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दिल की आवाज़

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16 May 2010
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जातिगत व्यवस्था : देश के लिए खतरा

जाति के आधार पर जनगणना का कोई अर्थ ही नहीं है. हाँ, यह बात सही है कि जब मुझे विभिन्न जातियों को जाति के आधार पर विशेष सुविधा देनी है तो हमें जाति का हिसाब रखना ही होगा और इसके लिए जनगणना में जाति पूछना ही होगा. पर जाति के आधार पर आरक्षण या अन्य सुविधा
 
महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma
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क्या बिहार की राजभाषा हिन्दी की मौत हो गयी है?

22 मार्च 2010 को बिहार में बिहार दिवस मनाया गया.  बिहार के स्थापना के 98 वीं वर्षगाँठ पर पहली बार मनाया जाने वाला इस बिहार दिवस का मुख्य कार्यक्रम बिहार सरकार की ओर से 22 , 23 व 24 मार्च 2010 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित किया गया.  24 .03
 
महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma
टैग: बिहार
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Great India is not great

India is great because Indian is great. But Indian is not great because India is not great. India is not great because Indian have no rights of justice. Indian have no rights of justice because here no justice in the court. And for this criminal be
 
MAHESH KUMAR VERMA
टैग: भारत
Mar 03 2010 08:36 PM
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होली प्रेम पूर्वक मनाएं

सबों को होली की शुभकामनाएं। होली आपसी प्रेम व भाईचारा का प्रेम है। अतः यह ख्याल रखें कि इस पर्व में आपसी प्रेम बनाएं रखें तथा किसी के भी साथ जोर-जबरदस्ती नहीं करें। जो न चाहे उसे जबरन रंग-गुलाल न लगायें। किसी के साथ अभद्र व्यवहार न करें तथा होली को प्रेम
Feb 27 2010 06:24 PM
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महिला आरक्षण क्यों?

सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पास कर दिया है और अब इसपर बहस होगी। इस विधेयक में लोक सभा व राज्य विधान सभा में महिलाओं को 33% आरक्षण की व्यवस्था है। स्थानीय निकाय के चुनाव में पहले से ही महिलाओं को आरक्षण मिला हुआ है। पर वहाँ महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों
Feb 26 2010 08:34 AM
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सच्चाई का खुलासा : मतदाता सूचि में सुधार नहीं होगा

चुनाव आयोग मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र बनाने में काफी पैसे खर्च कर रही है। पर मतदाता सूचि व मतदाता पहचान पत्र में गलत आंकड़ा में कमी नहीं हो रही है। और जगह की बात तो मैं नहीं कह सकता पर बिहार में तो स्थिति यही है। यहाँ के मतदाता सूचि व मतदाता पहचान
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Feb 15 2010 08:43 PM
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BPL परिवार के रिकॉर्ड में गलत आंकड़ा

अपने पिछले पोस्ट में मैं इस बात को स्पष्ट करने की कोशिश की है कि किस प्रकार चुनाव आयोग का मतदाता सूचि व फोटो पहचान पत्र के कार्य में गड़बड़ी होती है और सरकार द्वारा पानी के तरह पैसे खर्च किये जाने के बावजूद भी सही ढंग से कार्य नहीं होता है और गलती में
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RSBY के स्मार्ट कार्ड बनाने में अनियमितता

अपने पिछले पोस्ट में मैं बताया कि बिहार में पारिवारिक सर्वेक्षण के आंकड़ा में किस-किस तरह के गलती भरे पड़े हैं। और सच्चाई का खुलासा करते हुए आज मैं बता रहा हूँ कि BPL परिवार के लिए RSBY के स्मार्ट कार्ड बनाने में तथा उसे वितरित करने में किस तरह के
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परीक्षा में कदाचार के लिए जिम्मेवार कौन

मैं अपने पिछले पोस्ट में परीक्षा में कदाचार का जिक्र किया है। विचारनीय है कि परीक्षा व मूल्यांकन में कदाचार के लिए जिम्मेवार कौन है? मैं जोर देकर कहता हूँ कि परीक्षा में कदाचार के लिए जिम्मेवार और कोई नहीं बल्कि परीक्षार्थी के अभिभावक रहते है। जी हां
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ऐसे शिक्षक क्या पढ़ायेंगे?

