेरे करीब इतना आई मै समझा सब कुछ सुलझ गया

जो होना था जो होता है आखिरकार तो वो ही हुआवो अपनी राह में चली गयी मै अपनी राह पे चता गयाइक बार कहा था उसने हमें जो होगा दोनों निपट लेंगेबिंदास जियो और खुल के जीयो हैं साथ तो सबसे निपट लेंगेवो मेरे करीब इतना आई मै समझा सब कुछ सुलझ गयाअहसास हुआ छोटेपन का
 
Krishan lal "krishan"
Feb 20 2010 03:38 PM
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मेरे यार सा सच्चा यार बड़ी किस्मत वालो को मिलता है

तुम बिन रहना मुश्किल ही नही नामुमकिन सा लगता हैहर पल या तुम संग बीतता है या तेरी याद में कटता हैकिस हद तक दिल में समाई हो इसका तुमको एहसास नहीदिल जितनी बार धडकता है तेरे नाम की माला जपता हैसांस तेरी साँसों में मिल kar आती है तो लगता उम्र बढीवरना तो सांस
 
Krishan lal "krishan"
Feb 19 2010 11:19 AM
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क्यों होता है ऐसा क्यों होता है

क्यों होता है ऐसा ऐसा क्यों होता हैजरा सा दे कर के चाहते हैं एहसान बड़ा हो जाएचंद ईंटो और पत्थरों से कोई ताज खड़ा हो जाएहींग लगी ना फिटकरी और रंग भी चोखा आयेसब क्यों ऐसा चाहते है कि ऐसा गधा मिल जायेवजन तो पूरा ढोए लेकिन घास जरा ना खाए ऐसा भला कहाँ होता है
 
Krishan lal "krishan"
Feb 19 2010 10:34 AM
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ऐ मेरे खुदा इतना भी ना दे जितनी मेरी औकात नही

सब से सुन्दर फूल है जो इस दुनिया के गुलशन का अर्थी पे वो आके चढ़े ये तो कोई अच्छी बात नही वो कोहीनूर का हीरा है किसी ताज पे ही शोभा देगा फकीर की झोली पड़ा रहे ये तो कोई अच्छी बात नही रानी महारानी बनने का अधिकार जिसे कुदरत ने दिया महलों की जगह खंडहर में
 
Krishan lal "krishan"
Feb 14 2010 01:59 PM
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हुस्न की वो मल्लिका है और वो भी पूरे शवाव पे है

माना ये कि पास में उसके दौलत-ऐ हुस्न अपार हैपर काम किसी के ना आये तो सब दौलत बेकार हैहुस्न की वो मल्लिका है और वो भी पूरे शबाब पे हैहम है किस गिनती में उसके चाहने वाले हजार हैछूने से उसको डरते है मर ही ना हम जाए कहींजब देखने भर से ही उसको इश्क का चढा
 
Krishan lal "krishan"
Feb 12 2010 01:38 PM
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किसी ने हमसे प्यार किया हो ऐसा पहली बार हुआ है

देर से ही पर खुदा मेहरबां हमपे नहुत इस बार हुआ हैदुनिया में जो सब से हसी है उसको हमसे प्यार हुआ हैतानो या उल्हानो से तो झोली अपनी भरी रहीकिसी ने उस में प्यार भरा हो ऐसा पहली बार हुआ हैजख्म दिए हो किसी ने हमको ऐसा सारी उम्र हुआ हैपर मरहम लेकर कोई घर आया
 
Krishan lal "krishan"
Feb 10 2010 01:01 PM
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तो फर्क बचा क्या गली के आशिक और तेरे दीवाने में

वापिस लौट जा ऐ राही या राह बदल ले फिर कोईशायद कुछ भी हासिल ना हो तुझ को मेरे वीराने मेंतेरा मिलना तय था बेशक जीवन के इस सफर में लेकिनतेरा बिछुड़ना सोचा तक नही हमने जाने अनजाने मेंकुछ भी मुमकिन नजर तुझे नही आता अपनी कहानी मेंपर कुछ भी नामुमकिन सा नही ऐ
 
Krishan lal "krishan"
Feb 10 2010 12:22 PM
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लगी हाथ में है प्यार की इक किताब अभी अभी

अब देखिये क्या रंग दिखाता है रेड रोज़उन्हें आज हमने दिया है इक गुलाब अभी अभीउस फूल में भी दिल मेरा आये उसे नजरदिल के लहू से है रंगा गुलाब अभी अभीता उम्र बदली करवटे ना नींद थी ना ख़्वाब थालगी आँख तो दिखा तेरा है ख़्वाब अभी अभीता उम्र मिले जख्म तो अब जा के
 
