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अभिवर्ल्ड

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02 Jun 2010
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अब दुख भरे दिन बीते रे भैया ,, सब सुख .......

फोन की घंटी बजी,,, जो बजती ही चली गई,,, अटेंड किया तो चचा की आवाज आई।अरे भतीजे,, खुश हो जा,, अब दुख भरे दिन बीते रे भैया ,, सब सुख आने वाला है,,,,।अचकचाए से अनमने से मैंने चचा से पूछ ही लिया,, कैसा सुख,, बस सुना ही सुना है सुख भी कुछ होता है,, तुम किस
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सुर सुर की बात

चचा हंगामी लाल आज बहुत दिनों बाद नजर आए तो हमने कहा चचा कहां चले गए थे, इतने दिन। अरे कहीं नहीं, बस यूं जरा मन नासाज था इतने दिनों तक बड़े परेशान हो रहे थे। क्यों चचा क्या बात हो गई थी.बस यूं ही, पर आज जरा मन ठीक है, देश तरक्की कर रहा है न, इसलिए।चचा की
Jun 01 2010 07:00 PM
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इस्तीफे के साइड इफेक्ट

कई दिन हो गए हमें चचा हंगामी लाल के कुछ समाचार नहीं मिल रहे थे। सो आज हम सवेरे उनके कमरे पहुंच गए। वहां पहुंचे तो क्या देखते हैं, चचा बड़ी गम्भीर मुद्रा में अखबार हाथ में लिए पता नहीं क्या सोच रहे हैं, हम कहे सलाम चचा, कैसे हैं। हमारी आवाज सुन कर उदास से
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जिंदगी

कतरा कतरा जिंदगीलम्हा लम्हा बंदगीक्या है,क्यूं है ये बंदगीन समझ, न समझा पाई ये जिंदगी
Feb 18 2010 04:38 PM
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सड़क पर दौड़ता आतंक

पूना में विस्फोट हो गया...। आतंक की एक ओर दास्तां लिख गया.....। खबरों की सुर्खियां कह रही हैं,,,। इन हमलों की योजना बनाने वाले विदेशी थे.....। पर इन्हें अंजाम देने वाले हाथ,, हिन्दुस्तानी हो सकते हैं,,,। गृहमंत्री कह रहे हैं,, हमला और भी बड़ा हो सकता था,
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जय युवराज,,

आज चचा हंगामी लाल बहुत जोर से चिल्ला रहे थे,,, मिल गया ,, मिल गया,, मिल गया,,चाचा को यूं बेसाख्ता चिल्लाते देख हमसे रहा नहीं गया,,,,,,, अरे चचा क्या मिल गया,,, भतीजे हमें देश का सही वारिस मिल गया,,, क्यों चचा क्या बात हो गई,,, अरे देखते नहीं ,, देखते
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उतिष्ठत् जाग्रत प्राप्यवरानिबोधत्

आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है, यानी युवा दिवस। विवेकानंद ने युवाओं को किसी देश की तकदीर और भविष्य कहा था। उन्होंने ध्येय वाक्य दिया था, उतिष्ठत् जाग्रत् प्राप्यवरानिबोधत्। अर्थात, उठो जागो और तब तक मत रूको जब तक की लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाए। उठने,
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पार्टी विद अ डिफरेंस...

भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान इकाई में इन दिनो चल रही उठापठक को लेकर कल फेस बुक पर एक परिचित की टिप्पणी पढ़ने को मिली... वाकई भारतीय जनता पार्टी, पार्टी विद अ डिफरेंस...। दरअसल मामला राजस्थान में विधानसभा और लोकसभा चुनाव में पार्टी की हार के साथ शुर
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अध्यक्ष जी की दिलेरी और लोकसभा का टिकट

हमें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो रहा था।पर चचा थे कि हंस हंस कर हमें बताए जा रहे थे। अरे भइया, तुम नहीं मान रहे थे कि हमें लोकसभा का टिकट मिल जाएगा। देखो मिल गया। और हम उनके दिखाए अखबार में भारत जनसहयोग पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की सूची में हंगामी
Dec 29 2009 12:03 PM
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यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करेगी