जैसा कि पिछले पोस्ट में मैंने लिखा कि किस प्रकार आरक्षण नीति के कारण अयोग्य को महत्त्वपूर्ण कार्य दे दियाजाता है और इस कारण देश विकास के राह पर न चलकर पतन की ओर जाता है। योग्य व्यक्ति को दरकिनार कर अयोग्य व्यक्ति को कार्य सौंपना व्यक्ति के प्रतिभा के साथ
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आरक्षण निति : उचित या अनुचित

मैंने अपने पिछले पोस्ट में बताया कि किस प्रकार सरकार जाति के आधार पर समाज को बाँट रही है। सरकार जाति के आधार पर आरक्षण करके देश को विकाश के ओर ले जा रही है या पतन की ओर? विचारने पर यह बात सामने आता है कि जाति के आधार पर या किसी भी आधार पर आरक्षण होने के
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जाति के आधार पर समाज को बांटने में सरकार कितनी दोषी

सोचनीय है कि एक ओर धर्म व जाति के आधार पर भेद-भाव समाप्त करने की बात कही जाती है और दूसरी ओर धर्म व जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाता है। विचारने पर तो यही बात सामने आती है कि धर्म व जाति के आधार पर समाज को बांटने का कार्य करने में सबसे ज्यादा हाथ हमारी
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देश से अपराध भगाना है, खुशहाल जीवन लाना है।

आज राष्ट्र 61 वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है। भारत को स्वतंत्र हुए 62 वर्ष व गणतंत्र हुए 60 वर्ष हो गए। पर इतने अवधि में हमने क्या पाया? क्या देश के आम नागरिकों को देश के विकाश का वास्तविक फायदा मिल पाया है? इस बात पर विचारने पर हम पाते हैं कि कहने के लिए
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क्यों न करूँ मैं गणतंत्र दिवस का बहिष्कार

गणतंत्र दिवस है आया सोचने पर हमने है विचारा है नहीं यहाँ बच्चों को पढने का अधिकार है नहीं बच्चों को खेलने का अधिकार बच्चे करते हैं होटल में काम बेचते हैं रेल पर नशा तमाम देखने वाला नहीं है कोई उसे फिर हमने देश को गणतंत्र माना कैसे गणतंत्र दिवस है आया
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नववर्ष का संकल्प : हमें सुधरना होगा

नव वर्ष पर सबों को हार्दिक शुभकामनाएं । हरेक वर्ष हम नववर्ष पर एक - दुसरे को शुभकामनाएं देते है । पर कभी हमने सोचा है कि सिर्फ शुभकामनाएं भर दे देने से क्या हमारा समाज व देश उन्नति कर सकेगा । कभी नहीं , हमें अपने समाज से बुराई को हटाना होगा । जब तक ह
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अब तुम्हारे हवाले बदन साथियों

हमारे देश को स्वतंत्र हुए ६२ वर्ष हो गए और अब हम पूर्ण रूप से स्वतंत्र हैं, कोई कुछ करने वाला नहीं है। चाहे भ्रष्टाचार का मामला हो या अपराध का मामला हो हम बेरोकटोक आगे बढ़ रहे हैं। आखिर हम स्वतंत्र जो हैं, मेरे कार्य पर कोई भला क्यों अंकुश लगाएगा? इतन
Dec 29 2009 11:43 AM
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गलती

मुझे नहीं मालूम कि मेरी क्या गलती है मुझे तो बस इतना मालूम कि गलती मेरी साथ हुयी न्याय पाने की थी आशा पर न्याय पाना भी दुस्वार हुआ गलती बताने वाले कोई नहीं पर सजा देने वाले हजार हुए मेरा सुनने वाला कोई नही पर आरोप लगाने वाले हजार हुए घाव पर मलहम लगान
Dec 29 2009 11:43 AM
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नव वर्ष के शुभ किरण

नव वर्ष के शुभ किरण नव वर्ष के शुभ किरण स्‍वच्‍छ करे मेरा तन व मन चले एक ऐसा पवन कि झूम उठे सारा चमन हर कलियाँ खिलती रहे हर बगिया महकती रहे मज़हब की खुशबु उठती रहे ज्ञान की धारा बहती रहे नव वर्ष के शुभ किरण स्‍वच्‍छ करे मेरा तन व मन स्‍वच्‍छ करे मेरा
Dec 29 2009 11:43 AM
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शहीदों को श्रद्धांजलि

क्या फायदा हुआ तुम्हें किसी का घर सुना करके किसी के मांग का सिंदूर उतार के किसी को अनाथ करके किसी को यों ही तड़पा के किसी को बेमौत मार के क्या फायदा हुआ तुम्हें सबों को दर्द देके है तुम्हारे पास कोई जवाब नहीं है क्योंकि तुम ख़ुद बेदर्द हो क्या जानोगे
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याद

