मनोज कुमार रूढ़िवादी भारतीय समाज की पहली पसंद हमेशा से बेटा रहा है। बेटियों कोदूसरे दर्जे पर रखा गया। यही नहीं, पालन पोषण में भी उनके साथ भेदभावजगजाहिर है। बेटियों को जन्म से माने के पहले मार देने की निर्मम खबरेंअब बासी हो गयी है। बेटियों के साथ इस
कोडरमा में निरुपमा की मौत की खबर उसके दोस्तों की वजह से इस मुकाम तक पहुंचीकि प्रशासन को भी इसे गंभीरता से लेना पड़ा। वरना रोज कितनी ही निरुपमाएं मरतीहैं, किसी को परवाह नहीं होती, सिवाय उन पत्राकारों के जो सिंगल कॉलम की खबरलिखकर अपनी जिम्मेवारी खत्म मानते
सबसे खतरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना न होना तड़प का सब सहन कर जाना घर से निकलना काम पर काम से लौटकर घर आनासबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना सबसे खतरनाक वह घडी होती है आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो आपकी निगाह में रुकी होती है सबसे खतनाक वह चाँद
डीडीएस कम्यूनिटी सेन्टर के लिए काम करने वाली पूण्यम्मा जो किसानों की समस्या पर डाक्यूमेन्ट्री फिल्म बनाती हैं, आन्ध्र प्रदेश में बीटी कॉटन पर फिल्म बनाने के दौरान अपनी खुली जीप से नीचे गिर पड़ी। उन्हें चोट आई, जिससे उनकी कलाई की हड्डी टूट गई। उसके बाद वह
कनालन रजा का मेल मिला, चेन्नई में ६-१८ अप्रैल तक रमेश गोर्जाल की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाने वाली है. पता है - ३३, वूड्स रोड, चेन्नई (मोबाईल न. ०९८४१०३७८१०). अगर आप चेन्नई में हैं तो प्रदर्शनी में जा सकते हैं, नहीं हैं तो उनके पेंटिंग्स की एक छोटी
रविशंकर भाई ने जी मेल बज पर कल कोर्ट में आर सी छुड़ाने के दौरान उनके साथ जो हुआ उसका संक्षिप्त विवरण लिखा था. इसमे उन्होंने देश में वकील व्यवस्था पर सवाल उठाया है. कल मुझे अपनी बाइक की आर सी छुडवाने के लिए कोर्ट जाना पडा। 2-3 वकीलों ने मुझे घेरने की
२६ वर्षिय एक चीनी युवक जुआंग आगुई ने अपनी २१ वर्षिय मृत प्रेमिका हूँ जाओ से शादी की. शादी की रश्म दाह कर्म से ठीक पहले निभाई गई. (यह सारी जानकारी शंकर ने मेल की)
पार्लर की मुख्य ब्यूटिशियन सिमी अपने ग्राहक के साथ हमारे पास कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है कि इस देश में कितने किन्नर हैं। क्योंकि वे जनगणना में या तो पुरुष होते हैं या अधिक मामलों में स्त्री। किन्नर शब्द हमारे समाज में गाली की तरह ही इस्तेमाल होता रहा है।
यहाँ सुनिए अरब की कवित्री हिस्सा हिलाल का साक्षात्कार यह वह महिला है जिसने दुबई में आयोजित 'पोएट ऑफ मिलानायर'कार्यक्रम में इसने जड़ मान्यताओं के खिलाफ आग उगलने वाले शब्दों में अपना विरोध दर्ज किया.आज जहां एक तरफ हिस्सा को दुनिया भर से समर्थन मिल रहा
