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ख़ुशबू.ए.गुलज़ार

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22 May 2010
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एक और मंज़र - ट्रैफिक सिग्नल का

होंठ हिलते हैं भिखारी के, सुनाई नहीं देताहाथ के लफ़ज़ उछलते हैं, वो कुछ बोल रहा है,थपथपाता है हर इक कार का शीशा आकरऔर उजलत में हैट्रैफ़िक के सिग्नल पे नज़र है!चेंज है तो सहीकौन इस गर्मी में अब कार का शीशा खोले,अगले सिगनल पे ही सहीरोज़ कुछ देना ज़रूरी है,
May 23 2010 02:27 AM
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एक मंजर गर्मी का

कभी कभी लैम्प पोस्ट के नीचे कोई लड़कादबा के पैन्सिल को उंगलियों मेंमुड़े-तुड़े काग़ज़ों को घुटनों पे रख केलिखता हुआ नज़र आता है कहीं तो..ख़याल होता है, गोर्की है!पजामे उचके ये लड़के जिनके घरों में बिजली नहीं लगी हैजो म्यूनिसपैल्टी के पार्क में बैठ कर
May 23 2010 01:15 AM
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इब्नबतूता का भूत [The ghost of Ibn-Batuta]

सुबह सुबह अखबार ने जब दरवाजे पर दस्तक दी तो मालूम हुआ कि इब्नबतूता के भूत साथ में तशरीफ़ लाए हैं। आने का सबब पूछा तो पता चला कि कुछ चिलप्पों करने वाले तथाकथित साहित्यकारों ने शोर मचा कर उन्हें नींद से उठा दिया है। शोर ये कि गुलज़ार साब ने इब्नबतूता का जूता
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RoobaRoo 2010 : Gulzarfans Meet Report

स्माल इज़ ब्यूटीफुल-डॉ. डी.पी. अग्रवालबावजूद इस बात के कि मुझे हिंदी समाचार पत्रों में बढ़ते जा रहे अंग्रेजी के प्रयोग से चिढ़ होती है, मैं यहाँ अपनी इस टिप्पणी के लिए अंग्रेजी वाक्यांश का प्रयोग कर रहा हूं। असल में यह वाक्यांश ब्रिटिश अर्थशास्त्री ई.एफ़.
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Thanks for all the love, respect and birthday wishes!

पवन, बहुत बहुत शुक्रिया,क्यूंकि तुम्हारी वजह से
Dec 29 2009 11:55 AM
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जय हो! (Jai ho from Slumdog Millionaire)

जय हो!जीत का जश्न है जय हो! (spoilers ahead... skip the para if you haven't seen the film)झोपड़-पट्टी में पला-बढ़ा अनाथ जमाल सवाल दर सवाल फ़तेह हासिल कर के अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है. इस गेम शो में ज़िंदगी की किताब हर सवाल का जवाब हल करने में मदद कर
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चुनाव (elections)

राजस्थान में आज चुनाव का दिन... वोट पड़ रहे हैं नयी सरकार के लिये.. पर्ची इस बार भी पहुंची है और याद दिला रही है गुलज़ार साब की एक त्रिवेणी कीपर्चियां बंट रही हैं गलियों मेंअपने क़ातिल का इन्तेख़ाब करोवक़्त ये सख़्त है चुनाव का !Parchiyaan bat rahi h
Dec 29 2009 11:55 AM
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बुढ़िया रे!

हाल ही में कोवलम (केरल) में पहला कोवलम साहित्यिक समारोह आयोजित किया गया. समारोह में गुलज़ार साब ने भी शिरक़त की.. और अपनी नज़्मों से सुनने वालों की आखॊं और अन्तर्मन दोनो को भिगो दिया... खासकर उनकी नज़्म बुढिया रे से.. बुढ़िया, तेरे साथ तो मैंने,जीने
Dec 29 2009 11:55 AM
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"विज्ञान की रंगोली, साहित्य के झरोखे से" : Gulzar saab at IISc

गये हफ़्ते गुलज़ार साब पहुंचे भारतीय विज्ञान केन्द्र, बंगलौर, (I.I.Sc.) संस्था के शताब्दी समारोह में भाग लेने के लिये.. उनकी चर्चा का विषय बड़ा अनूठा था, "विज्ञान की रंगोली, साहित्य के झरोखे से".. संस्था से शोध कर रहे श्रीराम यादव ने कार्यक्रम का बया
Dec 29 2009 11:55 AM
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गुलज़ार साब! : जन्म दिन मुबारक़

