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31 Dec 2009
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आईना

आईना अपनी वाणी को झोली में बांध दुछत्ती पर चढा मैं खूश हूं भूल चुकी कभी मैं भी प्रतिक्रिया व्यक्त करती थी होते देख अन्याय सुलग पडती थी अब नजरिया बदल हर बात में कारण खोज लेती हूं ऐसा तो होना ही था मान लेती हूं गलती शायद मेरी ही है खुद को समझा लेती हूं
 
anuradha srivastav
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श्राद्ध

श्राद्ध पक्ष आते ही घर में विवादों का दौर शुरू हो जाता था। मनीष ब्राह्मणों को खाना खिलाने का विरोध करते और मम्मी उनके खाने खिलाने के पक्ष में नाना तर्क दिया करती उनके अनुसार ब्राह्मणों को खिलाया गया खाना हमारे पुर्वजों को उनकी आत्मा को संतुष्टी देता
 
anuradha srivastav
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गुलाबी शहर और आतंक का मंज़र

कल शाम से मन उदास है। बदलती फिज़ा शायद अहसास दिला रही है कि बहुत कुछ बदल गया और उतनी ही तेजी से बदलता जा रहा है। मुठ्ठी से दरकती रेत की मानिंद । "पधारो म्हारे देस" की गुहार लगाने वाला गुलाबी नगर कल लाल रंग से रंग दिया गया। महज आतंक फैलाने के लिये। ये
 
anuradha srivastav
Dec 29 2009 11:48 AM
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हां,मैं नारी हूं

नारी , तुम नारी हो सब कहते रहे मैं लडती रही जूझती रही सब कुछ बदला पर मुझे लेकर मानसिकता नहीं अब मैं थक चुकीं हूं आक्षेपों से अवहेलनाऒं से हां ! मैं नारी हूं सिर्फ नारी
 
anuradha srivastav
Dec 29 2009 11:48 AM
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सिर्फ बातों से क्या होगा

विश्वमहिला दिवस के रुप में फिर आ गया ८ मार्च। सही मानिये सिर्फ रुप में ही है। मुझे समझ में नहीं आता कि क्या आवश्यकता है किसी भी अवसर या मौके को दिवस के रुप में मनाने का । आखिर औचित्य क्या है? महिलायें जैसी पहले थी वैसी अब भी हैं। उनकी सामजिक स्थिति औ
 
anuradha srivastav
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आज भी शर्मिन्दा हूं मां

आज कैंसर से जुझ रही और उससे उबर चुकी महिलाऒं का इन्टरव्यू देखा। कई बार ज़ेहन में मां आपका अक्स उभरा। कई बार आंखें नम हुई।नये सिरे से आपकी साहसिक ,एकाकी और जुझारु छवि से रुबरु हुई। मन के किसी कोने में पश्चाताप भी है और दुख भी। जब भी खुद को आप से तुलनात
 
anuradha srivastav
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जिभिया चटापट होइबे , हम खइबे जलेबिया

आज सुबह से ही फोन पर फोन आ रहे थे। बधाई देने के लिये। अरे-अरे हंसिये मत इसका वेलेंन्टाइन डे से कुछ लेना-देना नहीं। आज दिन है हमारी शादी की २३वीं सालगिरह का । शादी की याद आते ही उससे जुडी तमाम यादें,बातें ज़ेहन में घूम जाती है। कुछ खट्टी कुछ मीठी। शादी
 
anuradha srivastav
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नन्हीं बडी हो गयी

कृति का फोन था खुशी से लरजती आवाज़ "मां इन्फोसिस में मेरा सलेक्शन हो गया"सुन कर राहत की सांस ली। भगवान का लाख-लाख शुक्र है कि उसका आत्मविश्वास डिगा नहीं। पहली बार में असफलता हाथ आने पर निराशा की भावना बलवती हो जाती। पर ऐसा कुछ नहीं हुआ। पिछले दो दिनों
 
anuradha srivastav
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उड़ता मखौल और चूं न करते लोग

कल कहीं टी वी पर हिन्दी का मखौल उडाया जा रहा था तो कहीं उसके साहित्य सृजन से जुडे लोगों का । कान ऐसे पकडिये या वैसे बात तो एक ही है ना। कब तक हिंदी के साथ अपनी ही धरती पर दोयम दर्जे का व्यवहार होता रहेगा और कब तक इसे सहना होगा। मौका था "जयपुर लिटरेचर
 
anuradha srivastav
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गणतंत्र दिवस- दिल से या रस्म अदायगी.......

