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कनफुसकी

http://kanfuski.blogspot.com/
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17 Apr 2010
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example

एक ----------एक बिजनेसमैन अपने कर्मचारियों के हित में ऑफिस के बाहर लगा शराब का ठेका हटवा देता है। उसकी सोच थी कि उसके कर्मचारी काम के बाद दारू न पियें ताकि ऑफिस के लिए कोई हंगामा खड़ा न हो। इस काम में वह अपने शीर्षस्थ कर्मचारियों की मदद लेता है, जो
 
रमेंद्र
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नया शहर, नए लोग, नई जिंदगी

सड़क पर चलते रहिए, लोग न आपको देखेंगे न आपसे टकराएंगे. अरे भई फुटपाथ है न. सड़क के दोनों किनारों पर. अलग-अलग. आप टकरा ही नहीं सकते. गाड़ियां सरॆरॆरॆ से निकल जाएंगी. हॉनॆ ज्यादा नहीं बजातीं. लगता है लंदन बनने की होड़ है. पंजाबी आती है तो ठीक, हिंदी भी
 
रमेंद्र
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भाइयो, मैं चंडीगढ़ आ गया हूं

दैनिक भास्कर ज्वाइन कर लिया है. अब कुछ दिनों तक इन्हीं की सेवा में लगा रहूंगा. जागरण से मुक्ति पाकर थोड़ा सुकून में हूं. लेकिन भ्रम में मत पड़िएगा कि कम काम कर रहा हूं, हां तीन साल की किच-किच से थोड़ी राहत मिली है. अब चंडी के गढ़ से आपसे मिलता रहूंगा.
 
रमेंद्र
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कोइ नहीं पूछता राम के तीनों भाई कब जनमें...

दशकों पहले आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने कवियों की उर्मिला विषयक उदासीनता विषयक निबंध लिखा. आचार्य को उर्मिला याद आई उनके पति और दो देवर नहीं. शायद आपने भी कभी लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का जन्मदिन नहीं मनाया होगा. आखिर मनाए भी क्यों वे कौन से राम ह
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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हलवा पराठा खाया है आपने...

पराठे तो खाए होंगे आपने. साथ में भले ही हलवा न खाया हो. खैर आजकल हलवा-पराठा की चासनी में डूबा हुआ है. भई, मानना पड़ेगा कि कुछ तो खासियत होती है इन परंपरावादी शहरों में. यूं तो मेरठ में खाने के नाम पर पिंकी के छोले, रामचंद्र सहाय के तिल के आइटम्स और क
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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आत्मकथा वाया राजनीति गलियारा

आत्मकथा लिखना मामूली बात नहीं. सब नहीं लिख सकते. गांधीजी ने लिखी. नाम दिया सत्य के साथ मेरे प्रयोग. एक आत्मकथा तसलीमा ने भी लिखी. देश निकाला मिला और दूसरे देश से भी निपटाए जाने के बारे में सोची जाने लगी. हालिया आत्मकथा आडवाणी ने लिखी. सभी अखबारों में
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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आइये कुछ फोटो दिखाते हैं आपको

पेट पर पड़ी तो लाल झंडा याद आया। साभार : दैनिक जागरण व पीटीआई ------------------------------------------------------------------------------ सपना दिखा रहे हैं माल्या साहब। आइये इस फार्मूला-1 के ट्रैक पर चलने का अभ्यास करें। भारत 21वीं सदी में जा रहा ह
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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तलब

मौके यूं ही नहीं आते. उन्हें लाया भी जाता है. या कहें कि बरबस वो आपके सामने आ जाते हैं. अब यह तय आप पर है कि उसे किस तरह और कैसे भुनाएं. दरअसल इतनी देर तक उंगलियां टिप-टिपाने का मतलब ज्यादा गंभीर नहीं है. यह वस्तुतः मिठाई खाने की इच्छा को जस्टिफाई कर
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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हाकी का दिल चुराया

हाकी का दिल चुरा लिया. कुछ अटपटी बात है न. खैर, हम बताते हैं कि बात आखिर है क्या. दरअसल मेरठ में पिछले दिनों एक राष्ट्रीय स्तर के हाकी टूर्नामेंट का समापन हुआ. उसी में बैंड वाले ये गाना बजा रहे थे. बैंड वालों को अक्सर पता होता है कि उन्हें बजाना क्या
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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माया महा ठगिनी हम जानी

