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23 Apr 2010
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आओ आज नाम बदल लें…!

आओ आज नाम बदल लें…! ले लो इस नाम से जुड़ी सब दौलत और शौहरत, मुझे बेनामी का सुकून लौटा दो…. अक्सर तुम्हे देखा है नुक्कड़ पे बच्चो के साथ फुटबाल खेलते, मैं भी सनडे को साहब के साथ गोल्फ खेलने जाता हूँ….. बोलो तो खेल बदल लें…
 
Gaurav Sangtani
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एक मोहब्बत बेनाम

क्यूँ मसरूफ रहें हर वक्त, चंद लम्हें फुर्सत के भी बिताएं जाएँ | क्यूँ हर रिश्ते का नाम हो, एक मोहब्बत बेनाम भी निभाई जाये || तेरा नाम न आ जाये जुबान पे, ये कहानी दिल में ही छुपाई जाये | खुली आँखों से देखें हैं ख्वाब तेरे, एक रात जग के
 
Gaurav Sangtani
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सोचा नहीं कभी हमने

सोचा नहीं कभी हमने, क्यूँ दिल तुमबिन परेशां है | क्यूँ सांसे उखड़ी उखड़ी हैं, आँखें क्यूँ हैरान हैं || सोचा नहीं कभी हमने, क्या रिश्ता ये अनजाना सा | क्या डोर बांधें है हमको, क्यूँ लगता सब अफसाना सा || सोचा नहीं कभी हमने, क्या
 
Gaurav Sangtani
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Feb 23 2010 08:26 PM
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सदियां….

जिसकी आँखों में कटी थी सदियां, उसने सदियों की जुदाई दी है….. तेरी आवाज़ सुनाई दी है.. - गुलज़ार
 
Gaurav Sangtani
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धुआँ अभी बाक़ी है……….

बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज फिर याद आ रहा है….. आग बुझ गयी, पर धुआँ अभी बाक़ी है. हम कहते हैं इश्क़ नहीं, पर नशा अभी बाक़ी है. नशे का क्या है, ये तो उम्र भर रहेगा. शुक्र है खुदा का, जान अभी बाक़ी है. - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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सितारों से जगमगाते ख्वाब…..

मोहब्बत पलकों पे कितने हसीं ख्वाब सजाती है.. फूलों से महकते ख्वाब.. सितारों से जगमगाते ख्वाब.. शबनम से बरसते ख्वाब.. फिर कभी यूँ भी होता है की पलकों की डालियों से ख्वाबों के सारे परिंदे उड़ जाते हैं और आँखें हैरान सी रह जाती हैं. - जावेद अख़्तर
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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सुना है…….

सुना है वक़्त के पंख हुआ करते हैं…. कुछ लम्हों में हमने इसे ठहरे हुए देखा है. किसी की ज़ुल्फ़ो में अटके हुए देखा है झील सी आँखों में भटकते हुए देखा है….. बहुत तेज़ी से निकल गया जब भी रोकना चाहा इसको, सारी यादें साथ ले गया समेटना चाहा जिनको. पर वो कुछ
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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तेरे बिन……

तेरे बिन मैं इस जीवन को गुज़ारूं कैसे . हर घड़ी सोचता हूं तुझको जहन से उतारूँ कैसे.. जब कोई आहट ना हुई, ना ही कोई दस्तक दी तुमने, कैसे चले आए इस दिल में, दिल को संभालूं कैसे.. तेरे बिन मैं इस जीवन को गुज़ारूं कैसे . हर घड़ी सोचता हूं तुझको जहन से उता
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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दिल मानता नहीं…..

