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अखाड़े का उदास मुगदर

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16 Jan 2010
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किताबें बचेंगी तो पढ़ना बचेगा, लिखना भी

कई समय से मन था कि कोई ऐसी जगह बने जहां हिंदी किताबों के बारे में नये सिरे से बात हो सके. अगर किताबें होंगी तो लिखना और पढ़ना भी बचा रहेगा. हमारी ये बातचीत ही हिंदी को बचा सकेगी. एक तरीका यह सोचा है कि हम अपनी अपनी पसंदीदा हिंदी किताबों की फेहरिस्त बनाएं
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 472: लड़की देखते ही अंदाजा लगा लिया कि उसका ब्लड प्रेशर कितना है

वह एक डॉक्टर के यहां काम करता था. उसका काम डॉक्टर की मदद करना था, पर वह माहिर था लोगों का ब्लड प्रेशर नापने का. लोगों का ब्लड प्रेशर नापते नापते हुए उसे इतनी महारत हासिल हो गई थी, कि वह लोगों का चेहरा देखकर उनके ब्लड प्रेशर का अंदाजा लगाने लगा था. शु
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 473: सीसीटीवी में दिखा कि वह गोलियां चलते वक्त एकबारगी ठिठक गया था

वह विक्टोरिया टर्मिनस उर्फ छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन पर उस रात जेहादी हमला करने आया था. अपनी ए के 56 से वह जहां लोगों को देखता गोलियां दागता रहता. बाद में मुम्बई और सुरक्षा एजेंसियों ने सीसीटीवी फुटेज देखा. वह लगातार गोलियां चलाता हुआ एकबार
 
आस्तीन का अजगर
Dec 29 2009 11:41 AM
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LOVE STORY # 474: मुंबई की मुजाहिदीन शाम में उसे बामियान बुद्ध को उड़ाने के बाद की खाली जगह याद आई

मुंबई में जब वह धमाकों के बीच भाग रही थी, उसका चेहरा पीछे छूट चुका था.उसमें कोई भाव नहीं थे. दहशत हर जगह थी. सड़क पर. होटलों में. सड़क पर गश्त करती पुलिस जिप्सी के टोही दलों के चेहरों पर. मुंबई में उसे सब कुछ दिया था. बान्द्रा में बंगला. सुपर स्टार का
 
आस्तीन का अजगर
Dec 29 2009 11:41 AM
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LOVE STORY # 475: पेंटिंग पूरी होने का पता उसे वैसे ही चलता है जैसे प्यार करने के पूरा होने का

लाइफ मैगजीन: आप कैसे जान लेते हैं की पेंटिंग पूरी हो गई? जैक्सन पॉलक: आप कैसे जान लेते है प्यार करना कब पूरा हो गया? (सोनी पिक्स पर सोमवार रात फ़िल्म पॉलक देखने के बाद) हम अपनी मनुष्यता में अकेले हैं. वह एक अरण्य है. बेतरतीब और कुदरती. अरण्य की तरफ़
 
आस्तीन का अजगर
Dec 29 2009 11:41 AM
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LOVE STORY # 476: कुहासे में गड्डमड्ड सपने की याद में वह एक सिगरेट जलाता है. सपने के कुहासे में धुंआ छोड़ता हुआ.

यहां आओ और बैठ जाओ, बेटे. वह अपने पिता के पास बैठ गया. वे सोने जा रहे थे. मां पास में बैठी है. ‘तुम इतनी स्मोकिंग क्यों कर रहे हो’, उन्होंने पूछा. बहुत सारी घनी चुप्पी. छुए जा सकने वाले कुहासे की तरह. नवम्बर का महीना. ‘पापा वह मर रही है’, उसने कहा. ‘
 
आस्तीन का अजगर
Dec 29 2009 11:41 AM
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LOVE STORY # 477: नाम दो कि वे सुन सकें तुम्हें और तुम भी उन्हें पुकार सको

