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मेरी डायरी

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08 May 2010
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जिंदगी जिधर ले जाए...

ये जिंदगी किसे बहाकर कहाँ ले जाय , ये कोई नहीं जानता है. इसी तरह दौड़ती भागती दुनिया में तमाम तरह की चीजों से टकराते हुए मैं आखिर देश की राजधानी में अपना ठौर ढूंढता हुआ आ ही गया. जिंदगी ने मुझे अभी तक उतनी खुशियाँ नहीं दी है या यूं कहे कि इच्छाए कभी मरती
 
डॉ. अजीत कुमार
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सुर संग्राम विजेता………….. मैं ....?

                               इस सुपरहिट ग्रैंड फिनाले को हुए 6 महीने हो गए. उससे मुलाक़ात भी पहले हो
 
डॉ. अजीत कुमार
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"नवम् सिद्धिदात्री"

या देवी सर्वभूतेषु,क्षमा रूपेण संस्थिता:,नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमो नमः॥माता के अनन्य भक्तजन,आज नवरात्रि का नवम दिवस अर्थात अन्तिम दिवस है। आप सबों के साथ किस तरह ये नौ दिन गुजर गए खुद मुझे भी नहीं पता चला। आप सबों का साथ ही था जो मैं माँ के
 
डॉ. अजीत कुमार
Mar 08 2010 03:34 PM
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बदन पे सितारे लपेटे हुए......

दोस्तो, आपने मेरी ग्रामोफोन गाथा को पसंद किया और इसका पहला भाग भी आपने देखा. आप सभी का शुक्रिया. हमारे कई संगीतप्रेमी मित्रों ने सलाह दी कि इस मजेदार गाथा को आगे भी जारी रखा जाए. आप सबों का अनुरोध मैं कैसे ठुकरा सकता हूँ. वैसे भी यूनुस भाई ने अपने वि
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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अथ श्री ग्रामोफोन गाथा....

एक बार आप लोगों से क्षमा प्रार्थना के साथ ये पोस्ट आपके लिए फ़िर से हाजिर है...) ...... ग्रामोफोन से मेरा परिचय तो भैया ने करवा ही दिया पर ये परिचय एक लगाव में परिणत हो गया। अब तक जिन गानों से मेरा सिर्फ़ दूर का नाता था अब वो मेरे क़रीब बजने लगे थे और
 
डॉ. अजीत कुमार
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भैया का वो बाजा ....

दोस्तो, एक बार मैं फिर हाजिर हूँ आपको अपने उन अनुभवों से रूबरू कराने को जिनसे मैं ख़ुद पहली बार मिला था। इस 'पहली बार' की कड़ी में पहले आप मिल चुके है अज़ीज़ नाजां की उस क़व्वाली से, अहमद हुसैन-मुहम्मद हुसैन की उस ग़ज़ल से , उस भजन से, और जगजीत सिंह जी
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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एक उम्दा ग़ज़ल, दो दिलकश आवाजें....

दोस्तो, नमस्कार! "प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं, बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं।" जी हाँ, आपसे जुड़ने की जब मैं दिल में ख्वाहिश कर लूँ तो किसी न किसी तरह आपके लिए हाजिर हो ही जाऊंगा और कुछ अच्छा ही लेकर आऊंगा इतना तो विश्वास है। आ
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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झूम बराबर झूम.......

संगीतप्रेमी सुधी पाठको, नमस्कार। आज बहुत दिनों बाद मैं आपके सामने फिर से हाजिर हूँ अपने एक और पसंदीदा कलाकार की खूबसूरत रचना को लेकर। जैसा आपको शीर्षक देख कर ही आभास हो गया होगा आज मैं आपको झूम जाने का आग्रह करने वाला हूँ। ये रचना ना तो कोई पॉप है ना
 
डॉ. अजीत कुमार
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लता मंगेशकर - मेरी आवाज़ ही पहचान है.......

दोस्तो, बहुत दिनों से आपसे बातें करने का मन हो रहा था। आज मैंने सोचा कि बात की शुरुआत कैसे की जाये। तभी लता जी के गाने रेडियो पर बजने लगे । मुझे लगा क्यों न आज फिर मैं एक पोडकास्ट आपके लिए पेश करूं वो भी लता जी के बारे में। खोजबीन शुरू की मैंने। मुझे
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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इस मौसम में अंगूर भी नमकीन है....

दोस्तो, कल यानी ६ नवम्बर को हमारे चहेते कलाकार संजीव कुमार जी की पुण्यतिथि थी. उनके बारे में कुछ लिखने का भी मतलब है कि कमसेकम दो पोस्ट की जरूरत। पर साथियो , मैंने कोशिश की है उनके बारे में लिखने की और वो भी सिर्फ एक ही पोस्ट में। यूँ तो आप सब उनके ब
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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सचिन दा को याद करते किशोर कुमार साहब.....

