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16 Jun 2010
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लंगोटी .... पर नजर

कहावत का पोस्टमार्टममेरी समझ काफी समझदार है लेकिन एक बात समझ से बाहर है कि आदमी भागते भूत की लंगोटी ही सही... क्यों कहता है। पहली बात तो ये विवादास्पद है कि भूत होता भी है या नहीं। वैसे लोकमान्यताओं के अनुसार भूत वह भटकती आत्मा होती है जो लोग अपने जीवन
 
पवन *चंदन*
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सही कहा नेहरू जी ने...............

पुराने बच्चेपुराने बच्चेभ्रष्‍टाचारी हो गयेवैमनस्य का बीज बो गयेबस्तियों में आग लगाकर झांक रहे हैंदेश की कीमत आंक रहे हैंइन्हीं पुराने बच्चों ने मंदिर बनायाइन्हीं पुराने बच्चों ने मस्जिद बनाईखूब की है ह-राम की कमाईइन पुराने बच्चों ने जिंदगी कोअपने मन से
 
पवन *चंदन*
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क्‍या आप ढूंढ़ सकते हो ....

क्‍या जीवन था....जब चलती चक्की घोर घोर, सब बोले हो गयी भोर भोरफिर चून पीस कर चार किलो, गिड़गम पर रखा दूध बिलोनेती से जब जब रई चली फिर छाछ बटी यूं गली गलीयूं बांट बांट कर स्वाद लिया, बचपन को हमने खूब जियाक्या जीवन था वो ता...ता...धिनमैं ढूंढ़ रहा हूं वो
 
पवन *चंदन*
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फोटो..... ऐसे भी होते हैं

फोटोग्राफर स्त्री हो या पुरूषमैं सबकी तरफ एक आंख मींचता हूंजी हां फोटोग्राफर हूंफोटो खींचता हूंक्या करूं धंधा ही ऐसा हैआंख मारने में ही पैसा हैएक बार एक विचित्र प्राणी मेरे पास आयाउसने अपना एक फोटो खिंचायाबोलाये रहे पैसे संभालोइसके छै प्रिंट निकालोमैं इस
 
पवन *चंदन*
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इंटरनेशनल दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन में अविनाश वाचस्‍पति जी ने जो जैसा कहा, आप भी पढि़ए

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पवन *चंदन*
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आइये आपसे रूबरू हो लें

इसे व्‍यक्तिगत बुलावे की मान्‍यता प्रदान करें।यह सिर्फ सूचना है। जिसमें ब्‍लॉगर समुदाय के सभी सक्रिय, निष्क्रिय, टंकी धारक, बेटंकी ब्‍लॉगर सभी आमंत्रित हैं। पूर्ण विवरण के लिए नुक्‍कड़ की पोस्‍टें देखते रहिये। अपनी संभावना बतलाते रहिए। यह एक ऐतिहासिक
 
पवन *चंदन*
May 22 2010 02:00 PM
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हिन्‍दी ब्‍लॉगरों हिन्‍दी ब्‍लॉगिंग के मेले में चलते हैं वहां पर सबसे सब मिलते हैं (पवन चंदन)

आइये मेरे साथवैसे आपमें से बहुत सारेपहले ही आ चुके हैंपर जो मेरी तरह लेट हैंक्‍योंकि व्‍यस्‍त हैंया जल्‍दी चली जाती हैलाइट जहां परगड़बड़ा जाता हैनेट कनेक्‍शन भीखोलकर नीचे के लिंक कोघूमते रहिए मेले मेंजानते रहिए सबकोमजा आ रहा है अबतो।खोल लें
 
पवन *चंदन*
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व्‍यंग्‍य लेख हरिभूमि में प्रकाशित

गोपनीय या ओपनीयआज मैं श्री तेंदुलकर जी के बारे में चर्चा चलाना चाहता हूं, रोकना मत... वैसे जो बात ढकी दबी रहनी चाहिए, उसे ये गेंद की तरह उछालना चाहते हैं। बुजुर्गों ने कहा है...भजन-भोजन एकांत में। भोजन का मतलब है, खाना-पीना। अब श्री तेंदुलकर जी को कौन
 
