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04 Jun 2010
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अभी तक क्राईम टाईम्स , दिल्ली में , "ब्लोग हलचल" में निरूपमा हत्याकांड पर लिखी गई कई पोस्टों की चर्चा

आलेख को पढने के लिए चटका कर , जो भी छवि अलग खिडकी में खुले , उसे चटका कर आप आराम से पढ सकते हैं । इस अंक में , गपशप का कोना ,एक आलसी का चिट्ठा , घुघुती बासूती, चोखेरबाली, और अखिलेस सिंह आदि का उल्लेख
 
अजय कुमार झा
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आपकी मर्ज़ी , चाहे तो पुस्तकालय बनाएं या कूडाघर

मुझे अक्सर टोका गया कि आपने अपने इस ब्लोग का नाम" रद्दी की टोकरी " क्यों रखा या कि इस ब्लोग का नाम बदलिए । अभी थोडे दिनों पहले ज़ील उर्फ़ दिव्या जी ने कहा कि हर ब्लोग्गर को अपने ब्लोग की इज़्ज़त करनी चाहिए इसलिए आपको भी इस ब्लोग का नाम बदल कर कुछ और रखना
 
अजय कुमार झा
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आज के "डेली हिन्द मिलाप" , (हैदराबाद ),तथा "सच कहूं" सिरसा, में में प्रकाशित मेरा एक आलेख

दैनिक सच कहूं सिरसा में प्रकाशित आज के दैनिक डेली हिन्द मिलाप , हैदराबाद में प्रकाशित (आलेख को पढने के लिए उसे चटकाएं, और अलग से खुली खिडकी में, दिखने वाली छवि को चटका कर आराम से पढा जा सकता है ) , इस आलेख को आप ब्लोग पोस्ट के रूप में पहले भी पढ चुके हैं
 
अजय कुमार झा
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दैनिक महामेधा में , "ब्लोग हलचल ", में कसाब मामले का ज़िक्र करती कई ब्लोग पोस्टों का उल्लेख

आलेख को पढने के लिए उस पर चटका लगाने पर अलग खिडकी में खुलने वाली छवि को चटका लगा कर आप उसे आराम से पढ सकते हैं ।
 
अजय कुमार झा
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फ़ितरत छुपाने को, कोई ,नकाब तो लगाओ यारों......अजय कुमार झा

मुहब्बत कर न सको तो , नफ़रत की ही ,कम से कम ,इंतहा तो दिखाओ यारों ,॥कर देना पैवस्त खंजर ,मेरी पीठ पर ही सही,चलो इसी बहाने इक बार ,गले तो लगाओ यारों ,॥मैं समझ लूंगा तुमको, आईना , या अपने जैसा ,फ़ितरत छुपाने को, कोई ,नकाब तो लगाओ यारों ,॥माना कि चलना मुझे
 
अजय कुमार झा
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"ब्लोग हलचल " में , कशमकश ,स्वच्छ संदेश , आज का मुद्दा ,लोकसंघर्ष, संजय खरे का ब्लोग तथा निहितार्थ ब्लोग का जिक्र

भटिंडा ,पंजाब से प्रकाशित दैनिक "पायलट " के इस अंक में स्तंभ ब्लोग हलचल में माधुरी प्रकरण पर आधारित कुछ पोस्टों की चर्चा । चित्र को पढने के लिए उसे चटकाएं और छवि के खुलने पर उसे चटका कर आराम से पढा जा सकता है । उम्मीद है कि आपको प्रयास पसंद आएगा ।
 
अजय कुमार झा
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"ब्लोग हलचल " में आईपीएल प्रकरण के जिक्र करती हुई कई ब्लोग पोस्टों की चर्चा

मैंने एक नए प्रयास के तौर पर ब्लोग पोस्टों पर आधारित एक साप्ताहिक स्तंभ शुरू किया था जिसे नाम दिया गया ब्लोग बातें , मगर आगे इसे एक नया नाम मिला "ब्लोग हलचल" । अब ये स्तंभ नियमित हो गया है और खुशी की बात है कि आठ दस समाचार पत्रों में छप भी रहा है । इसकी
 
अजय कुमार झा
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कसाब को फ़ांसी पर, आज के "दैनिक सच कहूं" में प्रकाशित मेरा एक आलेख

आलेख को पढने के लिए उस पर चटकाने पर जो छवि खुले उसे चटका कर आराम से पढा जा सकता है । दैनिक सच कहूं , सिरसा एवं दिल्ली से प्रकाशित
 
अजय कुमार झा
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हिंदी ब्लोगर के रूप में अविनाश वाचस्पति जी ने क्या कहा ...............