गुलज़ार साब के ७४वें जन्म दिन पर उनके सभी चाहने वालों की ओर से बहुत बहुत मुबारक़बाद!अगर आप अपनी शुभकामनाएं सीधे गुलज़ार साब तक पहुंचाना चाहते हैं तो यहां पर क्लिक करें
Dec 29 2009 11:55 AM
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मोरा गोरा अंग लेई ले....- गुलज़ार, एक परिचय

आज गुलज़ार साब का जन्मदिन है, और हिन्द युग्म पर संजीव सारथी ने जन्म दिन की बधाई पेश की हैhttp://podcast.hindyugm.com/2008/08/blog-post_18.html
Dec 29 2009 11:55 AM
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शहरयार गुलज़ार : शहरनामे

शहरयार : गुलज़ारनया ज्ञानोदय, जून २००८भारतीय ज्ञानपीठ की मासिक साहित्यिक पत्रिका नया ज्ञानोदय के पिछले अंक (जून २००८) में गुलज़ार साब की कलम ने पांच शहरों की तस्वीरें उकेरी हैं, कविताओं के माध्यम से शहरों के चरित्र को पेश किया है..प्रस्तुत हैं शहरनामे
Dec 29 2009 11:55 AM
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खर्ची

मुझे खर्ची में पूरा एक दिन, हर रोज़ मिलता हैमगर हर रोज़ कोइ छीन लेता है,झपट लेता है अण्टी से!कभी खीसे से गिर पढ़ता है तो गिरने कीआहट भी नहीं होती,खरे दिन को भी मैं खोटा समझ के भूल जाता हूं!गिरेबान से पकड़ के मांगने वाले भी मिलते हैं"तेरी गुज़री हुई पुश्तो
Dec 29 2009 11:55 AM
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नो स्मोकिंग : फिर तलब, है तलब [No Smoking : Music Review]

वैधानिक चेतावनी : नो स्मोकिंग का संगीत स्वास्थ्य के लिये हानिकारक साबित हो सकता है.. बार बार की रिवाईंडिंग आपकी उंगलियों को नुकसान पहुंचा सकती है.. और संगीत का हर कश आपको इस एल्बम का तलबगार बना सकता है ]बीड़ी की आग अभी तक बुझी नहीं थी, कि गुलज़ार साब व
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सचिन देव बर्मन स्मृति [मेरे पिताजी का बोया पौधा गुलज़ार ] Pancham Remembers

आज सचिन देव बर्मन जी का १०१वां जन्मदिवस है. गुलज़ार साब ने सचिन दा के साथ ही गीतकार के रूप में शुरुआत की थी... प्रस्तुत है इस अवसर पर पंचम का 80 के दशक का लिखा एक आलेख "मेरे पिताजी का बोया पौधा - गुलज़ार"मेरे पिताजी का बोया पौधा - गुलज़ारआज से लगभग बीस
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मीरा : विचार से पर्दे तक का सफ़र [ Gulzar on the making of Meera ]

मीरा : विचार से पर्दे तक का सफ़रगुलज़ार(फ़िल्म पूरी होने से पूर्व १५ दिसम्बर १९७५ को लिखा आलेख, राधाकृष्ण पर प्रकाशित 'मीरा' से साभार)प्रेम जी आये एक रोज़ । सन १९७५ की बात है । साथ में बहल साहब थे - श्री ए.के. बहल । प्रेमजी ने बताया कि वह 'मीरा' बनाना चा
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Gulzar saab's new nazms on his birthday

जाते जाते एक छोटी सी नज़्म आप लोगों के लियेअबे इसे पता नहीं क्या कहेंगे आप ऐसी नज़्म को...देखने में पाजी लगती है.. वैसे है नहींया फिर देखने में नहीं लगती पर है पाजी....ये बूढ़े लोग अजब होते हैंछाज में डाल केमाज़ी के दिनकंकर चुन करदांत तले रख कर उनकोफिर स
Dec 29 2009 11:55 AM
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Jugalbandi gulzar - jagjit singh in hyderabad [जुगलबन्दी - गुलज़ार-जगजीत सिंह, हैदराबाद में]

अक्तूबर 11, 2009 (October 11, 2009)वो शाम बहुत हसीन थी! (report by K Venkat)हैदराबादी नवाबों के चौमोहोल्ला पैलेस में, खुले आसमां के नीछे, जहां जगजीत सिंह की आवाज़ हवा में सराबोर हुई, वहीं गुलज़ार साब ने अपनी चन्द नज़्मों से ज़िन्दगी के कुछ नये "इमजेस" बन
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Breaking Breads with Russians! Gulzar saab in Moscow

