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इसी बहाने

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09 Jun 2010
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पाठ संख्या-6 भारत एक कृषि प्रधान देश है !

बचपन की स्कूली पढ़ाई ने यूं तो कई तरह से बेवकूफ़ बनाया लेकिन एक बात जो भुलाए नहीं भूलती वो है हर क्लास में न जाने किन किन किताबों के किन किन पन्नों पर चस्पा- भारत एक कृषि प्रधान देश है। बचपन में इम्तेहान की कई कॉपियों पर कई निबंधों की शुरुआत भी इसी तरह
 
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मदर्स डे पर टीवी आपको ये नहीं बताएगा !

आज मदर्स डे पर अख़बारों और टीवी के मां पर उड़लते प्यार से इतर कुछ आंकड़े देख लेते हैं। हो सकता है थोड़ा डर लगे...हो सकता है ये भी लगे कि ये तो कहीं दिखाया नहीं गया आज...दरअसल अख़बार और टीवी आपका मूड ख़राब करना नहीं चाहते थे..इसलिए ऐसा नहीं किया !हमारे
 
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अमां, छोड़िए आईपीएल, शोएब-सानिया ड्रामा देखिए !

अपने वक़्त के सबसे बड़े ब्याह बवाल में आपका स्वागत है। आप जानना चाहते हैं, सबसे ज़्यादा कौन दु:खी है, शोएब-सानिया स्यापे से। और कोई नहीं बल्कि अपने ललित मोदी। अरे, क्यूं न हों। आईपीएल का रंग फीका कर दिया दोनों के रायते ने। अब बेचारे ये भी सोच रहे हैं कि
 
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अतिथि! तुम कब जाओगेः व्यंग्य शरद जोशी का, विज़न अश्विनी धर का

कोई भूमिका बांधना नहीं चाहता, सिर्फ़ एक सूचना है। फ़िल्म अतिथि...शरद जोशी के लिखे व्यंग्य पर आधारित है। वो मिला तो लगा कि आपसे साझा कर लेना चाहिए। तो मज़ा लीजिए उनके पैने व्यंग्य और उसके बाद देखिए फ़िल्म...---तुम्हारे आने के चौथे दिन, बार-बार यह प्रश्न
 
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'Apple' of my eyes? Hardly

The stage was set. Technoholics of the world were waiting with bated breath. And then came Steve Jobs on the scene, the man in black, the man who is responsible for making images of young and old, swooning, with a li'l device in hand...all too common. We
 
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किताबें बहुत सी पढ़ी होंगी तुमने...

बड़ी गरम बहस छिड़ी है दुनिया भर के अख़बारों के सामने। क्या करें- लोग काग़ज़ी अख़बार से दूर इंटरनेट पर, टीवी पर भाग रहे हैं। इस गरम बहस को ज्वालामुखी के लावे सा बहाने में मदद की है किंडल ने। अमेज़न का ई बुक रीडर- किंडल, जिसने इस दफ़ा क्रिसमस के तोहफ़ों
 
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गुलज़ार करेले की सब्ज़ी हैं, यार !

एक तरफ़ जावेद अख़्तर हैं तो दूसरी ओर गुलज़ार। दोनों ही बेहतरीन गीतकार। एक जो लड़कपन में आप ही के अरमानों को लफ़्ज़ दे रहा था तो दूसरा जिसका लिखा सुनने में तो अच्छा लगता था पर ज़्यादा समझ नहीं आ पाता था। इसलिए लड़कपन में जावेद अख़्तर से ज़्यादा दोस्ती
 
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हम हैं ख़बरों की दुनिया के नंगे पुरोधा

हां-हां, कहावतें जानते हैं हम भी हां-हां, रवायतें जानते हैं हम भी जानते हैं तौर-तरीक़े भी पर क्या चिपके रहें इन्हीं से हमेशा होते होंगे पहले हमाम पर वो हमारा क्या मुक़ाबला करेंगे हमाम- नाम ही इतना डाउनमार्केट है अपना तो भैया स्पा है आधुनिक और सुविधा
 
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वो फ़्लॉपी याद आती हैं !