यह हेडिंग आज अच्छी लगी. जनसत्ता में पढ़ी. ऐसा नहीं था कि पहली बार ही पढ़ी थी लेकिन आज के ब्लाग पर लेखन के लिए अच्छी थी. दरअसल बहुत दिनों के बाद एक ब्लाग पढ़ा. याद आ गया कि मैं भी कभी ब्लाग पर लिख लिया करता था. बस बैठ गया. यह भी पता था कि इसे पढ़ेंगे
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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खइबऽ तबऽ न जनबऽ

मरदे बूझला न, खाई-पीए के बात करैत हतियो. तनि ध्यान न द एहि बगल. हम गेल रहली ह ट्रेड फेयर में. उहां बहूते चीज सब बिकाइत रहय. मगर हमरा आ हमर एगो साथी, उहे श्याम सुंदर (न चिन्हलहू कि ?), के लिट्टी-चोखा पर ध्यान रहे. तकइत-तकइत बिहार के पंडाल (पवेलियन) मे
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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नागार्जुन के दो रंग

बैठे-बैठे सोच रहा था तब तक नागार्जुन हाथ में आ गए। पेश है उनके दो रंग यह तुम थीं कर गयी चाक तिमिर का सीना जोत की फांक यह तुम थीं सिकुड़ गयी रग-रग बनाकर ठूंठ छोड़ गया पतझार उलंग असगुन सा खडा रहा कचनार अचानक उमगी डालों की संधि में छरहरी टहनी पोर-पोर मे
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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अंतराल के बाद.....

खुश होने के कई कारणों के पीछे, होते हैं कई अंतराल, बीच की कुछ घटनाएं उन्हें जोड़ती हैं, एक नया अंतराल जनमाने के लिए. कुछ ऐसा भी घटित होता है जीवन में, कल्पना जिसकी न की हो कभी सुखद हो या दुखद, ये 'कुछ' भी दे जाता है अंतराल, एक नया अंतराल जनमाने के लि
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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फिर मचाया तहलका तहलका ने

तीखी पत्रकारिता समाज को दिशा देती है. कई लोग कहते हैं कि यह कोरी बात है. लेकिन अपनी कलम या कह लें कैमरे (आज के दौर में) से इस कोरेपन को मिटाया जा सकता है. आपरेशन कलंक इसी की एक कड़ी है. गुजरात के दंगे नरसंहार के रूप में याद किए जाते है. देश के कई राज
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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रा.....म.... लीला............. में हम दोनों

बहुत दिन नहीं हुए हमारा रिश्ता ग्रामीण रंगमंच से टूटे. महज पांच साल ही तो. लगता है सदियां गुजर गईं इंतजार में. फिर विजय ने कहा मूंगफली के बहाने रामलीला देखेंगे. सुनकर दिल खुश हो गया. उसे बता नहीं सकता था कितनी खुशी हुई. इसलिए नहीं कि रामलीला देखने जा
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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जहाँ तक पहुंचती है नज़र....

शीर्षक को भ्रमात्मक बनाने का आशय पिछले पोस्ट को ही आगे बढ़ाने है. हालांकि पहली बार अपने ब्लोग को किसी अग्रिगेटर से जोड़ने की कोशिश मैंनें की ताकि मेरा ब्लोग किसी अग्रिगेटर से जुड़ जाये. ब्लोग्वाणी पर लिखा था की 'लिंक डालो, तेरा ब्लोग दिखेगा.' पर मुझे
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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दो दिनों का एफ-5

पिछले 6 और 7 तारीख को हम कुछ पत्रकार चित्रकूट में थे. मौका था विकास संवाद पर कायॆशाला का. बहाना सरकारी विकास की भागमभाग भरी रफ्तार के बीच मौलिक और टिकाऊ विकास की बात करने का. चित्रकूट जैसी जगह के चयन को लेकर पहले तो लगा था कि यह महज घुमाऊ-फिराऊ कायॆक
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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रात की चाय

अच्छा लगता है न शीषॆक पढ़कर. रात की चाय। जीभें लपलपा उठती हैं और मन बरबस उस चाय वाले के यहां चहल-कदमी करने लगता है, जहां कल रात चाय पी थी. हममें से कितनों को ये मौका रोजाना मयस्सर होता है, कहा नहीं जा सकता. मेरी इच्छा हमेशा रहती है, मौके कभी-कभार ही
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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हे राम !

