4
तूने ये क्या सितम किया : 'शकील' बदायूनी - तलत महमूद
मैं 'शकील' दिल का हूँ तर्जुमाँ कि मुहब्बतों का हूँ राज़दांमुझे फ़ख्र है मेरी शायरी मेरी ज़िंदगी से जुदा नहींबकौल साहिर लुधियानवी :'जिगर' और 'फ़िराक़' के बाद आने वाली पीढ़ी में 'शकील' बदायूनी एकमात्र शायर हैं जिन्हों ने अपनी कला के लिए ग़ज़ल का क्षेत्र चुना
Jun 09 2010 06:15 AM


Shuffle