आज सवेरे अलमारी में कुछ ढूंढ़ रहा था। जिसकी तलाश थी वो तो नहीं मिला, कुछ पुरानी फ़्लॉपी ज़रूर मिल गईं। अचानक मिली इन फ़्लॉपीज़ से मेरे होठों पर मुस्कान बिखर गई। कुल 8 फ़्लॉपी- 5 चालू हालत में थीं (इनका नाम किसने रखा, याद है आपको नए डिब्बे में भी 10 म
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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सुनो, तुम्हारी आंखों में मेरे कुछ ख़्वाब पड़े हैं

मैं जब भी देखता हूं तुम्हारी आंखें थोड़ा डर सा जाता हूं पता नहीं इनमें से कितने , पूरे कर सकूंगा हां , मैं तुम्हारी इन आंखों में हर पल बुनते हज़ार ख़्वाबों की ही बात कर रहा हूं सुनो जो कभी मैं न पूरा कर सका कोई ख़्वाब तुम मुझसे रूठ तो नहीं जाओगी तुम
 
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इस भ-सूंड ने तो परेशान कर दिया !

आपको पता है, यूपी में आकाशवाणी हुई? क्या कहा, आपने नहीं सुनी। नहीं जनाब, अपने कानों को दोष देने की ज़रूरत नहीं है। दरअसल ये हमारे आपके सुनने के लिए बनी भी नहीं थी। ये हायली एनक्रिप्टेड आकाशवाणी उत्तर प्रदेश शासन के लिए थी जो जल्द ही डीक्रिप्ट कर ली ग
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म

कंस्ट्रक्शन का बूम है कुछ तो फ़ायदा उठा लो मेरी मानो आरा मशीन पर रख दो सारे ग़म एक-एक ग़म बेमौत मरेगा टुक़ड़े-टुकड़े यहां-वहां गिरेगा रह जायेंगी बस ख़ुशियां समेट के सारी ख़ुशियां प्यारी ग़म की दीवार ढहाओ इमारत बुलंद बनाओ
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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मैं थक गया हूं, ज़हानत का ये नक़ाब ओढ़े-ओढ़े

मैं थक गया हूं ज़हानत का ये नक़ाब ओढ़े-ओढ़े करना कुछ चाहता हूं करना कुछ पड़ता है वरना लोग कहेंगे देखो, कैसा जंगली है लेकिन बहुत हुआ मुझे अब परवाह नहीं किसी की मैं सच कह रहा हूं नोंच के फेंक दूंगा इसे क्यूंकि मैं थक गया हूं ज़हानत का ये नक़ाब ओढ़े-ओढ़
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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माउंट एवरेस्ट उसी का है !

अस्सी बरस से ज़्यादा हुए वक़्त पर पड़ी बर्फ पिघली तो सही हमें माफ़ कर देना, मैलरी हम गुनहगार हैं तुम्हारे कई पीढ़ियों के भी लेकिन हम क्या करते इतिहास सुबूत मांगता है और दुनिया ने देखा था सिर्फ एडमंड हिलेरी और तेनज़िंग का सच लेकिन अब हम जानते हैं वो तुम
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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सत्रहवें फ़्लोर पर...

दो इमारतों के बीच ही सही सूरज दिखता तो है सा'ब उसकी लाली को चाय की प्याली और घरवाली के साथ अपनी जाली से देखकर ख़ुश हो लेना तारों भरा आसमान नहीं दिखेगा तो आसमान तो नहीं टूट पड़ेगा आपके पड़ोसी किसी स्टार से कम थोड़े ही हैं अब लाइफ़स्टाइल की नहीं स्टाइल
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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प्लेट भर प्यार

मैं अक्सर घर देर से लौटता था घर में मिलती थीं दो प्लेटें एक में खाना दूसरी में संवाद दोनों एकदम गर्म मैं अक्सर घर देर से लौटता हूं घर में मिलती हैं दो प्लेटें एक में खाना दूसरी प्लेट से वो हर दोपहर ढका जाता है
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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पहली उड़ान का जादू

एक लंबे इंतज़ार के बाद आख़िर मैं भी बादलों के पार हो ही आया। होश संभालने के बाद करीब 20 साल से ज़्यादा का लंबा इंतज़ार। लेकिन इसको इतना भर कहना ठीक नहीं होगा। दरअसल दिल्ली से पुणे तक का हवाई सफ़र यादों का वो सफ़र भी था जिसे मैंने होठों पर तैरती हल्की
 
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जब ख़ून पानी से सस्ता हो गया !