नाम दो उन बिल्ली के बच्चों को कि वे डरना भूल सकें. और ठिठकने का संकोच भी. ताकि वे आ सके तुम्हारे पास बिना दबे पांव भी. ताकि वे भूखे हों तो तुम्हारे पास आ कर भूखी म्याऊं कर सकें. कि वे आएं तुम्हारे पास और तुम्हारे पांवों से खुद को रगड़ते हुए वहीं कहीं
 
आस्तीन का अजगर
Dec 29 2009 11:41 AM
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बहुमत की लठैती वाले लोकतंत्र में आस्थाएं मरी जा रही हैं आहत होने के लिए

एक पूर्व गृहमंत्री अब प्रधानमंत्री बनना चाहता है. वह कह रहा है कि मालेगांव धमाके में जो आरोपी हैं, अगर वे दोषी हैं, तो उनपर कानून अपनी कार्रवाई करे.. ये वह आदमी कह रहा है, जिसने पूरे मुल्क में रथ यात्रा कर पहले दंगे करवाए, फिर बाबरी मस्जिद तुड़वाई, ज
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 478: जब वह लौट कर उस तक पंहुचा तो एकबारगी लगा वह जा चुकी है

एक दोस्त ने ये कहानी भेजी है. नाम न बताने की हिदायत के साथ) वह बहुत दिनों से पार्क में बैठा था. घड़ी देखी. शाम के सात बज रहे थे, पर सूरज डूबा नहीं था. बल्कि चमक रहा था जैसे दोपहर अभी ढली न हो. यूरोप में ये गर्मियों का मौसम था. वीकेंड था इसलिए पार्क म
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 391: उस रात कुछ नहीं हुआ. वह बहुत ज़्यादा शराब पीता था

वह बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी औरत नहीं थी और सिर्फ पंजाबी में ही लिखती थी. दूसरी भाषाओँ का लिखा वह बमुश्किल पढ़ पाती थी और इसलिए लिखने में कोई बहुत तहजीब नहीं थी. वह बॉलीवुड पर मरी जाती थी. उसके लिए कामयाबी का असली मुक़ाम अपने उपन्यास या कहानियों की फिल्म बनते
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 392: फ़ोन पर तैरती हुयी आवाज़ असल की आवाज़ से अलग होती

बहुत सारे अँधेरे खामोश में बीच एक शब्द जैसे एक झील में उछाला हुआ कंकर और डूबने से पहले फिर फिर उछलता हुआ. उस अँधेरे खामोश में आवाज़ का अपना अमूर्त था, अपना जादू, अपना यथार्थ. दूरी की खाई को लांघती हुयी, माइकलएंजेलो की पेंटिंग में बढ़ी हुयी उंगली की तरह. एक
 
आस्तीन का अजगर
Sep 23 2009 03:53 PM
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LOVE STORY # 393: चाहता है कि वह गलती ज़िन्दगी भर उसका पीछा करे

मित्र की ही) लोग उस पहाड़ी पर देवी के दर्शन के लिए चढ़ा करते हैं. लेकिन वो दोनों एक दूसरे के लिए हाँफते हुए सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे. उन्हें नहीं पता था कि ऊपर चढ़ने से क्या होगा. लेकिन उन्हें यह पता था कि ऊपर चढ़ते और उतरते हुए वो दोनों साथ रह सकते हैं.
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY 460- 394: एक ज़िंदगी की एक लाइन में दुनिया भर से 66 कहानियां प्यार की

धूमिल की एक कविता ऐसे शुरू होती है- ओ अपराध सी अंधी, पाप सी उजागर, आदम इरादों से बित्ता भर ऊपर उठी हुई पृथ्वी. ये 66 कहानियां ट्विटर पर मिलीं. एक ऐसी साइट पर जहां आप अंग्रेजी के 140 कैरेक्टर्स में अपना रहस्य लिख कर उस भार से मुक्त हो सकते हैं, जो आपक
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 461: नदियों के बीच दूरियां थी, बहाव के बीच नहीं