कांग्रेस ने बिहार की 37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। उसकी यह पहल लोकतंत्र को मजबूत करने वाली साबित हो सकती है। आखिर उत्तर प्रदेश और बिहार हिन्दुस्तान के दो बड़े राज्य हैं जो लोकसभा में एक बहुत बड़ा प्रतिनिधित्व रखते हैं। यहां कांग्रेस
Dec 29 2009 12:03 PM
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चुनाव के खेल में अलगाव का जहर

चाचा हंगामी लाल का पिछले कई दिनों से कोई संदेश नहीं था। जाहिर है हमें उनकी चिन्ता होनी थी सो हुई। दफ्तर की व्यस्तताओँ के बीच आज कल करते करते आखिर हमने थोड़ा वक्त निकाला और पहुंच गए उनके घर। मन में घबराए हुए तमाम आशंकाओं को साथ हमने घर की कुण्डी खटखटा
Dec 29 2009 12:03 PM
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हार का हार किसके गले में

ज़माने की दोपहर हो चली थी और हमारी सुबह। अख़बारों का जायजा लिया जा चुका था। चाय का दौर चल रहा था। अचानक गेट का दरवाजा खुला और चाचा हंगामी लाल दनदनाते हुए घुसे चले आए। उनका चेहरा थोड़ा तमतमाया सा लग रहा था. मैंने कहा, चचा क्या बात है, काहे गर्म हुए जा र
Dec 29 2009 12:03 PM
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होम लोन- मन्दी की अनोखी मंडी

लीजिये जनाब एक बार फ़िर से होम लोन की मण्डी सज गई है। प्रोपर्टी बाज़ार के सूरमाओं की बांछे खिल गई हैं। , हमारा इतना कहना था की चाचा हंगामी लाल एकदम से बिगड़ पड़े, कहने लगे तुम को तो हर बात मैं राजनीति ही दिखाई पड़ती हैं। अब यदि कर्जा सस्ता हुआ हैं, गरीब
Dec 29 2009 12:03 PM
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शोर थमा अब जोर से चुनो

लो थम गया चुनाव का शोर। भाषण का जोर। भाषाओँ का सभ्य असभ्य आक्रमण । विकास से भ्रष्टाचार तक पाँव रखने और हाथ थामने का दौर। जादू के जोर से वोट की बोट तैराने का करिश्मा । नेताओ की फौज और कार्यकर्ताओं का टोटा । बगावत के सुर और मान मनोवल के बोल। पुराणी पंग
Dec 29 2009 12:03 PM
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धमाका.. धमाका.. धमाका.. धमाका

धमाका.. धमाका.. धमाका.. धमाका .. मुंबई में एक और धमाका .. अब तक का सबसे बड़ा धमाका.,, १५० मर गए ,, सवा तीन सौ घायल हो गए,, ५१ घंटों तक मुंबई में गोलियां गूंजती रहीं ... पुलिस - सेना - कमांडो सभी ने मिल कर इतना बड़ा हमला नाकाम कर दिया,, चंद लोगों ने प
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क्या इडियट हैं हम

आप कोई भी चैनल बदलें, किसी भी समय देखें, इन दिनों आमिर खान अपनी नई फिल्म 3 इडियट्स के प्रचार में जोर- शोर से जुटे नजर आएंगे। आमिर के बारे में कहा जा रहा है कि वे 100 प्रतिशत प्रोफेशनल हैं। इतने की अपने फायदे के लिए के किसी भी हद तक जा कर कुछ भी कर गु
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नया साल, उम्मीद पुरानी

मोबाइल पर चचा हंगामी लाल का मैसेज था, लम्हा लम्हा वक्त गुजर जाएगा, १६ दिन बाद नया साल आएगा आज ही आपको हैप्पी न्यू इयर कह दूं , वर्ना,, कोई और बाजी मार जाएगा विश यू है प्पी न्यू इयर २०१० ... चचा का यह मैसेज पढ़ कर हमारे चेहरे पर मुस्कान थी,, अरे एक सा
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हंगामी लाल की राज्य वार

बहुत दिन से दूसरे शहर की नौकरी बजा रहे हैं, छुट्टी में घर पहंचे तो शाम पड़ते ही चचा हंगामी लाल आ पहुंचे। बहुत दिन बाद मिल रहे थे, हम और वो दोनों बहुत खुश थे। बातों ही बातों में चचा बोल पड़े, अब मिल लो जितना मिलना हो,, क्योंकि कुछ दिन बाद तो तुम हमसे
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प्याज तो बहाना है,,

