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03 Jun 2010
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कुछ पोस्टें , देखी अनदेखी सी (पोस्ट झलकियां )

    बीबीसी हिंदी ने अपने पत्रकार साथियों को अपने मन की बात अपने तरीके से कहने के लिए ,के लिए बीबीसी ब्लोग्स मंच प्रदान कर रखा है । इस मंच पर प्रतिदिन अलग अलग पत्रकार जो देश विदेश के अलग अलग कोने में अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं न सिर्फ़ अपने
 
अजय कुमार झा
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कुछ पोस्टें , देखी अनदेखी सी (पोस्ट झलकियां )

    बीबीसी हिंदी ने अपने पत्रकार साथियों को अपने मन की बात अपने तरीके से कहने के लिए ,के लिए बीबीसी ब्लोग्स मंच प्रदान कर रखा है । इस मंच पर प्रतिदिन अलग अलग पत्रकार जो देश विदेश के अलग अलग कोने में अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं न सिर्फ़ अपने
 
अजय कुमार झा
Jun 01 2010 09:37 PM
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आज लिखी पढी गई कुछ पोस्टें (पोस्ट झलकियां )

      बीबीसी हिंदी ब्लोग में आज हफ़ीज़ चाचड कहते हैं … हफ़ीज़ चाचड़ | सोमवार, 31 मई 2010, 09:52 टिप्पणियाँ (2) शनिवार को कराची प्रेस क्लब गया तो वहाँ मेरे कुछ पत्रकार मित्र हिंदी और उर्दू भाषा के बीच हुए विवाद पर चर्चा कर रहे थे. मैंने कहीं
 
अजय कुमार झा
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सिर्फ़ नाम की "हाऊसफ़ुल" : फ़िल्म समीक्षा , एक आम दर्शक की नज़र से

अभी कल परसों ही फ़ैमिली जिद पर अड गई कि पिक्चर देखने जाना है, मुझे सिर्फ़ फ़रमान सुनाया जाता है , पूछा नहीं जाता , सो सब के सब चल दिए , देखने , टिकट मुझे पहले ही लाना पडा , और इसके बाद जुल्म ये कि अगले ढाई तीन घंटे तक पूरी पिक्चर को भी झेलना पडा । बस उसी
 
अजय कुमार झा
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जाने क्या क्या पढ गया , जो पढा सब यहां धर गया …(पोस्ट झलकियां)

      पहले नवभारत टाईम्स ब्लोग से देखिए कि,  जो है सो है होमवर्क खरीदने का जमानाराजेश कालरा Friday May 14, 2010 मेरा आम तौर पर यह प्रयास रहा है कि मैं ब्लॉग के लिए ऐसे टॉपिक उठाऊं जो हमें, यानी आम लोगों को प्रभावित करे। मुझे यह लगता
 
अजय कुमार झा
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"ब्लोग बोलता है" : ब्लोग + रेडियो : व्हाट एन आईडिया सर जी !

कल जब इस पोस्ट पर भाई खुशदीप ने टिप्पणी की कि , क्या मैंने कभी रेडियो प्रसारण सेवा में हाथ आजमाने की नहीं सोची तो मुझे बताना पडा कि एक दशक पहले जब मेरा अंतरिम चयन पटना औल इंडिया रेडियो के लिए समाचार वाचक /अनुवादक के पद पर हुआ था , मगर अंतिम चयन नहीं हो
 
अजय कुमार झा
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नो चर्चा , ओनली सूचना : अपनी ब्लोग्गिंग , अपनी कमाई

        जी हां आज कोई चर्चा नहीं , वैसे भी ये तो हिंदी ब्लोग्गर्स ही हैं जो तरह तरह की चर्चाएं झेल रहे हैं एक ही दिन में , जाने कितनी कितनी बार । और कुछ हमारे जैसे ब्लोग्गर भाई बंधु , पता नहीं इतने फ़जीहत के बाद भी ढीठ की तरह चर्चाएं
 
अजय कुमार झा
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जस्ट एन कटपिटिया चर्चा जी …झा जी कहिन

  बुधवार, १४ अप्रैल २०१० परिकल्पना ब्लोगोत्सव-2010 का भव्य शुभारंभ मैं समय हूँ , मैंने देखा है वेद व्यास को महाभारत की रचना करते हुए , आदि कवि वाल्मीकि ने मेरे ही समक्ष मर्यादा पुरुषोत्तम की मर्यादा को अक्षरों में उतारा...सुर-तुलसी-मीरा ने
 
अजय कुमार झा
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कुछ पोस्टें और पढिए …..( पोस्ट झलकियां ) ...झा जी कहिन