राष्ट्रभाषा हिंदी की दशा और दिशा पर पत्रिका "द संडे इंडियन " के ताजा अंक में अविनाश वाचस्पति जी ने हिंदी ब्लोग्गिंग और ब्लोग्गर्स का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतर्जाल पर हिंदी के मजबूत होते कदम और उसमें हिंदी ब्लोग्गिंग के योगदान और महत्व की चर्चा की । सबसे
 
अजय कुमार झा
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प्रिंट मीडिया बनाम इलेक्ट्रानिक मीडिया : दैनिक महामेधा में आज प्रकाशित मेरा एक लघु आलेख

इस आलेख को आप ब्लोग पोस्ट के रूप में पहले पढ चुके हैं , आलेख को पढने के चित्र को चटकाने पर जो छवि खुले उसे चटका कर आराम से पढ सकते हैं
 
अजय कुमार झा
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"दैनिक महामेधा "दिल्ली तथा "दैनिक सच कहूं सिरसा" में प्रकाशित दो लघु आलेख

दैनिक महामेधा में प्रकाशित सच कहूं सिरसा हरियाणा में प्रकाशित ये दोनों आलेख आप मेरी ब्लोग पोस्टों के रूप में पढ चुके हैं । आलेख को के लिए उस पर चटका लगाने पर जो छवि खुले उसे फ़िर से चटका कर पढ लें
 
अजय कुमार झा
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ये हैं.... दिलशाद गार्डन दिल्ली से..... अजय कुमार झा

जी हां कुछ ऐसे ही अंदाज़ में शायद एक दो साल पहले तक विश्व की बहुत सी हिंदी रेडियो प्रसारण सेवा में मुझे और मुझे जानने वाले सभी परिचितों को मेरा नाम सुनने की आदत सी हो गई थी । बीबीसी रेडियो हिंदी सेवा , वायस औफ़ अमेरिका हिंदी सेवा ( जो अब बंद हो चुकी है ,
 
अजय कुमार झा
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"ब्लोग बातें" का दूसरा अंक प्रकाशित होकर आया

जैसा कि आप सबको सूचित कर ही दिया था कि "ब्लोग बातें "नामक स्तंभ को शुरू करने जा रहा हूं ताकि ब्लोग्गिंग में चल रही बातों को और भी विस्तार दिया जा सके । उनकी पहुंच प्रिंट के आम जनमानस तक भी हो । उन्हें भी पता चले कि हिंदी ब्लोग्गिंग में सिर्फ़ लफ़्फ़ाजी नहीं
 
अजय कुमार झा
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भारत में उठी यौन व्यवसाय पर एक बहस ( मेरा एक प्रकाशित आलेख )

दैनिक महामेधा दिल्ली में आज ही प्रकाशित आलेख जो "मुद्दा " स्तंभ के अतंर्गत प्रकाशित हुआ है । अबकि बार आप बस एक क्लिक करें छवि बडी ही नहीं बहुत बडी हो जाएगी ।
 
अजय कुमार झा
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सिलिगुडी की यात्रा , गुलाबी चाय और बैंकिंग परीक्षा (यात्रा संस्मरण )

कल की पोस्ट में जब कहा कि केले खाने का मन नहीं था , तो उसके पीछे कोई विशेष कारण नहीं था बल्कि ,केले खाने का मन इसलिए नहीं था क्योंकि उस गर्मी में पौलोथिन में शायद उतनी बुरी हालत उनकी न भी होती जितनी कि हम दोनों जन के बीच में पिस जाने से हुई । अब इस हालत
 
अजय कुमार झा
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बैंकिंग की परीक्षा और सिलिगुडी की यात्रा (यात्रा संस्मरण )

मुझे कभी नहीं पता था कि यात्रा संस्मरण कैसे लिखा जाता है , और क्या क्या लिखा जाता है , या कि क्या नहीं लिखा जाता है । जीवन में इतनी यात्राएं की हैं कि यदि उन्हें लिख कर सहेज न पाता तो अफ़सोस ही रहता । इसकी शुरूआत जाने क्या सोच कर कर गया , पिछली इस पोस्ट
 
अजय कुमार झा
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"ब्लोग बातें " का पहला अंक प्रकाशित होकर आया ...