जीवन हर पल कुछ सिखाना चाहता है, एक नयी सीख, एक नया सबक… पर ना जाने क्यूं ये दिल कुछ सीखना ही नही चाहता, कुछ समझना ही नहीं चाहता….. या मानूं तो, जो दिख रहा है, उसे स्वीकरना नही चाहता….. पर हमारे स्वीकारने या ठुकराने से सच बदल तो नही 
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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तेरी याद में

कभी यूँ ही लिखा था कुछ तेरी याद मे, तेरी याद आयी तो फिर से गुनगुना दिया आज…. “दर्द की इंतहाँ हो गयी है यारों | सुबह चले थे अब शाम हो गयी है यारों | थक गयें हैं लेकिन कोई सहारा नहीं मिलता | समंदर में मौजों को किनारा नहीं मिल
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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तुझे नही….!

तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ | उजालो से डर लगता है, अंधेरों को ढूँढता हूँ | ढूँढता हूँ उस शख्स को, जिसे तूने कभी चाहा था | अपने वादे न निभा पाया, उस गुनाहगार को ढूँढता हूँ | तुझे नहीं मैं खुद को ढूँढता हूँ | उजालो से डर लग
 
Gaurav Sangtani
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Dec 29 2009 11:45 AM
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जादूगरी

ये कैसी है तेरे इश्क की जादूगरी, अभी तू यहीँ है और नहीं अभी | अभी तुझसे मिलकर हँसे थे हम, अभी तुझे खोकर रो दिये भी | तू ही तन्हाइयोँ में साथ मेरे, तू ही भीङ में करे तन्हा | तू ही तो ख्वाबोँ में है मेरे, तू ही रातों को जगाये भी | य
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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दर्द…

हम दर्द को दबाते रहे, ये फूट फूट निकलता रहा कभी चेहरे से झलकता रहा, कभी आँखों से छलकता रहा. हम हर मोड़ पर पुकारा किए और वो हमसे बचके चलता रहा. कितनी दफ़ा गिरे हम राहों मे वो बस दूर से तकता रहा. हमेशा ख्वाब सा ही बनकर रहा मेरे लिए वो, मैं हरदम पकड़ता 
 
Gaurav Sangtani
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काश कभी…..

काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. चाहत ये ना थी सब कुछ मिले, पर कभी कुछ तो मिला होता…. हर क़दम पे तेरे साथ चले थे हम, किसी क़दम पे हमें भी इसका सिला मिला होता…. काश कभी तुमने मेरी चाहत को समझा होता. अब हम थक गये हैं इस चाहत से, इस जीन
 
Gaurav Sangtani
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पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे

बहुत भुलाना चाहा, बहुत कुछ भुलाया, पर अब भी बहुत कुछ याद है मुझे | वो इश्क की राहों में पहले कदम, उन कदमों पे लङखङाना और संभलना याद है मुझे || वो तेरा नजरे मिलाना और पलकें झुकाना याद है मुझे | वो तेरा सब कुछ समझना और बच के निकलना
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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समझे नहीं जो खामोशी मेरी

समझे नहीं जो खामोशी मेरी, मेरे लब्जों को क्या समझेंगे | बचते रहे उम्र भर साये से मेरे, मेरे जख्मों को क्या समझेंगे | भूल जाना यूँ तो नहीं है, रवायत मोहब्बत की | समझे नहीं जो हालात मेरे, इन रस्मों को क्या समझेंगे | - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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बात इतनी सी है

जो होना है वो होता है, तेरी मेरी बिसात कुछ भी नहीं. मैं जो यूँ अक्सर उदास रहता हूँ, बात इतनी सी है कि……… बात कुछ भी नहीं. - अज्ञात (कहीं सुना था कभी)
 
Gaurav Sangtani
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जिंदगानी

जिंदगी हर पल बस यही सिखाती है, चलने का नाम ही जिंदगानी है | जो थम गया तो मिट गया, दरिया सिर्फ बहता पानी है || - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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उंचाई

हे प्रभु…! मुझे इतनी उंचाई कभी मत देना गैरों को गले से लगा ना सकूँ इतनी रुखाई कभी मत देना - अटल बिहारी वाजपेयी
 
Gaurav Sangtani
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जाते हुए दिन नें

एक क्षणिका….! जाते हुए दिन ने शाम से बस इतना ही कहा ‘अब भी उदास बैठा है वो, न जाने किस गम को दबाए बैठा है वो | उगते हुए सूरज की किरणें, पँछियों की चहचहाहट, खिलते हुए फूल, सुबह की चाय की चुस्की, स्कूल जाते बच्चों का शोर, धान कूटती औरत
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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वो चाहत कहाँ से लाओगे…!