झंडारोहण के बाद कुछ देर पहले ही फैक्ट्री से लौटे हैं।दिल कुछ भारी सा है। आज गौर किया तो महसूस हुआ कि झंडारोहण के बाद राष्ट्रीयगान वाले सिर्फ कुछ ही लोग थे। मज़दूर महिलाऒं की बात छोड दी जाये क्योंकि अधिकांश अंगूठा छाप हैं। लेकिन बाकि लोगों की बात करें
 
anuradha srivastav
Dec 29 2009 11:48 AM
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पालतु रखिये- तनाव मुक्त रहिये

पालतु रखिये- तनाव मुक्त रहिये अवसाद मुक्त रहना हे तो कोई भी पशु पालिये। जी हाँ अचूक इलाज़ है अकेलेपन का भी और अवसाद का भी। मैंने अपने बचपन से इनका संग पाया है। बच्चों के हास्टल जाने के बाद तो इनका संग अपरिहार्य हो गया है। बडी बेटी जब आज से ४ साल पहले
 
anuradha srivastav
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होना इन्सपायर्ड युवाओं का

नये साल पर सब लोग नये-नये रिज़ाल्यूशन्स लेते है। पर हमारे संजीत भाई ने शुभ दिन चुना अपने जन्मदिन का । हमने भी मुबारकबाद दी बातों-बातों में पुछा तो पता चला कि इस बार का उनका रिज़ाल्यूशन्स’ है कि अपनी "हाथ अगरबत्ती पैर मोमबत्ती "वाली छवि से मुक्ति पायी ज
 
anuradha srivastav
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मिलेगा ऐसा कोई कभी?

डॉ गरिमा तिवारी जिनसे परिचय तो हुआ था हिन्दयुग्म की प्रतियोगिता जीतने के बाद मेडिटेशन सीखने के दौरान ।लेकिन कब धीरे-धीरे उसने अपने लिये दिल में जगह बना ली कि पता ही नहीं चला । वो "मै और कुछ नही…" और "जीवन ऊर्जा" नाम से ब्लॉग लिखती है। उसकी इच्छा थी क
 
anuradha srivastav
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अनछुए लम्हें

गर्मियों की छुट्टियों में जब भी लखनऊ जाते थे तो पापा एक बार हमें वज़ीरगंज जरुर ले जाते थे। अपना पुराना घर दिखाने। सडक के एक ऒर खडे होकर बताते देखो वो वाला घर हमारा था। "दादी यहां बैठी रहती थी। वो ऊपर जो कमरा दिख रहा है ना वो मेरा और आनन्द का था"। उनके
 
anuradha srivastav
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"आइये स्वागत करें ,ऐसे फैसलों का"

कुछ दिनों पहले हम रिश्तेदारी में एक जगह मिलने गये। सबसे मेल-मुलाकात हो गई उनके सुपुत्र जी नादारद थे।पता चला वीडियोगेम खेल रहें हैं । काफी बुलाने के बाद जनाब तशरीफ लाये। हाय,हैल्लो की औपचारिकता पूरी करी और फिर गायब व मशगूल अपने गेम में। हम भी पहुंचे उ
 
anuradha srivastav
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"उफ्फ ये मीडिया"

कुछ अच्छा सा देखने की नीयत से हम बार-बार टी.वी. का रिमोट खटकाये जा रहे थे। तभी नज़र पडी एक न्यूज़ चैनल से प्रसारित हो रहा था-थोडी ही देर में-"चोकिंग" युवाऒं खासतौर पर बच्चों में लोकप्रिय होता नया गेम। जिज्ञासावश हमने भी पूरा प्रोग्राम देखने की ठानी। जै
 
anuradha srivastav
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"शिक्षक बनाम बिना रीढ की हड्डी वाला प्राणी"

