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खामोशी और शब्द
न जाने बेजान स्मृतियों में इतनीताकत कहां से आ गई कि वेयकायक उठ कर वर्तमान में अपनीजडें तलाशने लगी थी ।शायद यह वक्त हीअपने आप को पूरा होते हुएदेखने का थामैंने अपने दोनों हाथ उठायेमेरी दुआ तुरंत कबुल हो गई समय खामोशी के साथ थाइससे पहले की शब्द अपनामनचाहा
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Jun 12 2010 02:55 PM


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