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उज्जास

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24 May 2010
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नंदीग्राम से वेदांत विश्वविद्यालय तक -सरकारी दमन की एक ही गाथा

डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री12 मई 2004 को मुम्बई में वर्ली में रहने वाले चार लोगों ने मिलकर भारतीय कम्पनी अधिनियम की धारा 25 के अन्तर्गत स्टरलाईट फाउंडेशन का पंजीयन करवाया । इस धारा के अंतर्गत पंजीयन होने वाली कम्पनियां प्राइवेट होती हैं और उनका उद्देश्य
 
उमाशंकर मिश्र
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मध्यप्रदेश बजट : फिर गांव-गरीब की ओर

भोपाल. वित्तमंत्री राघवजी शुक्रवार को सुबह साढ़े 10 बजे राज्य की भाजपा सरकार का छठवां बजट पेश कर दिया है। बजट में शामिल राज्य आयोजना का आकार 16114 करोड़ रखा गया है। आज प्रस्तुत बजट में कृषि, और ग्रामीण विकास पर बल दिया गया है। इसके साथ ही राज्य के वि
 
उमाशंकर मिश्र
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स्थानीय स्वशासन की प्रयोगशाला बनेगा सोनिया विहार

अब अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लोगों को नेताओं और अधिकारीयों का मुंह ताकने की जरुरत नहीं रहेगी । शीघ्र ही लोग ख़ुद अपने हित और क्षेत्र की समस्याओं पर स्वयं निर्णय लेने लगेंगे, क्योंकि दिल्ली में स्थानीय स्वशासन की संकल्पना अब जमीन पर उतर चुकी है,
 
उमाशंकर मिश्र
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'आह' से उपजा होगा गान

मल्लिका साराभाईसभी का कोई न कोई आदर्श होता है। फिल्म स्टार, राजनीतिज्ञ, संगीत क्षेत्र के सितारे या फिर सामाजिक कार्यकर्ता इत्यादि। हम उनके जैसा बनने का प्रयास करते हैं। मेरे भी आदर्श हैं, लेकिन ऊपर दिए गए लोगों की श्रेणी में वे कहीं भी नहीं आते और यह
 
उमाशंकर मिश्र
Dec 29 2009 11:43 AM
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अपना देश रेल में

उमाशंकर मिश्ररेलगाडियों में फेरी का काम करने वाले बच्चों की जिंदगी के अलग-अलग आयाम देखने को मिलते हैं, तम्बूरा बजाकर मस्तमौला जिंदगी जीना किसी का शौक हो सकता है तो कोई निषेधात्मक चेतावनी के बावजूद ट्रेन में गुटखा एवं सिगरेट बेचने का जोखिम भरा काम करन
 
उमाशंकर मिश्र
Dec 29 2009 11:43 AM
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छत्तीसगढ़ में जट्रोफा की फसल से लोग संकट में

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण बकरंडा का उपयोग घर की सुरक्षा हेतु उसके चारो तरफ बाड़ लगाने के लिए करते रहे हैं। लेकिन इसे विडंबना ही कहा जाएगा कि जिस बकरंडा का प्रयोग छत्तीसगढ़ के लोग घर की सुरक्षा के लिए करते थे, वही आज जट्रोफा बनकर उनके घर के उजड़ने का कारण बन र
 
उमाशंकर मिश्र
Dec 29 2009 11:43 AM
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धारा के विपरीत जंग

बात दलितों के तथाकथित रहनुमाओं की चली है तो चर्चा को थोड़ा और आगे; वड़ोदरा के डिवेयर गांव में लेकर चलते हैं, जहां दलितों को अपना अधिकार पाने के लिए किसी चंद्रभान प्रसाद की जरूरत नहीं पड़ती। पटेल जाति के सवर्णों के घर पानी भरने वाले पूरे गांव के दलितों न
 
उमाशंकर मिश्र
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जैविक ग्राम, निर्मल ग्र्राम

कुछ समय पहले तक भारतीय गांवों के अथाह महासागर में मलगांव भी एक गुमनाम एवं आम गांव हुआ करता था, जिसकी अपनी कोई पहचान नहीं थी। सूखे की मार ने मलगांव के लोगों को ऐसा सबक सिखाया कि उन्हें दीर्घकालीन एवं जैविक खेती को अपनाना जरूरी लगने लगा। आज मलगांव को ज
 
उमाशंकर मिश्र
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मानवाधिकार और ख़बर का कमोडिफिकेशन

उमाशंकर मिश्र/दिल्ली हाल ही में एक प्रतिष्ठत हिन्दी दैनिक में जालंधर से एक ख़बर आई, जिसमें पुलिस द्वारा मीडिया वालों से आरोपियों के साथ फोटो खिंचवा कर वाहवाही लूटने की बात कही गई थी। आखिरकार पुलिस को अपनी इस हरकत के लिए लताड़ खानी पड़ गई। हुआ यों कि कुछेक
 