आज के अखबारों की हेडलाइन थी, एक ही दिन में प्याज के दाम दुगने हुए,,,। इससे पहले चीनी, दाल, आलू आटे के भावों को लेकर कुछ न कुछ छपता ही रहता है,,। दाम का बढ़ना अब एक सुर्खी भर रह गया है। कहीं कोई हलचल नहीं। अपने हितों के लिए वेतन भत्तों के लिए,, धरना प
Oct 14 2009 07:40 PM
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फोलोइंग गांधी की

शाम चार बजे जब मोबाइल बजा और स्क्रीन पर चचा का नम्बर दिखा तो चौंकना स्वाभाविक था, हमारे चचा सुबह सुबह एक्टिव होते है,, आज बेवक्त क्यों फोन किया,, जरूर कोई खास बात होगी सो हम भी तुरन्त दफ्तर में अपनी सीट से उठकर ( पत्रकार होने का यह भी एक नुकसान है जब
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गांव की सड़क ऐसी क्यों नहीं,,,,

आजादी के बासठ साल बीत गए हैं, और लोगों को अभी भी हालात में कोई अन्तर नहीं लगता। यहां कोटा में आसपास के किसान बिजली की मांग को लेकर एक महापंचायत में शामिल होने आए थे। बात भले ही राजनैतिक थी, लेकिन दर्द राजनीति से परे था। रैली में आए करीब सात आठ हजार क
टैग: चौपाल
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अब अगले रावण का इन्तजाम ....

लो फिर जल गया रावण। हर साल हम रावण जलाते हैं। पिछले साल से ज्यादा। मुझे आश्चर्य होता है कि इतने रावण आते कहां से हैं। अब तो नया ट्रेंड चला है, हर घर में रावण जलता है। बच्चे भी रावण जलाते हैं। मानो रावण अब खेल हो गया है। जयपुर में तो बकायदा रावण की मं
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चाय नाश्ता के रेट और छठा वेतन आयोग

आज फिर चचा हंगामी लाल का फोन आ गया। इसी के साथ चचा ने हमारे सामने एक खुलासा भी किया कि अब चचा गाहे बगाहे फोन करते रहेंगे और हम उनके फोन से बिल्कुल भी नहीं चौंके। हमने जब चचा से इस मेहरबानी का कारण जानना चाहा तो उनका कहना था , देखो भतीजे अब तुम इतनी दूर
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खींचतान की चिंता और क्रिकेट की चिता

सुबह सुबह मोबाइल की घंटी से नींद टूटना हमारे लिए कोई नई बात नहीं है, अक्सर ऐसा ही होता है जब मोबाइल हमें गुड मार्निंग कहता है। आज भी जब मोबाइल बजा तो उनींदें से हमने फोन का हरा बटन दबाते हुए कहा, हैलो, लेकिन दूसरी ओर की आवाज सुनते ही हमारी सारी खुमारी
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चाहिए एफिशिएंट ब्यूरोक्रेसी

कुछ दिन पहले की बात है,, एक बुजुर्ग महिला,उसका चेहरा ही उसकी उम्र को बयां करने के लिए काफी था, कोटा के दौरे पर आई एक मंत्री से वृद्धावस्था पेंशन की गुहार ले कर मिली। मंत्री महोदया ने वही किया जो उन्हें करना चाहिए था, उस बृद्धा को जिला कलेक्टर के पास ले
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चलो आम आदमी को मजबूत बनाएं

आज जब दरवाजे पर दस्तक हुई तो बड़ा अजीब लगा। जब से नए शहर में आए हैं तब से हमारे दरवाजे पर यह पहली दस्तक थी। सच पूछो तो शायद इस शहर में दरवाजों पर दस्तक देने का रिवाज ही नहीं है। खैर हम अचकचाए से, हड़बड़ाए से दौड़ते दौड़ते से दरवाजे तक पहुंचे और एकदम
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जय हो, भारत भाग्य विधाता जय हो...