जैसा कि आप लोगों को मैंने सूचित किया था कि ब्लोग पोस्टों पर आधारित एक नया स्तंभ मैं समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के लिए शुरू करने जा रहा हूं ।और अब जबकि इसका पहला अंक प्रकाशित होकर आया है तो सोचा आपको दिखाता चलूं । हालांकि ये अंक अब तक दस समाचार पत्रों में
 
अजय कुमार झा
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बैंक की परीक्षा और नैनीताल की यात्रा -२ (यात्रा वृत्तांत )

जैसा कि कल की पोस्ट में बताया कि लखनऊ रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद सभी साथी अपने अपने रास्ते निकल पडे । मुझे वहां से आगे नैनीताल के लिए निकलना था , समय शाम के चार बज चुके थे और अगले दिन यानि रविवार को मेरी परीक्षा थी । जब वहां पता किया कि आगे नैनीताल
 
अजय कुमार झा
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बैंकिंग परीक्षा और नैनीताल का सफ़र (यात्रा संस्मरण )

बहुत दिनों से सोच रहा था कि अभी तक जीवन के सफ़र में की गई सारी यात्राएं अपने आप में एक कहानी , एक फ़साने से कम नहीं हैं । और ये भी तय है कि समय के साथ साथ उनमें से यदि सभी को भूल न भी जाऊं तो कुछ तो वो यादें होंगी ही जो धीरे धीरे मेरा साथ न दें । तो ऐसे
 
अजय कुमार झा
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क्रिकेट पर एक ललित निंबंध (व्यंग्य )

ये बरसों की परंपरा रही है कि जो त्यौहार जो , नजदीक हो चलन में हो उसीपर अक्सर बच्चों से निबंध लिखने को कहा जाता है । और पिछले कुछ सालों में अब ये सिद्ध हो चुका है कि भारत का सबसे बडा और सदाबहार त्यौहार सिर्फ़ एक ही है क्रिकेट । सबसे अच्छी बात तो ये है कि
 
अजय कुमार झा
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ब्लोग पोस्ट की ब्लोग पोस्ट और आलेख का आलेख (कुछ प्रकाशित पोस्ट्स/आलेख )

ब्लोग्गिंग में जब से आया था तभी से प्रिंट के लिए आलेख , व्यंग्य आदि के लिए कम समय मिल पा रहा था। जब शिकायत ज्यादा हो गई तो पुन: वहां भी अपनी सक्रियता बढानी पडी। मगर फ़िर यकायक एक आईडिया और मेरे मन में आया कि सोचा क्यों न कुछ इस तरह से लिखा जाए कि वो
 
अजय कुमार झा
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किसका दु:ख , सबसे बडा ?????

पिछले साल जब अचानक मां की मृत्यु हुई तो मुझे लगा कि इससे बडा दुख कोई नहीं हो सकता । और सच भी है जीवन मां का चले जाने से बडा शायद कोई दुख होता भी नहीं है ॥कुछ दिनों बाद जब पिताजी को लेकर यहां चला आया तो अक्सर उन्हें दुखी पाता था ये कहते हुए कि तुम लोगों
 
अजय कुमार झा
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बुरा मान गए .......