Breaking Breads with Russians wearing WWII cap!, Gulzar saab in Moscow
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रीढ़ - Reedh - One of the most inspiring poems. Kusumagraj Translated by Gulzar

Translation of Kusumagraj's one of the most inspiring poems (Reedh - Original Title Kanaa in Marathi). Very Simply told but exceptional in impact.. Conversation of a student with his old time teacher after long time.. (for roman, scroll down)रीढ़"सर, मुझे
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Aug 30 2009 04:24 PM
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चौपाल में गुलज़ार साब की ऑस्कर जीत का जश्न

रविवार 12 अप्रैल, स्थान-राजेन्द्र गुप्ता जी की बगीची, चौपाल फिर से जमी. मगर इस बार बहुत ही खास मक़सद के साथ. गुलज़ार साब की ऑस्कर जीत का जश्न मनाने और गुलज़ार साब को इस उपलब्धि के लिये सम्मानित करने के लिये. और जब गुलज़ार साब आमंत्रित हों तो चौपाली र
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ऑस्कर पहुंचा बोस्किआना (Oscar Arrived at Boskyana)

गुलज़ार साब ऑस्कर समारोह में नहीं जा पाये मगर अब परम्परा के मुताबिक गुलज़ार साब की ऑस्कर ट्रॉफी सोमवार को उनके घर बोस्किआना पहुंच गई है । बोस्किआना में पहले ही ट्रॉफियों का इक भरा पूरा परिवार, अपने इस नवीनतम सदस्य के लिये जगह बनाने में लग गया है!
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होली के रंगों में एक रंग : Holi Mubaarak!

होली के रंगों में एक रंग और : गुलज़ार साब की एक त्रिवेणी जो आज के दैनिक भास्कर के होली विशेष में शामिल हुई हैज़रा पैलेट सम्भालो रंगोबू कामैं कैनवास आसमां का खोलता हूंबनाओ फिर से सूरत आदमी की!साथ में एक और रंग बोनस मेंजहां नुमा एक होटल है नां...जहां न
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कितनी गिरहें खोली हैं मैने :[Gulzar saab's Poem on Womens Day]

अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर गुलज़ार साब की एक बेहद संवेदनशील रचना .. कितनी गिरहें खोली हैं मैने, कितनी गिरहें अब बाकी हैं.. ये रचना गुलज़ार साब ने सबसे पहले जयपुर में सुनाई थी.. और बाद में भुपेन्द्र-मिताली के साथ उनके एलबम "चाँद परोसा है" म
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चख ले, हां चख ले, ये रात शहद है

जय हो"जीत का इससे बेहतर उदबोधन क्या होगा! गुलज़ार साब की जीत, रहमान की जीत, गीत से जुड़े सभी लोगों की जीत, सभी सुनने वालॊं की जीत, हिन्दी फ़िल्म संगीत की जीत हमें गर्व है गुलज़ार साब और रहमान पर.. आज गुलज़ार साब समारोह में नही थे, मगर ऑस्कर समारोह गु
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जयपुर हुआ गुलज़ार II

जयपुर प्रवास के दूसरे दिन गुलज़ार साब सुनने वाले काव्य रसिकों से रूबरू हुए एक अनूठे आयोजन में.. श्री पवन के वर्मा के साथ काव्य - जुगलबन्दी प्रस्तुत करते हुए. मौका था जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल का एक सत्र, जहां गुलज़ार साब और श्री वर्मा ने गुलज़ार साब की
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जयपुर हुआ गुलज़ार

गुलज़ार साब इन दिनों जयपुर में हैं. अपनी जयपुर यात्रा के पहले दिन आज सुबह आबशार संस्था द्वारा आयोजित पोएट्री वर्कशाप में शिरकत की और नये नौजवान शायरों के कलाम सुने. शाम को अपनी नज़्मों की बौछार से जयपुर के काव्य रसिकों को सराबोर कर दिया.. कल जयपुर लि
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गुलज़ार साब की ओर से नया साल मुबारक़

इस बार नये साल का स्वागत करने पूर्व संध्या पर गुलज़ार साब दूरदर्शन पर देशवासियों से मुख़ातिब हुए.. थोड़ी पशोपेश में थे, क्युंकि मुम्बई धमाकों की टीस अभी तक गयी नहीं है और दूसरी तरफ़ चांद फ़तेह करने की खुशी.. कार्यक्रम की थीम थी "नये चांद की नयी सुबह"