चचा हंगामी लाल बहुत दिनों तक शहर से बाहर रह कर रात ही लौटे थे। हमें उनके आने की सूचना मिल गई थी सो सोचा रहे थे कि चाय वाय पीने के बाद जरा चचा से उनके हाल पूछ आएंगे। पर ये क्या चचा तो सुबह होने के साथ ही हमारे कमरे में हाजिर थे। आते ही बोले भाई दिल खु
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जूता प्रूफ प्रेस कॉन्फ्रेंस

चचा हंगामी लाल बहुत चिन्तातुर स्वर मं बोले,, कहां हो लाला,., जरा हमारी सुनो,, ये देखो तुम्हारे बिरादरी भाइयों ने क्या कर दिया। हम थोड़े सकुचाए से, बोले क्या चचा, जूता पुराण पर कह रहे हो क्या। हां, और नहीं तो क्या, अब वो जो किए जो किए, पर हमें बड़ी फि
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वो बे-कार और हम बदहाल

अरे कहां हो बरखुर्दार, तुम लोग क्या-क्या छाप देते हो... ! आवाज सुनते ही हमें यकीन हो गया कि हो न हो चचा हंगामी लाल आज कुछ झुंझलाए हुए हैं और पूरा मीडिया पुराण हम पर ही उतारने वाले हैं, पर वो किस खबर को लेकर लाल-पीले हो रहे थे, इस उत्सुकता से भरे हम उ
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सोश्यल इंजिनियरिंग की जादूगरी

चचा हंगामीलाल शाम को ही घर पधार गए। आते ही बोले क्या बरखुरदार तुम्हारी जात क्या है जरा बताओ तो सही। सवाल जबरदस्त था और उससे भी जबरदस्त था हमारा रेस्पोंस, क्यों चचा लड़की ब्याहनी है क्या, हमारी तो पहले ही शादी हो चुकी है तुम्हें पता नहीं है क्या। अरे
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बिस्तर पर सुख की नींद का फार्मुला

चचा हंगामी लाल कुछ उदास लग रहे थे। मैंने कहा चचा क्या हुआ आज मुंह क्यों लटका है। ये रोनी सी सूरत क्यों बना रखी है। अरे क्या मुंह लटकाएं अब इस आजाद देश में चैन की नींद सोना भी गुनाह हो गया है। कोई सुख से चैन की नींद सोने की जुगत करे तो उसे जेल पहुंचान
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सवाल एक लाख का, जवाब अगली पोस्ट में

आज तो गजब हो गया। चाचा हंगामी लाल सुबह सबेरे ही आ धमके। मैंने उन्हें देखा तो समझा शायद अखबार लेने आए होंगे सो मैंने सारे अखबार उनकी तरफ सरका दिए पर ये क्या उन्होंने अखबारों की तरफ हाथ भी नहीं बढ़ाया। और बोले भइया वो जरा रिमोट देना। मैंने कहा क्यों क्
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कभी नहीं, कदापि नहीं, यहाँ नहीं

भारतीय मुसलमान जेहाद के नाम पर आतंकी इस्लाम की शहीदाना मानसिकता को लगातार नकार रहे हैं। - थॉमस एल. फ्रीडमेन - वहां नौ शव हैं, और उनमें सभी युवा हैं,जो 29 नवम्बर से मुम्बई हॉस्पीटल के शवगृह में रखे हैं। वे वहां कुछ और समय तक रखे रह सकते हैं क्योंकि को
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कभी नहीं, कदापि नहीं, यहां नहीं

भारतीय मुसलमान जेहाद के नाम पर आतंकी इस्लाम की शहीदाना मानसिकता को लगातार नकार रहे हैं। - थॉमस एल . फ्रीडमेन - वहां नौ शव हैं , और उनमें सभी युवा हैं , जो 29 नवम्बर से मुम्बई हॉस्पीटल के शवगृह में रखे हैं। वे वहां कुछ और समय तक रखे रह सकते हैं क्योंक
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कभी नहीं, कैसे भी नही, यहाँ नही

भारतीय मुसलमान आतंक के जेहाद इस्लाम की शहीदाना मानसिकता को लगातार नकार रहे हैं। थॉमस एल. फ्रीडमेन वहां नौ शव हैं , और उनमें सभी युवा हैं , जो 29 नवम्बर से मुम्बई हॉस्पीटल के शवगृह में रखे हैं। वे वहां कुछ और समय तक रखे रह सकते हैं क्योंकि कोई भी स्था