याद हर रोज तुम आती हो हर वक्त साथ रहती हो तुम्हारे साथ रहने के कारण ही मैं राह चल पाता हूँ तुम साथ रहती हो पर फिर भी नहीं कर पाता तुम्हारा शरीर-स्पर्श कारण तुम शरीर से नहीं बल्कि तुम्हारी सिर्फ याद आती है तुम्हारी सिर्फ याद आती है तुम्हारी याद में वो
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एक भिखारी ऐसा भी

देखा मैं एक ऐसा भिखारी जो खा रहा था खैनी सोचा पेट भरने के लिए कुछ नहीं है उसके पास माँगता है कुछ लेकर आस दया करके कोई कुछ खाने देता है कोई कुछ पैसे देता है पर वह वह भिखारी मिले पैसे से खैनी खाता है सोचने पर मैं मजबूर हुआ कि इसे पैसे देना पुण्य है या
Dec 29 2009 11:43 AM
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बारात का मतलब

मैंने अपने पिछले पोस्ट में बताया कि किस प्रकार हमारे समाज में जबरन लड़कियों की शादी करायी जाती है? फिर यदि शादी के रश्म को किसी भी तरह पूरा करने को ही शादी मानें तो होने वाले शादियों के गवाह या साक्ष्य कितने बन पाते हैं? हिन्दू परिवार से जुड़े रहने के
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जहाँ जबरन शादी होती है

मित्रों , आज हम आपको उस स्थान के बारे में बताने जा रहा हूँ जहाँ जबरन शादी होती है । चौकिये नहीं, यह कोई कोरी-काल्पनिक बात नहीं बल्कि वास्तविकता है। आगे पढ़ें ( Click Here )
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जागो बहना जागो

हर परिवार, हर जाति, हर समाज में शादी बड़ी धूमधाम से होती है। शादी को लोग मांगलिक व शुभ मानते हैं। दुल्हन अपने बाबुल के घर को छोड़कर पिया संग ससुराल जाती है और फिर वही ससुराल ही उसका घर- परिवार हो जाता है। दुल्हन का एक नया जीवन शुरू होता है। ससुराल में
 
महेश कुमार वर्मा
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भ्रष्टाचार है जिस देश की पहचान

जिस देश में भ्रष्टाचार होती है , उस देश के हम वासी हैं । दिस देश में न्याय का होता हलाल, उस देश के हम वासी हैं। जहाँ बोलने का नहीं है अधिकार, उस देश के हम वासी हैं । जहाँ स्वतंत्र रहते हुए भी हैं गुलाम, उस देश के हम वासी हैं। जहाँ धर्म से बड़ा पैसा ह
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हमें मनुष्य बनना होगा

दिवाली का पर्व बीत गया और अब महापर्व छठ निकट आ गया है । आपको याद होगा पिछले वर्ष छठ पर्व के उपरांत पशुओं ने कवि के रचना के माध्यम से मनुष्य को मुर्ख की संज्ञा देता हुए शाप दिया था कि इनका व्रत निष्फल जाएगा । क्या हम मनुष्य पशुओं के शाप से मुक्त होंगे
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दीपावली की शुभकामनाएं

दीपावली की शुभकामनाएं अंतर में ज्ञान का दीप जलाकर सत्य के प्रकाश में ईमानदारिता के राह पर चलें।
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दीपावली का संकल्प

दुर्गा पूजा व दशहरा बीत गया । ईद भी बीत गया और अब आ गया बुराई पर अच्छाई के विजय व अंधकार से प्रकाश में जाने का प्रतिक पर्व दीपावली । दीपावली सा पर्व हमें अंधकार से प्रकाश में जाने की प्रेरणा देता है । इस पर्व के अवसर पर कई दिन पहले से ही लोग अपने घरो
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पहले राम बनो

आज विजया दशमी का पर्व है। इसी दिन लोग दशहरा पर्व का समापन भी करते हैं। कहा जाता है कि दस सिरों वाला रावण इसी दिन हारा था यानि भगवान राम के हाथों मारा गया था। और इसी के यादगार में लोग इस दिन रावण का पुतला जलाते हैं और खुशियाँ मानते हैं। पर लोग यह भूल
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करें मानवता को महान

नमस्कार।आज से शारदीय नवरात्र आरंभ हो गया है। और इसके साथ ही दशहरा व दुर्गा पूजा का पर्व का भी शुभारंभ होगया। इस खुशी के माहौल में और भी खुशी आ गयी कि दो दिनों के बाद आपसी प्रेम व भाईचारा का पवित्र पर्व ईदहै। इन खुशी व पवित्र पर्व के अवसर पर आम जनों से
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Sep 19 2009 04:04 PM
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क्यों खफा हो मुझसे