Krishan lal "krishan"
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मंजिल कही होती है तो राहे ले जाती है कहीं

आगाज से अंजाम का अंदाजा लगता है नहीमंजिल कहीं होती है और राहें ले जाती हैं कहींख्वाहिशो के अंकुरित होने पे खुश क्या होईयेपौधा कभी बनती नही फल कभी लगते नहीवो आदतन ही मुस्कराता है तो क्या पता चलेकौन सी मुस्कान उसकी प्यार है कौन सी नहींअब ऐसे मेहरबां से
 
Krishan lal "krishan"
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नही आज तो कल दिल का शीशा टूट जाना है जरूर

देखिये अब जिन्दगी रंग दिखलाती है क्यावक्त ने खोला है फिरसे हम पे दरवाजा नयादोस्त या दुश्मन कहूं इस वक्त को तू ही बतायूँ तो मिलाता है मगर मिलते ही करता है जुदाजगती है उम्मीद कुछ पाने कि जब भी जिन्दगी सेये वक्त लाकर आइना हमको देता है दिखाक्या मुकद्दर है
 
Krishan lal "krishan"
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मेरे क़त्ल की साजिश, वही, रचते रहे है रात भर

किसके लिए और किसलिए रोये हम रात रात भरतुम रही खामोश या तेरी कही किसी बात पर बन के बदली तुम बरस जाती तो करते शुक्रियावैसे गुजारिश के सिवा मेरा बस कहाँ किसी बात परज़िन्दगी भर ही हसीनो ने हमें धोखा दियातुम्ही कहो कैसे भरोसा अब कर लूँ औरत जात परकोशिश भी की
 
Krishan lal "krishan"
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इसे मान लेना तुम बेशक अंतिम इच्छा मेरी

इसे मान लेना तुम बेशक अंतिम इच्छा मेरीमरू तो हाथो में रख देना तस्वीर कोई इक तेरीइसके बाद इक रोज़ खुदा से अपनी मुलाक़ात होगी शिकवे शिकायत होंगे आमने सामने हर बात होगीआखिर में पूछे गा खुदा अब बता क्या मर्ज़ी है तेरीकहूंगा मैं कि मेरे खुदा बस इतनी अर्ज़ है
 
Krishan lal "krishan"
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क्यों अपने रंग रूप का इतना तुझे गरूर है

क्यों अपने रंग रूप का इतना तुझे गरूर हैहै अब जवानी की दोपहरी तो सांझ कितनी दूर हैइक बार सांझ हो गयी तो रात भी घिर आयेगीफिर लाख तूं करना यत्न वो बात न रह पायेगीआँखों से कुछ दिखना नही तो नैन लड़ने किससे हैंमुंह में दांत ही ना होंगे तो हंस के किस को
 
Krishan lal "krishan"
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हम किनारे पर भी होते तो भी डूबते सनम

इससे तो अच्छा था नश्तर ही चुभा जाता कोई मरहम लगाये बिन अगर जाना था वापिस यार को बीमार जानता है जब कि मर्ज़ लाइलाज है बेकार है झूठी तसल्ली देना फिर बीमार को गर जीता जाए दिल किसीका हार कर अपना अहमजीत से बेहतर समझ लो ऎसी हसीं हार को माझी ही चाहता ना था कि
 
Krishan lal "krishan"
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प्यार नही करना है तो फिर जताती क्यों हो

प्यार नही करना है तो फिर प्यार जताती क्यों होदूर दूर रहना है तो फिर पास में आती क्यों होदिल से दिल ही नही मिले तो जिस्म मिलेगे कैसेनही मिलाना दिल से दिल तो हाथ मिलाती क्यों होप्यास बुझाने की तुझ में ना चाहत है ना हिम्मत प्यास बुझा सकती ही नही तो प्यास
 
Krishan lal "krishan"
Jan 21 2010 02:40 PM
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जी करता है कभी मै तेरे होंठ गुलाबी चूमू

तुम चाहो तो मान लो ये की मुझे है तुम से प्यारजी करता है कभी मैं तेरे होंठ गुलाबी चूमूं कभी तुझे आगोश में लेकर बिना पीये ही झूमुया होठों से कोई गजल लिखूं तेरे गालो पेया कोई गीत बनाऊं तेरे मखमली से बालों पे या गदराये जिस्म के तेरे अंग अंग पे लिखूं कविताया
 
Krishan lal "krishan"
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तुम चाहो तो कह सकती हो मुझे है तुम से प्यार