चुनावी नतीजों की धांयधांय के बीच ये ख़बर शायद ही किसी ड्रॉइंग रूम में बातचीत का बहाना बने लेकिन यक़ीन मानिए लोकतंत्र के सबसे बड़े मेले से ये ख़बर पूरी तरह जुड़ी हुई है। भोपाल में तीन लोगों की- मां-बाप और उनके बच्चे की सरेआम चाकू मारकर हत्या कर दी गई।
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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मेरे तो नीतीश कुमार दूसरो न कोय !

मेरे प्यारे नीतीश...मेरे भोले नीतीश...मेरी सत्ता की नैया बीच भंवर में गुड़ गुड़ गोते खाए, नैया पार लगा दे। इस समय राजनीतिक दल 'पड़ोसन' के गीत को थोड़े ट्विस्ट के साथ पेश करते ही नज़र आ रहे हैं। नीतीश ने जिस तरह बिहार की तस्वीर बदलने में क़ामयाबी पाई
 
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राष्ट्रीय फूल को बदल क्यों नहीं देते- आदर्श आचार संहिता कुछ यूं भी हो सकती है !

चुनाव आयोग का आदर्श आचार संहिता नाम क शस्त्र कई बार बड़े अजीब क़िस्म के हालात पैदा कर देता है। अब देखिए न , कहा जा रहा है कि स्कूलों की दीवार से कमल का फूल , घड़ी , साइकिल और दूसरे तमाम चित्र जो किसी पार्टी का चुनाव चिन्ह हो सकते हैं, उन्हें मिटाना ह
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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मुझे मशहूर होना है

मैं भी सोचता हूं लिखूं कोई कविता , गीत या फिर एक शेर भला सा जिसमें चांद हो , तारे हों , फूल हों हो एक तोला ' माही वे ' रत्ती भर ' मौला ' और हों कुछ प्यार की बातें लिखूं वो कि जिसे सुनकर कोई बरबस बजा दे ताली करे वाह - वाह हर तरफ़ मेरी ही जय हो ! कुछ त
 
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जिसके हम मामा हैं ! - चुनावी दाल में व्यंग्य का तड़का

शरद जोशी हिन्दी के उन लेखकों में से हैं जिन्होंने अपनी कलम ऐसे विषयों पर चलाई जिन पर दूसरे साहित्यकारों की नज़र नहीं जाती। इसके लिए व्यंग्य से बेहतर विधा नहीं हो सकती थी और शरदजी के तराशे व्यंग्यों की तीखी चोट आपको न सिर्फ़ परेशान करती है बल्कि झंझोड
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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'पा' से प्रोमोशन

पा' और '3 इडियट्स'... दो ऐसी फ़िल्में जो फ़िल्म प्रोमोशन का व्याकरण नए सिरे से लिख रही हैं। दो ऐसी फ़िल्में जिनके पास बड़े स्टार का तड़का है, बड़े निर्देशक की कमान है लेकिन फिर भी जिन्होंने मानो ठान रखा है कि लोग अगर इन्हें बेहतरीन फ़िल्म की तरह याद
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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एक किताब और एक फ़िल्म के बहाने इंसानी जज़्बात के हज़ार रंग

इंसानी जज़्बात तमाम चीज़ों से बेतरह प्रभावित होते रहते हैं। किताब के पन्ने और सिनेमा के पर्दे पर न जाने कितने एहसास, कितनी बार ख़ूब बारीकी से छिटकाए गए हैं। लेकिन आज मैं आपसे उस किताब और फ़िल्म का ज़िक्र कर रहा हूं जिसने इन जज़्बातों को कुछ इस क़दर छ
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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आतंकवाद तो फ़ायदे का सौदा निकला !