उमाशंकर मिश्र
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Aug 12 2009 04:56 PM
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परंपराओं का लोहा पीटते लोग

अपने पुरखों की विरासत को बचाए रखने के लिए लोग क्या कुछ नहीं करते। लेकिन आज हम आपसे चर्चा कर रहे हैं एक ऐसे समुदाय की जिसकी कई पीढ़ियां अपने पुरखों की एक क़सम को निभाने के लिए सड़क पर बंज़ारों की तरह जिंदगी गुज़ार चुकी है। गाड़िया लोहार कहलाने वाले ये लो
 
उमाशंकर मिश्र
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यहां दलित भी बनते हैं

अवधेश कुमार मल्लिक क्या आप सवर्ण हैं? यदि हां तो क्या आप अपने लड़के या लड़की शादी किसी दलित परिवार में करना चाहेंगें? क्या ऐसे रिश्ते आपको स्वीकार्य होंगे। गौरतलब है आजादी के आज 60से भी अधिक साल हो गये पर ऐसे सवालों का उत्तर आज भी ना में ही आते हैं। ऐस
 
उमाशंकर मिश्र
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पहचान के संघर्ष से आत्मनिर्भरता की ओर

सामाजिक तौर पर बहिष्कृत, अनवरत् मानसिक यंत्रणा का दंश झेल रही और गलियों में भीख मांगकर दो वक्त की रोटी जुटाने वाली वृंदावन की विधवा महिलाओं को कई बार शारीरिक शोषण का भी शिकार होना पड़ता है, इस सामाजिक निष्ठुरता एवं सरकारी उपेक्षा के बीच इन महिलाओं को
 
उमाशंकर मिश्र
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अब प्रणब दादा की बारी

उमाशंकर मिश्रममता दीदी के रेल बजट के बाद अब प्रणब दादा की बारी थी। मंदी के दौर और खेती के चौपट होने की मार झेल रही ग्रामीण जनता को नई सरकार से काफी उम्मीदें थी। कृषि क्षेत्र के लिए कम से कम चार प्रतिशत की विकास दर का लक्ष्य रखते हुए अर्थव्यवस्था के ल
 
उमाशंकर मिश्र
टैग: बजट
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बेटे की हत्या के बदले में है मां चुनाव मैदान में

प्रतापगढ़। भड़काऊ भाषण और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत निरुद्ध होने के बाद देश की राजनीति में हाल ही में चर्चा में वरुण गांधी को लेकर मां कौन और कैसी हो पर बसपा प्रमुख मायावती और भाजपा की आंवला सीट से प्रत्याशी मेनका गांधी के बीच वाक युद्ध थमा भी नह
 
उमाशंकर मिश्र
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कितने हितकारी होंगे ग्राम न्यायलय

प्रीति पाण्डेय /दिल्ली ग्राम न्यायलय बिल के द्वारा देश भर में करीब 3000 हजार ग्राम न्यायालय स्थापित करने की घोषणा हाल ही में केन्द्रीय मंत्री हंसराज भारद्वाज ने की है। क्या सच में यह बिल गांवों में सुख-शांति का बीज बो पाएगा? गांवों की न्यायिक व्यवस्थ
 
उमाशंकर मिश्र
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हर गरीब की अपनी हो पहचान : प्रभाष जोशी

इलाहाबाद। रोजी, रोटी और मकान अपनी हो पुख्ता पहचान। यही वह नारा था जो शहरी गरीबों के घोषणा पत्र पर अंकित था। शनिवार को शहरी गरीबों के इस नारे से सभागृह गूंज उठा। मौका था लोक सभा चुनाव पर शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा द्वारा तैयार घोषणा पत्र का। घोषणा पत्र क
 
उमाशंकर मिश्र
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मोहर लगेगी जात पर

उमाशंकर मिश्र/वाराणसीपूर्वांचल में रोजगार का एकमात्र साधन यहां खेती-बाड़ी है। लम्बे समय तक अर्थव्यवस्था मनीआर्डर इकॉनमी पर आधारित रही है, लेकिन अब तो हर नौजवान मुम्बई, दिल्ली या फिर सूरत जाना चाहता है। अपने लिए क्या सही अथवा क्या गलत है, इसके बारे में
 
उमाशंकर मिश्र
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सिर से मैला नहीं उतार पायी सरकार

सभ्यता के विकास में मल निस्तारण समस्या रही हो या न रही हो, लेकिन भारत में कुछ लोगों के सिर पर आज भी मैला सवार है. तमाम कोशिशों के बावजूद भारत सरकार उनके सिर से मैला नहीं उतार पायी है जो लंबे समय से इस काम से निजात पाना चाहते हैं. हालांकि सरकार द्वारा
 
उमाशंकर मिश्र
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गुजरात के गांव के लोग गांव में ही

संगीता शुक्लापंद्रहवीं लोकसभा के लिए चुनाव की उल्टी गिनती शुरु हो गई है। अब चंद दिनों बाद ही चुनाव प्रक्रिया भी शुरु हो जायेगी और नई लोकसभा का गठन होगा। नई लोकसभा का ताज किसके सर पर होगा यह कहना मुश्किल है लेकिन आजकल यह देखा जा रहा है कि सभी पार्टिया
 