पवन *चंदन*
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हिन्‍दी ब्‍लॉगर टंकी पुराण प्रतियोगिता का आयोजन

इस जानकारी को अधिक से अधिक ब्‍लॉगरों तक पहुंचाने के लिए अपने ब्‍लॉग पर पोस्‍ट लगा सकते हैं और चर्चाओं में इसका उल्‍लेख किया जा सकता हैआप स्‍वयं को एक सच्‍चा हिन्‍दी ब्‍लॉगर स्‍वीकार करते हैं तो इस प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी भावना को साबित करने का
 
पवन *चंदन*
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आंखों से सुनिये

ये कोई पहेली नहीं है। ये एक सवाल है। जी हां आप नहीं जानते इन्‍हें, हम बताते हैं कि ये एक पोलैंड की महिला हैं। ये दिल्‍ली में हुए पुस्‍तक मेले में हिन्‍दी की पुस्‍तकें तलाश रही हैं। अब मैं पूछता हूं आपसे एक सवाल .... ये चित्र जो कुछ भी कह रहा है, बताएं
 
पवन *चंदन*
Mar 23 2010 10:45 AM
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बड़ों के लिए बाल कविता

बिल्‍ली आयी बिल्‍ली आयीबिल्‍ली आयी बिल्‍ली आयीदौड़ भाग कर दिल्‍ली आयीखेल रहा था लगातारएक चूहा देखा सड़क पारआया उसके मुंह में पानीझट से अपनी मूंछें तानीतड़प रही थी भूख की मारीलेकिन क्‍या करती बेचारीमोटर गाड़ी कार सवारसबकी खूब तेज रफ्तारचले सड़क पर भीड़
 
पवन *चंदन*
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आओ हंस लें....... भला मानो होली है

दुविधा ही दुविधा उन्‍हें जो चश्‍मे बद्दूरबिन चश्‍में रहता नहीं है चेहरे का नूरजब चश्‍मा हो नाक पर बरसे रंग हजारकुछ भी तो दिखता नहीं शीशों के उस पारक्रोधित हों या जतलाएं मुस्‍काकर के प्‍यारनर था ये कोई सांड सा या थी कमसिन नार दिखने में बाधा करे होली पर हर
 
पवन *चंदन*
Mar 01 2010 12:40 PM
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भला मानो होली है

निवेदन फागुन सेन जाने कब क्या हुआ बचपन हो गया लुप्तयौवन छलके देह से फागुन रखियो गुप्तकुछ छींटे महसूस कर भीगा सारी रात-मौसम हुआ शरारती खबर बांट दी मुफ्तभांग और होलीलगती पीकर भांग को होली बड़ी विचित्रफिर तो भाभी सा लगै देखो अपना मित्रअगर कहीं वो पास नहीं
 
पवन *चंदन*
Mar 01 2010 07:57 AM
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शुभ काम न आएं

भल्‍ले गुझिया पापड़ी खूब उड़ाओ मालखा खा कर हाथी बनो मोटी हो जाए खालफिरो मजे से बेफिक्री से होली में,मंहगाई में कौन लगाए चौदह किला गुलाल
 
पवन *चंदन*
Feb 28 2010 06:02 PM
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बच्‍चों के लिए एक रचना

जंगल की होलीलगा महीना फागुन का होली के दिन आयेइसीलिए वन के राजा ने सभी जीव बुलवायेभालू आया बड़े ठाठ से शेर रह गया दंगदुनिया भर के रंग उड़ेले चढ़ा न कोई रंगहाथी जी की मोटी लंबी सूंढ बनी पिचकारीखरगोश ने घिघियाकर मारी तब किलकारीउसका बदला लेने आया वानर हुआ
 
पवन *चंदन*
Feb 28 2010 04:37 PM
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दिल्‍ली हिन्‍दी ब्‍लॉगर मिलन : आंख में ऊंगली मत करिये (पवन चंदन)