जितना चाहा है तुम्हे…. वो चाहत कहाँ से लाओगे…! चाहत मिल भी गयी तो ये दिल कहाँ से लाओगे..! दिल ढूँढ भी लिया तुमने तो वो इतना जल नही पाएगा, मैं फिर कहता हूँ….. जितना चाहा है तुम्हे कोई चाह नही पाएगा…! - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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तेरा नाम

नज़्म उलझी हुई है सीने में, मिसरे अटके हुए हैं होठों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों की तरह, लफ्ज़ कागज पे बैठते ही नहीं कब से बैठा हुआ मैं जानम, सादे काग़ज़ पे लिखके नाम तेरा बस तेरा नाम ही मुकम्मल है, इससे बेहतर भी नज़्म क्या होगी……….
 
Gaurav Sangtani
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एक शेर

हमें अश्कों से ज़ख़्मों को धोना नही आता | मिलती है खुशी तो उसे खोना नही आता || सह लेते हैं हर गम हस के , और वो कहते हैं कि हमें रोना नही आता…|| - अग्यात
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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छलकना छोङ दे

बहुत पहले लिखा था ये शेर, आज भी दिल के बहुत करीब है…..! तेरी हर बात मानी है हमने, अब ये ना कहना ऐ दिल धङकना छोङ दे | दिल है तो धङकेगा, दर्द होगा, आँसू भी होंगे, आँखों से ना कहना छलकना छोङ दे….! - गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
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Dec 29 2009 11:45 AM
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शीशा

सन्नाटे की मौत बर्दाश्त नहीं मुझे, शीशा हूँ टूट कर भी खनक छोङ जाउँगा - अग्यात
 
Gaurav Sangtani
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Dec 29 2009 11:45 AM
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मंजिलें भी उसकी थी…!

मंजिलें भी उसकी थी, रास्ता भी उसका था | एक मैं अकेला था, काफिला भी उसका था | साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था | आज क्यों अकेला हूँ, दिल सवाल करता है | लोग तो उसके थे, क्या खुदा भी उसका था…
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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शाम

शाम होते ही चरागों को बुझा देता हूँ मैं, इक दिल ही काफी है तेरी याद में जल जाने के लिए | -अग्यात
 
Gaurav Sangtani
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कुछ शेर धुंधले से….

कुछ शेर धुंधले से…. कहीं सुने थे कभी…. जिन्होने भी लिखे हैं उन्हे सलाम… १. तेरी याद मे जल रहा हूँ मैं, जहाँ तक रोशनी हो… चले आओ.. चले आओ…..! _____________________________________________ २. किस ज़ुबान से करें शिकवा हम उन
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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रोना आया

हम को तो गर्दिश-ए-हालात पे रोना आया रोने वाले तुझे किस बात पे रोना आया कैसे मर-मर के गुज़ारी है तुम्हें क्या मालूम रात भर तारों भरी रात पे रोना आया कितने बेताब थे रिम झिम में पिएँगे लेकिन आई बरसात तो बरसात पे रोना आया कौन रोता है किसी और के गम कि खात
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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टूट गया

आज अश्कों का तार टूट गया रिश्ता-ए-इंतज़ार टूट गया यूँ वो ठुकरा के चल दिए गोया इक खिलौना था प्यार टूट गया रोए रह-रह कर हिचकियाँ लेकर साज़-ए-गम बार बार टूट गया ‘सैफ’ क्या चार दिन कि रंजिश से इतनी मुद्दत का प्यार टूट गया - सैफुद्दीन सैफ
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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खुदाई