दोस्तों , नमस्कार। कल मैंने आपके लिए एक पोस्ट लिखी थी जिसमें मैंने जिक्र किया था कि हमारी अपनी विविध-भारती के स्वर्ण जयंती के मौक़े पर हमारे देश के स्टार ब्रोडकास्टर अमीन सायानी साहब प्रस्तुत करने जा रहे हैं "स्टार जयमाला" दोपहर 12:30 बजे से. यूँ तो
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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अमीन सयानी के साथ स्टार जयमाला.....

दोस्तो, हमारी - आपकी सबकी पसंदीदा " विविध-भारती " अपनी स्वर्ण जयंती मना रही है । 50 वीं वर्षगांठ के अवसर पर विविध-भारती ने जो पिटारा हमारे सामने खोला है तो उससे एक से एक मोती रत्न आदि निकलते ही जारहे हैं। पिछले महीने ३ अक्तूबर को ही रात दस बजे एक प्र
 
डॉ. अजीत कुमार
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साहिर साहब और ये चाँद....

अक्तूबर 1980, एक ऐसा दिन जिसने हमसे एक हरदिल अजीज शायर को हमसे छीन लिया था। जी हाँ , मैं बात कर रहा हूँ शायर और गीतकार साहिर लुधियानवी साहब की। यूँ तो उनका नाम उनके वाल्दायन ने रखा था अब्दुल हई, पर हम उन्हें साहिर लुधियानवी के नाम से ही जानते हैं। ८
 
डॉ. अजीत कुमार
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नया दिन... नया रास्ता

दोस्तो, नमस्कार ! 10 दिनों तक भक्ति भाव में डूबे रहने के बाद अब आपके सामने एक बार पुनः अलग अलग विषयों को लेकर हाजिर हो जाउंगा। इन दस दिनों में ब्लॉग लेखन की कई कटु-मधुर अनुभूतियाँ मुझे हुईं। किसी विषय को लगातार लेकर चलना ही सबसे बड़ी बात होती है। नए ब
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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विदाई माँ की

माँ रक्षा करो। आज माता हम सबों को छोड़ कर अपने घर वापस जा रही हैं। जी हाँ, माँ नौ दिनों तक अपने नैहर में रह लीं, अब हम सबों को रोता छोड़ कर जा रही हैं। माँ की आंखों में भी आंसू हैं। नौ दिन हम सबने माँ की पूजा और अब दसवें दिन हम उन्हें अपने घर विदा कर
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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अब मेरी बारी है.........

आज कई दिनों की खामोशी के बाद फिर आपसे रूबरू हो रहा हूँ। वक़्त के थपेड़ों के साथ चलते हुए कब साल दर साल गुजर जाते हैं पता ही नहीं चलता। हम अपने आप में मसरूफ़ होते चले जाते हैं। स्थितियां कुछ ऐसी बदलती हैं कि हमें अपने शौक से भी मुँह मोड़ लेना पड़ता है,चाहे
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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चलें बाबा के द्वार... चलें देवघर नगरिया.. बोल - बम !

जय शिव शंकर! दोस्तो, यदि आपने मेरी कल की पोस्ट पढ़ी होगी, तो आप ने देखा होगा कि मैने एक बात शुरुआत में ही लिखी थी.. "......... पता नहीं कितने रूपों में सावन हमारे आस पास बिखरा पड़ रहा है. हर कोई अपने अपने तरीके से इसे समेटने में लगा है. ........आश
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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सावन का पावन महीना और भगवान भोलेनाथ के द्वारे जाते काँवरिया.....

आजकल सावन का  महीना चल रहा है और बारिश की फ़ुहारें हम सभी को दिलो दिमाग तक भिगोये जा रही हैं. कहीं सावन के झूले पड़ रहे हैं तो कहीं सावन के बादलों को विकलता से पुकारा जा रहा है. कहीं सावन का गुणगाण किसी शेरो शायरी से किया जा रहा है तो कहीं सावन से
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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विवशता

कमजोर, कातर नेत्रों से ताकती हुई. गिन रही थी, दो चार पल जिंदगी के. गुन रही थी, हुई क्या उससे ख़ता. बूचड़खाने कटने खड़ी थी. क्या थी उसकी विवशता? ( 5th Feb. 1994)
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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चौदह साल पुरानी पर अभी भी उतनी ही प्रासंगिक

बीते चौदह सालों में काफ़ी कुछ बदल जाता है. हमारे जीवन में, हमारे आसपास एक अलग दुनिया नज़र आने लगती है. स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ख़ुद बाल बच्चेदार हो जाते हैं, उस समय के युवा प्रौढ़ता की ओर अग्रसर होने लगते हैं. युवाओं की जिम्मेदारियाँ बढ़ने लगती है . प
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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वो भूली दास्तां... लो फ़िर याद आ गई....