कितनी स्थितियों में आपके पास व्यक्त करने के लिए ये पूणॆ या अपूणॆ वाक्य होता है। देखते हैं... १. जब आप या आपका चप्पल गूं से सन जाए २. आप अपने किसी संगी के किसी कृत्य से अफसोस करने की स्थिति में पहुंच जाएं ३. आपके आसपास की परिस्थितियां आपके वश में न हो
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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अनुभव

कल अपने हषॆ भाई की कार में बैठकर चाय पीने गए। अच्छा लगा. ड्राइवर नया था, हम बैठने वाले भी उन्हीं की तरह के सवार थे. लेकिन इसमें नया क्या है. दरअसल अनुभव नया है. कार में इससे पहले भी बैठे हैं हम लोग. उसमें बैठकर चाय पी है, बातें की हैं, खालें छीली हैं
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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तुझे अभी कई और विष्णु को जन्म देना है...

हिंदी के मूर्धन्य साहित्यकार विष्णु प्रभाकर नहीं रहे. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मीरापुर में जन्मे इस साहित्य-शिल्पी की याद इस गांव के गली-कूचों में रची-बसी है। ये अलग बात है कि प्रभाकर कब के यहां से चले गए. लेकिन अपनी माटी कब छूटी है किसी से
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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पाश की दो कविताएं

संसद जहरीली शहद की मक्खी की ओर उंगली न करें जिसे आप छत्ता समझते हैं वहां जनता के प्रतिनिधि बसते हैं। ----------------------- उम्र आदमी का भी कोई जीना है अपनी उम्र कव्वे या सांप को बख्शीश में दे दो।
 
रमेंद्र
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कौन लिखेगा परती परिकथा

फोटो साभारः दैनिक जागरण बाढ़ और बिहार का सदियों पुराना नाता है. साल दर साल यहां के उत्तरी इलाके की जनता बाढ़ की विभीषिका से त्रस्त होती आ रही है. बाढ़ इस साल भी आई. लेकिन वहां जहां कई सालों से नहीं आई थी. याद करें यह वही जमीन है जहां पर बैठकर रेणु ने
 
रमेंद्र
Dec 29 2009 11:47 AM
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थरूर को आप माफ करेंगे ?

शशि थरूर ने हम जैसे पहले कभी विमान में न चढ़े और निकट भविष्य में विमान में चढ़ने वाले लोगों को कैटल क्लास कहा. अपन जैसे वे टुच्चे टाइप के लोग, जो विदेश तो नहीं ही गए हैं, देश में भी कभी विमान यात्रा का सुख नहीं ले पाए हैं, विदेश में सालों तक रहने के बाद
 
रमेंद्र
Sep 18 2009 10:36 PM
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होली पर दुल्हिन की पाती दूल्हे के नाम

अमवा के डाल पर, कुहके है कोयली फगुआ त आ गेल सजन काहे न अयली अंखिया सुखायल, हम निंदिया गंवायल अहांके न जनली हमर बिंदिया हेरायल। तन से हमर अंचरा गिरैत हय सखि बरजोरी हमरा रंगैत हय केकरा से कहू, कि हम सुनाऊ दुइए दिन बाकी हवे, जल्दी से आऊ। के देखे गाल, के
 
रमेंद्र
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जय हो को तो छोड़ देते

बहुत से लोग राजनीति को गंदा कहते हैं. होगी शायद... पर मैं व्यक्तिगत रूप से सहमत नहीं। हालांकि अभी मैं इस बात पर बहस करने नहीं आया हूं। अभी तो जय हो। कांग्रेस पार्टी ने इस आठ आस्कर पुरस्कार विजेता फिल्म के इस प्रसिद्ध गाने का कापीराइट खरीद लिया है। अब
 
रमेंद्र
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दो दृश्य

सीन 1 श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में छक्के पड़ रहे थे और उसी देश की अंतर्राष्ट्रीय सीमा से सटे कुछ इलाके बम-धमाकों की गूंज सह रहे थे। यकीन कीजिए सब कुछ एक ही साथ हो रहा था। पिस रही थी जनता। एक तरफ तो उसे मार्केट का खिलाया-पिलाया क्रिकेट देखना पड़ रहा
 
रमेंद्र
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मंदी के दौर में

आजकल मंदी चल रही है. भारत और पाकिस्तान युद्ध जैसी बातें कर रहे हैं. अमेरिका अपने नए राष्ट्रपति की प्रतीक्षा कर रहा है. पता नहीं बीच में इजरायल पर उसके पड़ोसी फलस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने हमला कर दिया. अब इजरायल भारत तो है नहीं कि पाकिस्तान को बार-ब
 
रमेंद्र