    सोमवार, ५ अप्रैल २०१० फिर सावन रुत की पवन चली ……………….महेन आज हम एक और कलाकार का आगाज़ यहाँ करना चाहते हैं जोकि कम मशहूर हैं मगर उनकी चंद गज़लें हम दो दोस्तों को बेहद पसंद आयीं थीं और हमनें उनकी कैसेट मिलकर लम्बे अरसे तक तलाश की थीं। दरअसल
 
अजय कुमार झा
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पूरे अंतरजाल में खुले सांड की तरह विचरते हैं , देखिए फ़िर हम कैसी चर्चा करते हैं , …….पोस्ट, पत्रिका, वीडियो, बज ….सब माल है जी ..

  सबसे पहले चलते हैं बीबीसी ब्लोग्स की ओर देखिए क्या कह रहे हैं विनोद वर्मा जी हाइवे पर हम्माम विनोद वर्मा | मंगलवार, 06 अप्रैल 2010, 15:06 IST शेरशाह सूरी ने जब ग्रैंड ट्रंक रोड बनवाई तो उन्होंने सड़कों के किनारे पेड़ लगवाए, सरायें बनवाईं और कुँए
 
अजय कुमार झा
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चर्चा रविवार की : हमने फ़िर तैयार की

    आज रविवार था सो आपको ब्लोग जगत की हलचलों से रूबरू करना जरूरी था , इसलिए हम हाज़िर हो गए हैं लेकर कुछ पोस्टों की झलकियां । वैसे तो इन दिनों सिर्फ़ सानिया की ही धूम है , मगर बहुत लोग इसके अलावा भी पढ लिख रहे हैं जी ,,,,देखिए आज कौन क्या कह रहा
 
अजय कुमार झा
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बिना पोस्ट , बिना लिंक्स वाली चर्चा ……हें हें हें हम कुछो कर सकते हैं जी ……हायं …

  देखिए जी अपनी खोपडी है कि खोपडा ..हमें नहीं पता ..ससुरी धरती की तरह घूमती ही रहती है ..कभी ब्लोग्गर और ब्लोग की आपसी बातें सुन लेती है …तो कभी बिना मतलब उनकी वसीयत तैयार कर देती है ….और कभी ये कर डालती है ..आप खुद ही देखिए न ….हां है वही …..अरे
 
अजय कुमार झा
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भाड में जाए ब्लोग्गिंग मैं छोड रहा हूं इसे ........अजय कुमार झा ....

भाड में जाए ब्लोग्गिंग मैं छोड रहा हूं ........कारण स्पष्ट है बिल्कुल ...............................क्या हुआ जी .............???????????आज के दिन कुछ छोडने के लिए इससे अच्छा और क्या हो सकता था ...आखिर मूर्ख दिवस यानि अप्रैल फ़ूल डे है भाई ..........और
 
अजय कुमार झा
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हिंदी ब्लोग्गिंग भी करवट बदल रही है , कुछ पोस्ट झलकियां …….

  अब कोई कह के दिखाए कि हिंदी ब्लोग्गिंग में गंभीरता नहीं दिखती । पिछले कुछ दिनों में आई पोस्टों और उनपर हुई बहस ने बता और जता दिया है कि आने वाले समय में हिंदी ब्लोग्गिंग पर हो रही हलचल, विमर्श , बहस और उसका निष्कर्ष के बहुत बडे मायने होंगे । और
 
अजय कुमार झा
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आज चर्चा सांझ सकारे : लिंक्स हैं प्यारे प्यारे

    हमें क्या पता था कि आपको हमरी कट पेस्ट भी गुड बेटर बेस्ट लगने लगेगी । आप सब न एक दम झूठे हैं जो कुछ भी धर दें आप कह देते हैं बढिया है । अब हमको तो लगेगा ही कि बढिया है …लिया जाए आज की चर्चा भी झेलिए …     फलों से डर लगता है! प्रभु
 
अजय कुमार झा
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सिर्फ़ कट पेस्ट चर्चा : कुछ ब्लोग्स लिंक्स

  आज खाली कट पिटिया चर्चा …अरे खाली कट पेस्ट यार …..का लुत्फ़ उठाईये ….बस उठाते गए ..चेपते गए …आप भी झेलते जाईये ……. यहां घोषणा हुई कि महफ़ूज़ मियां खो गए …… कहां महफूज़ है एक स्टार ब्लॉगर...खुशदीप कल मैनपुरी से ब्लॉगर भाई शिवम मिश्रा का फोन
 
अजय कुमार झा
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एक और चर्चा झेलिए …..झाजी चर्चा वाले …..