एक समय था जब शिक्षक को सबसे सम्मानीय समझा जाता था। जहाँ तक मेरे बचपन की मुझे याद है हम अपने शिक्षक के नियमित रूप से पैर छूते थे। वो भी प्रत्येक विद्यार्थी को निजी तौर पर जानते थे। आज ना शिक्षक अपने विद्यार्थी को जानता है ना उसका उसे मौका ही मिल पाता
 
anuradha srivastav
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सपने में देखी सुनीता जी की पार्टी

सपने में देखी सुनीता जी की पार्टी समीर जी के स्वागत में सुनीता जी ने जो पार्टी रखी थी उसमें क्या-क्या होगा उसकी कल्पना करते-करते ना जाने कब आँख लग गई। भला हो सपनों का, जो काम सहज ना होता हो वो सपनों में चुटकी बजाते ही सम्पन्न हो जाता है। तो सुनिए आप
 
anuradha srivastav
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एक परम्परा यह भी

हताई" गाँव में किसी भी समस्या के समाधान के लिये जो बैठक बुलाई जाती है, उसे हताई कहते है। इसमें सिर्फ गाँव के पुरुष ही हिस्सा लेते हैं। हताई को एक तरह से गाँव का कोर्ट भी कह सकते हैं। छोटे-मोटे झगडे,मनमुटाव आदि यहाँ पर निपटाये जाते हैं। तथा गाँव के हि
 
anuradha srivastav
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क्या ये उचित है?

राज्यसभा में विपक्ष के नेता जसवतं सिंह जैसे वरिष्ठ राजनीतिज्ञ द्वारा अपने पैतृक गाँव जसोल में अफीम की मनुहार करना क्या उचित है? एक तरफ आप एक प्रबुद्ध नागरिक होते हैं ,दूसरे सक्रिय राजनीति में होने पर समाज के प्रति उनकी जवाबदेही बनती है। समाज में व्या
 
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करवाँचौथ

हमारा पहला करवाँचौथ एक आयोजन जैसा था ।दो महीने पहले से मम्मी की खतो-कितावत शुरु हो गई थी।मजमून रहता था एक ही आपके यहाँ क्या रस्में होती है?कितनी साडी लानी है ,कितने करवें लाने है? कब आना होगा वगैरह वगैरह। मुझे जरुर कुछ अजीब सा लगता था। सीधे-सादे तरीक
 
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मार्निंग वाक और हम

रोज आँख खुलते ही एक बहस शुरु हो जाती थी ।आलस्य त्यागों और मार्निंग वाक शुरु करो कभी आइने में खुद को निहार लिया करो। दिन दूनी रात चौगुनी फैलती जा रही हो पति देव की सुबह आजकल इन्हीं भाषण के साथ शुरु होती थी । हम भी पक्के मठ्ठूस एक कान से सुनते और दूसरे
 
anuradha srivastav
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सर्वे या मखौल

यत्र नारीयस्तु पुज्यन्ते तत्र रमन्ते देवता"ये सूक्ति तो हमारे देश में सदियों से चली आ रही है। नारी सम्मान का महत्व और आवश्यकता सब ही जानते हैं। घर की धूरी यानि महिला। आधुनिक परिवेश और बदलती मानसिकता कहें या विकृत मानसिकता जिसकी बानगी है -नेशनल फैमिली
 
anuradha srivastav
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कॉमनवेल्थ गेम और दिल्ली - एक नजरिया

कामॅनवेल्थ गेम्स के लिये तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। बहुत सारी प्लानिंग्स और दिल्ली के सौंदर्यकरण के लिये कुछ महत्वपूर्ण कदम भी उठाये जा रहें हैं। आज की टापॅटेन खबरों में था -कि दिल्ली की झुग्गी -झोपडियों को पर्दानशीं करने की योजना। कामॅनवेल्थ गेम्स
 
anuradha srivastav
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देह से इतर मन-प्राण और भी है............

नारी शोषण की बात कोई नयी तो नहीं है फिर भी हर बार ये कचोटती है विचलित करती है। आदिमकाल से चली आ रही शोषण की व्यथा व कथा आज भी कायम है। कभी प्रतिशोध के तहत उसे रौंदा गया तो कभी जश्न कै बतौर भोगा गया। लेकिन शोषित तो एक वर्ग ही रहा ना। अफसोस तब और अधिक
 
anuradha srivastav