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गुजरात के बोलो तो साहब जलते हुए मंज़र देखे हैं ?
ग़ज़लजंगल के दरिन्दे तो देखे, बस्ती के पयंबर देखे हैं ?गुजरात के बोलो तो साहब जलते हुए मंज़र देखे हैं ?गाते हो समन्दर की गाथा, लहरों की अदा पे रीझे हो,हे महामहिम बोलो तो सही, आँखों के समन्दर देखे हैं.रो-रो के सिसकर मांगे थे जो जान को अपनी मुश्किलमें
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Jun 16 2010 06:43 PM


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