  मुझे क्या पता था कि पिछला ट्रेलर आप सबको खूब पसंद आएगा ..हम तो सोच रहे थे कि सब कहेंगे कि अरे कहां फ़ंस गए झाजी ..आप तो बस अपनी टरेन दौडाईये ….धडाधड पटरी बिछा के …और हमको भी ई ससुर लाईव राईटर के स्यापे से मुक्ति मिलेगी …अरे ई इतना स्लो है कि का
 
अजय कुमार झा
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आज तो पोस्टों की चर्चा …हां चर्चा कर ही ली …(पोस्टों की चर्चा )

  ओईसे तो ब्लोग पटरी बिछाने का काम हमारा खूब जम जमा के चल रहा था पर सोचे कि बहुत लोग कह रहे हैं कि का जी ..ई आप लोग सब संगी साथी मिल के खाली लिंक पटक कर कहते रहिएगा कि चर्चा कर दिए हैं । अरे चर्च का मतलब तनिक चर्चियाईये भी …तो हम सोचे कि जब ई गूगल
 
अजय कुमार झा
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कुछ नई रेलों की नई पटरियां (ब्लोग लिंक्स , दो लाईना , और क्या )

आज बहुत दिनों बाद फ़िर पटरियां बिछाने का मन हुआ , मगर जब स्टेशन पर पहुंचा तो सोचा कि , सभी सुपर फ़ास्ट, शताब्दी , राजधानी, गरीब रथ , दोरांतो तो धडाधड दौडी जा रही हैं , कुछ छोटी छोटी सुंदर सी रेलें इंतजार करती रह जाती हैं कब पटरी बिछें और उन्हें भी दौडने का
 
अजय कुमार झा
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होली है भई होली है ...अब है तो है .....और अब तो हो .ली ..ताजा समाचार ..

बस देखिए जी अभी अभी के ताज़े समाचारों के अनुसार ..झाजी की होली ..कुछ यूं ....होली ..आप खुदे देखिए .. (बुलबुल ....रंग गुलाल को ...... चैक करते हुए कि आखिर इस पैकेट मे था ऐसा क्या....जो इसने ...हमारे दोनों झाजी ..........भैया और पापा का ऐसा हाल कर दिया
 
अजय कुमार झा
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हमने आज इनको देखा , और खींच दी सारी रूपरेखा , (अरे वही ब्लोग लिंक्स यार )

सोचा था कि आज आपको हम अपना फ़ाग राग सुनाएंगे , मगर आज चर्चा का मूड निकल आया तो हाज़िर है फ़िर ....................................रंग भर के ले आये दीपक आज अपना मशाल ,आप देखिए दु लाईना में सबका किया है कैसा हाल ॥ब्लोग्गर के साथ pspo का अजब लगाया कनेक्शन
 
अजय कुमार झा
Feb 27 2010 10:10 PM
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आज फ़िर फ़ुर्सत में हम कुछ ब्लोग्स पढ गए, और साथ साथ उनके लिंक्स हत्थे चढ गए ( कुछ ब्लोग लिंक्स )

जी हां भाई अब तो यही कहना पडता है कि इन ब्लोग्स को हमने घुस घुस कर पढ लिया , काहे से कि चर्चा तो हमारी होती नहीं है न ये .....अरे चर्चा हम करते भी नहीं हैं भाई , तो बस आप भी इन पोस्टों की पूंछ ( अरे हम पूंछ तो पकड के ले ही आए हैं न जी ) पकड के जाईये और
 
अजय कुमार झा
Feb 13 2010 07:43 PM
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आप देखिए और पहचानिए कौन शामिल हुए दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक में

दिल्ली ब्लोग्गर्स बैठक में शामिल हुए सभी मित्र ब्लोग्गर्स को जितनी खुशी हुई और उसके बाद आई रिपोर्टों पर हिंदी ब्लोगजगत के तमाम साथियों ने जिस तरह से बधाई और शुभकामनाएं दीं उसने मुझे विवश कर दिया है कि जो पोस्ट मैं शाम को लिखने वाला था वो अभी ही डाल रहा
 
अजय कुमार झा
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ये पोस्ट चर्चा नहीं सिर्फ़ मेरे द्वारा पढी गई कुछ पोस्टों का लिंक है आप भी पढ सकते हैं

मुझे लगता है कि चिट्ठाचर्चा के नाम से इतनी उठापटक चल रही है , अब तो सीधे सीधे इसे यही कह दूं कि ये रही उन पोस्टों की लिंक जो आज मैं पढते पढते लगा पाया । अब इसका मतलब ये कतई न लगाया जाए कि इसके अलावा कुछ नहीं पढा क्योंकि मैं कितना और कितने ब्लोग्स पढता
 