मैं तो नहीं आ पायाइच्‍छा तो खूब रहीपर मन का कहापूरा नहीं होता।रेल विभागकभी नहीं सोतान सोने देता है।मैं तो नहीं पहुंच पायापर मेरी हाजिरी बजाईमेरे कैमरे नेउसमें यह चित्र मिला ।यह तो सही नहीं हैहिन्‍दी ब्‍लॉगिंग मेंविवाद पैदा करनाआंख में ऊंगलीकरने के है
 
पवन *चंदन*
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अ...वि....ना.....श........। व्‍यंग्‍य हरिभूमि में प्रकाशित

सांप करोड़ों केकालोनी में तड़के तड़क बीन की धुन सुनाई दी। होगा कोई सपेरा, सोचकर मैं अखबार पढ़ने में तल्लीन हो गया। अखबार ही तो सुबह का नाश्‍ता है। इसके बिना मुझे चाय भी फीकी लगती है। बीन का शोर बढ़ता ही जा रहा था। कालोनी में भीड़ भी बढ़ने लगी और शोर
 
पवन *चंदन*
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पाबंदी

सदन मेंजूते चप्‍पलचलाने की क्‍या तुकबंदी हैजवाब मिलाहथियार ले जाने परपाबंदी है
 
पवन *चंदन*
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डाकिया या कुरियर

डाकिया आता थाएक थैला लाता थामोहल्‍ला जुटता थाजिज्ञासा और आशा के बीचहरेक आनंदित होता थाडाकिया पता पूछतातो हर कोईघर तक छोड़ आने को तैयार होता थाअपने आप को धन्‍य समझता थाआज पहली बात तोडाकिया नहीं आताकोरियर आता हैवह पता पूछता हैतो कोई नहीं बतातापड़ोस में कौन
 
पवन *चंदन*
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सभी ब्‍लागरो के लिए शुभकामना

एक बूढ़ा साल कल रात ही में खो गयाऔर एक नन्‍हा शिशु नववर्ष पैदा हो गयाआओ मिल स्‍वागत करें प्‍यार का परिधान देकामना है ये तुम्‍हें भी मान दे सम्‍मान दे
 
पवन *चंदन*
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सर्दी के दोहे

शीतलहर के कोप का चला रात भर दौर धुंध ओढ़कर आ गयी भयाक्रांत सी भौर सूरज कोहरे में छिपा हुआ चांद सा रूप शरद ऋतु निष्‍ठुर हुई भागी डरकर धूप सूरज भी अफसर बना, है मौसम का फेर जाने की जल्दी करे और आने में देर दिन का रुतबा कम हुआ, पसर गयी है रात काटे से कटत
 
पवन *चंदन*
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एक व्‍यंग्‍य लेख जो आज के हरिभूमि में प्रकाशित है

पीली दाल पीनी है जब हम पढ़ते थे, विज्ञान के शिक्षक ने बताया था कि पृथ्वी गेंद की तरह गोल है। उसी आकृति की अन्य वस्तुएं जैसे संतरा या खरबूजा भी उस जमाने में थे, तरबूज भी था। लड्डू और रसगुल्ले भी थे। कम से कम स्वाद तो होता। क्यों इस नीरस गेंद का उदाहरण
 
पवन *चंदन*
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जन्‍मदिन की पहली पहेली : पहेली हूं मैं

आओ यादों को टटोलें किसका जन्‍मदिन है यही बूझें बधाई तो सब देते हैं पर पहले जान तो लें 14 दिसम्‍बर है आज किसको रहा है याद करते हुये सब काज राज कपूर संजय गांधी श्‍याम बेनेगल और ... ब्‍लॉग जगत में से ... जल्‍दी यादों को रिफ्रेशायें फिर शुभकामनायें दे जा
 
पवन *चंदन*
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तेंदुलकर का इंतजार मैंने भी किया था कभी ...

