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विचारों की जमीं- Land of Thoughts

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10 May 2010
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मेरी शर्त

रिश्ता तोडना चाहोतुम मुझ को छोड़ना चाहोतो मेरी शर्त इतनी है ,तुमें जो दे चूका हूँ मैंमुझे लौटा दो वो सब कुछ …..!मेरे लम्हे वो चाहत केवो सब तोहफे मोहब्बत केवो भीगी डायरी मेरीवो सारी शायरी मेरीमेरे वो कीमती लम्हेजो तुझ को सोचते गुजरेवो पल जो एक कयामत थी
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अच्छा लगता है वो मगर कितना

भूल जाता हूँ मिलने वालों को खुद से फिरता हूँ बेखबर कितना उसने आबाद की है तन्हाई वरना सुनसान था ये घर कितना कौन अब आरजू करे उसकी अब दुआ मैं भी है असर कितना वो मुझे याद कर के सोता है उस को लगता है खुद से दर कितना आदतें सब बुरी हैं यारों उसकी अच्छा लगता
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सुनो!! तुम लौट आना

उदास शामों की सिसकियों में .. कभी जो मेरी आवाज़ सुनना , तो बीते लम्हों को याद कर के , इन्ही फिजाओं मे लौट आना .. तुम आया करते थे खवाब बन कर , कभी महकता गुलाब बन कर , मैं खुश्क होंठों से जब पुकारूँ , इन अदाओं मे लौट आना … मेरी वफाओं को पास रखना , मेरी
Dec 29 2009 11:45 AM
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मुम्बई किसके बाप की है?

शिवसेना और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) ने एक बार फिर उत्तर भारतीयों पर कहर ढाया है। रेलवे भर्ती बोर्ड की प्रवेश परीक्षा देने मुंबई पहुंचे बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों को दोनों पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने कई इलाकों में घेर-घेर कर मारा है।
Dec 29 2009 11:45 AM
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बचपन का जोक्स

वेब सर्फ़ करते हुए, बजी बॉय हाथ लगा , सोचा ये कॉमिक आप लोगो से भी शेयर करता चलूँ...ये कॉमिक्स पढ़ कर बचपन की याद आ गयी. For More Cartoons Visit Buzziboy....
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तुम्हें भूलने की मैं कोशिश करूँगा

चमन की बहारों में था आशियाना न जाने कहाँ खो गया वो ज़माना तुम्हें भूलने की मैं कोशिश करूँगा ये वादा करो के न तुम याद आना मुझे मेरे मिटने का गम है तो ये है तुम्हें बेवफा कह रहा है ज़माना खुदारा मेरी कब्र पे तुम न आना तुम्हें देख कर शक करेगा ज़माना
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झुलनियाँ का धक्का

अगर आप दिल्ली,मुम्बई,कलकत्ता जैसे शहरों मैं रहते है,और धक्का मारने में एक्सपर्ट नही है तो, आप हरदम धक्का खाते रहोंगे,यहाँ ऐसे-२ लगते है,धकापेल होती है कि देखने वाला भी धकिया जाय.दिल्ली की मेट्रो का धक्का हो या मुम्बई की लोकल ट्रेन का या कलकत्ता के ट्
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हमरी भैसिया को घंटी किसने मारा

हमारे प्राचीन ग्रंथों में लिखा है की यदि कोई मनुष्य काम,क्रोध, मोह, लोभ त्याग तो वो परमानन्द को प्राप्त करता है. लेकिन मुझ खाकसार के तुक्ष विचार से यदि मनुष्य मोबाईल फ़ोन त्याग दे तो वो परमान्नद को प्राप्त करता है. अभी कुछ दिन पहले मैं अपने गाँव जौनप
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गजोधर और बिजली की प्रेम कहानी

प्यारे गजोधर ! तुम्हे यहाँ से गए तीन दिन यानी ७२ घंटे यानी .....काश मेरा मैथमेटिक्स स्ट्रोंग होता तो में इस बेरहम जमाने को बता देती की अपने गजोधर से बिछड़े हुए कितने पल हो गए.तुम्हे याद है न अभी कुछ दिन पहले से तुम मुझे प्यार से गोभी का फूल कहते थे, आ
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मुझे खोने से डरता था

मेरी आखों पे मरता था मेरी बातों पे हँसता था नाजाने शख्स था वो कैसा मुझे खोने से डरता था मुझे जब भी वो मिलता था यही हर बार कहता था सुनो !!!!! अगर मैं भूल जाऊं तो, अगर मैं रूठ जाऊं तो कभी वापिस न आऊं तो भुला पाओगे ये सब कुछ यूँही हँसती रहोगी क्या यूँही
Dec 29 2009 11:45 AM
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प्रतीक्षारत हूँ !!!!!!