दो घडी,चांद से ,गुफ़्तगू क्या कर ली,सितारे बुरा मान गए ॥कभी नकाबों में रहें,कभी परदों में ,कितनी ही कर ली कोशिश ,आईने हर बार पहचान गए ॥ये सोच कर कि,जीत ही है जो ,उस उस द्वेष की शुरूआत तो ,हम खुद ही हार मान गए ॥उन्हें जीतने की , कुछ आदत सी ऐसी पडी
 
अजय कुमार झा
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हैप्पी स्वास्थ्य डे : हरिभूमि में प्रकाशित मेरा एक व्यंग्य

व्यंग्य को पढने के लिए उस पर चटका लगाएं , अलग खिडकी में खुलने पर उसे बडा करके पढा जा सकता है । अन्यथा औन लाईन पढने के लिए यहां जाएं ॥
 
अजय कुमार झा
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सानिया मुद्दा इज द रियल मुद्दा : आज हरिभूमि में प्रकाशित मेरा व्यंग्य

                                         व्यंग्य को बडा करके पढने के लिए उसके उपर चटका लगाएं या औन लाईन पढने के लिए यहां जाएं      
 
अजय कुमार झा
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आखिरकार सानिया ने मना कर ही दिया .....अब पडी न कलेजे में ठंडक ब्लोग्गर्स के

आखिरकार जिस बात का डर था वही हुआ । सानिया मिर्ज़ा ने लगातार चल रही चकचक से तंग आकर अब अचानक मना कर ही दिया कि वो शोएब से शादी वादी नहीं करने जा रही है । हां हां आप कहेंगे कि क्या अनाप शनाप फ़ेंक रहे हैं झाजी ..जब इंडिया टीवी वालों को इसकी खबर नहीं हुई
 
अजय कुमार झा
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अभिव्यक्ति ......

अभिव्यक्ति ......मन के भाव , स्नेह और ताव,अभिव्यक्ति...नयन बचन,क्रुद्ध क्रंदन ,अभिव्यक्ति ,मौन कभी ,कभी प्रखर मुखर ,अभिव्यक्ति ,कभी राग द्वेष, कभी स्नेह क्लेश, अभिव्यक्ति ,संताप कभी ,प्रलाप कभी ,अभिव्यक्ति ,परिभाषित कर पाया कहां इसे,अभी व्यक्ति
 
अजय कुमार झा
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मां ............

मेरी मां माँ , तेरी गोद मुझे,मेरे अनमोल,होने का,एहसास कराती है॥माँ, तेरी हिम्मत,मुझको,जग जीतने का,विश्वास दिलाती है॥माँ, तेरी सीख,मुझे ,आदमी से,इंसान बनाती है॥माँ, तेरी डाँट,मुझे, नित नयी,राह दिखाती है॥माँ, तेरी सूरत,मुझे मेरी,पहचान बताती है॥माँ, तेरी
 
अजय कुमार झा
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पत्र पत्रिकाओं के लिए ,ब्लोग पोस्टों पर आधारित मेरा साप्ताहिक स्तंभ "ब्लोग बातें" शुरू

पिछले काफ़ी समय से विचार करते करते आखिरकार आज जाकर हिंदी ब्लोग की पोस्टों पर आधारित और विभिन्न समाचार पत्रों के लिए मेरा नया कालम " ब्लोग बातें " शुरू हो ही गया । ये विचार तो काफ़ी पहले से मन में आ रहा था मगर हर बार कुछ अलग अलग कारणों से और कुछ अपने आलस्य
 
अजय कुमार झा
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शहीद डे मनाता स्कूल ( आज हरिभूमि में प्रकाशित मेरा एक व्यंग्य )

        व्यंग्य  को पढने के लिए उस पर चटका लगाए या औनलाईन पढने के लिए इस यहां जा सकते हैं
 
अजय कुमार झा
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यही दस्तूर है मकानों का

वो सर बुलंद रहा और खुद्पसंद रहा,मैं सर झुकाए रहा और खुशामदों में रहा।मेरे अजीजों, यही दस्तूर है मकानों का,बनाने वाला हमेशा बरामदों में रहा॥कहीं  पढ थीं ये पंक्तियां ............याद रह गईं ॥
 
अजय कुमार झा
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२३ मार्च को कुछ ख़ास है क्या ???? हैप्पी शहीद डे यार !