आपने लियोपॉल्ड कैफ़े का नाम तो सुना होगा। अपने देश में त्रासदियां ही जगहों को जोड़ती हैं। जब मुंबई डूबने लगता है तो लोअर परेल, घाटकोपर जैसे इलाक़ों के नाम पूरे देश को पता लग जाते हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड की जगहों को नक्सलवाद ने जनवाया। हां, तो मैं
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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26/11- शहर के सीने में भी दिल धड़कता है

मैं डरा हुआ हूं, सहमा हूं मैं ख़ामोश हूं, नाराज़ हूं मैं वो शहर हूं, जिसमें हाड़-मांस के इंसान रहते हैं मैं कभी अजमेर हो जाता हूं कभी जयपुर, कभी दिल्ली तो कभी मुंबई मेरे रिसते ज़ख़्मों को ढंकने के नायाब इंतज़ाम ढूंढ़े हैं सबने जब मैं दिल्ली होता हूं
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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ई साला, मधु कोड़ा को दोषी कौन बताया !

मधु कोड़ा पर जब हर किसी के हाथ कोड़े बरसाने को मचल रहे हैं, ऐसे में हमें उन पर तरस आता है। बेचारे का कसूर ही क्या है। जानना चाहते हैं, उनकी ग़लती क्या है। उनको अपने नाम की लाज बचाने की सज़ा मिल रही है। मधु कोड़ा- मधु समझते हैं ना। अब तमाम मक्खियां शह
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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हिंदी के लिए ऐतिहासिक दिन- ख़बरिया चैनलों ने दिया 'राष्ट्रभाषा' का दर्जा !

अबु आज़मी ने महाराष्ट्र विधानसभा में हिंदी में शपथ क्या लेनी चाही, हंगामा मच गया। राज के गुंडों ने अपना घटियापन दिखाते हुए उनका माइक फेंका, थप्पड़ मारा। यानी टीवी के विजुअल का पूरा मसाला मौजूद था। सो दोपहर होते-होते ख़बरिया चैनल इन विजुअल्स पर 'गोलों
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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करवाचौथ पर एक विवाहिता का ख़त यश चोपड़ा के नाम

ये एक ख़त आपसे शेयर कर रहा हूं। शायद पोस्ट नहीं किया गया, आज रास्ते में पड़ा मिल गया था :-) डियर यश चोपड़ा जी आप तो जानते ही होंगे कि आज करवा चौथ है। मैं भी कितनी पागल हूं, आपसे से ये सवाल कर रही हूं। वो क्या है कि पहली बार इत्ते बड़े आदमी को चिट्ठी
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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हमारी पीढ़ी के लिए शहर 'किरदार' क्यूं नहीं बन पाते ?

मैं जब भी घर-परिवार या बाहर किसी बड़े से उनके शहर के बारे में यादों की चाशनी में पगी बातें सुनता था तो बड़ा अजीब लगता था। ये सोच कर नहीं कि देखो, इन लोगों को बैठे ठाले कुछ काम तो है नहीं बस गपोड़ बने रहते हैं। अजीब दरअस्ल ये सोच कर लगता था कि हमें अप
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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शशि थरूर- जो किया नहीं उसकी सज़ा

अब तक अख़बार और टीवी ही बरस रहा था, अब अपनी ब्लॉग की दुनिया भी थरुर की जान के पीछे हाथ धोकर पड़ गई है। जानते हैं,शशि थरुर की ग़लती क्या है- महज़ इतनी कि वो बेचारे अभी सरज़मीं-ए-हिन्दुस्तान की सियासी मिट्टी में ढंग से लोट नहीं लगा पाए हैं। इसलिए हमारी
 
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Dec 19 2009 12:55 PM
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अगर अपने मोबाइल में दर्ज नम्बर खोना नहीं चाहते तो इसे ज़रूर पढ़ें