दोस्तो, अभी तीन दिन पहले ही मैंने एक पोस्ट लिखी थी " आंगन की वो पहली किलकारी" . इसमें आप रूबरू हुए मेरे उन बीते दिनों से, उन यादों से जो हम दोनों भाईयों ने मिल कर बांटी थी. चूंकि मेरा जन्मदिन था 4 अप्रैल को सो उसे ही केन्द्र में रख कर मैंने
 
डॉ. अजीत कुमार
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आंगन की वो पहली किलकारी

माँ-पिता की शादी के तीन - साढ़े तीन साल गुज़र चुके थे. गाँव की बड़ी-बूढ़ी औरतों के बीच कानाफ़ूसियां शुरू हो चुकी थीं. माँ की गोद अब तक हरी नहीं हुई थी. पति पत्नी अपनी विदुषी माँ/सास के कहे अनुसार दवाओं और दुआओं दोनों से आस लगाये हुए थे. अंततः "माँ ते
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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अब चराग़ों का कोई काम नहीं....

दोस्तो, कभी - कभी हम अपने आस पास पड़े हुए कुछ चीजों से अनजान रहते हैं. और जब एकाएक जब वो चीजें हमारी नजरों के सामने आती हैं तो हमें एक आश्चर्य सा होता है कि अब तक हुम इससे यूं अनजान कैसे बने बैठे थे. ऐसा ही कुछ मेरे साथ हुआ जब एक गाना जो मेरे अल्बम मे
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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वसंत और फगुआ

वसंत अपने शवाब पर है और हवाओं में फगुनाहट की मादक महक सरसरा रही है. इसी अनुभव को आत्मसात करने के लिए मैं कुछ दिनों के लिए अपने गाँव चला गया था. यूँ तो गाँव जाने का मकसद कुछ और ही था पर फागुन के इस महीने में जो छटा चारों ओर फैली रहती है उसे देखने का ल
 
डॉ. अजीत कुमार
Dec 29 2009 11:47 AM
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Curtain Down

The 5 month old reality show air on MAHUA chanel, SUR-SANGRAM, came to an end last night. The grand finale was organised here in the historic Gandhi Maidan in Patna. Both the participants Mr. Alok kumar from Bihar and Mr. Mohan rathaud from UP was
 
डॉ. अजीत कुमार
Nov 07 2009 08:07 AM
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An appeal to all blogger friends

You may say it is my affection , my love,. . . Even my madness. Vote for SUR SANGRAM telecssted on Mahua chanel,hero Alok kumar. Just type BIHAR and send it to 58888.
 
डॉ. अजीत कुमार
Nov 01 2009 04:23 PM
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एक बेहतरीन के लिए, एक आग्रह दिल से....

दोस्तों, आज से लगभग 5 महीने पहले मैंने एक पोस्ट आपको समर्पित की थी। उस पोस्ट का मौजूं था " महुआ" चॅनल पर प्रसारित होने वाला प्रोग्राम - सुर संग्राम . उस प्रोग्राम में एक गायक का मैंने जिक्र किया था जिसका नाम है आलोक कुमार । और ये आलोक एक तरह से मेरा
 
डॉ. अजीत कुमार
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पूर्वांचल के लोकगीत और एक सुर संग्राम

अपने प्रदेश की भाषा किसे अच्छी नहीं लगती और खास कर जब वो अंतर्राष्ट्रीय ख्याति नाम की हो। भोजपुरी के लिए भी कुछ ऐसा ही है कुछ हम पूर्वांचल वालों के दिलों में. अगर बिहार के अलग अलग क्षेत्रों की बात करें तो वैसे मैं अंगिका बोली वाले अंग क्षेत्र से आता
 
डॉ. अजीत कुमार
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"महागौरीति च अष्टमं"

या देवी सर्वभूतेषु,शांति रूपेण संस्थिता:,नमस्त्स्यै, नमस्त्स्यै, नमस्त्स्यै, नमो नमः॥माँ के भक्तो,नमस्कार! माँ आप सब का कल्याण करें।माँ की पूजा करते हुए आप हम सब भक्त अन्तिम दौर में पहुंच चुके हैं। आज माँ की पूजा का आठवां दिन है, अर्थात अष्टमी है।माँ के
 
डॉ. अजीत कुमार
Oct 19 2007 07:33 AM