देश के तीन सपूत जिन्हें आज देश भुला बैठा है पापा, आज २३ मार्च को कुछ ख़ास है क्या ?हाँ बेटा, तुम्हें नहीं पता , आज शहीद दिवस है। आज ही के दिन तो हमारे आजादी के कुछ दीवाने हँसते हँसते अंग्रेजों के फांसी के फंदे को फूल की माला की तरह गले में लपेट कर झूल गए
 
अजय कुमार झा
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व्रत आसान है रखना क्या ( एक लघु कथा ..या पता नहीं क्या )

"सुनो जी कल से नवरात्रि शुरू हो रही है , मुझे बहुत सी तैयारियां करनी हैं । आप तो जानते हैं कि मैं पिछले कई सालों से श्रद्धापूर्वक सारे व्रत रखती हूं। ये लो लिस्ट और बाजार से व्रत के लिए सारा सामान ले आओ पांच किलो फ़ल ...अभी फ़िलहाल इतना ही बांकी बाद में
 
अजय कुमार झा
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एक प्याली चाय

एक प्याली चाय,अक्सर मेरे,भोर के सपनों को तोड़,मेरी अर्धांगिनी,के स्नेहिल यथार्थ की,अनुभूति कराती है॥एक प्याली चाय,अक्सर,बचाती है,मेरा मान, जब,असमय और अचानक,आ जाता है,घर कोई॥एक प्याली चाय,अक्सर,बन जाती है,बहाना,हम कुछ ,दोस्तों के,मिल बैठ,गप्पें हांकने
 
अजय कुमार झा
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सफ़ेद चेहरे ...एक कहानी या जाने हकीकत थी ......

कांति और नुपुर , बिल्कुल उस तरह से थी जैसे कि, दो बहने हों । उनकी ये दोस्ती कितनी पुरानी थी इस बात से ज्यादा ये बात जानने में मज़ा आ सकता है कि उनकी दोस्ती कैसे हुई। दरअसल ये उनके कोल्लेज के दिनों की बात थी, दोनों एक ही बस में चढ़ कर एक ही कालेज और एक ही
 
अजय कुमार झा
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आज महिलाओं को आरक्षण नहीं इंदिरा गांधी , किरन बेदी, और कल्पना चावला की जरूरत है

एक शताब्दी पहले महिला को सश्क्त करने के लिए अंतर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की परंपरा की शुरूआत शायद इस वजह से ही हुई होगी कि जब एक शताब्दी के बाद मुड के देखेंगे और पाएंगे कि महिलाओं की स्थिति कितनी बदली इन सौ सालों में तो वो संघर्ष का इतिहास गौरवमयी और
 
अजय कुमार झा
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बेटियां क्यों पैदा होती हैं .....???

बहुत पहले ये पोस्ट लिखी थी ...जाने आज फ़िर क्यों इसे लिखने पढने और पढाने का मन किया ........................आप सोचेंगे कि ये क्या सवाल हुआ .फ़िर तो कोई कहेगा कि क्यों निकलता है सूरज और क्यों होती है रात, क्योंबदलते हैं दिन और महीने। हाँ , हाँ हो सकता है कि
 
अजय कुमार झा
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सर्वाधिक अमीरों की सूची में एक ब्लोग्गर भी ....यार व्यंग्य न समझें इसे ..

वाह, भाई, क्या धाँसू ख़बर आए आज तो, आखिरकार मेरा सपना सच हो ही गया, हाल ही में दुनिया के सर्वाधिक अमीरों की सूची जारी करने वाली पत्रिका , फोर्ब्स, ने जो सूची जारी की है, उसमें एक ब्लॉगर का भी नाम है। पहले तो एक ये बात मेरी समझ में नहीं आती कि, ये इन
 
अजय कुमार झा
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Mar 05 2010 08:09 AM
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रे माधो, तू देखना,

रे माधो, तू देखना,इक दिन ,मैं इस चाँद का,एक टुकडा तोड़ कर,तेरे माटी के,दिए में पिघलाऊंगा ॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,इन तारों को,बुहार कर एक साथ,रगडूंगा, तेरे आँगन में,आतिशबाजी , करवाउंगा मैं॥रे माधो, तू देखना,इक दिन,तू नहीं जायेगा,पंचायत में हाजिरी
 
अजय कुमार झा
Mar 03 2010 08:32 PM