उसी मित्र की एक और कहानी) उनके छोटे से शहर से डेन्यूब नदी बहती थी. वे दोनों डेन्यूब के किनारे ही पले-बढ़े थे. इसी नदी के किनारे वे सपनों और सच से परिचित हुए थे. किसी भी प्रेमी जोड़े की तरह उन्हें नदी अच्छी लगती थी. उन्हें कोई भी नदी अच्छी लग सकती थी
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 462: उसके अरमान थे, कुछ मजबूरियां भी थीं, फिर वह सपने देखने लगी, जिन्हें टूटना ही था

उसी मित्र की भेजी गई एक और कहानी) वह बहुत ख़ूबसूरत नहीं थी. दोहरा बदन था पर आकर्षक होने के सारे तत्व मौजूद थे. उसे शहर में बहुत से लोग जानते थे. क्यों जानते थे यह बहुत रहस्य की बात नहीं थी. ठीक उसी तरह जिस तरह वासवदत्ता और वसंतसेना की ख्याति रहस्य की
 
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LOVE STORY # 463: उसने समंदर में बड़े यकीन से वह बोतल फेंकी जिसमे एक ख़त था

वह उस अजनबी को वैसे ही जानती थी, जैसे उसके भीतर एक हिस्से को वह नहीं जानती थी. उस बोतल में एक ख़त था. वह किनारे पर थी. जब उसने उसे देखा. वह ख़त किसी के लिए भी हो सकता था. पर उसे लगा कि वह उस ख़त का इंतज़ार कर रही थी. उसे लगा जिसने ख़त लिखकर उसे बोतल
 
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LOVE STORY # 464: वह जो लाल रंग फैल रहा था, क्रांति का नहीं था

इस श्रृंखला की यह सौवीं कहानी है. इसके बाद 463 कहानियां और इस सरदर्द से निज़ात पाने के लिए. लंदन से एक मित्र ने अपने बहुत अकेले दिनों को बिताते हुए इसे लिखा है. लिखना हम सबके अकेले होने की निशानी है. और अच्छा लिखना बहुत अकेले होने की. अकेले होने के ल
 
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LOVE STORY # 464: तानाशाह ने वर्ल्डस्पेस रेडियो में लेटिन गानों का स्टेशन लगाया और अपनी कामवाली से पूछा- नाचोगी मेरे साथ

तानाशाह ने सिर्फ बरमूडा पहन रखा था जब उसकी नींद खुली. तानाशाह फर्श पर सो रहा था. गर्मी थी. पंखा चल रहा था. तानाशाह घर में अकेला था. तानाशाह ने रात में शराब पी थी, जिसकी बोतल पर ओल्ड मॉंक लिखा हुआ था और जिसके करीब नमकीन की प्लेट और मुर्गे की हड्डियां
 
आस्तीन का अजगर
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देश को आडवाणी के योगदान और हमारी जिंदगियों के निजी मामले..

रविवार.काम पर 4 अप्रैल 2009 को प्रकाशित) उसके बच्चे थे और वह इतिहास की मरम्मत के लिए नहीं, बल्कि हादसों के टालने का तरफदार था. वह चाहता था कि उसके बच्चे एक अच्छे हिंदू की बजाय एक अच्छा मनुष्य बनने में यकीन रखें. जैसे उसके मुसलमान दोस्त थे और उनका परि
 
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LOVE STORY # 466: आईने में जितना दिख रहा है, हक़ीकत उससे ज्यादा करीब है

तुम उसे नहीं जानते थे. पर एक लाल बत्ती पर तुम्हारी कार रुकी तो तुमने अपने रियर व्यू मिरर में पीछे वाली कार को चला रहे आदमी को देखा. तुम्हारी तरह वह भी दफ्तर जा रहा है. उसकी कमीज़ बुर्राक सफ़ेद है और टाई गुलाबी. वह बिल्कुल सजा धजा और तरोताज़ा लग रहा थ
 
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LOVE STORY # 467 : दुःख की लम्बी एफआईआर होती, खुशी का न ठौर न ठिकाना