सरिताओं का गहरा सागर उमड़ा था . जब देखा था तुमने . चाहत भरी निगाहों से मुझे! चाहता था डूब जाऊं उनमे , पर, नही पा सका तुम्हारा वह अस्तित्व फिर भी "प्रतीक्षारत " हूँ , इसीलिए आज तक ! की कभी तो मिलोगी तुम ख्वाब में या ख़यालों में , एक अ-स्पस्ट सी परछाई ब
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छेड़छाड़- एक प्रसंग.

आज मैं छेड़ छाड़ का ज़िक्र करूँगा. बहुत पहले व्यंग के जादूगर यशवंत कोठारी जी ने छेड़ छाड़ पर एक व्यंग लिखा था जो काफी मशहूर हुआ.छेड़-छाड़ पर लिखने की प्रेरणा उन्ही के व्यंग से मिली. छेड़-छाड़ उस विधा का नाम है जिसे बेटा बिना बाप के सिखाये सीख जाता है.मूछो
Dec 29 2009 11:45 AM
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विल्स नेविकट और खड-खाना

मेरे मित्र अरुण तिवारी (हम लोग आठ साल से एक साथ रहते हैं) को कल एक शादी के निमंत्रण पर जाना हुआ.रात के ११ बजे वहाँ से फारिग हो कर कमरें पर आयें.देख रहा हूँ उनके हाथ में २ विल्स नेविकट(सिगरेट ) की डिब्बियां .मेरे तो आश्चर्य का ठिकाना न रहा.मैंने पूछा
Dec 29 2009 11:45 AM
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उसे जब याद आएगा की सावन लौट आया है

उसे जब याद आएगा की सावन लौट आया है . बुला लेगा वो मुझको या खुद ही लौट आएगा . उसे जब याद आयेगा मैं कैसे मुस्कुराता था तो आंखें मुस्करायेंगी , या दामन भीग जायेगा , उसे जब याद आयेगा मैं कैसे नाम लेता था तो मेरा नाम लिखेगा , या अपना भी मिटायेगा, उसे जब य
Dec 29 2009 11:45 AM
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तुने होंठों को लरज़ने से तो रोका होता?

तुझे इजहार -ऐ -मुहब्बत से अगर नफरत है तुने होंठों को लरज़ने से तो रोका होता बे-नियाजी से, मगर कंकपाती आवाज़ के साथ तुने घबरा के मेरा नाम न पूछा होता तेरे बस में थी अगर मशाल -ऐ -जज्बात की लौ तेरे रुखसार में गुलज़ार न भड़का होता यूं तो मुझ से हुई सिर्फ़
Dec 29 2009 11:45 AM
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ममता जी ने सही किया या गलत.?

पुरस्कारों और विवादों में हमेशा चोली दामन का साथ रहा है.२००७ की पुरस्कृत ब्लागर ममता जी ने पुरस्कार लेने से मना कर दिया.जैसा की उन्होने कहा की-.– हमने ब्लॉगिंग शुरू की थी तो सिर्फ अपनी ख़ुशी के लिए न कि किसी पुरस्कार प्राप्ति के लिए।जिस दिन हमें इस प
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कारवां के साथ रहकर मैं अकेला ही रहा

थक रहे है पाँव लेकिन मन थका लगता नही. आ रही है सांझ लेकिन पथ चूका लगता नहीं. कारवां के साथ रहकर मैं अकेला ही रहा , ठौर तो मिलते रहे पर घर मिला लगता नहीं. बीज थे संकल्प के वट-वृक्ष बनने के लिए. रीढ़ में थी ग्रंथियां यह तन तना लगता नहीं. बोझ थी यह जिंद
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बारह में से चार गए ?