तुम चाहो तो ये समझो कि गया मै तुम से हार तुम चाहो तो मान लो ये कि मुझे है तुम से प्यार और अगर चाहो तो समझो तुम बिन रह नही सकताजो चाहो वो समझो लेकिन मै कुछ कह नहीं सकताहाँ इतना कहूगा और नही अब कर सकता इन्तजारतुम चाहो तो मान लो ये कि मुझे है तुम से प्यारना
 
Krishan lal "krishan"
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आसमां छोटा पड़ेगा इक दिन उसकी परवाज को

जीत का ये हुनर उसको शायद खुदा की देंन हैहर एक बाजी जीतता है पहले बाजी हार केये नही शतरंज ये तो इश्क की बिसात हैजीती जाती है यहां हर एक बाजी हार केजान खुद दे दूंगा हंस के जाके कहो मेरे यार सेक्यों काम नाहक ले रहा hai तीर से तलवार से आसमां छोटा पड़ेगा इक
 
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मन के दरवाजे पे दस्तक देना ही काफी नहीं

प्यार क्या होता है कोई सीखे मेरे यार सेना गरज दौलत से उसको ना मेरे घरबार सेना उसे मौसम की परवाह ना उसे दुनिया का डरवारी मै हिम्मत पे उसकी सदक़े उसके प्यार पेमन के दरवाजे पे दस्तक देना ही काफी नहींघर के दरवाजे पे दस्तक शामिल है उसके प्यार में raam jaane
 
Krishan lal "krishan"
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प्यार क्या होता है कोई सीखे मेरे यार से

प्यार क्या होता है कोई सीखे मेरे यार से नागरज दौलत से उसको ना मेरे घरबार सेना उसे मौसम की परवाह ना उसे दुनिया का डर वारी मै हिम्मत पे उसकी सदक़े उसके प्यार पेमन के दरवाजे पे दस्तक denaa ही काफी नहीं घर के दरवाजे पे दस्तक शामिल है उसके प्यार में जाने
 
Krishan lal "krishan"
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बेवजह तो दिल धडकता है कहां यूं जोर से

जब से वो हमसे और उनसे हम मिलने लगे जिन्दगी के सारे मायने ही बदलने लगेता उम्र तो अकेले ही तय किया सारा सफरहै खत्म होने को सफर तो हमसफर मिलने लगेबेवजह तो दिल धडकता है कहां यूं जोर से दिल की गली से लगता है वो होके गुजरने लगेयकीनन ही दिन बहारों के कुछ दूर अब
 
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चन्द सिक्को की खातिर अपना यार बदल गया पाला

चन्द सिक्को की खातिर अपना यार बदल गया पालाजपने लगा है अब तो वो किसी और के नाम के मालामाली और सैयाद मे जिस को फर्क नजर नही आतादाना चुगते चुगते परिन्दा जाल में वो फस जाताकान्टे के सग लगा केचुआ मछली गर खायेगी हो कितनी होशियार वो मछली आखिर फस जायेगी ये
 
Krishan lal "krishan"
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इससे तो अच्छा था कि नश्तर ही चुभा जाता कोई

ज़ब से वो हम से और उनसे हम मिलने लगेजिन्दगी के सारे मायने ही बदलने लगेडर ये है कि फिर नया कोई जख्म ना मिले हमेउम्मीद ये कि शायद किस्मत अबसे बदलने लगेडर डर के राहे इश्क मे रखना था हर कदम मगर इक बार देखा फिर तो कदम खुद ब खुद चलने लगे ना कोई चाहत ना थी
 
Krishan lal "krishan"
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दर्पण के टुकड़े

मेरी नजरो से तुम खुद को देखो खुद को जानो तुम तुम सा सुंदर कोई नहीं ये बात मेरी सच मानो तुम होंठ गुलाबी नयन शराबी रेशमी जुल्फें काले बाल बिना पीये ही झूम उठे देखे जो तेरी लहराती चाल सुडोल नयन नख्श तीखे चहरे पे गज़ब का नूर ऐसा लगता है धरती पे उतर आयी ज
 
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याद करते है हम तो तुम्हें रात दिन

तेरे दिल मे भी है तेरे कदमों मे भी जाने क्यों फिर नजर तुझ को आते नहीं प्यार करते है जान से भी ज्यादा तुम्हें बात इतनी है बस हम बताते नहीं याद करते है हम तो तुम्हें रात दिन है खता ये कि तुम को जताते नहीं बात किससे करें कोई अपना तो हो गैर लोगो से कुछ ब
 
Krishan lal "krishan"
Dec 29 2009 11:39 AM