उसकी डायरी में उसने कभी झांक कर नहीं देखा. कहती है मर जाऊंगी तो पढ़ लेना. पर कभी कभी खुद ही से कुछ एंट्रीज बांट लेती है. पता नहीं वे पूरे पन्ने होते हैं या कुछ पैराग्राफ ही. जब ज़िंदगी को जिया जा रहा होता तकलीफ़ और राहत के बीच, तो डायरी छोटी हो जाती,
 
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LOVE STORY # 468: जिस तवायफ से उसने दिल लगाया है, उसका नाम दिल्ली है

वह हमेशा से दिल्ली के रास्ते पर था. दिल्ली से गुजरकर आगे चला जाता. फिर लौटता दिल्ली के रास्ते पूछता हुआ. दिल्ली का रास्ता भटकने का सवाल ही नहीं था. सब जानते थे. पर दिल्ली न तो उसे आने से मना करती थी, न बैठने को कहती थी. दिल्ली किसी को न नहीं कहती, दि
 
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लव स्टोरी # 469: एक बदलते हुए दृश्य में मौजूद होने का मतलब

अगर वे उस जगह पर वापस जाते भी, तो सब कुछ वैसा ही न होता जैसा उस बार था. ढलती सर्दियों वाली दोपहर में भला से लगता सूरज और ज़मीन से टकराकर उछलती रौशनियों का जादूई असर. ब्रह्मांड के उस कोने पर शहर में नौकरी न ढूंढने वाला चाय बेचता अनपढ़ बच्चा और चार देस
 
आस्तीन का अजगर
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मीडिया के मारेः नौकरियां फिर आएंगी पर..

रविवार डॉट कॉम पर २३ फरवरी को प्रकाशित लेख) जब अनापशनाप भर्तियों का दौर था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि छंटनी का वक्त कैसा होगा? कोई नहीं सोचता. पर सिर्फ नहीं सोचने से आप उसे टाल नहीं सकते. मीडिया का धंधा ही परजीवी है. अगर बाज़ार अच्छा चलेगा, तभी
 
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LOVE STORY # 470: जवानी की अंगड़ाई और बुढ़ापे की जम्हाई के बीच उन लड़कों की यादें थीं

दिल्ली में कुहरे के कई दिनों के बाद धूप निकली थी. वे तीनों एक ही साथ पढ़ती थी और एक ही दफ्तर में काम करती थीं. जवानी की अंगड़ाई और बुढ़ापे की जम्हाई के बीच वे तीनों अपनी दफ्तरी कुर्सियां धूप में ले आतीं और दोपहर के खाने के वक्त बैठकर उस वक्त की बातें
 
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LOVE STORY # 471: टीवी चैनल पर जारी फेहरिस्त में उसका नाम भी था

सब पूछ रहे थे उसके पति का हालचाल. वह बंबई के उस होटल में कामकाज के सिलसिले में गये हुए थे, जहां उस शाम गोलियां दनदनाते आतंकवादी घूमते देखे जा रहे थे. वह टीवी से चिपक कर बैठी हुई थी. फोन पर वह लोगों को यही कहती कि उसे उम्मीद है सब ठीक हो जाएगा.. पर वह
 
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LOVE STORY # 486: वह पृथ्वी की तरह निर्वासित है. वह शहर की तरह शरणार्थी नहीं.

वह निर्वासित है . नियति से . भाग्य से . सामान्य से . साधारण से . चीथड़ा सुख और टुच्ची सुविधा से . कुनबा परस्ती से . दुनियादारी से . अदालत में न्याय से . भीड़ के कोहराम से . धनुष की तरह तने हुए राग से निर्वासित अस्थमा की सांस में . वह निर्वासित है अपन
 
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LOVE STORY 487: उसने दिल को तसल्ली दी कि मुसलमान है... क्या फ़ायदा मिलने का

वह एक रिपोर्टर थी. और उसके लिए वह एक ख़बर बन कर आया था. काम के हर दिन उसे किसी न किसी का इंटरव्यू करना होता था. एक नए शख्स से मुलाक़ात, एक नए दिमाग में झाँकने की कोशिश. वह ख़ुद से बचने के लिए कहीं दूसरों की ज़िन्दगी में, उनके मन में, दिमाग में झांकती.
 
