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08 Apr 2010
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duaa

है आज दुआ बस मेरी इतनी तू मेरे मन का मीत बने !जो बदले न बरसों में तू प्रेम की ऐसी रीत बने !तेरे मुखसे जो शब्द निकलें मेरे होटों के गीत बने !हर आह्ट तेरी धड़कन की मेरे दिलका संगीत बने !हो जाय अमर इस दुनिया में हम दोनों की ऐसी प्रीत बने !
 
शिवानी
Apr 08 2010 04:13 PM
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वह पीला गुलाब

फ़िर आसमान से सूरज उतरा धरती पर लालिमा छाई ! पंछी उड़ चले नभ की ओर मैंने भी घर की खिड़की खोली ! बाहर छोटी सी बगिया थी ! मंद,मंद हवा के झोंके बुला रहे थे अपनी ओर ! अनायास मैं निकल पड़ी फ़िर हरी घास थी जैसे मखमल हर पौधे की हिलती डाली लगता मुझको बुला रही थी
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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कुछ सवालात

गुज़र चुकी जिंदगी की रातें क्यूँ न सुबह का इंतज़ार करें ! बहुत हो चुकी तकरार की बातें क्यूँ न प्यार का इज़हार करें ! मौत तो मिल जायेगी बिन मांगे क्यूँ न जिंदगी से दो बात करें ! ढूंढ रहे हैं हम,कहाँ खो गए तुम क्यूँ न हम तुमसे मुलाक़ात करें ! बहुत थक चुक
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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तुम्हारा ख्याल

वो महकता हुआ सा तुम्हारा ख्याल आज मुझे क्यूँ आ गया ! जागते में तुम्हारा सुनहरा सा ख्वाब दिल को क्यूँ बहला गया ! वो महकता हुआ सा तुम्हारा ख्याल !! तुम्हे तो भुला ही चुकी थी मैं कब का अचानक तुम्हारा चेहरा याद मुझे क्यूँ आ गया ! वो महकता हुआ सा तुम्हारा
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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प्यार भरा एक टुकडा

सन् १९९९ में दिसम्बर में १३३ साल बाद पूर्णमासी के दिन चाँद का आकार सामान्य से १४ % बड़ा था... एक शताब्दी बाद आज आई , अनूठी चांदनी संग पूनम की रात ! उसकी बिखरी चांदनी मानो , चांदी की चादर बिछी हो धरती पर! रात को मैं खिड़की से झांकी , देखा चाँद आज बहुत
 
शिवानी
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दगा

दोस्त बन कर तुमने अपनी ही दोस्ती को दगा दिया , तुमसे तो दुश्मन भले जो दुश्मनी तो निभाते हैं ! गंगा की तरह पाक समझा था तुम्हे हमने ! करके मैला दोस्ती को ,तुमने गंगाजल को नापाक किया ! कहते थे बड़े नाज़ से हम हीरा है दोस्ती अपनी ! कमबख्त तब कहाँ जानते थे
 
शिवानी
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फ़ैसला

एक एक पल,एक युग सा लगने लगा सूनी सी नज़र आने लगी सब गलियाँ ये शहर भी हमको अजनबी सा लगने लगा जब आईने में देखी हमने अपनी सूरत अपना चेहरा भी मुरझाया सा लगने लगा मन बहलाने चले बगीचे की ओर हर फूल भी कुम्ल्हाया सा लगने लगा न वो बहार ,न खुशबू सारा आलम ही बेग
 
शिवानी
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इंतज़ार

है मुझे इंतज़ार उस दिन का जिस दिन किसी की नफरत बदल जाएगी चाहत में ! हो जाएंगे दूर सब गिले शिकवे और बंध जाएंगे फिर सब रिश्ते प्यार के धागे में ! जानती हूँ ऐसा सोचना मेरे लिए एक हसीं ख्वाब सा है , और ख़्वाबों में जीना एक आदत सी बन कर रह गई है ! बैठी हूँ
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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सौगात

ये ग़म किसी और ने दिए होते तो शायद में भुला देती ! मगर मान कर ये सौगात तेरी इन्हें दिल से लगाए बैठी हूँ ! वो दरीचे किसी और इमारत के होते तो शायद -- नज़र झुका के चुपचाप चली जाती ! मगर आज उन्ही दरीचों को नज़र भर देख के चली जाती हूँ ! रात ढलने को है और नी
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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रैन बसेरा