आज कल मौसम में परिवर्तन होने से काम करने का बिलकुल भी मन नही करता.कल ऐसे ही ऑफिस में खाली खाली सा,अंगडाई लेते हुए बेमन से कंप्यूटर के कीबोर्ड पर अंगुलियाँ फिरा रहा था.संयोग से उसी दिन बॉस अमरीका से आये थे. पता नही था,अचानक बॉस हमारे केबिन में आये ..ह
Dec 29 2009 11:45 AM
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सुनो तुम लौट आओ ना!

सुनो तुम लौट आओ ना वो देखो चाँद निकला है सितारे जगमगा रहे हैं हमारी मुन्तजिर आंखें दुआएं मांगती आंखें तुम्हें ही सोचती आंखें तुम्हें ही ढूँढती आंखें तुम्हें वापिस बुलाती हैं ये दिल जब भी धड़कता है तुम्हारा नाम लेता है ये आंसू जब भी बहते हैं तुम्हारे
Dec 29 2009 11:45 AM
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जरा सी बात है मुँह से निकल न जाये कही

नजर नवाज नज़ारा बदल न जाये कही। जरा सी बात है मुँह से निकल न जाये कही, वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है , मेरे बयान को बंदिश निगल न जाये कही। यों मुझको खुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन , ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाये कही । तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी
Dec 29 2009 11:45 AM
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एक सपना

मैंने देखा है एक सपना , प्यारा सा सपना , जिसमे है सिर्फ मैं और मेरी दुनिया , मेरी दुनिया कि छोटी - छोटी खुशियाँ , फूलों की रंगिनिया , खुशबू भरी कलियाँ , समेट लेना चाहता हूँ मैं , सभी सुखो कि अनुभूतियों को , सारे जहाँ के प्यार भरी मुस्कान को , पर क्या
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अधुरा प्यार-An Another Uncomplete Love Story

यू तो इन्सान नए ज़मीन ,नए आसमान की चाहत करता है ,ये आरजू भी उसके लिए मुमकिन होती है । लेकिन !जहाँ नयी कायनात उसके सामने आती है , उस जहाँ मे कदम रखते हुए काँप सा जाता हूँ । उसे एक अजीब सी उलझन महसूस होती है । मुहब्बत भी कुछ ऐसे ही जज्बे का नाम है ,जहा
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मुर्तिवाद Vs सामाजिक क्रांति

अभी कुछ दिन पहले मायावतीजी के मूर्तियों(फिजूलखर्ची) पर १ छोटा सा डिस्कसन एक मित्र के साथ चल रहा था.. लेकिन बात काफी लम्बी खीच गयी. ...फिर हम लोग उस नवीन कांशीराम स्मारक के चार-दिवारी पर बैठ गए (जो वी.आई.पी रोड पर है). मायावती के अनुसार इन पार्को और स
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टायसन परिणय बोनी

कल ही तो था टायसन का रिसेप्सन ...बोनी तो ऐसे चहक रही थी मानो उसे टायसन के रूप में ज़न्नत मिल गयी थी...सुर्ख होंठ,शरमाई सी आँखे, आवाज में सिलवट, निगाहों में चमक , लिए गेस्ट-हाऊस के चक्कर लगा रही थी...लेकिन मुए , गली के आवारा कुत्ते गेट के बहार से ऐसे घूर
Aug 06 2009 07:17 PM
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छोटा-सा तिनका हवा का रुख बताता है

४ दिन पहले एक मीटिंग के सिल-सिले में इलाहाबाद जाना हुआ, शाम को ७ बजे लखनऊ से लॉन्ग ड्राइव करने के तत्पश्चात इलाहाबाद पंहुचा. साथ में मेरा एक जूनियर भी था ...सोचा की रात यही किसी होटल में गुजार लूं फिर अगले दिन सुबह ८ बजे इलाहाबाद से ५० की.मी दूर मेजा
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सुदामा के चावल- बनाम- गिरवी इमान

कल मैंने रात में सपना देखा की मै द्वापर युग में चला गया ..और कृष्ण का सबसे अच्छा मित्र सुदामा बन गया....और सुदामा अपनी भड़ास निकाल रहा है यहाँ....... सभी की की टिका-टिपण्णी से मैं तंग आ गया.लोग मुझे चैन क्यो नही लेने देते? कहते है कृष्ण ने पूजा के कोष