अगर आपका फ़ोन चोरी हो जाए, खो जाए या पानी में गिर जाए तो जो सबसे पहला ख़्याल आपको आता है, वो है- अरे मरे, गए सारे नम्बर्स। फिर शुरु होती है क़वायद वो सारे नम्बर्स इकट्ठा करने की। फिर भी सारे मिलते नहीं है। हां, अगर आपने अपने कम्प्यूटर पर बैकअप लिया ह
 
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'पा' से प्रोमोशन

पा' और '3 इडियट्स'... दो ऐसी फ़िल्में जो फ़िल्म प्रोमोशन का व्याकरण नए सिरे से लिख रही हैं। दो ऐसी फ़िल्में जिनके पास बड़े स्टार का तड़का है, बड़े निर्देशक की कमान है लेकिन फिर भी जिन्होंने मानो ठान रखा है कि लोग अगर इन्हें बेहतरीन फ़िल्म की तरह याद
 
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एक किताब और एक फ़िल्म के बहाने इंसानी जज़्बात के हज़ार रंग

इंसानी जज़्बात तमाम चीज़ों से बेतरह प्रभावित होते रहते हैं। किताब के पन्ने और सिनेमा के पर्दे पर न जाने कितने एहसास, कितनी बार ख़ूब बारीकी से छिटकाए गए हैं। लेकिन आज मैं आपसे उस किताब और फ़िल्म का ज़िक्र कर रहा हूं जिसने इन जज़्बातों को कुछ इस क़दर छ
 
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आतंकवाद तो फ़ायदे का सौदा निकला !

आपने लियोपॉल्ड कैफ़े का नाम तो सुना होगा। अपने देश में त्रासदियां ही जगहों को जोड़ती हैं। जब मुंबई डूबने लगता है तो लोअर परेल, घाटकोपर जैसे इलाक़ों के नाम पूरे देश को पता लग जाते हैं। पश्चिम बंगाल और झारखंड की जगहों को नक्सलवाद ने जनवाया। हां, तो मैं
 
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26/11- शहर के सीने में भी दिल धड़कता है

मैं डरा हुआ हूं, सहमा हूं मैं ख़ामोश हूं, नाराज़ हूं मैं वो शहर हूं, जिसमें हाड़-मांस के इंसान रहते हैं मैं कभी अजमेर हो जाता हूं कभी जयपुर, कभी दिल्ली तो कभी मुंबई मेरे रिसते ज़ख़्मों को ढंकने के नायाब इंतज़ाम ढूंढ़े हैं सबने जब मैं दिल्ली होता हूं
 
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ई साला, मधु कोड़ा को दोषी कौन बताया !

मधु कोड़ा पर जब हर किसी के हाथ कोड़े बरसाने को मचल रहे हैं, ऐसे में हमें उन पर तरस आता है। बेचारे का कसूर ही क्या है। जानना चाहते हैं, उनकी ग़लती क्या है। उनको अपने नाम की लाज बचाने की सज़ा मिल रही है। मधु कोड़ा- मधु समझते हैं ना। अब तमाम मक्खियां शह
 
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हिंदी के लिए ऐतिहासिक दिन- ख़बरिया चैनलों ने दिया 'राष्ट्रभाषा' का दर्जा !

अबु आज़मी ने महाराष्ट्र विधानसभा में हिंदी में शपथ क्या लेनी चाही, हंगामा मच गया। राज के गुंडों ने अपना घटियापन दिखाते हुए उनका माइक फेंका, थप्पड़ मारा। यानी टीवी के विजुअल का पूरा मसाला मौजूद था। सो दोपहर होते-होते ख़बरिया चैनल इन विजुअल्स पर 'गोलों
 
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करवाचौथ पर एक विवाहिता का ख़त यश चोपड़ा के नाम

ये एक ख़त आपसे शेयर कर रहा हूं। शायद पोस्ट नहीं किया गया, आज रास्ते में पड़ा मिल गया था :-) डियर यश चोपड़ा जी आप तो जानते ही होंगे कि आज करवा चौथ है। मैं भी कितनी पागल हूं, आपसे से ये सवाल कर रही हूं। वो क्या है कि पहली बार इत्ते बड़े आदमी को चिट्ठी
 
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Oct 14 2009 07:46 PM