खुदा हम को ऐसी खुदाई ना दे कि अपने सिवा कुछ दिखाई ना दे ख़तावार समझेगी दुनिया तुझे अब इतनी भी ज़्यादा सफाई ना दे - बशीर बद्र
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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राज़

पास आकर भी फ़ासले क्यों हैं | राज़ क्या है, समझ मे ये आया || उस को भी याद है कोई अब तक | मैं भी तुमको भुला नही पाया || - जावेद अख़्तर
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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तेरा ज़िक्र

बस इक झिझक है यही हाल-ए-दिल सुनाने में कि तेरा ज़िक्र भी आएगा इस फसाने में इसी में इश्क़ की क़िस्मत बदल भी सकती थी जो वक़्त बीत गया मुझ को आज़माने में - कैफ़ी आज़मी
 
Gaurav Sangtani
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तेरा गम

हो गयी है शाम, तेरी याद आ रही है | हर तरफ है धुन्ध, हर आस जा रही है || खो गया है अब तो मेरा खुद का वजूद भी, ना जाने किस लिहाज़ से ये सांस आ रही है|| तेरे दिए गम के साथ ही जिए जा रहा हूँ, कैसे कर लूँ यकीन तेरी तरह छोड़ के ना ज
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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मेरा मुक़द्दर….!

रातों को चुपके से कोई साया आता है, हवा का हर झोंका तेरी याद लाता है | कब तक यूँ ही तपड़ता रहूँगा मैं, क्यों हर बार मेरा मुक़द्दर मेरे दर से लौट जाता है || गौरव संगतानी
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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आख़िर क्यूँ..

कितनी दफा हम पूछते हैं न….. आख़िर क्यूँ..??? कुछ बातों का कोई कारण नही होता कोई अर्थ नहीं होता कोई तर्क नहीं होता आप स्वीकारें न स्वीकारें…. कोई फर्क नही होता….!!! कुछ सवालों का कोई जवाब नही होता कोई शुरुआत नही होती कोई अंत नहीं होत
 
Gaurav Sangtani
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दिल्ली धमाके

दिल्ली धमाको क़ी खबर देखी तो कुछ सवाल से फिर से घूमने लगे जहन में…. सोचा कुछ लिखू…. पर याद आया कि कल ही एक फिल्म देखी थी ‘आ वेडनेसडे‘….. उसमे नसारूद्दीन शाह के संवाद, काफ़ी हद तक बहुत कुछ बयान करते है…. उसी के अंश 
 
Gaurav Sangtani
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शेर

जाने किसके के शेर है….. पर अच्छे लगे सो बाँट रहा हूँ……. कितना खुश्फहम कोई इंसान हो सकता है… कभी तन्हाई में, आईना उठा के देखो….. ___________________________________ दबा के कब्र मे, सब चल दिए ! दुआ, ना सलाम ! ज़रा सी देर म
 
Gaurav Sangtani
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Dec 29 2009 11:45 AM
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कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं….

आइए सुने एक नज़्म जो ना जाने किसने लिखी है… पर बहुत कुछ कहती है.. http://gauravsangtani.podomatic.com/enclosure/2008-08-17T12_38_15-07_00.mp3
 
Gaurav Sangtani
Dec 29 2009 11:45 AM
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राह आसान हो गई होगी

राह आसान हो गई होगी जान पहचान हो गई होगी फिर पलट कर निगाह नहीं आई तुझ पे क़ुरबाँ हो गई होगी तेरी ज़ुल्फो को छेडती थी सबा खुद परेशाँ हो गई होगी उन से भी छीन लोगे याद अपनी जिन का ईमान हो गई होगी मरने वालो पे ’सैफ‘ हैरत क्यों मौत आसान हो गई 
 
Gaurav Sangtani
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Dec 29 2009 11:45 AM