घर के पिछवाडे आया एक पंछी बना गया खिड़की में रैन बसेरा रख दिया उसमे मैंने फिर चुग्गा बडे प्यार से उसने खाया अपनी मीठी वाणी से फिर उसने मेरा मन बहलाया सारा दिन वह उड़ता फिरता सांझ पड़े घर आया करता में भी उसको सांझ सवेरे उसके घर में देखा करती पर पंछी तो
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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हैरान हूँ

हैरान हूँ , परेशान हूँ ! जिंदगी के दाव पेचों से , पूरी तरह अनजान हूँ ! क्या यही खेल हैं जिंदगी के , कि अपने अपनों को छलते रहें, अपनेपन का दिखावा करते रहें ! और हम धिक्कारते रहें उनको गैर कह कर , जो गैर हो कर भी , जान हम पर लुटाते रहें !
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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उसकी राधा

मैंने कुम्हार से विनती करके उससे कुछ चिकनी मिटटी मांगी ! ला कर थोडा प्यार का पानी अरमानों का घोल बना कर बडे प्यार से उसको रखा ! फिर ख़्वाबों का चाक बना कर समय के चक्र सेउसे घुमा कर एक प्यारी मूरत घड़ डाली ! ममता की धूप में उसे सुखा कर चाहत के रंग दे ड
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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अनजाने राही

न मैं तुमको कुछ कह सकी न तुम ही मुझको समझ सके ! और बस यूं ही हम दोनों जिंदगी का सफर तय करते रहे ! चलती रही यूं ही जिंदगी यूं ही बस दिन कटते रहे ! और हम अपने ग़म के आंसू पीते रहे और जीते रहे ! कोशिश कि कभी जो हमने तुमने कब उसपे गौर किया ! बेदर्दी से म
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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तर्ज़-ए-हयात

न कहीं ज़िक्र है , न कोई बात है कितनी अजीब ये रात है ! हर दिन गुज़ारा तेरी याद में तू ही मेरी तर्ज़ -ए -हयात है ! तुझे याद हो कि न याद हो मेरे दिल में एक ही बात है ! तेरे नाम से दिल ये धड़कता है तेरे दम से ये कायनात है !
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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खुशियाँ

खुशियाँ मेरे दरवाज़े तक आयी , मगर दहलीज़ लाँघ न पायी ! हाथ बडा कर उन्हे समेटना चाहा चाहते हुए भी समेत न पायी जीवन कि खुशियों को करने हासिल , कुछ दूर तक दौड़ना चाहा ! पर वक्त की रफ़्तार के संग , ज्यादा दूर तक दौड़ न पायी ! जीवन की शाम ढलने को है , मैंने
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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हमें अच्छा नहीं लगता

यूँही चलते हुए एक दिन जब हम उस बाग़ से गुज़रे! और उस पेड़ के बडे पत्ते हमारी राह में बिखरे ! मगर अब हम वहाँ दोबारा कभी जाना नहीं चाहते ! भूले से भी वहाँ जाना हमें अच्छा नहीं लगता ! वो महफिल याद है हमको हमें महफिल-ए-जान कह देना ! हमारी हर बात पर सबका व
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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मुद्दत

हाँ ,चांद ज़रा ये बतलाना वो चांद वहाँ पर कैसा है ? मुद्दत हो गयी देखे उसे क्या हाल वहाँ पर उसका है ? क्या अब भी उसकी मीठी बातें मीठा रस कानों में घोलती हैं ? क्या अब भी उसकी खामोश आंखें चुप रह कर भी सब बोलती हैं ? क्या अब भी मेरी आशाओं का चेहरा उसके च
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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ज़िन्दगी - एक सवाल

ये ज़िन्दगी क्या है ? एक अजीब सा सवाल है ! कैसे समझे और कैसे जिए कोई सबका अपना - अपना ख्याल है ! किसी की नज़र में,ये सिर्फ एक जाम है ! किसी की निगाह में,ये गम की एक शाम है ! कोई कहता है,ये शायर का एक ख़्वाब है ! कोई समझे,ये मौत के ख़त का जवाब है ! कोई
 