वैसे तो मुझे बचपन से ही समाचार पत्र पढ़ने में बेहद रूचि रही है। इसी क्रम में एक दिन मैंने एक इंटरव्‍यू पढ़ा। यह इंटरव्‍यू था उस समय के विख्‍यात बल्‍लेबाज श्री सुनिल मनोहर गावस्‍कर का । अपने इस इंटरव्‍यू में गावस्‍कर ने जो भविष्‍यवाणी की थी वह कुछ यूं
 
पवन *चंदन*
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मिल कर इसका नाम विचारो

एक पैर का संत महान जिस बिन हम होंगे बेजान इस गूंगे के हाथ हजारों मिल कर इसका नाम विचारो
 
पवन *चंदन*
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नाम बता क्या मेरा

ग्रेफाइट की बाडी मेरी लकड़ी के हैं कपड़े हर कोई उपयोग में लाता हाथ में पकड़े पकड़े रंग बिरंगी प्यारी प्यारी बड़ा नुकीला चेहरा तेरे अंदर बुद्वि है तो नाम बता क्या मेरा
 
पवन *चंदन*
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बताओ तो

वर्षा में तो यौवन पाया शांत हो गयी जाड़ों में मर गयी जाकर सागर जो जन्मी बीच पहाड़ों में
 
पवन *चंदन*
टैग: सागर
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ढूढ़ों अपने कान में

अंक डंक रंक में गुडि़या जी की फ्राक में कलियों में मुस्काता रहता देखो अपनी नाक में सड़क किनारे रहता हूं मैं बीचों बीच मकान में नहीं मिला तो अक्ल लड़ाओ ढूढ़ों अपने कान में
 
पवन *चंदन*
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शुभकामनाएं

नगर धुएं से भरा, सांस हुई दुश्‍वार बम पटाखे फुलझड़ी, मत फूंको मेरे यार आज की दिवाली पर हमने और हमारे बच्‍चों ने आतिशबाजी का प्रयोग नहीं किया है।
 
पवन *चंदन*
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नाम बता दे बस मेरा

ये मेरी मजबूरी है मुझे सिर्फ समय से लड़ना है अपने दो हाथों के बल पर हर पल आगे ही बढ़ना है कब सूर्य उगा कब शाम हुई ये काम देखना है तेरा मैं चलती हूं और स्थिर हूं तू नाम बता दे बस मेरा
 
पवन *चंदन*
Oct 14 2009 07:38 PM
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सोचो सोचो सोचो

सब चीजों को धूप सुखाये लेकिन हमें भिगोती हम तो हरदम भीगे रहते छाया जो न होती चलो खुजाओ सभी खोपड़ी है कैसी ये माया इस बात को वही बताए जिसको पसीना आया
 
पवन *चंदन*
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एक नन्‍ही पहेली

मैं तो तेरी रक्षा करता तू रोंदे मेरे तन को घर के अंदर आने न दे कैसे रोउं जीवन को पिछली वानर वाली पहेली का उत्‍तर था ' पटाखा '
 
पवन *चंदन*
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औटो चलो कपास

कहीं नहीं औलाद की मेरे बिन औकात औरत के सम्मुख रहा चलो बताओ बात मैं और तू के बीच में खोजो करो प्रयास नहीं मिला तो दण्ड में औटो चलो कपास पिछली पहेली का उत्‍तर है ' घड़ी '
 
पवन *चंदन*
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इस वानर का नाम बताओ

एक वानर की पूंछ में जब आग लगाई जाती है बच्चे भागें दूर दूर जनता पीछे हट जाती है चिंगारी बनती है शोला हरेक स्तब्ध रह जाता है लंका में आग नहीं लगती वानर पूरा जल जाता है
 
पवन *चंदन*
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दिमाग की बत्‍ती जलाओ

एक साल की उम्र हमारी बच्चे पूरे दरजन बारिश भरी जवानी अपनी गर्मी मेरा बचपन ठंडा ठंडा हाय बढ़ापा काटे नहीं कटेगा जो भी मेरा नाम बता दे बुद्विमान वो होगा
 
पवन *चंदन*
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चांद की चिंता

चांद ने कहा सूरज से तुम मुझे सुरक्षा दो या सुखा दो वरना ये मेरा अंग अंग तोड़ देंगे और सारा पानी निचोड़ लेंगे ये अपने कदम अंतरिक्ष में बढ़ाना चाहते हैं पृथ्‍वी के साथ साथ मुझे भी सड़ाना चाहते हैं जो अब तक मुझे दूर से साला ‘अपने बच्चों का मामा‘ कहते थे
 
पवन *चंदन*