उमाशंकर मिश्र
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सूदखोर महाजनों के चंगुल में संताल परगना

ग्‍लैडसन की विशेष रिपोर्ट -दिशोम गुरू शिबू सोरेन और महाजनों का नाम संताल परगना के इतिहास में एक साथ विराजमान होगा। यह इसलिए कि यही महाजन सुदखोरों के खिलाफ लडते हुए गुरूजी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की थी और अंततः दो बार झारखण्ड की राजगद्दी पर बै
 
उमाशंकर मिश्र
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महिला दिवस पर याद आ रहा है यह गीत

महिला दिवस आ रहा है। यूँ तो महिलाओं के विभिन्न रूपों पर कई फ़िल्मी गीत है जो रेडियो से हम सुनते रहते है पर आज जिस गीत की हम चर्चा कर रहे है वो महिला की वास्तविक स्थिति बताता है ख़ासकर उसकी बरसों पहले की स्थिति।यह गीत शायद औरत फ़िल्म का है जिसमें मुख़्य भ
 
उमाशंकर मिश्र
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कश्मीरी पण्डित चाहते हैं पृथक होमलैण्ड

उमाशंकर मिश्र/जम्मूपेशे से अध्यापक मनोज कुमार कौल बताते हैं कि हम `छोटा लंदन´ के नाम से विख्यात सोपोर के रहने वाले हैं, लेकिन आज नरक में रहना पड़ रहा है। वहां का वातावरण ही ऐसा था कि अन्य किसी परिवेश में जाकर वहां के लोगों का जीवन यापन आसान नही था, जल
 
उमाशंकर मिश्र
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स्वरोजगारियों का गांव नगला धाकड़

उमाशंकर मिश्र/भरतपुर भरतपुर जिले की वैर तहसील की इटामड़ा ग्राम पंचायत के गांव नगला-धाकड़ में रहने वाले धाकड़ जाति के लोगों की आजीविका का मुख्य आधार खेती और पशुपालन रहा है। लेकिन छोटी जोतें और उस पर अनुपजाऊ भूमि स्थानीय ग्रामीणों के जीवन की एक फांस बन चु
 
उमाशंकर मिश्र
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आंचलिक पत्राकारिता की ताकत : खबर लहरिया

डॉ स्मिता मिश्र किसी देश के समग्र विकास में जनसंचार माध्यमों की अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका होती है। भारत के सन्दर्भ में ये माध्यम और अधिक महत्वपूर्ण हो उठते है। हमारी दो-तिहाई मानवीय पूंजी ग्रामीण भारत से ही सम्बद्ध है, जो कि आज भी ज्ञान तथा सूचना से
 
उमाशंकर मिश्र
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स्लमडॉग के नाम पर ही भीख दे दो

जैसा कि आपका मालूम ही है कि स्लमडॉग को ऑस्कर प्राप्त हो गया है। परन्तु भिखारी भी स्लमडॉग कहकर भीख मांग रहे हैं। मामला दिल्ली का है। तुलसी जी एक प्रतिष्ठित पत्रिका से जुड़े हुए हैं और अच्छे नेट-फ्रेंड हैं। हाल ही में उन्होंने बड़ी ही विचित्र घटना सुनाई
 
उमाशंकर मिश्र
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अब हम घोषित स्लमडॉग हैं

स्लमडॉग को ऑस्कर मिला, जबकि निदेशक गैर भारतीय था. इससे पहले भी बेहतर फिल्में ऑस्कर के लिए गई है. लेकिन उनमे भारत की ताकत और पारम्परिक पहचान का प्रतीकात्मक चित्रण किया गया था. सवाल है कि मदर इंडिया और लगान जैसी फिल्में क्यों ऑस्कर नही प्राप्त कर सकी?
 
उमाशंकर मिश्र
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सूचना युग में इन्टरनेट

वर्तमान सूचना युग में इन्टरनेट एक क्रांतिकारी संचार मध्यम साबित हो रहा है. इसकी संभावनाएं बहुत अधिक हैं क्योंकि आने वाले समय जैसे भौतिक साधनों का विकास होता रहेगा तो टेलीविजन और समाचार पत्र जैसे जन माध्यमों पर लोगों की निर्भरता भी कम होने लगेगी. क्यो
 
उमाशंकर मिश्र
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कोसी के किनारे पर बाढ़ के बाद

कोसी के बाढ़ पीड़ित इलाके में जब भी कोई राहत की बात करता है तो चारों ओर से 10 तरह की आवाजें उसे चुप करा देती हैं कि अरे इतना राहत तो बंट रहा है। सरकारी और संस्थाओं की ओर से भी. मगर सुपौल के भरतपुर गांव में महेंद्र शर्मा की मौत नीतीश सरकार की अफसरशाही क
 
उमाशंकर मिश्र