अजय कुमार झा
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चढते हैं मोटकार, कभी सायकल भी चढा कीजीए, अरे कभी कभी तो अलानी फ़लानी चर्चा भी पढा कीजीए

चलिए भाई , माना कि अपना कोई ब्रांड नहीं है , माना कि अपना दर्ज़ा भी शायद दोयम-तीयम या पता नहीं कौन कौन सा यम है , मगर अब जो है सो तो है ही , उसे जैसे का तैसा आपके सामने धर रहे हैं । झेलिए ......और हां ये हमने अपने आनंद के लिए नहीं समेटी, आपको भी आनंद आए
 
अजय कुमार झा
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पटरियों पर दौडेगी चिट्ठा चालीसा एक्स्प्रेस

मुझे नहीं पता था कि जब मैं इस पर लौटूंगा तो चर्चा की पटरियां "चिट्ठा चालीसा एक्स्प्रेस " बनके आपके सामने उतरेगी । और अभी तो रेल लाईनें बिछ रही हैं , यानि निर्माण कार्य जारी है जी , देखते जाईये और हां अपना अपना रिजर्वेशन करा लीजीये ............लंबी सैर को
 
अजय कुमार झा
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यदि ऐसा ही है तो लीजीये अब चर्चा ही चर्चा

कहते हैं न कि जो होता है उसमें कोई न कोई अच्छाई छुपी होती है , पिछले दिनों चिट्ठों की चर्चा और चर्चाकारों के संदर्भ को लेकर जो बातें हुई उन्हें अब मैं दोहराना नहीं चाहता , मगर शायद अधिक भावुक होने के कारण और शायद इस वजह से कि प्रश्न विवेक भाई जो अनजाने
 
अजय कुमार झा
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तो आखिर क्या हो पैमाना चिट्ठा चर्चा के लिए ???

सबसे पहले तो चंद जरूरी बातें , पहली ये कि झा जी कहिन नहीं बंद हुआ है , न ही वो ब्लोग कहीं जा रहा है अलबत्ता चर्चा या ब्लोग लिंक्स , आप जो भी समझें , उसे मैंने स्थाई रूप से विराम दे दिया है । दूसरी जरूरी बात ये महज एक दुख:द संयोग था कि भाई विवेक रस्तोगी
 
अजय कुमार झा
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दो लाईनों की पटरी, पूरे ब्लोग नगर से गुजरी (ब्लोग लिंक्स )

मुझे बहुत खुशी है कि , अब ब्लोगजगत में कम अब कम से कम ये शिकायत तो किसी को नहीं होगी कि ,पोस्टें तो लिखी जा रही हैं , मगर चर्चा नहीं होती ।आप खुद देख पढ रहे हैं कि किस तरह से नित नई चर्चाएं, एक से बढ के एक अंदाज ,कलेवर,और शैली में आपके सामने प्रस्तुत हो
 
अजय कुमार झा
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बिछा दी हैं पटरियां , घूम लो ब्लोग नगरिया ( ब्लोग लिंक्स )

लो जी हम एक बार फ़िर हाजिर हैं दो लाईना ....ओह माफ़ कीजीए हुजूर ....अपनी पटरियां लेकर ...तो बैठिए इस पर और पहुंचिए जहां जहां आपको पहुंचना है ॥ हां यहां एक बात बताने का मन हो रहा है ,. लोग बाग कह रहे हैं कि फ़ूं फ़ां वाली चर्चा को तोक दिया जाना चाहिए , सो
 
अजय कुमार झा
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ये चिट्ठी चर्चा नहीं सिर्फ़ पोस्टों के लिंक भर हैं (पोस्टों के लिंक )

अभी कुछ दिन पहले एक टीप आई कि ,,,क्या आप जो करते हैं वो चिट्ठा चर्चा है , मैंने कहा नहीं , ये चिट्ठा चर्चानहीं है ये चिट्ठी चर्चा है , जैसा कि मैं पहले से कहता आ रहा था । मगर फ़िर सोचने बैठा तो लगा कि ये तो कुछ भीनहीं है न चिट्ठा चर्चा और न ही चिट्ठी
 
अजय कुमार झा
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सिर्फ़ दो पंक्तियां ,,,हमेशा की तरह (चिट्ठी चर्चा )