शिवानी
Dec 29 2009 11:45 AM
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ख्वाब

उनींदी सी आंखों मेंपलकों के पीछेख़्वाबों में जब तुमचुपके से आए !मेरा मन महकाकदम डगमगाएकानों में आकरजब तुम गुनगुनाये !इन्हीं चंद शब्दों कोसुनने की हसरतहकीकत से हट करक्यूँ ख़्वाबों में लाये !है तुमसे गुजारिशयही बात कहनेहकीकत में आतेक्यूँ ख़्वाबों में आए
 
शिवानी
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अहसास

मैंने देखा नहीं है उसकोमगर हवाओं में महसूस किया है !है ख़्वाबों में तस्वीर उसकीमैंने तस्वीरों में महसूस किया है !वो मेरे अहसाह ,मेरी बातों में हैमैंने अल्फाजों में महसूस किया है !समझा है,चाहा है,सोचा है उसकोशायद मैंने जज्बातों में महसूस किया है !
 
शिवानी
Sep 10 2009 02:39 PM
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सुलझी पहेली

शायद मैंने तुम्हें कुछ समझा है !बहुत कुछ नज़र आने पर ,तुम्हारा नज़रंदाज़ कर जाना !बहुत कुछ कहना चाहने पर ,तुम्हारा इज़हार न कर पाना !बहुत सी प्रेम भावनाओं का ,तुम्हारे मन में दब जाना !किसीकी इच्छाओं को जान कर ,तुम्हारा अनजान बन जाना !मगर -खुली किताब सी
 
शिवानी
Sep 02 2009 01:39 PM
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एक शाम के नाम

सूरज का रथ लालिमा ले कर ,निकल पड़ा था क्षितिज की ओर !विशाल समुद्र के सपाट हृदय पर ,उठ रहा था लहरों का शोर !कलरव करते पक्षी भी अब,ढूंढ रहे थे रैन बसेरा !वहीँ दूर एक खड़ी थी किश्ती ,जाने को अब घर की ओर !सफ़ेद चमकती रेत पर बैठी ,सोच रही थी मैं एक बात !क्यूँ न
 
शिवानी
Aug 29 2009 03:57 PM
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जीवन यात्रा

जीवन एक यात्रा है ,जो शुरू होती हैबचपन की खुली ,चौडी ,साफ़ सडकों से !जिनसे बचपन भागता सा गुज़र जाता है !फ़िर नज़र आती हैं वही सड़केंगली के रूप में !जहाँ धीमी हो जाती है जीवन की रफ़्तार !कुछ समय बाद शुरू होती हैंपग डंडियाँ - छोटी ,बड़ी,लम्बी,पतलीयहीं से शुरू
 
शिवानी
Aug 18 2009 12:05 PM
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अपने शहर में

नसीब-ए-दर्द किसीसे ,हम कहना नहीं चाहते अब अपने शहर में दिल-ए-सोज़ ,हम रहना नहीं चाहते ! हमने देखी है वफ़ा की आड़ में,बेवफाई उनकी इस अफसाने को अब ,हम कहना नहीं चाहते अब अपने शहर में दिल-ए-सोज़ ,हम रहना नहीं चाहते ! न समझें जज़्बात वो हमारे ,तो कोई बात न
 
शिवानी
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तुम

तुम्हारी मुस्कराहट मेरे दिल को चुरा ले जाती है ! मैं कुछ कहना भी चाहूँ तो मुझे वो रोक लेती है ! सर्दियों में ओस की बूँद से अगर खेलना चाहूँ , न जाने क्यूँ तुम्हारी तस्वीर उभर के आती है ! पास अपनी हरदम महसूस होता है एक साया , तुम्हारी हर इक अदा नज़र उसम
 
शिवानी
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वो शाम

वो एक हसीं शाम थी शायद वो उनके नाम थी हर नजारे में उनका चेहरा था वो तो गज़ब की शाम थी उस राह से हम गुज़रे ही थे अचानक नज़र वो आ गए उनसे निगाहें क्या मिली उनके चेहरे का रंग बदल गया चेहरा सफ़ेद से सुर्ख हुआ सुर्ख रंग शर्म में बदल गया करीब से वो गुजरे ही थ
 
शिवानी