क्या हुआ अगर एक भाषा खत्म हो गईवह अपने झूठ और सच के साथ दफन हो गई,शब्द नहीं रहे, दुनिया बढ़ती रहीबोआ की दुनिया की खातिर, कहीं कोई नहीं रोया।’बाबुई और अर्जून जाना की यह कविता उस 85 वर्षिय अंदमानी महिला बोआ को समर्पित है जो अंदमान में बोली जाने वाली दस
गीता और पिंकी दोनों लगभग हम उम्र है, दोनों के बिच बड़ी जमती है गीता और पिंकी रांची जैसे बड़े शहर मे अकेले रहती है, न कोई उनका आगे है और न कोई उनका पीछे उन्हें यह भी पता नहीं की माँ की ममता और पिता का प्यार आखिर होता क्या है। मैंने उन दोनों को एक सप्ताह
अभी-अभी एक भारतीय भाषा विलुप्त हो गई है!और दुनिया की 7000 भाषाओं में सेएक भाषा अभी-अभी ही कहीं मरने वाली है!! भाषाओं को विलुप्त होने से बचाइए16-17 अप्रैल 2010 को रांची में आयोजितझारखंडी भाषा साहित्य संस्कृति अखड़ाके द्वितीय महासम्मेलन में शामिल हों
पंजाब में जल प्रदूषक यूरेनियम आर्सेनिक आदि के खतरे पर कार्यशालापंजाब के दक्षिण-पश्चिम मालवा इलाके में मानव स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों के मूल्यांकन सम्बन्धी सेमिनार (30-31 मार्च 2010, सर्किट हाउस,
यह आलेख इंदौर से विनीत भाई ने उपलब्ध कराया. ब्रिटिश सरकार ने 23 मार्च 1931 को भगत सिंह को फाँसी दी तो वे केवल तेईस साल के थे। लेकिन आज तक वे हिन्दुस्तान के नौजवानों के आदर्श बने हुए हैं। इस छोटी सी उम्र में उन्होंने जितना काम किया और जितनी बहादुरी
मक्खी सिर्फ मारे जाने के काम नहीं आता_ समझे नहीं, आप तो सोच रहे होंगे. मक्खी मारने में रचनात्मक क्या है, यहाँ प्रस्तुत है एक कलाकार मक्खी मार की कलाकारी.यह तस्वीर युवा पत्रकार पूनम ने उपलब्ध कराई हैं.
विनीत पाण्डेय कवि हैं, हास्य की कविता लिखते हैं. मुखर्जी नगर (दिल्ली) रहते हैं. आज ही उनका स्क्रेप मिला. खास यह था कि स्क्रेप में सिर्फ कविता नहीं थी, एक तस्वीर भी थी. उनकी कविता और यह तस्वीर सिर्फ गुदगुदाती नहीं, कुछ सोचने के लिए भी विवश करती है. विनीत
चीन में एक रेस्तराँ का नाम अंग्रेज़ी में “Translate Server Error" लिखदिया गया। हुआ यह था कि किसी तकनीकी समस्या के कारण कंप्यूटर पर चीनी नामके अनुवाद के बदले “Translate Server Error" का संदेश दिखा और अंग्रेज़ीनहीं जानने के कारण या हड़बड़ी में यही अनुवाद
राष्ट्रीय कवि संगम' दिल्ली में नियमित गोष्ठियों के माध्यम से चलाई जा रही है। इसमें देशभर के प्रतिष्ठित गीत, छंद, गजल, हास्य के उस्ताद आकर उभरते कवियों को इस क्षेत्र की बारीकियां सिखाते हैं। साथ ही नए कवियों को मंच पर प्रस्तुति का अवसर भी दिया जाता हैक्या
18 फरवरी 2010, (नई दिल्ली) आगामी दस दिनों के बाद हॉकी का विश्व कप टूर्नामेंट दिल्ली में आयोजित होने जा रहा है। लेकिन अब भी मीडिया सिर्फ क्रिकेट पर ही ध्यान देने में व्यस्त है। देश की जनता भी इस राष्ट्रीय खेल के विश्व कप से परिचित नहीं है, और न ही मीडिया