अब तो मुझे यकीन हो गया है कि अभी भी हमारे बीच कुछ मित्र /शत्रु हैं जिनका मकसद यहां लिखने/पढने .......हिंदी की सेवा से इतर भी की उद्देश्यों की पूर्ति में लगे हैं । और न हो तो बस कुछ भी कह सुन कर , अपनी वजह बेवजह की आपत्तियां दर्ज़ करा के माहौल को अशांत
 
अजय कुमार झा
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आख़िरी दू लाईना इस हफ्ते, हम चले अपने रस्ते (चिट्ठी चर्चा )

देखिए जी....ये तो पहले ही बता चुके हैं कि अब कल से गांव की तैयारी है तो जाते जाते ई दु लाईना ठेले जा रहे हैं ....बस ई हफ़्ता का कोटा समझिए ...उहां से समय मिला तो ठीक नहीं तो आने के बाद हईये हैं । ..... इंसानों बीच बैठा एलियन, उडनतशतरी कहलाए, एक पोस्ट
 
अजय कुमार झा
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दो पंक्तियों में सारा सार : चिट्ठी चर्चा हुई तैयार ,,

आज एक और चर्चा मंच की शुरूआत हो गई ......देखा आपने अलख जगाने की देर होती है फ़िर तो चारों ओर रोशनी ही रोशनी बिखर जाती है .....स्वागत है हर नई कोशिश का .....हर नए कदम का ।चाहे वो चर्चा मंच का हो या और कोई नया विचार । अभी तो बहुत कुछ करना है हमें आपको .
 
अजय कुमार झा
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पढ़ डाली पोस्टें तमाम : चर्चा सरे शाम (चिट्ठी चर्चा )

देखते देखते ये साल भी बीतने के कगार पर है । और समय कब किसी के लिए रुका है ...रुकना भी नहीं चाहिए ,न ही हमारा ये काफ़िला रुकना चाहिए । हो सकता है कि हमारे विचारों मे समानता न हो , समानता क्या हो सकता है कि हम अपने विचारों के कारण एक दूसरे के धुर विरोधी
 
अजय कुमार झा
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आज की छुटकी चर्चा (चिट्ठी चर्चा )

जितनी खुशी मुझे नए चिट्ठों के आने से होती है ....उतना ही दुख किसी चिट्ठे के चले जाने से होता है ....खासकर जब उनका जाना असहज सा होता है । पिछले दिनों जब मैं यहां नहीं था .....आया तो देखा कि कुछ अच्छे ब्लोग्गर्स सिर्फ़ एक छोटे से कंफ़्यूजन के कारण ब्लोग्
 
अजय कुमार झा
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चर्चा दो लाईना , देखो फ़िर से आई ना ( झा जी के साथ )

हम जान रहे हैं कि आप चाहे हमें मिस किये हों न हों ...ई अपने दु लाईना को जरूर मिस किए होंगे ....॥ लीजिये क्यों न कहूं आपकी दु लाईना .....अजी मेरा कहां रहता है इसमें कुछ भी आप ही बताईये न ........जो भी आपका लिखा यहां रहता है ....उसे दोबारा .......गुनगु
 
अजय कुमार झा
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bihari babu kahin

पिछले दिनों बहुत सी अच्छी अच्छी बातें पता चली अपनी हिंदी ब्लोग्गिंग के बारे में । रवि रतलामी जी ने बताया कि अब हिंदी ब्लोग्गिंग का इतिहास लिखा जा रहा है ...यानि कोई है ...या कहा जाए कि बहुत से हैं जो हिंदी ब्लोग्गिंग और हिंदी ब्लोग्गर्स को देख परख रह
 
अजय कुमार झा
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आज बुलबुल की चहक देखिये ,कल से चर्चा

पिछली चर्चा में आप सबने बुलबुल को उसके ठीक होने का आशीष दिया ...और आज वो बहुत खुश है ....धीरे धीरे पुरानी रफ़्तार में आ रही है ॥सबने कहा कि जब तक बुलबुल चहकने न लगे ....चर्चा नहीं ॥तो लिजीये आज आपको बता दें कि ॥आपकी बुलबुल बिटिया अब ठीक है ...सो कल से
 
अजय कुमार झा
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रविवारी चर्चा , दो लाइन का खर्चा ..

सोचा तो ये था कि आज रविवार होने के कारण पूरा फ़ायदा उठाते हुए ,खूब ब्लोग पढाई और टिपाई हो जाएगी ...बीच बीच में समय बचा तो पोस्ट भी ठेल लेंगे ...मगर सुबह से ही बिटिया बुलबुल बुखार में तप रही थी ॥बस सुबह से ही उसे गोद में लिये बैठे रहे ...डाक्टर साहब से
 
अजय कुमार झा