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LOVE STORY # 494: अरे आ ही तो रहा था, तुम इतना परेशान क्यों हो गई. 4

उसने कहा था- दो दिन में लौट आऊंगा. हफ्ता भर हो गया था. वह परेशान थी. हालांकि खबर आ गई थी कि फंस गये हैं सरकारी काम से. वक़्त लगेगा. दो बार ख़बर आई कि अगले दिन आएंगे. नहीं आये. जगदलपुर से वह गांव करीब 40 किलोमीटर दूर था. दिन में एक बार बस आती थी, कई ब
 
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LOVE STORY # 507: पानी में छपाक!!! होने से पहले उसके चेहरे पर स्माईली वाला भाव था

बिछड़ने से पहले तय हुआ था कि जाने से पहले बात हो सका तो अच्छा रहेगा। पर बाढ़ का पानी बढ़ता ही गया। पानी के बहाव में पता नहीं दोनों कब अलग हुए और कहाँ चले गए। तूफ़ान जब दम लेने के लिए रुका तब वह एक पहाड़ी के सामने था. बारिश थमी ही नहीं. जैसे जैसे पानी क
 
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LOVE STORY # 509: (स्पीड डेट-दो) देर रात पार्टी से लौटते बारिश में कार के रेडियो में वह गाना बजने लगा

देर रात पार्टी से लौटते वक्त उसकी कार के रेडियो में वह गाना बजने लगा . बाहर बारिश हो रही थी . उसने गाड़ी सड़क के किनारे लगा ली . और गाना खत्म होने के थोड़ी देर बाद तक स्टार्ट नहीं की . वह रोना चाहता था . पर फिर उसे लगा कि वह नशे में है . उसने रेडियो
 
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LOVE STORY 515: उसने सिगरेट जलाते हुए तीसरी मंज़िल की खिड़की पर झूलते जींस के पहचाने फटे पायंचों की तरफ देखा

नागपुर से दिल्ली वह पढ़ने पंहुचा था . कनॉट प्लेस उसके रास्ते में नहीं पड़ता था , पर उसने मोहन सिंह पैलेस जाकर जींस सिलवाई थीं , जो इंडियन कॉफी हाउस के अलावा सस्ती जींस के लिए मशहूर थीं . 1991 में एक जींस की कीमत सौ रुपये की थी . उसने दो लीं . उसने पं
 
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LOVE STORY # 518: एक शाम शुरू हुआ जो संगीत, जो जीता रहा मौत के बाद भी

पहली बार मिली तब उनकी उम्र 65 साल के आसपास थी . पर उनके उजास भरे चेहरे पर जो ताज़ग़ी थी , वह उन्हीं को हासिल होती है , जिनके भाग में प्यार आता है . मैं जानना चाहती तो थी , पर हमेशा हिचकिचाहट होती . कहीं अजीब तो नहीं लगेगा उन्हें . कहीं ग़लत तो नहीं ह
 
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LOVE STORY # 519: वह मर्द उससे मिलने के बाद उड़ने लगा था

कहानी : डेव एगर्स जब वे मिले और जब उन्होंने एक दूसरे को बहुत ज्यादा पसंद किया, उसका सुनना पहले से बेहतर हो गया और उसकी नज़रों में दुनिया की लकीरें पहले से ज्यादा साफ़ हो गयीं. वह पहले से ज्यादा स्मार्ट हो गया, ज्यादा जागरूक, और वह सोचने लगा अपने वक्त
 
आस्तीन का अजगर
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LOVE STORY # 524: धूप थी, बारिश थी, इंद्रधनुष नहीं था

उसने सब कुछ उलट पलट डाला . कमरे का हर समान . अलमारी . बाहर का आंगन , दालान , धोबी का हिसाब और किताबों , सीडी और डीवीडी का रैक . अच्छा ये हुआ कि जो धूल वहां बहुत दिनों से जमा थी , वह अपनी जगह से हटकर कहीं और बैठ गई . उसने अपने अतीत के बारे में सोचा .
 
आस्तीन का अजगर