क्यों खफा हो मुझसे यह तो बताक्यों चुप हो यह तो बता तुम्हारी चुप्पी मेरे दिल में यों चुभती है जिसका वर्णन मैं कर सकता नहीं फिर भी इस आश के साथ जिन्दा हूँ कि तुम्हारी चुप्पी टूटेगी और एक दिन तुम मेरे साथ दोगे मेरे साथ दोगे व मेरे दर्द सुनोगे मेरे दर्द
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स्वतंत्रता दिवस पर संकल्प

कल १५ अगस्त, २००९ को राष्ट्र स्वतंत्रता की ६२वीं वर्षगाँठ मना रहा है। लोग इस अवसर को मनाने के लिएतरह-तरह की तैयारियाँ किए हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि आज हम अपने को कैसे स्वतंत्र कहें? क्यों? आप खुद देखें व सोचें कि क्या आज हम वास्तव में स्वतंत्र हैं? आज
Aug 14 2009 06:28 PM
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तीन भिखारी

तीन भिखारी हाथ में कटोरा लिए आधा कपड़ा फटे हुए आधा तन उघड़े हुए एक हाथ में लाठी लिए झुकी कमर से चल रहे लोगों से हैं कह रहे दे दो बाबू दे दो इस बुढ़े को दे दो तू एक पैसे देगा वो दस लाख देगा दे दो बाबू दे दो दे दो बाबू दे दो उसे देख कई चलने वाले सिक्‍क
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विकलांग पुलिस प्रशासन ने अपराधियों के समक्ष घुटने टेके व पीड़ित को खुद मामला सलटाने को कहा

हमारी पुलिस प्रशासन का हालात कैसी है इसका अंदाजा इसी घटना से लगाया जा सकता है कि आगामी ३०.०४.२००९ को लोकसभा चुनाव है और इससे मात्र ८ दिन पहले २२.०४.२००९ को एक प्रा. वि. के हेडमास्टर श्री चितरंजन भगत का अपहरण होता है। पर घटना के चौथे दिन आज २५.०४.२००९
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पाप की विदाई

आओ साथ मिलकर लड़ें अपनी लड़ाई दुनियाँ से पाप और अत्याचार को दें हमेशा के लिए विदाई फिर कभी न आए ये पाप हम इंसानों के बीच नहीं बनें हम हैवान इंसानों के बीच हम हैं इंसान नहीं बनेंगे हैवान आएगी पाप यदि मेरे बीच तो दिखा दूंगा उन्हें सबसे नीच आओ साथ मिलकर ल
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न्याय व अन्याय

वो क्या देगा न्याय जो न जानता है कि क्या होता है न्याय वो क्या देगा न्याय जो जीवन भर किया अन्याय न्याय और अन्याय के बीच मरती है भोली जनता वो क्या जानेगा इसका दर्द जो है खुद बेदर्द जो है खुद बेदर्द -- महेश कुमार वर्मा ------------- http://paramjitbali
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नशा!

नशा! नशा शराब में नहीं नशा बोतल में नहीं नशा तो मेरे मन में है यदि होती शराब में नशा तो नाचती वो बोतल यदि होती बोतल में नशा तो नाचती वो बोतल पर नशा तो मेरे उस मन में है जिसने खुद को पागल बनाया व बोतल व शराब से दोस्ती निभाया नशा शराब में नहीं नशा मेरे
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होली

सबों को होली की ढ़ेर सारी शुभकामनाएँ। होली का पवित्र पर्व नजदीक है। मैं व्यक्तिगत रूप से सबों से आग्रह करना चाहता हूँ कि होली के पवित्र पर्व को पवित्र बनाएं रखें व इसे दूषित नहीं करें। कितने लोग इस होली के पर्व के ही दिन पुराने शत्रुता का बदला लेते है
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आपत्तिजनक टिपण्णी के लिए प्रकाशक जिम्मेवार क्यों?

आज मैं निम्न पोस्ट पढ़ा : ब्लागर हैं तो क्या? कानून से ऊपर नहीं ( http://teesarakhamba.blogspot.com/2009/02/blog-post_26.html ) ब्लागर और वेब पत्रकार भी कानूनी दायरे में ( http://janadesh.in/InnerPage.aspx?Story_ID=76 ) वैसे मैं सम्बंधित ब्लॉग को या
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गणतंत्र दिवस : एक प्रश्न

दो दिनों के बाद २६ जनवरी २००९ को हम गणतंत्र दिवस के ५९ वीं वर्षगाँठ मनाएँगे। प्रश्न उठता है की हम गणतंत्र दिवस क्यों मनाएँ? क्या सिर्फ इसलिए कि हम भारतीय है? जरा सोचें कि हमारे देश भारत वर्ष को स्वतंत्र हुए आज ६१ वर्ष वर्ष व गणतंत्र हुए ५९ वर्ष बीत ग
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